Saturday, May 30, 2015

लिपस्टिक स्त्री को बदसूरत कर देती है

जो भी नकली है वह लोगों को बदसूरत बना देता है-ओशो 
"लिपस्टिक स्त्री को बदसूरत कर देती है- जो भी नकली है वह लोगों को बदसूरत बना देता है। मैं सोच भी नहीं सकता कि किसी भी पुरुष में जरा भी समझ हो तो उस स्त्री का चुंबन लेगा जिसने लिपस्टिक लगाई हुई है!...वह लिपस्टिक चीन की दीवाल की तरह है- तुम किसी भी तरह से उस स्त्री तक नहीं पहुँच सकते। जिस पल मैं लिपस्टिक देखता हूँ, मैं जानता हूँ कि यह स्त्री नकली है, यह मात्र मुखोटा है।
कुछ दिनों पहले, बहुत अमीर युवा स्त्री मुझ से मिलने आई। वह अखबार और पत्रिका की मालकिन है। वह मेरे बारे में कहानी लिखना चाहती थी, और वह मेरे साथ फोटो भी चाहती थी।
आनंदो ने मुझे बताया कि वह बहुत सुंदर स्त्री है। जब मैंने उसे देखा, मैंने सिर्फ लाल लिपस्टिक देखी और कुछ नहीं दिखा। मैंने उसके चेहरे से बचने की कोशिश की, और मैंने आनंदो से कहा, 'तुम मुझ से कह रही थी कि ये स्त्री सुंदर है? तुमने इसकी लिपस्टिक नहीं देखी?" //OSHO//
ओशो के इस कालजयी विचार को चुन कर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है आनंद अर्चना ने। भिलाई में रहने वाली आनंद अर्चना इस तरह के चुने हुए विचार अक्सर सोशल मीडिया पर प्रस्तुत करती रहती हैं। आपको आज यहाँ प्रकाशित विचार कैसा लगा अवश्य बताएं। 

Monday, May 25, 2015

Media: विदेश की मुफ्त यात्रा बंद हुई तो विरोध में खड़े हैं


मीडिया में दलालों की दुकानें बंद पड़ी हैं.----- 
Nisheeth Joshi वरिष्ठ पत्रकार हैं। अमर उजाला के साथ रहते हुए उनका पंजाब से बहुत ही गहरा रिश्ता जुड़ा। साधना मार्ग पर चलने के कारण अपने शब्दों पर और असूलों पर अडिग रहते हैं। आज शाम पौने आठ बजे उन्होंने एक छोटी सी रचना एफबी पर पोस्ट की। इसमें उन्होंने मोदी सरकार के कामकाज की भी चर्चा की है मीडिया को भी अड़े हाथों लिया है।  
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार के एक साल में काम तो हुआ है मीडिया में मौजूद कुछ लोगों सहित जो भी दलाल थे उनकी दुकानें बंद हुई हैं वह ही सबसे ज्यादा चीख चिल्ला रहे हैं.. विदेश की मुफ्त यात्रा बंद हुई तो विरोध में खड़े हैं क्योंकि भष्ट्राचार में लिप्त सरकार के लोग एक टुकड़ा डाल देते थे फिर दुम हिलाते थे वह सब चाहे लाल झंड़े वाले हों या केसरिया..इन सब के बीच में शामिल हैं देश की सर्वोच्च सत्ता पर कोई भ्रष्ट्राचार के आरोप न लगा सके ..क्या उपलब्धि नहीं.. गरीबों के लिए काम तो हो रहा है.. आजादी के बाद पहली बार केन्द्र सरकार का लोक कल्याण कारी चेहरा योजनाओं के जरिए नजर आ रहा है जिसमें खाने पीने की गुंजाइश दलालों के लिए नहीं छोड़ी गई है... अभी तो सड़क तैयार की गई है ...क्या साफ सुथरा देश होना उचित नहीं.. कई जगह छोटी छोटी टोलियां सफाई आंदोलन से जुड़ चुकी हैं.. बच्चों से लेकर बड़ों तक में सफाई के प्रति जागरूकता आई है... दुनिया में हमारी इज्जत बढ़ी है...हमारा मानवतावाद भी सामने आया है...पेड़ जैसे एक ही दिन में फल नहीं देता वैसे ही सरकार के काम का हाल होता है... जो सूट बूट की सरकार कहते हैं भूल जाते हैं कि उनकी दादी के पापा के सूट कहां से धुल कर आते थे वह किस पार्टी का प्रधानमंत्री था जो अक्तूबर 1948 से नवंबर _48 <के पहले हफ्ते तक भारत छोड़ विदेश में था...उस समय जब देश में दंगे चल रहे थे..विस्थापितों को सैटल करना चुनौती बना हुआ था बंटवारे से उतपन्न हालात में साथ ही संविधान सभा की बैठकें चल रही थीं.. फिर वह कौन सा प्रधानमंत्री था जो जार्डन के शाह से गिफ्ट में मिली गाड़ी को अमेठी के तातारपुर गेस्ट हाउस से पूरे संसदीय इलाके में फिर जंगलो मे अवकाश में ले जाता था... इन आंखो ने देखा है माया पत्रिका के लिए कवरेज के दौरान... फिर जो मारूति कंपनी है वह जमीन किसकी थी किसानों की या उस परिवार की जो शेयर होल्डर बना आज तक कमाई खा रहा है... गांघी परिवार.. और अमेठी संसदीय इलाकेमें में इंडों गल्फ की इतनी जमीन बिड़ला को किसने दी कि वह भी इतनी की आज भी खाली पड़ी है.. उसी में से फूड पार्क को दे रहे थे क्या वह जमीन किसानों की नहीं थी..बहुत कुछ है इस पिटारे मे क्योंकि कांग्रेस को भी दो बैलों की जोड़ी से देखा समझा है और जब भाजपा जनसंघ होती थी और चुनाव चिन्ह था जलता हुआ दीपक.... यह सब अगली पोस्ट में..

Sunday, May 24, 2015

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर आठ जून तक सुझाव मांगे गए

23-मई-2015 19:40 IST
सुझावों को गोपनीय माना जाएगा
नई दिल्ली: 23 मई 2015: (पीआईबी):
लोकसभा में लम्बित भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा तथा पारदर्शिता अधिकार, सहायता एवं पुनर्वास (दूसरा संशोधन विधेयक 2015) संसद सदस्‍य श्री एस एस आहलूवालिया की अध्‍यक्षता में दोनों सदनों की संयुक्‍त संसदीय समिति को जांच करने तथा संसद को रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने के लिए भेजा गया है।
     इस विषय पर विभिन्‍न सार्वजनिक संस्‍थाओं, संगठनों, व्‍यक्तिगत लोगों तथा अन्‍य हितधारकों से सुझाव मांगने का निर्णय किया गया है। भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा तथा पारदर्शिता का अधिकार, सहायता एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 और भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा तथा पारदर्शिता का अधिकार, सहायता एवं पुनर्वास (दूसरा संशोधन विधेयक, 2015) को लोकसभा की वेबसाइट http://164.100.47.134/committee/other commiittees.aspx पर अपलोड कर दिया गया है।

     समिति को विचार/सुझाव देने के इच्‍छुक अपने लिखित ज्ञापन/सुझाव की अंग्रेजी या हिन्‍दी में लिखित दो कॉपी संयुक्‍त सचिव (आर एस), लोकसभा सचिवालय, कमरा संख्‍या 328, तीसरा तल, पार्लियामेंट हाउस एनक्‍सी, नई दिल्‍ली-110001 या फैक्‍स नम्‍बर 23018865 या ईमेल आईडी jc.landbill@sansad.nic.in  पर 8 जून 2015 तक भेज सकते हैं।


     समिति को प्रस्‍तुत ज्ञापन समिति के रिकार्ड का हिस्‍सा होंगे और इन्‍हें गोपनीय माना जाएगा तथा समिति की विशेषाधिकार के दायरे में होंगे। ज्ञापन प्रस्‍तुत करने के अतिरिक्‍त जो व्‍यक्ति समिति के समक्ष आना चाहते हैं उनसे अनुरोध है कि वे अपनी इच्‍छा प्रकट करें लेकिन इस संबंध में समिति का निर्णय अंतिम होगा।
वि.कासोटिया/एएम/एजी/एनएस-2703