Thursday, September 10, 2015

फिल्म जिन्दा सुक्खा: पहले मंजूरी अब पाबंदी

सेंसर बोर्ड या थाली का बैंगन?
चंडीगढ़: 9 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):  
जानीमानी कलाकारा सुनीता धीर 
फिल्म की घोषणा से ले कर उसके टाइटल रजिस्टर्ड होने, फिर शूटिंग होने और फिर अन्य कई पेचीदा किस्म की प्रक्रियायों से गुज़र कर उसके रलीज होने तक बहुत कुछ ऐसा होता है जो जग ज़ाहिर होता है। न  के लिए उसके पता लगाना मुश्किल होता है और न ही फिल्म निर्माण से जुडी संस्थाओं के लिए। इस सबके साथ एक एक ऐसा वर्ग होता है जो फिल्म निर्माण को संतान की तरह देखता है। यह वर्ग होता है कलाकारों का, लेखकों का, गीतकारों का, और दर्शकों का भी। कलाकार के लिए फिल उसके कैरियर और रोज़ी रोटी से जुडी होती है। जब तक फिल्म निर्माण चलता है उसका सारा ध्यान फिल्म पर केंद्रित होता है और जब फिल्म बन जाती है तो सारा ध्यान उसकी रिलीज़ पर केंद्रित हो जाता है। जब आखिरी दम तक मिली किसी मंजूरी को दरकिनार कर अचानक ही पाबंदी की घोषणा होती है तो सबसे अधिक निराशा होती है इस कलाकार वर्ग को। उसे ऐसा लगता है जैसे किसी ने भ्रूण हत्या कर दी हो। ऐसा महसूस होता है जैसे काटने को तैयार फसल को अचानक किसी ने आग के हवाले कर दिया हो। 
कुछ ऐसा ही हुआ है आगामी 11 सितंबर को रिलीज होने वाली पंजाबी फिल्म ‘मास्टर माइंड जिंदा सुक्खा’ कर मामले में। इस फिल्म पर रोक लगा दी गई है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पहले मंजूरी दे दी थी लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद इस पर पाबंदी लगा दी गई। मंत्रालय का कहना है कि इस फिल्म के रिलीज होने से पंजाब और आसपास के राज्यों मे हालात बिगड़ सकते हैं। फिल्म की टीम ने रोक लगने की पुष्टि की है। 
पाबंदी का एलान और इसकी वजह इतनी मासूमियत  से बयान की जाती है जैसे बेचारे सेंसर बोर्ड को कुछ पता ही न हो कि फिल्म किस मुद्दे पर थी, उसके हक़ और विरोध में कौन कौन थे, उसका क्या क्या असर हो सकता था। बहुत देर से सेंसर बोर्ड इस तरह की हरकतें कर रहा है कि फिल में एतराज़ की बात उसे बस सरकार के कहने पर ही पता चली हो। क्या फिल्म को पारित करते वक़्त इस बोर्ड ने कुछ नहीं देखा होता? 
फिल्म पर पाबंदी लगाने का कुछ संगठनों ने समर्थन किया है और कुछ ने विरोध। दल खालसा ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार को सिख विरोधी बताया है। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म पूर्व सेना प्रमुख जनरल अरुण वैद्य के हत्यारों हरजिंदर सिंह जिंदा और सुखदेव सिंह सुक्खा के जीवन पर आधारित है। फिल्म बनाने वालों और फिल्म के समर्थकों ने इसे अपने नायकों पर बनी ऐतिहासिक फिल्म भी कहा है। अब देखना है कि फिल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों और औनकी कला व कॅरियर के साथ खिलवाड़ कब तक जारी रहता है। 
फिल्म जिन्दा सुक्खा: पहले मंजूरी अब पाबंदी
सेंसर की भेंट:
1973 में फिल्म गर्म हवा का प्रदर्शन रोक गया 
1975 में  आंधी का प्रदर्शन रोक गया 
1977 में किस्सा कुर्सी का फिल्म पर पाबंदी सेंसर बोर्ड के कार्यालय से सारी रील उठवा कर जला दी 
1971 में सिक्किम फिल्म पर पाबंदी जिसे सितम्बर 2010 में हटा दी दिया गया।
1987 में फिल्म पति परमेश्वर की रेटिंग से इंकार किया गया 
1994 में फिल्म बैंडिट क्वीन पर पाबंदी 
1996 में फिल्म फायर पर पाबंदी 
2003 में फिल्म हवाएं पर पाबंदी जो नवंबर-१९८४ की घटनाओं से सबंधित थी। 
2005 में वर्ष 2004 की फिल्म ब्लैक फ्राईडे पर पाबंदी 
2005 में सिख व्विरोधी हिंसा पर पर बनी फिल्म अमु को कुछ आडियो कटस के बाद एडल्ट रेटिंग दी 
2005 में ही फिल्म वाटर हिन्दू संगठनों के ऐतराज़ पर रुकी और फिर मार्च 2007 में रिलीज़ हुई।
2014 में फिल्म कौम दे हीरे पर पाबंदी लगी  

Wednesday, September 09, 2015

ABVP बनी लुधियाना रेप के खिलाफ जनआवाज़

ABVP ने पठानकोट में किया ज़ोरदार प्रदर्शन 
पठानकोट: 8 सितम्बर 2015: (विजय शर्मा//पंजाब स्क्रीन):
लुधियाना में नावालिग से हुए रेप और हत्या के विरोध की आग पंजाब के अन्य  भागों तक भी फैलने लगी है।  अखिल भारती विद्यार्थी परिषद ने इस इस मुद्दे को लेकर पठानकोट में ज़ोरदार प्रदर्शन  और पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। 
पठानकोट में आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से लुधियाना में नावालिग के साथ हुए रेप और हत्या को ले कर ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियो ने पठानकोट डलहोजी रोड पर दोषियों के पुतले फूंके और जम कर नारेवाजी की। इस मोके पर परिषद के सभी सदस्य दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था की इस तरह की हरकत कोई इंसान नही राक्षक ही कर सकता है। उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की अगर इस काड के दोषियों को कड़ी सजा दी जाती है तो यह दूसरे लोगो के लिए भी एक मिसाल बनेगी और लोग इस तरह के घिनोने काम करने से पहले 100 बार सोचेगे। 
पठानकोट में आज  लुधियाना में हुए नावालिग के साथ रेप ओर हत्या के विरोध में विद्यार्थियो की तरफ से दोषियों के पुतले फूंक कर अपना विरोध जताया गया। इस तरह की घटना से सारी मानवता का सिर शर्म से झुक जाता है। छात्र-छात्राओं ने जम कर नारेवाजी कर अपने मन की भड़ास निकाली। विद्यार्थियो ने इस कांड के दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग भी की।

छात्र नेता शिल्पा   एतराज़ उठाया कि मृतका के माता पिता को पांच लाख रुपय  खामोश रहने के लिए मनाया रहा है।  पूछा  सब क्यों करें?
इसी तरह एक अन्य छात्र नेता वरिंदर ने भी इस घटना की सख्त निंदा करते हुए दोषियों सज़ा देने की मांग की।

अकाली दल अमृतसर ने किया जिन्दा सुक्खा फिल्म का खुल कर समर्थन

जत्थेदार चीमा ने किया विरोधियों को उचित जवाब देने का ऐलान  
लुधियाना: 8 सितम्बर 2015: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
सियासत की जिन चालों के चलते पंजाब लहू-लुहान हुआ वे चालें अब फिर से तेज़ होती महसूस हो रही हैं। ब्ल्यू स्टार आपरेशन के बाद 1992 तक पंजाब में गोली का राज रहा।  खून खराबे का एक लम्बा दशक जब सांस  लेने के लिए भी सोचना पड़ता था। पंजाब के जनमानस में एक रेखा सी खिंच गयी थी। इंसान की पहचान हिन्दू सिख  बन गयी थी। सन 1990 के बाद जन्मी पीढ़ी ने उन काले दिनों को अपनी आँखों से नहीं देखा लेकिन उसकी कहानियां ज़रूर सुनी होंगीं। अब खतरा है कि वे कहानियां कहीं साकार होकर फिर सामने न आने लगें।  
पंजाब का माहौल फिर गर्मा रहा है। हिन्दु और सिख संगठन दुसरे के सामने आने को तैयार खड़े लगते हैं। इसका कारण बन रही है 11 सितम्बर को रलीज होने जा रही फिल्म जिन्दा सुक्खा। उसी दिन गैंगस्टर लाइफ़ स्टाईल को दर्शाने वाली फिल्म रुपिंदर गांधी भी रलीज होने वाली है। 
हिन्दू संगठनों ने जहाँ  इसका विरोध करने की चेतावनी दी है वहीँ वहीँ सिख संगठनों ने कहा है जिन्दा सुक्खा हमारे नायक हैं और इसी तरह की फिल्में सतवंत सिंह बेअंत सिंह जैसे अन्य नायकों पर भी बननी चाहिएं। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि विरोध करने वाले पर हमारी बाज़ आँख लगी हुई है और वक़्त आने पर उन्हें उचित जवाब भी दिया जायेगा और मान सम्मान भी। 
दूसरी तरफ हिन्दु संगठन इस फिल्म के विरोध पर एकजुट होते नज़र आ रहे हैं। हिन्दु नेताओं का कहना है कि इस तरह की फिल्मों का बनना और रलीज होना यही बता रहा है कि हालात फिर से खराब करने की साज़िशें तेज़ी से शुरू हो चुकी हैं। हिन्दु नेताओं नेजनरल ए के वैद्या को अपना नायक बताते हुए कहा कि अमृतसर की पावन भूमि को आतंकियों से मुक्त करवाने वाले उस बहादुर जरनैल के हत्यारे किसी भी तरह शूरवीर नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि इस संबंध में हमारी हिन्दु पंचायत सही समय पर जो भी प्रोग्राम देगी हम वही करेंगे।   ,टंडन और रोहित साहनी ने  फिल्म बनाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस तरह की फिल्मों में लगा पैसा कहाँ से आया? उन्होंने विदेशों में बैठे हुए अमीर सिखों को निशाना बनाते हुए कहा कि इस तरह की फिल्में बना कर पंजाब के हालात दोबारा बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। 
गौरतलब है कि इस पंजाबी फिल्म का निर्माण जिन्दा-सुक्खा द्वारा लिखित चिट्ठियों पर आधारित किया गया है। उन्होंने बताया कि फिल्म में मुख्य किरदार पंजाबी सिनेमा के कलाकार नव बाजवा, सोनप्रीत जवन्दा, गुगु गिल्ल, सुनीता धीर, अमृतपाल सिंह बिल्ला निभा रहें है। उन्होने बताया कि फिल्म पूरी दुनिया में 11 सितम्बर को वर्ल्ड वाईड रिलीज हो रही है। यह पत्र उनकी फांसी से पहले ही मीडिया के ज़रिये जन जन तक पहुँच गए थे।  बाद में इनको पुस्तिका के रूप में भी छपवा कर बांटा गया।  

Monday, September 07, 2015

इस्लामिक संगठन दे रहा है बच्चों को खतरनाक दवा

इस दवा के बाद नहीं रहता किसी भाव या संवेदना का अहसास 
लुधियाना: 7 सितम्बर 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):  
आपको हैरानी हो सकती है और होनी भी चाहिए। आपने कलम के सिपाही भी देखे सुने होंगें और सशत्र सैनिक भी। कभी ऐसा देखा कि कलम का सिपाही सीमा की चिंता कर रहा हो। केवल चिंता ही नहीं बल्कि उसकी रक्षा के उपायों पर भी गंभीर हो। आज हम आपको मिलवा रहे हैं एक ऐसे पत्रकार से जिसने अपनी मीडिया फ़ोर्स और ख़ुफ़िया नेटवर्क से एक ऐसी खतरनाक दवाई का पता लगाया है जो आजकल आतंक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। इस दवा का ही परिणाम है कि इस्लामिक स्टेट के बच्चे एक इशारा होते ही किसी को भी गोली मार देते हैं और किसी को भी छुरा घोंप देते हैं। इस तरह के जघन्य कुरटयों के समय उनके चेहरे पर न डर होता है न ही झिझक और न ही कोई अन्य भाव। किसी रिमोट कंट्रोल्ड यंत्र की तरह ये नन्हे आतंकी बड़ी बड़ी वारदातें कर रहे हैं। विश्व के सभी प्रमुख आतंकी संगठनों में यह दवा धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही है। इस दवा को लेते ही न कोई जज़बात रहता है न कोई संवेदना न ही कोई भाव। बस एक ही ध्यान कि इशारा होते ही अपने शिकार को मौत के घाट उतार देना है। बचपन में ही मौत के खिलाडी बने ये बच्चे बड़े हो कर कितने खतरनाक होंगें इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। आज तेज़ी से तैयार हो रही बाल आतंकियों की ये फ़ौज जब दुनिया में आतंक की आंधी ला देगी तो उससे बचने का कोई रास्ता भी नज़र नहीं आने वाला। दवा खा कर बेरहम होने वाले बच्चे अपने आकाओं के इशारे पर बेगुनाह लोगों पर ज़ुल्मो सितम ढाया करेंगे। क्यूंकि यह कैमिकली जनरेटड आतंक होगा इस लिए इसका तोड़ ढूंढ़ना भी मुश्किल होगा। छुरा, बंदूक, रिवाल्वर और अन्य हथियारों को खिलोने की तरह इस्तेमाल करने वाले ये बच्चे न अपनी जान की परवाह करेंगे न ही दुसरे की। बेरहमी के ये  पहाड़ दुनिया पर टूटने के लिए तेज़ी से तैयार हो रहे हैं। दुनिया इन बच्चों से डरेगी पर कुछ कर नहीं सकेगी। अगर इन बच्चों के हाथों में एटमी हथियार आ गए तो फिर दुनिया की खैर नहीं। तबाही का खतरा हमारे सरों पर मंडरा रहा है। बेरहमी भरी मौत दुनिया के दरवाज़े पर दस्तक दे रही है। 
क्राईम फ्री इंडिया ब्यूरो (CFIB) पंजाब के अध्यक्ष और नेशनल सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस फ़ोर्स के सलाहकार डाक्टर भारत ने इस खतरनाक दवा का पता लगते ही इसकी सूचना उच्च अधिकारीयों को दी। राष्ट्रपति, गृह मंत्रालय, पंजाब पुलिस के महांनिर्देशक को इस संबंध में विस्तृत पत्र भेजे गए। इनका असर भी हुआ। संगठन का दावा है कि पंजाब प्रशासन के उच्च अधिकारी 27 अगस्त को लुधियाना में डाक्टर भारत से मिलने आये थे। दवा का नाम राष्ट्र हित में गोपनीय रखा गया है। अब देखना है क़ि इसकी रोकथाम के लिए क्या उपाय किये जाते हैं। अगर आज भी हम नहीं चेते तो फिर शायद हमें कभी वक़्त न मिले। वक़्त रहते सम्भल जाओ।