Saturday, February 08, 2014

इण्डिया टूडे ने ब्लू स्टार को बताया जनरल शाहबेग का "महंगा बदला"

संत भिंडरांवाले को बताया ग्रंथी और विद्रोही गुट का नेता 
लुधियाना: ब्लू स्टार आपरेशन में ब्रिटिश दखल की बात उठी तो सिख समाज के साथ साथ मीडिया में भी एक फिर तूफ़ान आ गया।  इसके साथ ही शुरू हुई सिख समाज के दर्द को भुनाने की एक और नयी कोशिश। क्यूंकि व्यापारी समाज के लिए हर बात  एक व्यापार  आंसुयों का व्यापर, जज़बात का व्यापार और खबरों का सिलसिला भी अब एक व्यापार बन गया है। कहा कुछ जाता है पर उसका छुपा मकसद कुछ और ही होता है।   बात को घुमा फिरा कर अर्थों का अनर्थ।  इण्डिया टुडे  (हिंदी)  नाज़ुक और संवेदनशील मामले को एक बार फिर सनसनी का आवरण औड़ाते हुए बहुत से नए तथ्य सामने लाने का दावा करता महसूस होता है।  इस आवरण स्टोरी में जहाँ कुछ काम की बातें भी हो सकती हैं वहीँ पत्रिका के इरादे छुपे नहीं रह सके। पत्रिका ने अपना पक्षपात एक बार फिर ज़ाहिर कर  दिया है। जहाँ पत्रिका ने गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी की ओर से स्थापित  दमदमी टकसाल के चौहदवें उत्तराधिकारी संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले को एक "तेज़तर्रार ग्रंथी" बताया है वहीँ ब्लू स्टार ऑपरेशन को सही करार देने के प्रयास में यह भी कहा है कि उसके नेतृत्व में सिखों के एक विद्रोही गुट ने "जंग" छेड़  रखी थी और 1981 से 1984 तक 100 से अधिक आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान ले ली थी। यह भी कहा कि भिंडरांवाला अपने हथियारबंद साथियों के घेरे में सिखों के सबसे पवित्र गुरुद्धारे में छिपा बैठा था। इस पत्रिका की इस आवरण कथा का चालाक लेखक यह नहीं बताता कि अगर समस्या केवल सवर्ण मंदिर में ही थी तो पंजाब के अन्य 36 गुरुद्धारों में सैनिक एक्शन क्यूँ किया गया?  क्या इतना बड़ा मीडिया हाऊस नहीं जानता कि सिखों के लिए वे अन्य गुरुद्धारे भी बहुत महत्वपूर्ण और पवित्र थे और रहेंगे।
आगे जाकर इण्डिया टुडे इंदिरा गांधी को बेहद संवेदनशील साबित करने के प्रयास में कहता है कि इंदिरा गांधी ने आपरेशन सनडाऊन की उस परियोजना को केवल इस लिए रद्द कर दिया था क्यूंकि उसमें अधिक नुक्सान होने का खतरा था। गौरतलब है कि इस योजना के अंतर्गत  हेलीकाप्टरों और स्पेशल ट्रेंड कमांडोज़ के ज़रिये होना था और  संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले का अपहरण किया जाना था।
अपनी इस सारी "सच्ची कहानी" में पत्रिका ने यही प्रभाव देने का प्रयास किया कि जैसे वहाँ हमला करने गए सेनिक तो बेचारे सिखों का शिकार हो रहे थे। पत्रिका ने कहीं नहीं कहा कि इंदिरा गांधी ने इस एक्शन के लिए श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी पर्व का दिन क्यूँ चुना? वहाँ उस पावन दिवस पर माथा टेकने गए श्रद्धालुयों में बच्चे भी थे--महिलाएं भी और बज़ुरग भी---उनमें से किसी के  नहीं थे। सेना ने उन को भी निशान बनाया जिसकी हकीकत एक बार नहीं बहुत बार मीडिया में आ चुकी है। इसके बावजूद इण्डिया टुडे बताता है कि जब इंदिरा गांधी को खबर मिली कि बहुत बड़ी संख्या में सैनिक और असैनिक मरे गए हैं तो इंदिरा गांधी के मुँह से निकला"हे भगवान"। इसके साथ ही स्व्तंत्र भारत के इस इतने बड़े युद्ध के वास्तविक कारणों पर पर्दा डालने ले नापाक प्रयास में इण्डिया टुडे इसे जनरल शाहबेग सिंह का एक व्यक्तिगत बदला बताता है।  पत्रिका ने लिखा है-"सेना के नायक रह चुके शाबेग ने सेना से बहुत महंगा बदला लिया।"
फिर भी इस पत्रिका को बड़े पैमाने पर पढ़ा जाना चाहिए ख़ास तौर पर सिख सियासत और सिख इतिहास से जुड़े कलमकारों और पाठकों दोनों को।  तभी इस तरह साज़िशी कलमों का जवाब कलम से दिया जा सकेगा। आपके विचारों की इंतज़ार बनी रहेगी। चुनावी मौसम है इसलिए इस तरह के बहुत से नए मामले सामने आएंगे सनसनी के आवरण मेंलपेटे हुए तांकि आम लोगों को दाल रोटी का सच भूला रहे, क्रांति का सच भूला रहे--सियासतदानों के घोटालों का सच भूला रहे---और लोग उलझे रहे साम्प्रदायिक टकरावों में। इस तरह के मामले जनता का ध्यान असली सच से हटाने की साज़िश मात्र हैं। -रेकटर कथूरिया 
ब्लू स्टार को जनरल शाहबेग का महंगा बदला बताया इण्डिया टूडे ने 

Thursday, February 06, 2014

बगलामुखी मां की आराधना मात्र से दूर हो जाते हैं सारे संकट

72 घंटे के अखंड जाप से शुरू हुआ लुधियाना में मंदिर निर्माण
लुधियाना:6 फरवरी 2014: (पंजाब स्क्रीन टीम): 
बगलामुखी हवन यज्ञ का नाम बहुत ही रहस्य और भय युक्त श्रद्धा से लिया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से जहाँ पंजाब में शनि मंदिरों की संख्या बढ़ी है, गणेश जी की शोभा यात्रा, शिव भगवान की शोभा यात्रा, भगवान जगन्नाथ जी की शोभायात्रा और बाला जी का गुणगान तेज़ी से बढ़ा--हनुमान जी के मंदिरों में वृद्धि हुई है वहीँ बगलामुखी साधना के भक्त भी तेज़ी से बढ़े हैं। लुधियाना में भी भक्ति और तंत्र का यह रंग तेज़ी से ज़ोर पकड़ रहा है। गौरतलब है कि बगलामुखी तंत्र साधना से लोग वशीकरण, मारण, उच्चाटन आदि कार्यों को बखूबी अंजाम देते हैं। अपने मन की असाध्य और असम्भव चाहतों की बात को पूर्ण करने के लिए लोग इस तंत्र साधना का प्रयोग करते हैं और तंत्र-मंत्र पर विश्वास करने वाले लोगों का पूरी तरह यह मानना है की इससे बेहतर कोई अन्य विकल्प है ही नहीं। साधना करने वालों का कहना है कि बगलामुखी मां की आराधना मात्र से साधक के सारे संकट दूर हो जाते हैं और श्री में भी हैरानीजनक हद तक वृद्धि होती है। इसकी ताज़ा मिसाल है लुधियाना की पक्खोवाल रोड पर स्थित सिंगला एन्क्लेव इलाके के बहुत सुंदर मार्ग पर बनने वाला माँ बगलामुखी मंदिर। दो हज़ार गज़ जगह का यह टुकड़ा कुछ वर्ष पूर्व तक़रीबंद डेड करोड़ रुपयों में खरीदा गया था। उसके बाद कुछ समय और व्यतीत हुआ लेकिन अब मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है।  इस मकसद के लिए बाकायदा 72 घंटे का अखंड हवन यज्ञ कराया गया जिसके लिए विशेष नाथ जोगी भी बुलवाये गए।
वीडियो देखें: 72 घंटे के अखंड यज्ञ से शुरू हुआ मां बगलामुखी मंदिर का निर्माण=Video

इस गहन तांत्रिक साधना को जानने हैं कि स साधना से शत्रुओं का शमन होता है, लम्बे समय से चले आ रहे विवाद झटपट निपट जाते हैं। अपने ऊपर हो रहे अकारण अत्याचार से बचाव के मामले में भी इसे अचूक माना जाता है। कहते हैं कि अगर किसी को सबक सिखाना हो तो या फिर मुकद्दमा जीतना हो या फिर असाध्य रोगों से छुटकारा पाना हो, बंधनमुक्त होना हो, संकट और ऋण से उद्धार पाना हो तो इस साधना से बढ़कर और कुछ भी नहीं। साधना का मर्म जाने वालों का कहना है कि नवग्रहों के दोष से मुक्ति के लिए तथा किसी अन्य के टोने को बेअसर करने के लिए भी बगलामुखी हवन मंत्र यज्ञ इत्यादि संजिवनी बुटी हैं। तंत्र मंत्र में महारथ हासिल किए जानकार कहते हैं की बाहर के शत्रु जातक को उतना नुकसान नहीं पहुंचाते जितना सगे संबंधी पहुंचाते हैं लेकिन उनका अक्सर पता नहीं चलता। जब तक बात सामने आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। उस नाज़ुक हालन में 
भी बगलामुखी मां ही सहायक साबित होती है।
 Video: बारह बारह घंटे तक बिना कुछ खाये पिए हवन में बैठे राजस्थान से आये सत्यनाथ --वीडियो देखें 
लेकिन यह साधना बेहद कठिन है। लगातार बारह बारह घंटे तक बिना कुछ खाये पिए इस हवन की तप्त अग्नि और आंसू ला देने वाले धूंए में बैठ कर हवन यज्ञ को परिपूर्ण करने वाले नाथ जोगी सत्य नाथ का कहना है कि अगर ज़रा सी भी चूक हो जाये तो बस सारा काम उल्टा भी हो जाता है। ज़रा सी चूक और और साधक का दिमाग ही चला जाता है। बगलामुखी साधना को पूर्ण करने के लिए निम्न बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए अन्यथा साधना अपूर्ण रह जाती है और इस अपूर्ण साधना से साधक को बेहद कष्ट भोगना पड़ता है। इसी लिए लोग बहुत डरते भी हैं इस साधना से। 
राजस्थान से आये नाथ जी के साथ बाएं से विजय गर्ग, प्रवीण कुमार, नाथ जोगी सत्यनाथ जी, वरुण गर्ग और हरमिंदर सिंह रोकी 
साधना के नियमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि यह एक बहुत ही  साधना है। इसमें नियमों का पूरा ध्यान रखना अतिआवश्यक है। नियमों का संक्षेप विवरण इस प्रकार है :
*बगलामुखी साधना करते समय पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन किया जाना चाहिए। इसमें ढील का कोई मतलब ही नहीं। 
किसी भी स्त्री को छुना, वार्तालाप करना यहां तक कि सपने में भी किसी स्त्री का आना इस साधना में पूर्णत: निषेध है। ऐसा न करने से साधना खण्डित हो जाएगी और साधक को कष्ट उठाना पड़ेगा।  इसलिए बहुत सात्विक जीवन जीने वाला ही इस साधना को कर सकता है। 
*यह किसी कमज़ोर दिल वाले के बस की साधना नहीं है। इस साधना को करने के लिए किसी डरपोक व्यक्ति या बच्चे का सहारा नहीं लेना चाहिए। जो लोग साधना करना चाहते हों पहले उन्हें खुद कि सात्विक और बलवान बना लेना चाहिए। बगलामुखी साधना करते समय साधक को कई तरह का डर भी लगेगा, विचित्र तरह कि बहुत सी आवाजें भी सुनायी देंगीं और बहुत से अन्य खौफनाक आभास भी हो सकते हैं लेकिन साधक को निडर और मज़बूत रहना होगा। श्रद्धा,और नियमों के पालन के बिना साधना परिपूर्ण नहीं होती। साधना जानने वालों का कहना है कि जिन साधकों/जातकों को काले अंधेरों और पारलौकिक ताकतों से भय लगता हो, उन्हें यह साधना कदापि नहीं करनी चाहिए वर्ण उनके लिए उल्ट परिणाम सामने आ सकते हैं। 
* नवरात्रि के दिनों में बगलामुखी साधना करना सबसे उत्तम फल देता है। मंत्रों का जाप शुक्ल पक्ष में करना अत्यन्त शुभ फल देता है। रात्री होते होते साधकों संख्या कम हो जाती है लेकिन उनकी वाणी और कृत्य में जोश आ जाता है। वे किसी दैवीय शक्ति का आभास देते हुए इतने ऊंचे सवर में बोलते हैं कि दूर दूर तक लगने लगता है न जेन कितनी बड़ी संख्या में भक्त बोल रहे हैं।  रात के सन्नाटे में इसका प्रभाव और भी बढ जाता है। इस मंदिर में भी रात का नज़ारा देखने वाला था।  दूर दूर तक अँधेरा और मंदिर के केंद्र में हवन यज्ञ की अग्नि में चमकते साधकों के चेहरे। 

* मंत्रों का जाप करते करते साधकों का स्वर अपने आप तेज होने लगता है ऐसा होने पर घबराने की कोई बात नहीं होती। यह एक अच्छा संकेत है। इसलिए बिना भटके मन को पूजा पाठ में हुए चिंतित हुए बिना अपना ध्यान मंत्रों पर केंद्रित रखें। तान मन दोनों में एक नयी शक्ति का आभास लगेगा। 

* इस साधना के नियमों के मुताबिक उत्तर की ओर मुंह करके बैठने के बाद ही साधना का आरंभ करें। इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं। साधक को सफलता मिलती है। 
Video--नाथजोगी सत्य नाथ ने संक्षेप में मां बगलामुखी के बारे में बताया--वीडियो देखें 
* कहा जाता है भोजन, भजन और नारी तीनों पर्दे के अधिकारी लेकिन इस साधना में यह बात विशेष रूप से लागू होती है। इस साधना को गुप्त रूप से करें जल्द सफलता मिलेगी। जब तक साधना पूर्ण न हो जाए किसी से भी इस विषय पर वार्ता न करें। वाणी पर नियंत्रण भी इसके नियमों में है। 
* इसका विधिविधान भी विशेष है। साधना आरंभ करने से पूर्व अपने चारों ओर घी और तेल के दिए जलाएं।
*साधना करते वक्त पीले रंग के वस्त्र धारण करें और पीले रंग के आसन का ही उपयोग करें।
*उपवास सबसे अच्छा होता है। लेकिन अगर कठिन लगे तो अल्पाहार ही करें। 
*साधकों का अभियास भी होता है और उपवास के कारण उन्हें लघुशंका इत्यादि की समस्या होती ही नहीं भी  लेकिन अगर यत्ना ही पड़े तो दोबारा स्नान करके ही हवन में जाएं। 

तंत्र स्क्रीन में भी देखें इसी हवन पर विशेष सामग्री 

72 घंटे के अखंड हवन से शुरू मां बगलामुखी मंदिर का निर्माण


Wednesday, February 05, 2014

लुधियाना को अलविदा कह देगी करमो//समाप्र समारोह आज

दर्शकों से मिला रेकॉर्डतोड़ उत्साह         --Wed, Feb 5, 2014 at 6:26 PM
लुधियाना, 5 फरवरी 2011: ( सतपाल सोनी//पंजाब स्क्रीन) :
लुधियाना वासी अपनी दिनभर की व्यस्तता से फुर्सत में पंजाब की सांस्कृति और देश के कोने कोने से आए कलाकारों की प्रतिभा को करमो कार्यक्रम के जरिए देखने के लिए भारी संख्या में उपस्थित हो रहे हैं। भारत के सूचना एव प्रसारण मंत्रराला द्वारा करवाया जा रहा यह कार्यक्रम अपना सभ्याचार व देश की प्रतिभा को परिचित कराने के अलावा एक भरपूर मनोरंजन का भी साधन सिद्ध हो रहा है जिसमें प्रत्येक कलाकार अपनी-अपनी कला का लोहा मनवा रहा है।
इस कार्यक्रम के डायरैक्टर बलजीत सिंह ने बताया कि लुधियाना वासी अपने कामों से समय निकालकर शाम को टीवी के आगे बैठने की बजाए करमो कार्यक्रम को देखने के लिए न्यू शिमलापुरी के दुशहरा ग्राऊंड में अपने-अपने परिवार सहत पहुंच रहे हैं, जिससे वहां पर काफी चहल पहल हो जाती हैं और लोगों द्वारा इस कार्यक्रम की काफी सराहना की जा रही है। क्योंकि इस प्रोग्राम के जरिए पंजाब के इतिहास को नाटकी रूपांत्रण में दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लुधियानवीयों के लिए भरपूर अवसर है कि बिना किसे टिक्ट से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के लिए सिरफ आज का दिन ही बचा है इसलिए आज के दिन भी सबको इस कार्यक्रम का पूरा लाभ उठाना चाहिए। 
उन्होंने शहर वासियों एवे अविभावकों से अपील की कि वह अपने और अपने बच्चों के लिए शाम को समय निकालें और उन्हें सांस्कृतिक शिक्षा से जोड़े और उनके मनोरंजन में भी वृद्धि करें।  क्योंकि ऐसे कार्यक्रम के जरिए हमें अपनी सास्कृति और कलाकारों की प्रतिभा देखने को मिलती है, जो छात्र वर्ग के लिए भविष्य में काफी लाभदायक होती है।  2 फरवरी से रोजाना शास को 6:30 बजे से शुरू हुए प्रोग्राम के आखिरी दिन भी उन्होंने लोगों को भारी संख्या में पहुंचने की अपील की।

यह सब गुरु घर को लूटने जैसा-हम नहीं सहेंगे--फेडरेशन मेहता

Wed, Feb 5, 2014 at 5:49 PM
परमजीत सिंह खालसा ने बताया ई टेंडरिंग को एक गहरी साज़िश   
अमृतसर: 5th Feb 2014: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (मेहता) के अध्यक्ष भाई परमजीत सिंह खालसा ने कहा है कि एसजीपीसी धार्मिक स्थान, गुरु घर से संबंधित भवनों, स्कूलों व कॉलेजों के निर्माण में सिख संगत की सेवा ले। बड़े-बड़े बिल्डर्स व ठेकेदारों को दी जा रही निर्माण की आज्ञा गुरु घर की गोलक को लूटने जैसा है। खालसा ने कहा कि एसजीपीसी द्वारा सिख धार्मिक संस्थाओं की निर्माण की सेवा सिख संगत से छीन कर ई-टेंडरिंग के माध्यम से बड़े पूंजीपति बिल्डरों के हाथों में दी जा रही है। एसएसएफ मेहता इसका सख्त विरोध करती है। इस तरह से सेवा भावना की जो पंथ में गुरु काल से परंपरा चली आ रही है उसको खत्म किया जा रहा है। सिख संगत इस तरह की किसी भी कार्रवाई को कभी सहन नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने अगर जल्द यह सेवाएं संगत को न सौंपी तो फेडरेशन मेहता सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होगी।

गुरमति प्रकाश में चारों साहिबजादों की गलत तस्वीरे छापने का मामला गर्माया

Wed, Feb 5, 2014 at 5:46 PM
पंजाब स्क्रीन सहित कई मीडिया मंचों ने उठायी थी आवाज़ 
एसजीपीसी का मासिक पत्र है गुरमति प्रकाश 
अमृतसर: 5 फरवरी 2014  (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक बार फिर से विवादों में है। इस बार एसजीपीसी की ओर से  ओर से प्रकाशित की जाने वाली मासिक पत्रिका गुरमति प्रकाश में चारों साहिबजादों की गलत तस्वीरें प्रकाशित किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। गौरतलब है कि सिक्ख सियासत  पर विशेष कवरेज करने वाले पत्र पत्रिकायों ने इस मुद्दे को करीब एक माह पूर्व उठाया था। दिसंबर-2013 के अंक का कवरेज इन तस्वीरों को लेकर काफी  था। इन आरोपों को लेकर आज एसजीपीसी के पूर्व सदस्य बलदेव सिंह सिरसा ने अमृतसर के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की और उन्हें एसजीपीसी प्रधान, सचिव, धर्म प्रचार कमेटी के सचिव और धर्म प्रचार कमेटी के संपादक के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में केस दर्ज करने की मांग की। इस मौके पर बलदेव सिंह सिरसा ने कहा, कि एसजीपीसी की ओर से प्रकाशित मासिक पत्रिका गुरमति प्रकाश के दिसंबर 2013 के संस्करण के पहले पेज पर चारों साहिबजानों की जो तस्वीरें प्रकाशित की गई हैं, उनमें उनके केशों के अलावा उनके सिर पर टोपी दिखाई गई है। जबकि चारों साहिबजादे अपने  सिर पर दस्तार सजाते थे। उन्होंने बताया, कि इससे पूर्व भी एसजीपीसी की ओर से प्रकाशित सिख इतिहास नामक पुस्तक में गुरु साहिबानों का अपमान किया गया था। उधर, अमृतसर के पुलिस कमिश्नर जतिंदर सिंह औलख ने कहा, कि उन्हें बलदेव सिंह सिरसा की ओर से शिकायत दी गई है। जिसकी वह जांच कराएंगे और जो कानूनी कार्रवाई बनेगी, वह की जाएगी।

ਕੀ ਦਸ਼ਮੇਸ਼ ਪਿਤਾ ਦੇ ਸਾਹਿਬਜ਼ਾਦੇ ਟੋਪੀਆਂ ਵਾਲੇ ਸਨ?


ਹੁਣ ਸਿਗਰੇਟ ਪੀਣ ਵਾਲਿਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਬਾਬੇ ਨਾਨਕ ਦਾ ਆਸ਼ੀਰਵਾਦ?


Tuesday, February 04, 2014

ढोलेवाल में पूर्वांचल समाज द्वारा हुई माँ सरस्वती की पूजा

पार्षद सरबजीत काका बने मुख्य अतिथि                Tue, Feb 4, 2014 at 6:36 PM 
लुधियाना: 4 फरवरी 2014: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
विधा,ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा के उपलक्ष में कार्यक्रम ढोलेवाल में भुलाई गुप्त की अगुवाई में हुआ इस अवसर पर पंडित अवधेश पांडे ने पूजा अर्चना की इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पार्षद सरबजीत सिंह काका और अकाली दल लेबर विंग के महासचिव राजेश मिश्रा शामिल हुए माँ के दरबार में हाजिरी भरने उपरांत शामिल श्रधालुयो को संबोधित करते पार्षद काका ने कहा की माँ सरस्वती विद्या की आराध्य देवी है इस लिए इस पूजा को सिर्फ़ मज़दूर ही नही बल्कि हर वर्ग के लोग इनकी पूजा करते है इस दौरान राजेश मिश्रा ने कहा की माँ सरस्वती ज्ञान ,विद्या और कला की देवी है पूर्वांचल के लोग माँ सरस्वती पर अपार श्रधा रखते है इस अवसर पर आए हुए मेहमानों को कार्यक्रम प्रबंधकों ने सन्मनित किया इस अवसर पर भंडारा भी लगाया गया कार्यक्रम में जिया लाल वर्मा , हरिंदेर गुप्ता ,भुलाई गुप्ता, रमेश पांडे , कमलेश पांडे , मनोज कुमार , बालेश्वर कुमार , भीखी यादव , अर्जुन कुमार , राम प्रकाश आदि शामिल रहे।

अंतर्राष्ट्रीय दबाब का सामना करने के लिए केंद्र में पूर्णबहुमत आवश्यक

Kanhaiya Jha                                                             Tue, Feb 4, 2014 at 6:28 PM
(Research Scholar)
Makhanlal Chaturvedi National Journalism and Communication University, Bhopal, Madhya Pradesh
       सन 1990 से पहले कांग्रेस पार्टी की सरकार ने देश पर एक-छत्र राज्य किया था. 90 के दशक से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विदेशी पूंजी सभी विकासशील देशों में घुसने के लिए आतुर है, जो केन्द्रीय सत्ता को कमज़ोर करके ही सम्भव हो सकता है. इंडोनेशिया में केन्द्रीय सत्ता विदेशी पूंजी एवं निजी क्षेत्र के कूटनीतिक बंधन (nexus) के कारण स्वयं को असहाय स्थिति में पा रही है. अनेक अफ्रीकी देश केन्द्रीय सत्ता  की कमजोरी से गृह-युद्ध, भुखमरी आदि अनेक  विभीषिकाएँ झेल रहे हैं. आज देश की दो मुख्य पार्टियों में से कोई भी केवल अपने दम पर एक मजबूत सरकार बना सकती हैं. परन्तु उसके लिए जनता को, केवल मई 2014 के आम चुनाव के लिए, अपनी पसंद को दो मुख्य पार्टियों तक ही सीमित करना होगा. विधान सभा के लिए वे मुख्य पार्टियों को भूल अपनी पसंद की स्थानीय सरकार हमेशा चुन सकते हैं.     
       इस विषय पर सन 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति श्री एपीजे अब्दुलकलाम का संसद के दोनों सदनों में दिया गया भाषण महत्वपूर्ण है. उत्तरप्रदेश में बसपा की सरकार सत्ता में आयी थी और देश की दोनों प्रमुख पार्टियां भाजपा एवं कांग्रेस वहाँ पर हाशिये पर आ गयीं थीं. केंद्र में साझा सरकारों की प्रथा चल पड़ी थी. परंतू उन्होनें 'दो पार्टी' प्रथा की ही वकालत की. पूर्व राष्ट्रपति ने देश के विकास विषय पर 'इंडिया 2020' पुस्तक भी लिखी है. हालांकि वे  स्वतन्त्रता संग्राम की 150 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर बोल रहे थे, परन्तु भाषण में देश को एक विकसित राष्ट्र देखने की उनकी दिली इच्छा ही प्रकट हो रही थी.
       1857 का स्वतन्त्रता संग्राम एक छोटी शुरुआत थी परंतू मुख्यतः तभी से अनेक क्षेत्रों में प्रतिभावान व्यक्तित्व उभर कर सामने आने लगे. वह एक जज्बा था जिसमें वे सभी अपने-अपने तरीके से देश की स्वंत्रता के लिए योगदान करना चाहते थे. साइंस के क्षेत्र में सर सीवी रमन, मेघनाथ साहा आदि ने यह सिद्ध किया कि भारतीय विश्व के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों से किसी तरह कम नहीं हैं. श्री जमशेदजी टाटा ने देश में स्टील उद्योग स्थापित किया. शिक्षा के क्षेत्र में सर सैयद अहमद खान ताथा पंडित मदन मोहन मालवीय ने विश्वविद्यालय स्थापित किये. साहित्य एवं कविता के क्षेत्र में श्री रविंद्रनाथ टेगोर ने नोबेल पुरुस्कार जीता. पूर्ण स्वतन्त्रता के प्रति उनके आवेगपूर्ण उद्गारों ने अनेकों को प्रेरित किया:
"जहाँ पर मनुष्य बिना किसी डर के अपना सर ऊंचा कर जी सकें, हे मेरे परमपिता! उस स्वतन्त्रता के स्वर्ग में मेरे देश को जगा"
       तमिल कवि श्री सुब्रमनियम भारती ने एक महान भारत के प्रति अपने गहरे प्यार को प्रदर्शित करते हुए लिखा," जहां स्त्रियों को सम्मान मिलेगा, तथा उन्हें शिक्षा एवं अपनी प्रतिभा विकसित करने के पूरे अवसर मिलेंगे". अनेक क्षेत्रों की इन प्रतिभाओं से प्रेरणा पाकर असंख्य लोगों ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह आन्दोलनों में भाग लिया. पूर्व राष्ट्रपति ने उन सब व्यक्तियों की याद दिलाकर सांसदों को इस देश की जनता की शक्ति का ही परिचय कराया था.  
       आज भी भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जो हर क्षेत्र में विश्व के सर्वोत्तम से स्पर्धा कर सकते हैं. देश के लिए साझा सरकारें कदापि सर्वोत्तम विकल्प नहीं हो सकतीं. श्री रविंद्रनाथ टेगोर के उपरोक्त उद्गारों से प्रेरणा लेकर तथा निडर होकर वे मीडिया में दोनों मुख्य पार्टियों के बारे में अपने विचार व्यक्त करें, जिससे जनता को अपना मत बनाने में सहायता मिले और देश को केंद्र में किसी भी एक पार्टी की मजबूत सरकार मिल सके.   
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