Saturday, August 17, 2013

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना

16-अगस्त-2013 20:22 IST
मनीष ति‍वारी ने रखी सड़क के नि‍र्माण की नींव रखी 
आज, केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री मनीष ति‍वारी ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत लुधि‍याना जि‍ले में दो लि‍न्‍क सड़कों के नि‍र्माण का शि‍लान्‍यास किया। श्री ति‍वारी ने आयली गांव से झामत और राष्‍ट्रीय हाइवे-95 से बैस गांव को जोड़ने वाली सड़कों का शि‍लान्‍यास किया जि‍नके नि‍र्माण पर लगभग क्रमश: 82 लाख और 98.48 लाख रूपये की लागत आएगी। 
शि‍लान्‍यास रखने के बाद जनता को संबोधि‍त करते हुए श्री ति‍वारी ने कहा कि‍ केंद्र सरकार अब तक वि‍भि‍न्‍न लि‍न्‍क सड़कों के लि‍ए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत अब तक सौ करोड़ रूपये दे चुकी है। उन्‍होंने कहा कि‍इस योजना के तहत अब तक लुधि‍याना में कई लि‍न्‍क रोड पूरे हो चुके हैं और अन्‍य कई पूरे हो रहे है। श्री ति‍वारी ने कहा कि‍ राज्‍य सरकार द्वारा कोई भी वि‍कास कार्य नहीं कि‍या जा रहा, केंद्र सरकार पर केवल दोषारोपण हो रहा है। केंद्र सरकार पंजाब राज्‍य को लगभग एक हजार करोड़ रूपये प्रति‍वर्ष वि‍भि‍न्‍न कार्यक्रमों जैसे ग्रामीण वि‍कास, मनरेगा और सर्व शि‍क्षा अभि‍यान पर जि‍ला परि‍षदों के माध्‍यम से खर्च करने के लि‍ए देती है। उन्‍होंने कहा कि‍ राज्‍य सरकार न तो केंद्रीय परि‍योजनाओं में योगदान देती है और न ही केंद्र सरकार द्वारा दि‍ए गए फंड को राज्‍य के वि‍कास और जन कल्‍याण में खर्च करती है। 

इस अवसर पर बोलते हुए पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री मलकीत सि‍ह दखा ने आरोप लगाया कि‍केंद्र सरकार से पर्याप्‍त फंड लेने के बावजूद पंजाब सरकार इस फंड को ग्रामीण क्षेत्रों के वि‍कास के लि‍ए खर्च नहीं कर रही है।
इस अवसर पर मलकीत सि‍ह बि‍र्मी, पवन दीवान, के. के. बावा, दर्शन सि‍ह बि‍र्मी, परमजीत सि‍ह घ्‍वड़डी, करति‍न्‍दर पाल सिं‍हपुरा, मेजर सिं‍ह मुल्‍लनपुरी मौजूद थे। (PIB) 

वि.कासौटिया/इ-अहमद/मनोज/राजीव-5654

Friday, August 16, 2013

लुधियाना में आकाशवाणी का एफएम गोल्ड रेडियो

16-अगस्त-2013 19:41 IST
दशकों पुराना सपना साकार:मनीष तिवारी ने किया उदघाटन 
*लुधियाना में पासपोर्ट का क्षेत्रीय कार्यालय खुलवाने का भरोसा दिलाया 
*लुधियाना और नई दिल्ली के बीच शीघ्र नई शताब्दी

सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने आज लुधियाना में आकाशवाणी के एफएम गोल्ड रेडियो का उद्घाटन किया। इसके साथ ही लुधियाना चार मेट्रो शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के बाद एफएम गोल्ड रेडियो वाला देश का पांचवां शहर हो गया है। 
इस मौके पर गुरु नानक देव भवन के सभागार में बड़ी संख्या में जुटे लोगों को संबोधित करते हुए श्री तिवारी ने बताया कि पंजाब के बड़े और अहम औद्योगिक केंद्र लुधियाना में स्थानीय रेडियो केंद्र की मांग काफी समय से लंबित पड़ी थी जो आज पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल लुधियाना रेडियो केंद्र का दायरा 20 किलोमीटर ही है जिसे बाद में बढ़ाया जाएगा और यहां से स्टूडियो आधारित कार्यक्रम बनाए जाएंगे और प्रसारित किए जाएंगे। एफएम गोल्‍ड लुधियाना का प्रसारण 100.01 मेगा हर्ट्ज पर सुना जा सकता है। 

श्री तिवारी ने महज 4 महीने की अवधि में एफएम गोल्ड को साकार करने के लिए प्रसार भारती के अधिकारियों और अभियंताओं को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नया रेडियो केंद्र लुधियाना जैसे शहर में एक नई शुरूआत का संदेशवाहक बनेगा जो पंजाब का एक अहम शहर होते भी अपने एफएम रेडियो से अब तक वंचित था। इस कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में फतेहगढ़ साहिब से सांसद सुखदेव सिंह लिबरा, प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सरकार, और आकाशवाणी के महानिदेशक एल डी मंडोली भी शामिल रहे। इस मौके पर अन्य लोगों के अलावा श्री सुरिंदर डावर, श्री मोहम्मद सादिक़ (दोनों विधायक), श्री पवन दिवान डीसीसी (यू) अध्यक्ष, पूर्व राज्य मंत्री श्री मल्कियत सिंह डाखा, मलकित सिंह बिरनी, और इशर सिंह मेहरबान, पूर्व विधायक जगदेव सिंह जस्सोवाल भी मौजूद थे।
लुधियाना में भावी नागरीय सुविधाओं के बारे उन्होंने बताया कि मौजूदा पासपोर्ट सेवा केंद्र को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में बदलने के लिए उन्होंने संबंधित मंत्रालय के सामने बात रखी है ताकि आवेदकों को पासपोर्ट के लिए चंडीगढ़ या जालंधर नहीं जाना पड़े। श्री तिवार ने लुधियाना से नई दिल्ली वाया अंबाला एक नई शताब्दी ट्रेन शुरू करने का भी वायदा किया। उन्होंने बताया कि ये मसला पहले ही रेलवे मंत्रालय के सामने रख दिया गया। 

श्री मनीष तिवारी ने केंद्र की ओर से लुधियाना को मिल रही अन्य सेवाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2010 में ही दिल्ली और लुधियाना के बीच हवाई सेवाएं मिल गईं थी लेकिन राज्य सरकार की ओर से कुछ जरूरी आवश्यकताएं पूरी नहीं कर पाने की वजह से हवाई सेवाएं जारी नहीं रखी जा सकीं। इस मौके पर श्री तिवारी ने यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी खाद्य सुरक्षा योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत देश के 81 करोड़ आबादी को क्रमश: 3, 2, और 1 रुपये में ही चावल, गेहूं और मोटे अनाज मिल सकेंगे। 

इस मौके पर प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सरकार ने घोषणा की कि दो महीने के भीतर ही स्थानीय एफएम गोल्ड रेडियो में तैयार स्थानीय कार्यक्रम इसी केंद्र से प्रसारित किए जाएंगे जो शुरूआती दौर में एक घंटे के होंगे और सुबह और शाम के समय प्रसारित होंगे। (PIB)
वि. लक्ष्मी कासोटिया/अनिल/सुजीत- 5651

रेडियो स्‍टेशनों के लिए बोलियों का काम अगले छह महीनों में

लुधियाना में आकाशवाणी का एफएम गोल्ड रेडियो 

मैं इसे एक राष्ट्र कैसे मानूं ?

लगता है हमारा राष्ट्र दूसरा है और सोनी सोरी का दूसरा ! 
अब जब कल स्वतन्त्रता दिवस पर सरकारी डयूटी करके थके मांदे सरकारी मुलाजिम कल फिर ड्यूटी देने के  लिए आज कर रहे होंगें  तो गांधीवादी नेता हिमांशु कुमार अर्थात Himanshu Kumar ने फिर कुछ कड़वे सत्य सामने रख कर उनके दिलो-दिमाग को आंदोलित कर दिया है। हिमांशु लिखते हैं :सोनी को थाने में पीटते समय और बिजली के झटके देते समय एसपी अंकित गर्ग सोनी से यही तो जिद कर रहा था कि सोनी एक झूठा कबूलनामा लिख कर दे दे जिसमे वो यह लिखे कि अरुंधती राय , स्वामी अग्निवेश , कविता श्रीवास्तव , नंदिनी सुंदर , हिमांशु कुमार, मनीष कुंजाम और उसका वकील सब नक्सली हैं !
ताकि इन सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक झटके में जेल में डाला जा सके ! 
सरकार मानती है कि ये सामजिक कार्यकर्ता छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की ज़मीनों पर कंपनियों का कब्ज़ा नहीं होने दे रहे हैं ! इसलिये एक बार अगर इन सामजिक कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में जेल में डाल दिया जाए तो छत्तीसगढ़ में आदिवासियों पर सरकारी फौजों के हमलों पर आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं बचेगा ! फिर आराम से बस्तर की आदिवासियों की ज़मीने कंपनियों को बेच कर पैसा कमा सकेंगे !
67 वें स्वतन्त्रता दिवस पर एक दुसरे को थोक के भाव आज़ादी की बधाईयाँ दे रहे लोगों की इस में कड़वे सत्य को देख कर  हो रहे हिमांशु समाज के सभी वर्गों से---गुहार लगाते हुए कहते है---पुकारते हैं--झंक्झौरते हैं--:
कोई तो बचाओ इस लड़की को ! संसद , सुप्रीम कोर्ट , टीवी और अखबारों के दफ्तर हमारे सामने हैं ! और हमारे वख्त में ही एक जिंदा इंसान को तिल तिल कर हमें चिढा चिढा कर मारा जा रहा है ! और सारा देश लोकतन्त्र का जश्न मनाते हुए ये सब देख रहा है !
हिमांशु चेतावनी भी देते हैं--:शरीर के एक हिस्से की तकलीफ अगर दूसरे हिस्से को नहीं हो रही है तो ये शरीर के बीमार होने का लक्षण है !एक सभ्य समाज ऐसे थोड़े ही होते हैं ! मैं इसे एक राष्ट्र कैसे मानूं ? लगता है हमारा राष्ट्र दूसरा है और सोनी सोरी का दूसरा ! नक्सलियों से लड़ कर अपने स्कूल पर फहराए गये काले झंडे को उतार कर तिरंगा फहराने वाली उस आदिवासी लड़की को जेल में नंगा किया जा रहा है और उसे नंगा करने वाले पन्द्रह अगस्त को हमें लोकतन्त्र का उपदेश देंगे !

सोनी सोरी की कहानी सुनो

लोकतंत्र पर आए दिन जगह जगह पर दिए जाते खोखले उपदेशो से बुरी तरह आहत हुए हिमांशु कुमार की आवाज़ क्या अनसुनी रहेगी ? काले झंडे को उतार कर तिरंगा फहराने वाली उस आदिवासी लड़की की बेबसी किसी को नजर नहीं आएगी? क्या इस आदिवासी अध्यापिका को हर द्रोपदी की तरह नंगा किया जाता रहेगा ? क्या किसी कृष्ण तक नहीं पहुँच प् रही इस अबला की पुकार ? हम देवी के 9 रूपों की पूजा करने वाले एक धार्मिक देश में ही रहते हैं या कहीं और? क्या यह समाज पूरी तरह कौरव प्रधान हो गया है?--यहाँ सत्य की आवाज़ सुनने वाले अब नहीं रहे क्या? नक्सलियों से लड़ कर अपने स्कूल पर फहराए गये काले झंडे को उतार कर तिरंगा फहराने वाली उस आदिवासी लड़की का आखिर कसूर क्या है ? स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर आखिर कोई तो बताये !           ----रेक्टर कथूरिया 


सोनी सोरी की कहानी सुनो                        सोनी सोरी को दी जा रही हैं एक्सपायरी दवाएं


आनन्द मार्ग स्कूल में भी मनाया गया स्वतन्त्रता दिवस

कुर्सी रेस का खेल दिखा कर दिखाई  देश व दुनिया की असली हालत
यूं तो 15  अगस्त का दिन इस बार भी देश के हर कोने में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा था पर लुधियाना के आनन्द मार्ग आश्रम कम स्कूल में हुए आयोजन का नजारा कुछ अलग सा ही था। पूरी रात से जारी तेज़ बरसात के बावजूद स्कूल के छोटे छोटे बच्चे पूरे जोश में थे। लगातार हो रही बरसात उनके हौंसले या उत्साह को जरा सा भी कम नहीं कर पाई थी। लगता था इन बच्चों के जज्बे को  देख कर इंद्रदेव ने भी अपनी जिद छोड़ दी है चाहे थोड़ी देर के लिए ही सही। बारिश थमते ही ठीक नौ (09) बजे के निर्धारित समय पर शुरू हुआ इन वच्चों का रंगारंग कार्यक्रम भी रंगीन था लेकिन इस रंगारंग कार्यक्रम में रंग थे जिंदगी के---सफलता के---मेडिटेशन के---संघर्ष के और आत्मा परमात्मा तक के कुछ अलौकिक रंग जिन्हें वक्त या हालात के तूफ़ान कभी धुंधला नहीं कर पाते--कभी भी मिटा नहीं पाते।ये वे रंग थे जिनसे जिंदगी का हर रंग उत्कर्ष और नैतिकता की बात करता है---सफलता और सात्विकता की बात करता है---!
कार्यक्रम के मुख्य मेहमान थे इन बच्चों के जाने पहचाने वीआईपी जनाब अशोक चावला जो समाज सेवा के लिए अपने व्यस्त समय में से भी किसी न किसी तरह समय निकाल ही लेते हैं ! आज भी वह इस स्कूल के लिए विशेष तौर पर आये थे--और इस अवसर पर सम्मानीय अतिथि थे पब्लिक व्यूज़ के सम्पादक अरुण कौशल।
देश और दुनिया में जारी 
कुर्सी रेस की एक झलक 
शिक्षा पर बोलते ऋषिदेव
शुरूआत हुई परेड से जिसे देख कर लगता था कि इन बच्चों में भी सेना का जज्बा और जोश अपना पूरा रंग दिखा रहा है। परेड के बाद मुख्य मेहमान ने झंडा लहराया और शुरू हुआ कार्यक्रमों का सिलसिला। इन बच्चों ने बोरा रेस भी दिखाई कि अगर दुश्मन इन्हें किसी बोरी में भी बंद कर दे तो वहां से कैसे भागना है। अगर दुश्मन इनके हाथ बाँध दे तो मूंह से भोजन की तलाश करके के कैसे अपना जीवन बचाना है--इस तरह के सब खेल बहुत ही कुशलता से दिखाए गए।  इन छोटे छोटे बच्चों ने अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और पंजाबी में भाषण करके अपने सही उच्चारण और भाषा पर पकड़ का जादू भी दिखाया---साथ ही दिखाया जनरल नालेज और साधना से विकसित होने वाली स्मरण शक्ति  का कमाल भी ! किसी भी बच्चे ने किसी कागज़ से देख कर कुछ नहीं बोला।  सब  को अपना अपना भाषण ज़ुबानी याद था। उच्चारण भी बिलकुल सही और आत्म विशवास भी कमाल का---!
इन बच्चों ने ड्राईंग में भी अपना कला कौशल दिखाया। कला की प्रतियोगिता में इन बच्चों ने केवल साथ मिनट के अल्प समय में बहुत ही कुशलता से बताये गए विषयों पर बहुत ही हैरानीजनक चित्र बना कर दिखा दिए। अनुमान लगाना कठिन था कि इन बच्चों ने इतने कम समय में यह सब कैसे कर दिखाया ? अगर इन बच्चों को भी अमीरों  जैसे साधन और सुविधाएं मिलें तो ये बच्चे बी क्या नहीं कर के दिखा सकते ?
जब शुरू हुआ एक पुराना गीत जहाँ डाल डाल सोने की चिड़िया करतीं हैं बसेरा वोह भारत देश है मेरा ! तो इस गीत की पर डांस कर रही छोटी छोटी बच्चियों के हाथ एक एक पंक्ति पर ऐसे सुनियोजित ढंग से उठ रहे थे कि ऐसे लगता था जैसे यह गीत इन्ही बच्चियों पर फिल्माया गया हो।  ताल से ताल मिलाती इन बच्चियों ने पूरे माहौल को ही संगीत पूर्ण बना दिया था। अच्छी कारगुजारी दिखने वाले बच्चों को सम्मानित भी किया गया। मंच संचालन की ज़िम्मेदारी किसी टीवी एंकर की तरह निभाई इसी स्कूल की अध्यापिका रीतू ने---हर आईटम पर बच्चों का होंसला बढ़ती---दर्शकों को तालियों की याद दिलाती और एक कार्यक्रम को दुसरे कर्यक्रम के साथ शब्दजाल में पिरोती रीतू को देख कर एक बार तो यूं लगा कि शायद मंच संचालन के लिए किसी विशेषज्ञ कलाकार को बुलाया गया है पर पूछने पर पता चला कि वह तो इसी स्कूल की एक वरिष्ठ अध्यापिका है।
 समाज सेवा:हर पल तैयार:अशोक चावला 
इस सारे कार्यक्रम की सफलता के पीछे  स्कूल प्रिंसिपल और आश्रम के आचार्य गोविन्दानन्द जी का सतत प्रयास और दिन रात एक करके की गई कठिन मेहनत थी।  पूछने पर आचार्य ने बताया कि यह सब 24 घंटे पूर्व ही तैयार किया गया।  पुरूस्कार वितरण के अवसर पर अशोक चावला जी ने बच्चों को उत्साहित किया और आये हुए मेहमानों को बताया कि इस स्कूल में पढने वाले बच्चों को शरीरक, मानसिक और अध्यात्मिक हर स्तर पर अवश्य ही लाभ -होगा-यहाँ से पढने वाले बच्चे बहुत ही संस्कारी नागरिक बन कर देश और दुनिया का कुछ संवारेंगे।  युवा पत्रकार अरुण शर्मा ने भी इन बच्चों के कार्यक्रम और स्कूल प्रबन्धन के प्रयासों की प्रशंसा की। जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी में पढने वाले एक पुराने लेकिन युवा साधक ऋषिदेव ने बहुत ही भावुक हो कर कहा कि अगर देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार दिया  देश विकासशील देशों के वर्ग में से निकल कर विकसित देशों की पंक्ति में आ जाएगा।
पत्रकार अरुण कौशल 
उन्होंने पढो-पढ़ाओ आभियान चलने की आवश्यकता पर भी बल दिया।  उन्होंने कहा कि यह अभियान हर गाँव--हर घर----हर परिवार तक पहुंचना चाहिए---पूरी तरह से निशुल्क या फिर बहुत ही कम लागत मूल्य पर।   तकरीबन 600 गीत लिख चुके ऋषिदेव ने अपना एक गीत भी सुनाया----गाँवों में आ के मेरा भारत देखो।
इस अवसर पर अरुण कौशल ने कहा कि वह इस स्कूल का संदेश और इस संस्थान के इन छोटे छोटे बच्चों की प्रतिभा का विवरण इस क्षेत्र के सम्पन्न लोगों तक पहुँचायेंगे तांकि कुछ कर सकने की क्षमता रखने वाले लोग इस शुभ  कार्य के लिए बढ़ चढ़ कर आगे आ सकें और इस समाज को कुछ अच्छे संस्कारों के नैतिक लोग मिल सकें। --रेक्टर कथूरिया 

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Thursday, August 15, 2013

स्वतंत्रता दि‍वस 2013 के अवसर पर प्रधान मंत्री का भाषण

15-अगस्त-2013 08:42 IST
आज यकीनन ही खुशी का दिन लेकिन हमारे दिलों में दर्द भी है
लाल किले की ऐतिहासिक प्राचीर से जय हिन्द का जय घोष करते प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह 
आज प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने स्‍वतंत्रता दि‍वस 2013 के अवसर पर लाल कि‍ले के प्राचीर से देश को संबोधि‍त कि‍या । इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है - 

“मेरे प्यारे भारतवासियो, 

भाइयो-बहनो और प्यारे बच्चो, 

मैं आप सभी को इस स्वाधीनता दिवस पर बधाई देता हूँ। 

आज यकीनन ही खुशी का दिन है। लेकिन आज़ादी के इस त्यौहार पर हमारे दिलों में इस बात का दर्द भी है कि उत्तराखण्ड के हमारे भाई-बहनों को करीब दो महीने पहले भारी तबाही का सामना करना पड़ा। हमारी संवेदना और सहानुभूति उन सभी परिवारों के साथ है जिनको जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा । मैं आज उत्तराखण्ड की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इस मुश्किल की घड़ी में सारा देश उनके साथ है। हमारी सरकार जल्द से जल्द लोगों के उजड़े हुए घर दोबारा बसाने और बर्बाद हुए Infrastructure को फिर से बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत से काम कर रही है। 

उत्तराखण्ड में कठिन परिस्थितियों में हमारी फौज़, अर्धसैनिक बलों और केन्द्र और राज्य सरकार के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों ने आम लोगों के साथ मिलकर, घिरे हुए लोगों को राहत पहुंचाने का जो काम किया, वह तारीफ के काबिल है। हम ख़ास तौर पर Air Force, ITBP और NDRF के उन अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने दूसरों को बचाने में अपनी जान कुर्बान कर दी। 

हमें इस बात का भी बेहद अफसोस है कि कल एक दुर्घटना में हमने अपनी पनडुब्बी INS Sindhurakshak को खो दिया। इस हादसे में 18 बहादुर नौसैनिकों के शहीद होने की आशंका है। यह नुकसान इसलिए और भी दर्दनाक है क्योंकि अभी हाल में हमारी Navy ने अपनी पहली Nuclear पनडुब्बी Arihant और Aircraft Carrier, INS Vikrant के रूप में दो बड़ी कामयाबियां हासिल की थीं। 

हम शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। साथ-साथ Navy की सफलताओं के लिए उन्हें मुबारकबाद भी देते हैं। 

भाइयो और बहनो, 

1947 में महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में हमने आज़ादी हासिल की। उसके बाद के अपने सफर पर अगर हम ग़ौर करें तो पाएंगे कि हर दस साल पर हमारे देश में बड़े बदलाव आए हैं।

1950 के दशक में पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के नेतृत्व में एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में भारत ने अपने पहले कदम रखे। देश में Atomic Energy Commission, योजना आयोग और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं की स्थापना की गई जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्र निर्माण के काम में बहुत बड़ा योगदान दिया। पहली बार आम चुनाव कराए गए और देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए पहली पंचवर्षीय योजना बनाने का सिलसिला शुरू किया गया। 

1960 के दशक में पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने नए-नए उद्योग और कारखाने लगवाए, नई सिंचाई परियोजनाएं शुरू की और नए विश्वविद्यालय खोले। राष्ट्र निर्माण में विज्ञान और Technology के महत्व पर ज़ोर देकर उन्होंने इस प्राचीन देश को एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया। 

1970 के दशक में इंदिरा जी ने हमारे राष्ट्र का आत्मविश्वास बढ़ाया। इस दौरान हमने अंतरिक्ष में अपना पहला उपग्रह छोड़ा। हरित क्रांति ने पहली बार हमें अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्रदान की। 

राजीव गांधी जी ने अगले दशक में तकनीकी और आर्थिक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान Information Technology के क्षेत्र में हमारी प्रगति की नींव रखी गई। 

पंचायती राज संस्थाओं के महत्व पर ज़ोर दिया गया जिसकी वजह से आगे चलकर इन संस्थाओं को मज़बूत और अधिकार संपन्न बनाने के लिए हमारे संविधान में संशोधन हुआ। 

साल 1991 में हमने श्री नरसिम्हा राव जी के नेतृत्व में एक बहुत बड़े आर्थिक संकट का सामना बख़ूबी किया और देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए आर्थिक सुधारों को अपनाया। उस समय इन सुधारों का कई राजनैतिक दलों ने विरोध किया। लेकिन ये सुधार राष्ट्र हित में थे और इसीलिए बाद में आने वाली सभी सरकारों ने उनको जारी रखा। साल 1991 से लेकर आज तक सुधारों की ये प्रक्रिया आगे बढ़ती रही है। 

भाइयो और बहनो, 

मेरा मानना है कि पिछला दशक भी हमारे देश के इतिहास में बहुत बड़े बदलावों का दशक रहा है। देश की आर्थिक समृद्धि जितनी इस दशक में बढ़ी है उतनी पहले किसी दशक में नहीं बढ़ी। लोकतांत्रिक ताकतों को बढ़ावा मिला है और समाज के बहुत से वर्ग विकास की प्रक्रिया से पहली बार जुड़े हैं। आम आदमी को नए अधिकार मिले हैं जिनकी बदौलत उसकी सामाजिक और आर्थिक ताकत बढ़ी है। 

भाइयो और बहनो, 

मई 2004 में पहली UPA सरकार सत्ता में आई थी। तब से लेकर आज तक हमने एक प्रगतिशील और आधुनिक भारत बनाने के लिए लगन और ईमानदारी से काम किया है। 

हमने एक खुशहाल भारत की कल्पना की है। एक ऐसा भारत जो सदियों से चले आ रहे गरीबी, भूख और बीमारी के बोझ से मुक्ति पा चुका हो। जहाँ शिक्षा के उजाले से अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधेरे दूर हो चुके हों। 

जहां सामाजिक समानता हो और सबको एक जैसे आर्थिक अवसर प्राप्त हों। जहाँ समाज के किसी भी तबके को अन्याय और शोषण का सामना न करना पड़े। 

हमने एक ऐसे भारत का सपना देखा है जहाँ नौजवानों को रोज़गार के ऐसे अवसर मिलें जिनके जरिए वह राष्ट्र निर्माण के महान काम में योगदान कर सकें। 

हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज़ बुलंद करनी चाही है। हमने एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहा है जिसे सारी दुनिया आदर और सम्मान के साथ देखे। 

इन सपनों को साकार करने के लिए हमने कई कदम उठाए हैं। लेकिन सफर लंबा है, अभी बहुत फासला और तय करना है। 

भाइयो और बहनों, 

अभी कुछ दिन पहले हमने Food Security कानून बनाने की दिशा में एक Ordinance जारी किया है। Food Security Bill अब संसद के सामने है और हमें उम्मीद है यह जल्द ही पास हो जाएगा। इस कानून का फायदा हमारे गांवों की 75 प्रतिशत और शहरों की आधी आबादी को पहुंचेगा। इसके तहत 81 करोड़ भारतीयों को 3 रुपये प्रति किलो चावल, 2 रुपये प्रति किलो गेहूं और 1 रुपये प्रति किलो मोटा अनाज मिल पाएगा। यह दुनिया भर में इस तरह का सबसे बड़ा प्रयास है। 

हम अपने किसानों की मेहनत की वजह से ही इस कानून को लागू कर पाए हैं। साल 2011-12 में हमारी अनाज पैदावार 25.9 करोड़ टन रही, जो एक रिकार्ड है। 

बिना तेज़ कृषि विकास के हम अपने गांवों में खुशहाली पहुंचाने का मक़सद हासिल नहीं कर सकते हैं। पैदावार बढ़ाने और किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलवाने के लिए हमने लगातार कोशिशें की है। फसलों के खरीद मूल्यों में पिछले 9 सालों में पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ोत्तरी की गई है। गेहूं और धान के खरीद मूल्य दुगुने से भी अधिक किए गए हैं। कई ऐसे राज्यों में जहां पहले अनाज की कमी रहती थी आज उनकी अपनी ज़रूरत से ज़्यादा पैदावार हो रही है। 

11 वीं पंच-वर्षीय योजना के दौरान कृषि विकास की औसत सालाना दर 3.6 प्रतिशत रही है जो 9वीं और 10वीं योजना, दोनों से ज्यादा है। 

अब ग्रामीण इलाकों में खुशहाली बढ़ने के साफ संकेत दिखाई देने लगे हैं। साल 2004 से लेकर 2011 तक प्रतिव्यक्ति उपभोग किया जा रहा सामान और सुविधाएं पहले के मुकाबले चार गुना तेजी से बढ़े हैं। 

ग्रामीण मजदूरी दर में भी कहीं अधिक तेजी से वृद्धि हुई है। मनरेगा की बदौलत ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों गरीब लोगों को रोज़गार मिल रहा है। 

गरीबी को नापना एक मुश्किल काम है। गरीबी की परिभाषा को लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हम गरीबी की चाहे कोई भी परिभाषा अपनाएं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि 2004 के बाद गरीबी कम होने की गति तेज़ हुई है। 

कई ऐसे राज्य, जो बहुत समय से पिछड़े माने जाते थे और जिनमें से कुछ को "बीमारू" कहा जाता था, आज तेज़ी से विकास कर रहे हैं। 

भारत में हर बच्चे को शिक्षा के अवसर देने के लिए हमने शिक्षा का अधिकार कानून बनाया है। आज देश में लगभग सभी बच्चे प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे हैं। 

कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या पिछले नौ सालों में दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है। गरीबों और कमजोर तबकों के बच्चों को शिक्षा के अवसरों का फायदा दिलाने के लिए हमने बड़े पैमाने पर वज़ीफों के कार्यक्रम शुरू किए हैं। आज देश भर में 2 करोड़ से ज़्यादा बच्चों को केन्द्र सरकार द्वारा वज़ीफे दिए जा रहे हैं। 

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नए संस्थान खोले गए हैं। जैसे 8 नए IIT, 7 नए IIM, 16 नई Central Universities और 10 नए NIT । Scientific Research को बढ़ावा देने के लिए भी नई संस्थाएं खोली गई हैं। Science की पढ़ाई में ज्यादा छात्रों को शामिल करने के लिए और विदेशों से भारतीय Scientists की वापसी आसान करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। 

लेकिन शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बहुत सारे स्कूलों में अभी भी पीने का साफ पानी, शौचालय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। शिक्षा की Quality को बेहतर बनाने की ज़रूरत है। इसके लिए अध्यापकों की training पर ज़्यादा जोर दिया जाना आवश्यक है। 

Mid-day-Meal योजना में रोज करीब 11 करोड़ बच्चों को स्कूलों में दोपहर का खाना दिया जा रहा है। यह योजना बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। लेकिन इसको बेहतर तरह से लागू करना भी बहुत ज़रूरी है। बिहार में पिछले दिनों जो दर्दनाक हादसा हुआ वह देश में कहीं भी दोबारा नहीं होना चाहिए। 

2005 में हमने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरूआत की थी। इस मिशन के अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। देश में Maternal Mortality Rate और Infant Mortality Rate दोनों तेज़ी से घटे हैं। पहले से कहीं अधिक बच्चों का जन्म आज अस्पतालों में होता है। टीकाकरण के प्रतिशत में भी काफी वृद्धि हुई है। 

पिछले दो सालों से हमारे देश में पोलियो का कोई भी केस सामने नहीं आया है। हमें एक ऐसे रोग को मिटाने में कामयाबी मिली है जो लाखों लोगों को अपंग बना दिया करता था। 

हमारे ग़रीब भाई-बहनों को अस्पतालों में इलाज के लिए मुफ्त बीमा सुविधा प्रदान कराने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना अब साढ़े तीन करोड़ परिवारों को फायदा पहुंचा रही है। 

हमने शहरी क्षेत्रों में भी Health Mission लागू किया है जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और उनमें सुधार आएगा। 

महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर करने के लिए, हमने महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित कानून को मज़बूत बनाया है। 

Infrastructure यानि सड़कों, रेलगाड़ी, बिजली उत्पादन, Civil Aviation, बंदरगाहों और Telecom जैसे क्षेत्रों में भी पिछले 9 सालों में काफी तरक्की हुई है। गांवों को जोड़ने वाली प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2 लाख किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। सैंतीस हजार Kilometer से ज़्यादा नए Highway बनाए गए हैं जिनसे व्यापार और यात्रा अब ज़्यादा आसान हो गए हैं। चालीस से ज़्यादा हवाई अड्डों का निर्माण या नवीनीकरण किया गया है। सन् 2004 में सिर्फ 7 प्रतिशत लागों के पास telephone connection थे। आज 73 प्रतिशत लोगों को यह सुविधा प्राप्त है। ग्रामीण इलाकों में यह प्रतिशत 2 से बढ़कर 40 हो गया है। बिजली उत्पादन में रिकार्ड बढ़ोत्तरी हुई है। 

भाइयो और बहनो, 

हाल के महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में यह बात चर्चा में रही है कि पिछले साल हमारी विकास दर कम होकर 5% रह गई है। यह बात सच है और हम इस हालत में सुधार लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सिर्फ हमारा देश ही अकेला आर्थिक कठिनाईयों का सामना नहीं कर रहा है। पूरी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए पिछला साल मुश्किल भरा रहा है। यूरोप के बड़े देशों में इस वक्त मंदी चल रही है। दुनिया भर में हर जगह निर्यात बाज़ारों की स्थिति में गिरावट आई है। सभी विकासशील देशों को मंदी का सामना करना पड़ा है। 

मेरा मानना है कि भारत में धीमे विकास का दौर बहुत दिन नहीं चलेगा। पिछले 9 सालों में हमारी अर्थव्यवस्था में औसतन 7.9 प्रतिशत सालाना की बढ़ोत्तरी हुई है। विकास की यह रफ्तार अब तक किसी भी दशक में हुई प्रगति से कहीं ज्यादा है। 

भाइयो और बहनो, 

आज दुनिया के देश एक दूसरे से जितना जुड़े हुए हैं उतना पहले कभी नहीं रहे। हमने अपनी विदेश नीति के जरिए यह कोशिश की है कि भारत को इस बात का पूरा फायदा मिले। दुनिया की बड़ी ताकतों से पिछले 9 सालों में हमारे संबंध लगातार सुधरे हैं। पूर्व और दक्षिण पूर्व Asia में स्थित दस ASEAN राष्ट्रों के साथ हमारी Look East Policy के अच्छे नतीजे सामने आए हैं, खासकर आर्थिक मामलों में। हमारी यह भी कोशिश रही है कि पड़ोसी देशों के साथ हमारी दोस्ती बढ़े। लेकिन पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर होने के लिए यह ज़रूरी है कि वह अपनी सरज़मीन और अपने नियंत्रण वाली ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए न होने दे। 

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति में सुधार हुआ है। 2012 में और इस साल कुछ राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा की चिंताजनक घटनाओं के बावजूद, पिछले 9 साल सांप्रदायिक सद्भाव की दृष्टि से अच्छे गुजरे हैं। आतंकवादी और नक्सली हिंसा में भी कमी आई है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में हमें लगातार सावधानी बरतने की ज़रूरत है। समय-समय पर हो रहे नक्सली हमलों को पूरी तरह रोकने में हम सफल नहीं हो पाए हैं। छत्तीसगढ़ में पिछली 25 मई को जो नक्सली हिंसा हुई वह भारत के लोकतंत्र पर एक सीधा हमला था। भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर हाल में हमारे जवानों पर कायरतापूर्ण हमला किया गया। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे। 

भाइयो और बहनो, 

सरकार के काम को ज़्यादा संवेदनशील, पारदर्शी, और ईमानदार बनाने के लिए हमने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें से मैं सिर्फ दो का ज़िक्र यहां करना चाहूंगा। 

RTI कानून के जरिए आम आदमी को अब सरकारी कामकाज के बारे में पहले से कहीं ज़्यादा जानकारी मिल रही है। इस कानून का इस्तेमाल एक बड़े पैमाने पर, हर स्तर पर हो रहा है। यह कानून अक्सर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को सामने लाता है और सुधार का रास्ता खोलता है। मुझे यकीन है कि आने वाले समय में RTI की वजह से सरकारी कामकाज में और सुधार आएगा । 

हमने संसद में लोकपाल बिल प्रस्तुत किया है। लोक सभा ने इसे pass कर दिया है और अब इस पर राज्य सभा विचार कर रही है। यह कानून हमारी राजनैतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। 

भाइयो और बहनो, 

हमने पिछले दशक में एक लंबा सफर तय किया है। लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बदलाव का जो सिलसिला हमने शुरू किया है उसे आने वाले वक्त में जारी रखा जाएगा। 

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, तेज़ आर्थिक विकास हमारे देश के लिए बेहद ज़रूरी है। गरीबी दूर करना, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और रोज़गार के नए-नए अवसर पैदा करना – यह सब तेज़ आर्थिक विकास के बगैर मुमकिन नहीं है। पिछले 9 साल में हमने आर्थिक विकास की जो औसत रफ्तार हासिल की है उससे हमारे देश की क्षमताओं का पता चलता है। लेकिन इस वक्त देश के आर्थिक विकास की दर में कमी आई है। हम इस कमी को दूर करने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं। 

उद्योगों के लिए सरकारी मंज़ूरियों की प्रक्रिया को तेज़ करने, देश में उद्योग और व्यापार के लिए बेहतर माहौल बनाने और निवेश को बढ़ाने के लिए हमने हाल ही में कई कदम उठाए हैं। बड़ी परियोजनाओं की मंजूरियों की प्रक्रिया में मदद करने के लिए एक विशेष cell की स्थापना की गई है। Cabinet Committee on Investment रुकी हुई परियोजनाओं की अड़चनें दूर करने का काम कर रही है। 

बिजली उत्पादन बढ़ाने के रास्ते में कोयले की आपूर्ति एक समस्या बन गई थी। इसको हमने काफी हद तक सुलझा लिया है। 

आने वाले महीनों में Infrastructure के क्षेत्र में बहुत सी बड़ी परियोजनाओं पर हम काम शुरू करने वाले हैं। इनमें 2 नए बंदरगाह, 8 नए हवाईअड्डे, नए Industrial Corridors और रेल परियोजनाएं शामिल हैं। 

Foreign Direct Investment को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में हमने कई क्षेत्रों में ऐसे निवेश की सीमा बढ़ाई है और इसकी प्रक्रिया को आसान बनाया है। 

निवेश बढ़ाने की इन कोशिशों के अच्छे नतीजे हमें अगले कुछ महीनों में साफ देखने को मिलेंगे। इससे आर्थिक विकास की रफ्तार तेज़ होगी, रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और infrastructure में भी सुधार आएगा। 

भाइयो और बहनो, 

Food Security कानून बनने के बाद उसे प्रभावी ढंग से लागू करना हमारी प्राथमिकताओं में से एक रहेगी। इस दिशा में हमने राज्यों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। Public Distribution System के Computerization के काम में तेज़ी लाई जाएगी। 

Mid-day-Meal Scheme में सुधार लाए जाएंगे। बच्चों को स्कूल में मिल रहा भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ साफ सुथरे ढंग से बना हुआ होना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए हम ठोस कदम उठाएंगे। 

Skill Development के क्षेत्र में शुरुआत में हम उतनी अच्छी प्रगति नहीं कर पाए जितनी चाहते थे, लेकिन अब इसमें तेज़ी आई है। हमने कुछ महीने पहले National Skill Development Authority का गठन किया है। हम जल्द ही एक नई योजना शुरू करेंगे जिसके तहत उन नौजवानों को लगभग 10 हज़ार रुपये की राशि दी जाएगी, जिन्होंने सफलतापूर्वक नई Skills हासिल की हैं। इस योजना से अगले 12 महीने में करीब 10 लाख नौजवानों को फायदा पहुंचेगा। 

अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए Multi-Sectoral Development Programme में हाल ही में सुधार लाए गए हैं। अब इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। 

Minor Forest Produce के लिए खरीद मूल्य निर्धारित करने की स्कीम को मंजूरी दे दी गई है। इससे हमारे आदिवासी भाई-बहनों को लघु वन उपज के सही दाम मिलेंगे। इस योजना को हम जल्द-से-जल्द लागू करेंगे। 

आदिवासी भाई-बहनों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति और उनके स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर के बारे में सही जानकारी हासिल करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की Report से हमें उनके लिए बेहतर योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। 

हम अपने देश में बहुत सी समस्याओं को बेहतर Technology के ज़रिए हल कर सकते हैं। इसकी एक मिसाल है आधार योजना। इस योजना के तहत इस साल के आख़िर तक पचास करोड़ लोगों को अपनी पहचान साबित करने का जरिया मिलेगा और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उनको सहूलियत पहुंचेगी। इसके ज़रिए हम करोड़ों लोगों को पहली बार बैंकों की सुविधाओं का लाभ दे पाएंगे। 

भाइयो और बहनो, 

एक आधुनिक, प्रगतिशील और Secular देश में तंग और सांप्रदायिक ख्यालों की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। ऐसी सोच हमारे समाज को बांटती है और हमारे लोकतंत्र को कमज़ोर करती है। हमें इसे रोकना होगा। हमें अपनी संस्कृति की उन परंपराओं को मज़बूत करना होगा, जो हमें अन्य विचारधाराओं के प्रति सहनशील होना और उनका सम्मान करना सिखाती हैं। मैं आज सभी राजनैतिक दलों, समाज के सभी वर्गों और आम जनता से इस दिशा में प्रयास करने की अपील करता हूँ । 

भाइयो और बहनो, 

कुछ देर पहले मैंने कहा था कि आज़ादी के बाद के हर दशक में भारत में बड़े परिवर्तन आये हैं। हमें आज यह सोचना है कि आने वाले दस सालों में हम किस तरह का परिवर्तन चाहते हैं। 

पिछले दस सालों में जैसी प्रगति हमने की है यदि हम उसे आगे भी जारी रखें तो वह वक्त दूर नहीं जब भारत को ग़रीबी, भूख, बीमारी और अशिक्षा से complete मुक्ति मिल जाएगी। हमारा भारत खुशहाल होगा और उसकी खुशहाली में सभी नागरिक बराबर के शरीक होंगे चाहे उनका धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा कुछ भी हो। 

इसके लिए हम सबको मिलकर देश में राजनैतिक स्थिरता, सामाजिक एकता और सुरक्षा का माहौल भी बनाना होगा। 

आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा भारत बनाने के लिए अपने आपको फिर से समर्पित करें। 

प्यारे बच्चों, अब आप मेरे साथ मिलकर तीन बार बोलिए… 

जय हिन्द - जय हिन्द - जय हिन्द ।”  (PIB)
***
शरत/रतनानी/नवनीत/शाहबाज/सनोज/सतीश/लालमणी

सस्‍ती दरों पर होगा प्‍याज का आयात

14-अगस्त-2013 20:21 IST
प्‍याज की पर्याप्‍त उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपाय 
उपभोक्‍ता बाजार में उचित मूल्‍यों पर प्‍याज की पर्याप्‍त उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के उद्देश्‍य से निम्‍नलिखित उपाय किए जा रहे हैं: देश में घरेलू उपभोग के लिए नैफेड अन्‍य देशों से सस्‍ती दरों पर प्‍याज का आयात करेगा। नैफेड राजस्‍थान की मंडियों से सीधे किसानों और एपीएमसी से प्रतिदिन चार से पाँच मीट्रिक टन प्‍याज खरीदेगा और अपने खुदरा बिक्री केन्‍द्रों और मोबाइल वैनों के जरिए दिल्‍ली में इसकी आपूर्ति करेगा। इसके अलावा यह आजादपुर एमपीएमी दिल्‍ली के माध्‍यम से थोक भंडार की नीलामी कराएगा। 
नैफेड महाराष्‍ट्र के नासिक जिले के लासलगांव/पिम्‍पलगांव की मंडियों से सस्‍ती दरों पर खरीद करके दो प्रतिशत के नाम मात्र के सेवा शुल्‍क पर सभी राज्‍य विपणन और आपूर्ति संघों के पास भेजेगा। 

वि.कासोटिया/सुधीर/मधुप्रभा– 5644

स्‍वतंत्रता दि‍वस के उपलक्ष्‍य पर‍ पुलि‍स पदक की घोषणा

14-अगस्त-2013 19:49 IST
सराहनीय सेवा के लि‍ए 639 कर्मि‍यों को चुना गया
स्‍वतंत्रता दि‍वस के अवसर पर 864 पुलि‍स कर्मि‍यों को पुलि‍स पदक से सम्‍मानि‍त कि‍या गया है। वीरता के लि‍ए राष्‍ट्रपति‍ के पुलि‍स पदक से 6 कर्मि‍यों, वीरता के लि‍ए पुलि‍स पदक से 132 कर्मि‍यों, उत्‍कृष्‍ट सेवा के लि‍ए राष्‍ट्रपति‍ के पुलि‍स पदक से 87 कर्मि‍यों और सराहनीय सेवा के लि‍ए 639 कर्मि‍यों को चुना गया है।

       पुरस्‍कार वि‍जेताओं के संबंध में वि‍स्‍तृत जानकारी गृह मंत्रालय की वेबसाईट www.mha.nic.in और पत्र सूचना कार्यालय की वेबसाईट www.pib.nic.in पर उपलब्‍ध है।

Wednesday, August 14, 2013

राष्ट्रपति जी का राष्ट्र के नाम संदेश

14-अगस्त-2013 20:16 IST
67वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर लोगों के दिलों को झंकझौरा 
राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी का राष्‍ट्र के नाम संदेश का मूल पाठ इस प्रकार है: 
“प्यारे देशवासियों, हमारी स्वतंत्रता की 66वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, मैं आपको तथा विश्व भर में सभी भारतवासियों को हार्दिक बधाई देता हूं। 
2. मेरा ध्यान सबसे पहले हमारे स्वतंत्रता संग्राम को दिशा प्रदान करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और हमारे देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों सहित उन महान देशभक्तों की ओर जाता है, जिनके अदम्य संघर्ष ने हमारी मातृभूमि को लगभग दो सौ वर्षों के औपनिवेशिक शासन से मुक्ति दिलवाई। गांधीजी, न केवल विदेशी शासन से, बल्कि हमारे समाज को लम्बे समय से जकड़ कर रखने वाली सामाजिक बेड़ियों दोनों से, मुक्ति चाहते थे। उन्होंने हर भारतीय को खुद पर विश्वास करने की तथा बेहतर भविष्य के लिए उम्मीदों की राह दिखाई। गांधीजी ने स्वराज, अर्थात् सहिष्णुता तथा आत्म-संयम पर आधारित स्व-शासन का वायदा किया। उन्होंने अभावों तथा दरिद्रता से मुक्ति का भरोसा दिलाया। अब पिछले लगभग सात दशकों से हम खुद अपने भाग्य के नियंता हैं। और यही वह क्षण है जब हमें पूछना चाहिए कि क्या हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं? यदि हम उन मूल्यों को भुला देंगे जो गांधीजी के आंदोलन की बुनियाद थे, अर्थात्, प्रयासों में सच्चाई, उद्देश्य में ईमानदारी तथा सबके हित के लिए बलिदान, तो उनके सपनों को साकार करना संभव नहीं होगा। 

3. हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने औपनिवेशिक दुनिया के मरुस्थल के बीच एक हरे-भरे उद्यान की रचना की थी जो कि लोकतंत्र से पोषित है। लोकतंत्र, वास्तव में, केवल हर पांच साल में मत देने के अधिकार से कहीं बढ़कर है; इसका मूल है जनता की आकांक्षा; इसका जज़्बा नेताओं के उत्तरदायित्व तथा नागरिकों के दायित्वों में हर समय दिखाई देना चाहिए। लोकतंत्र, एक जीवंत संसद, एक स्वतंत्र न्यायपालिका, एक जिम्मेदार मीडिया, जागरूक नागरिक समाज तथा सत्यनिष्ठा और कठोर परिश्रम के प्रति समर्पित नौकरशाही के माध्यम से ही सांस लेता है। इसका अस्तित्व जवाबदेही के माध्यम से ही बना रह सकता है न कि मनमानी से। इसके बावजूद, हम बेलगाम व्यक्तिगत संपन्नता, विषयासक्ति, असहिष्णुता, व्यवहार में उच्छृंखलता तथा प्राधिकारियों के प्रति असम्मान के द्वारा अपनी कार्य संस्कृति को नष्ट होने दे रहे हैं। हमारे समाज के नैतिक ताने-बाने के कमजोर होने का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव युवाओं और निर्धनों की उम्मीदों पर तथा उनकी आकांक्षाओं पर पड़ता है। महात्मा गांधी ने हमें सलाह दी थी कि हमें ‘‘सिद्धांत के बिना राजनीति, श्रम के बिना धन, विवेक के बिना सुख, चरित्र के बिना ज्ञान, नैतिकता के बिना व्यापार, मानवीयता के बिना विज्ञान तथा त्याग के बिना पूजा’’ से बचना चाहिए। जैसे-जैसे हम आधुनिक लोकतंत्र का निर्माण करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं, हमें उनकी सलाह पर ध्यान देना होगा। हमें देशभक्ति, दयालुता, सहिष्णुता, आत्म-संयम, ईमानदारी, अनुशासन तथा महिलाओं के प्रति सम्मान जैसे आदर्शों को एक जीती-जागती ताकत में बदलना होगा। 

प्यारे देशवासियो : 

4. संस्थाएं राष्ट्रीय चरित्र का दर्पण होती हैं। आज हमें अपने देश में शासन व्यवस्था तथा संस्थाओं के कामकाज के प्रति, चारों ओर निराशा और मोहभंग का वातावरण दिखाई देता है। हमारी विधायिकाएं कानून बनाने वाले मंचों से ज्यादा लड़ाई का अखाड़ा दिखाई देती हैं। भ्रष्टाचार एक बड़ी चुनौती बन चुका है। अकर्मण्यता तथा उदासीनता के कारण देश के बेशकीमती संसाधन बर्बाद हो रहे हैं। इससे हमारे समाज की ऊर्जा का क्षय हो रहा है। हमें इस क्षय को रोकना होगा। 

5. हमारे संविधान में, राज्य की विभिन्न संस्थाओं के बीच शक्ति का एक नाजुक संतुलन रखा गया है। इस संतुलन को कायम रखना होगा। हमें ऐसी संसद चाहिए जिसमें वाद-विवाद हों, परिचर्चाएं हों और निर्णय लिए जाएं। हमें ऐसी न्यायपालिका चाहिए जो बिना विलंब किए हुए न्याय दे। हमें ऐसा नेतृत्व चाहिए जो देश के प्रति तथा उन मूल्यों के प्रति समर्पित हो, जिन्होंने हमें एक महान सभ्यता बनाया है। हमें ऐसा राज्य चाहिए जो लोगों में यह विश्वास जगा सके कि वह हमारे सामने मौजूद चुनौतियों पर विजय पाने में सक्षम है। हमें ऐसे मीडिया तथा नागरिकों की जरूरत है जो अपने अधिकारों पर दावों की तरह ही अपने दायित्वों के प्रति भी समर्पित हों। 

प्यारे देशवासियो: 

6. शिक्षा प्रणाली के माध्यम से समाज को फिर से नया स्वरूप दिया जा सकता है। विश्व स्तर का एक भी विश्वविद्यालय न होने के बावजूद हम विश्व शक्ति बनने की आकांक्षा नहीं पाल सकते। इतिहास गवाह है कि हम कभी पूरी दुनिया के मार्गदर्शक हुआ करते थे। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी, सोमपुरा तथा ओदांतपुरी, इन सभी में वह प्राचीन विश्वविद्यालय प्रणाली प्रचलित थी, जिसने छठी सदी ईस्वी पूर्व से अठारह सौ वर्षों तक पूरी दुनिया पर अपना प्रभुत्व बनाए रखा। ये विश्वविद्यालय दुनिया भर के सबसे मेधावी व्यक्तियों तथा विद्वानों के लिए आकर्षण का केंद्र थे। हमें फिर से वह स्थान प्राप्त करने का प्रयास करना होगा। विश्वविद्यालय ऐसा वट-वृक्ष है जिसकी जड़ें बुनियादी शिक्षा में और स्कूलों के एक बड़े संजाल में निहित होती हैं जो हमारे समुदायों को बौद्धिक उपलब्धियों का मौका प्रदान करता है। हमें इस बोधि वृक्ष के बीज से लेकर जड़ों तक, तथा शाखा से लेकर सबसे ऊंची पत्ती तक, हर हिस्से पर निवेश करना होगा। 

प्यारे देशवासियो: 

7. सफल लोकतंत्र तथा सफल अर्थव्यवस्था के बीच सीधा संबंध है, क्योंकि हम जनता के द्वारा संचालित राष्ट्र हैं। जनता अपने हितों का बेहतर ढंग से तभी ध्यान रख सकती है जब वह पंचायत तथा स्थानीय शासन के विभिन्न स्वरूपों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी करती है। हमें स्थानीय निकायों के कामकाज में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए उनको कार्य, कर्मचारी तथा धन देकर तेजी से अधिकार संपन्न बनाना होगा। तीव्र विकास से हमें संसाधन तो मिले हैं परंतु बढ़े हुए परिव्ययों के उतने बेहतर परिणाम नहीं मिल पाए हैं। समावेशी शासन के बिना हम, समावेशी विकास प्राप्त नहीं कर सकते। 

8. 120 करोड़ से अधिक की आबादी वाले हमारे विकासशील देश के लिए, विकास और पुनर्वितरण के बीच बहस अत्यावश्यक है। जहां विकास से पुनर्वितरण के अवसर बढ़ते हैं, वहीं आगे चलकर पुनर्वितरण से विकास की गति बनी रहती है। दोनों ही बराबर महत्वपूर्ण हैं। दूसरे के हितों के विपरीत, इनमें से किसी भी एक पर जोर देने से देश को दुष्परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। 

9. भारत, पिछले दशक के दौरान, विश्व में एक सबसे तेजी से प्रगति करता हुआ देश बनकर उभरा है। इस अवधि के दौरान, हमारी अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष 7.9 प्रतिशत की औसत दर से वृद्धि हुई है। हम आज खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भर हैं। हम, दुनिया भर में चावल के सबसे बड़े तथा गेहूं के दूसरे सबसे बड़े निर्यातक हैं। इस वर्ष दालों का 18.45 मिलियन टन का रिकार्ड उत्पादन हुआ है, जो दालों के उत्पादन में आत्म-निर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक शुभ संकेत है। कुछ वर्षों पहले तक इस बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। इस गति को बनाए रखना होगा। वैश्वीकृत दुनिया में, बढ़ती हुई आर्थिक जटिलताओं के बीच, हमें अपनी बाहरी तथा घरेलू दोनों ही प्रकार की कठिनाइयों का बेहतर ढंग से सामना करना सीखना होगा। 

प्यारे देशवासियो: 

10. अपनी आजादी की भोर में, हमने आधुनिकता का तथा समतापूर्ण आर्थिक विकास का दीपक जलाया था। इस दीपक के जलते रहने के लिए, गरीबी का उन्मूलन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यद्यपि गरीबी की दर में स्पष्ट रूप से गिरावट का रुझान दिखाई देता है परंतु गरीबी के विरुद्ध हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। भारत के पास इस अभिशाप के उन्मूलन के लिए प्रतिभा, योग्यता तथा संसाधन मौजूद हैं। 

11. जिन सुधारों ने हमें यहां तक पहुंचने में सक्षम बनाया है, उन्हें शासन के सभी स्तरों पर जारी रखने की जरूरत है। अगले दो दशकों के दौरान, जनसंख्या में अनुकूल बदलाव का हम बहुत लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए औद्योगिक रूपांतरण की और रोजगार के अवसरों के तेजी से सृजन की आवश्यकता है। इसके साथ ही सुव्यवस्थित शहरीकरण भी जरूरी है। सरकार द्वारा पिछले कुछ समय के दौरान शुरू की गई नई विनिर्माण नीति, शहरी अवसरंचना का नवीकरण तथा महत्वाकांक्षी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों जैसी विभिन्न पहलों पर, अगले वर्षों के दौरान बारीकी से नजर रखने की जरूरत पड़ेगी। 

12. हमने अपनी जनता को रोजगार, शिक्षा, भोजन तथा सूचना के अधिकार की कानूनी गारंटियों के साथ, हकदारियां प्रदान की हैं। अब हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इन हकदारियों से जनता को सच्ची अधिकारिता प्राप्त हो। इन कानूनों को कारगर बनाने के लिए हमें मजबूत सुपुर्दगी तंत्रों की जरूरत होगी। कारगर जन-सेवा सुपुर्दगी तथा जवाबदेही के नए मानदंड तय करने होंगे। इस वर्ष के आरंभ में शुरू की गई प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना से पारदर्शिता आएगी, दक्षता बढ़ेगी तथा बहुमूल्य संसाधनों का अपव्यय रुकेगा। 

प्यारे देशवासियो: 

13. प्रगति की अपनी दौड़ में, हमें यह ध्यान रखना होगा कि इन्सान और प्रकृति के बीच का संतुलन बिगड़ने न पाए। इस तरह के असंतुलन के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। उत्तराखंड में अपनी जान गंवाने वाले तथा कष्टों का सामना करने वाले असंख्य लोगों के प्रति, मैं अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। मैं, अपनी सुरक्षा तथा सशस्त्र सेनाओं के बहादुर जवानों, सरकार तथा गैर सरकारी संस्थाओं को नमन् करता हूं, जिन्होंने इस आपदा के कष्टों को कम करने के लिए भारी प्रयास किए। इस आपदा के लिए मानवीय लोलुपता तथा मां प्रकृति का कोप, दोनों ही जिम्मेदार हैं। यह प्रकृति की चेतावनी थी। और अब समय आ गया है कि हम जाग जाएं। 

प्यारे देशवासियो: 

14. पिछले दिनों आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां हमारे सामने आई हैं। छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा के बर्बर चेहरे ने बहुत से निर्दोष लोगों की जानें लीं। पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाने के भारत के निरंतर प्रयासों के बावजूद सीमा पर तनाव रहा है और नियंत्रण रेखा पर युद्ध विराम का बार-बार उल्लंघन हुआ है, जिससे जीवन की दुखद हानि हुई है। शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अविचल है परंतु हमारे धैर्य की भी एक सीमा है। आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मैं निरंतर चौकसी रखने वाले अपने सुरक्षा और सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य की सराहना करता हूं और उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में सबसे मूल्यवान उपहार, अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। 

15. हमारे अगले स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, आपको फिर से संबोधित करने से पहले, हमारे देश में आम चुनाव होंगे। लोकतंत्र का यह महान त्योहार हमारे लिए एक ऐसी स्थिर सरकार को चुनने का महान अवसर है जो सुरक्षा तथा आर्थिक विकास सुनिश्चित करेगी। हर एक चुनाव अधिक सामाजिक सौहार्द, शांति तथा समृद्धि की ओर राष्ट्र की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होना चाहिए। 
16. लोकतंत्र ने हमें एक और स्वर्ण युग के निर्माण का मौका दिया है। हमें यह असाधारण मौका नहीं चूकना चाहिए। हमारी भावी यात्रा बुद्धिमत्ता, साहस तथा दृढ़ संकल्प की मांग करती है। हमें अपने मूल्यों तथा संस्थाओं के सर्वांगीण पुनरुत्थान का प्रयास करना होगा। हमें यह समझना होगा कि अधिकार तथा उत्तरदायित्व एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमें आत्म-चिंतन तथा आत्म-संयम जैसे सद्गुणों को फिर से अपनाना होगा। 

17. अंत में मैं, महान ग्रंथ भगवद्गीता के एक उद्धरण से अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा, जहां उपदेशक अपने दृष्टिकोण का प्रतिपादन करते हुए कहता है, ‘‘यथेच्छसि तथा कुरु...’’ ‘‘आप जैसा चाहें, वैसा करें, मैं अपने दृष्टिकोण को आप पर थोपना नहीं चाहता। मैंने आपके समक्ष वह रखा है जो मेरे विचार में उचित है। अब यह निर्णय आपके अंत:करण को, आपके विवेक को, आपके मन को लेना है कि उचित क्या है।’’ 

आपके निर्णयों पर ही हमारे लोकतंत्र का भविष्य निर्भर है। 

जय हिंद!” 
***
शरत/सतीश

लालकिले पर स्‍वतंत्रता दिवस समारोह 15 को सुबह सुबह

14-अगस्त-2013 20:27 IST
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह करेंगे राष्‍ट्र को संबोधित
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 67वीं स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्‍त 2013 को लालकिले की प्राचीर से राष्‍ट्रीय झंडा फहरायेंगे। तिरंगा फहराने के बाद प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह राष्‍ट्र को संबोधित करेंगे। 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लालकिले के लाहौरी गेट पहुंचने पर उनकी अगुवाई रक्षामंत्री श्री ए. के. एंटनी, रक्षा राज्‍य मंत्री श्री जितेन्‍द्र सिंह और रक्षा सचिव श्री आर. के. मा‍थुर करेंगे। रक्षा सचिव, प्रधानमंत्री से जनरल ऑफीसर कमांडिंग-जीओसी, दिल्‍ली क्षेत्र, लेफ्टिनेट जनरल सुब्रतो मित्रा का परिचय करायेंगे। इसके बाद जीओसी प्रधानमंत्री को सलामी मंच तक ले जाएंगे, जहां कंबाइंड इंटर सर्विसेज और पुलिस गार्ड प्रधानमंत्री को सलामी देंगे। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करेंगे। 

प्रधानमंत्री के गार्ड ऑफ ऑनर में थलसेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्‍ली पुलिस में से प्रत्‍येक से एक अधिकारी और 24 जवान शामिल होंगे। 

कार्यक्रम की जिम्‍मेदारी इस साल वायुसेना को दिये जाने के कारण गार्ड ऑफ ऑनर का संचालन वायुसेना के विंग कमांडर के श्रीनिवासन करेंगे। कार्यक्रम में थलसेना की अगुवाई मद्रास रेजिमेंट के कैप्‍टन निशांत कुमार विवेक, नौसेना की अगुवाई लेफ्टिनेट कमांडर वाई. हेमंत कुमार, वायुसेना की अगुवाई स्‍क्‍वाड्रन सिद्धार्थ साठे और दिल्‍ली पुलिस की अगुवाई एसीपी संतोष कुमार मीणा करेंगे। 

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात थलसेना का दल मद्रास रेजिमेंट के 28वें बटालियन को भेजा गया है। अपनी सेवा की शानदार 37 साल पूरी कर चुके इस बटालियन की स्‍थापना ऊटी में वैलिंग्‍टन के पास ग्‍वाहाँ हिल पर 1 जुलाई 1976 को हुई थी। नगालैंड में इस बटालियन के जवानों के बहादुरी के कारनामे देखते हुए इसे द डेयरिंग नाम दिया गया था। यह बटालियन पूरी क्षमता के साथ सभी तरह के वातावरण में काम कर चुका है वह चाहे ऊंचाई वाली जगह हो या नियंत्रण रेखा या फिर उग्रवाद या आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई। ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन विजय (जम्‍मू कश्‍मीर) के दौरान जबरदस्‍त प्रदर्शन के लिए इस बटालियन को जनरल ऑफीसर कमांडिंग इन चीफ, उत्‍तरी कमान से नवाजा गया। 

इस बटालियन के जवानों को एक वीर चक्र, तीन एवीएसएम, तीन शौर्य चक्र, 15 सेना पदक, तीन विशिष्‍ट सेवा पदक सहित कई अन्‍य पुरस्‍कारों से नवाजा गया। जम्‍मू कश्‍मीर में नियंत्रण रेखा के पास सफल कार्यकाल बिताने के बाद बटालियन को नई दिल्‍ली लाया गया जो राष्‍ट्रपति भवन, इंडिया गेट और लालकिला सहित विभिन्‍न समारोहों के संचालन के जिम्‍मेदारी निभाता है। 

गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करने के बाद प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह लालकिला की प्राचीर की ओर बढ़ेंगे जहां रक्षामंत्री, रक्षा राज्‍य मंत्री, सैन्‍य प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह, नौसेना प्रमुख (कार्यवाहक) वाईस एडमिरल आर. के. धोवान और वायु सेना अध्‍यक्ष एयर चीफ मार्शल एन ए के ब्राउन स्‍वागत करेंगे। फिर जीओसी दिल्‍ली क्षेत्र, प्रधानमंत्री को राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराने के लिए मंच तक ले जाएंगे। 

तिरंगा फहराने के साथ ही राष्‍ट्रीय ध्‍वज को 871 फिल्‍ड रेजिमेंट की ओर से 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। प्रधानमंत्री के राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराने के वक्‍त थल सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्‍ली पुलिस में प्रत्‍येक से 32 जवानों और एक अफसर से लैश राष्‍ट्रीय ध्‍वज गार्ड तिरंगा को राष्‍ट्रीय सलामी देंगे। इस इंटर सर्विसेज गार्ड और पुलिस गार्ड की कमान वायुसेना के विंगकमांडर आशीष शर्मा संभालेंगे। नौसेना दल की कमान लेफ्टिनेट कमांडर पुष्‍पजीत ओझा, थलसेना दल की कमान मेजर प्रमोद कुमार एमवी, वायु सेना दल की कमान स्‍क्‍वाड्रन लीडर नीरज सारस्‍वत और दिल्‍ली पुलिस की दल के कमान अतिरिक्‍त डीसीपी डॉ. ए कोवान संभालेंगे। 

तिरंगा झंडा फहरते वक्‍त राष्‍ट्रीय ध्‍वज गार्ड द्वारा राष्‍ट्रीय सलामी देते वक्‍त वायुसेना का दल राष्‍ट्रीय गान की धुन बजायेगा। इस दल की कमान वारंट ऑफीसर अल्‍फ्रेड संभालेंगे। वायु सेना के दो अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेट अजित कुमार और फ्लाइंग ऑफीसर नाजीव कुमार, प्रधानमंत्री को सलामी देने वाले मंच के दोनों तरफ तैनात रहेंगे। 

राष्‍ट्रीय ध्‍वज गार्ड के लिए सैन्‍य दल मद्रास रेजिमेंट के 27वें बटालियन से लिया गया। 42 सालों तक शानदार सेवा देने वाले इस बटालियन की स्‍थापना ऊटी के नजदीक वेलिंग्‍टन में ग्‍वाहा हिल के पास 01 जून 1971 को हुई थी। तब से यह बटालियन पूरी क्षमता के साथ सभी तरह के वातावरण में काम कर चुका है वह चाहे ऊच्चाई वाली जगह हो या नियंत्रण रेखा या फिर उग्रवाद या आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई। यह बटालियन सितंबर 1990 से जनवरी 1994 तक राष्‍ट्रपति भवन को भी सेवा दे चुका है। अपनी स्‍थापना के 42 साल की छोटी अवधि में बटालियन को एक शौर्य चक्र, चार सेना पदक, एक विशिष्‍ट सेवा पदक, एक जीवन रक्षक पदक सहित कई अहम पुरस्‍कार से नवाजा गया है। 

लालकिला की प्राचीर से राष्‍ट्रीय ध्‍वज तिरंगा फहराने के बाद प्रधानमंत्री राष्‍ट्र को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद स्‍कूली बच्‍चे और एनसीसी कैडिट राष्‍ट्रीय गान गायेंगे। 

इस साल ध्‍वजारोहण समारोह में दिल्‍ली निदेशालय से एनसीसी के सात सौ कैडिट शामिल होंगे, जिनमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना की शाखाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा, उत्‍तरी, पूर्वी, मध्‍य और पूर्वोत्‍तर क्षेत्रों के 36 सरकारी स्‍कूलों से तीन हजार पाँच सौ छात्राएं शामिल होंगी। इस मौके पर यह छात्राएं मानव श्रृंखला से राष्‍ट्रीय ध्‍वज का प्रतिरूप प्रदर्शित करेंगे। (PIB)

वि.कासोटिया/अनि‍ल/मनोज—5638

सब संकल्‍प करें कि हम एकजुट रहेंगे--एम. हामिद अंसारी

14-अगस्त-2013 15:09 IST
स्‍वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में उप-राष्‍ट्रपति का अभिनन्‍दन संदेश
उप-राष्‍ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने 67वें स्‍वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में नागरिकों का अभिनन्‍दन किया है। इस अवसर पर अपने संदेश में उन्‍होंने कहा कि इस मौके पर हम अपनी उपलब्धियों पर खुशी मनाते हैं। हम कृतज्ञता के साथ उन उप‍लब्धियों को सादर याद करते हैं, जो हमारे पूर्वजों ने बेशकीमत आज़ादी पाने में प्राप्‍त की हैं। साथ ही, उन लोगों को भी याद करते हैं, जिन्‍होंने आज़ादी की लड़ाई में और बाद में उसे बनाए रखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उप-राष्‍ट्रपति के संदेश का पूरा पाठ नीचे दिया जा रहा है :- 
''67वें स्‍वतंत्रता दिवस के खुशगवार मौके पर मैं अपने सभी नागरिकों को शुभकामनाएं देता हूं और उनका अभिनन्‍दन करता हूं। 

इस दिन हम नाज के साथ पिछले स्‍वतंत्रता दिवस के बाद मिली अपनी राष्‍ट्रीय उपलब्धियों पर खुशी मनाते हैं, हम कृतज्ञता के साथ उस योगदान को याद करते हैं, जो हमारे पूर्वजों ने बेशकीमत आज़ादी पाने के लिए संघर्ष करते हुए दिया और उन्‍हें श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्‍होंने इसको बरकरार रखने में अपना योगदान किया। 

इस मुबारक मौके पर आईए, हम सब संकल्‍प करें कि हम एकजुट रहेंगे और एक आधुनिक, विकसित और प्रगतिशील राष्‍ट्र निर्माण के लिए काम करेंगे।'' 

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इ. अहमद/शुक्‍ला/शौकत—5609

अब स्लेबस में शामिल होगी साईबर और सूचना सुरक्षा

14-अगस्त-2013 16:44 IST
स्‍नातक और स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर पर शामि‍ल किया जायेगा यह विषय
                                                                                                  दोनों तस्वीरें इंदोर पुलिस से साभार 
आखिरकार साईबर सुरक्षा का मामला कालेज के सिलेबस तक पहुँच ही गया। इस क्षेत्र में बार बार लग  दिन हो रही हैकिंग से यह सब सुनिशिचित सा ही था पत्र सूचना कार्यालय के मुताबिक वि‍श्‍ववि‍द्यालय अनुदान आयोग तथा अखि‍ल भारतीय तकनीकी शि‍क्षा परि‍षद्(एआईसीटीई) ने वि‍श्‍ववि‍द्यालयों और तकनीकी संस्‍थानों से कहा है कि‍ वे साइबर सुरक्षा तथा सूचना सुरक्षा को वि‍षय के रूप में स्‍नातक और स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर पर लागू करें।
डॉ. शशि‍थरूर ने लोकसभा में कहा कि‍ सुरक्षा पर कैबि‍नेट कमेटी के नि‍र्देश पर राष्‍ट्रीय सुरक्षा प्रणाली पर बने कार्यबल की सि‍फारि‍शों के आधार पर वि‍श्‍ववि‍द्यालय अनुदान आयोग ने सभी वि‍श्‍ववि‍द्यालयों के कुलपति‍यों से आग्रह कि‍या है कि‍वे वि‍श्‍ववि‍द्यालयों तथा तकनीकी संस्‍थानों में स्‍नातक तथा स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर पर साइबर सुरक्षा/सूचना सुरक्षा को वि‍षय के रूप में लागू करें। एआईसीटीई ने कहा है कि‍कार्यबल की सि‍फारि‍शों के बाद एप्रूवल हैंडबुक में यह प्रावधान है कि‍स्‍नातकोत्‍तर तथा पोस्‍ट डि‍प्‍लोमा स्‍तर पर दो आवंटि‍त प्रभागों में से एक में कंप्‍यूटर/इंजीनि‍यरिंग की आईटी शाखा/टैक्‍नोलॉजी में साइबर सुरक्षा तथा साइबर सुरक्षा से संबंधि‍त पाठ्यक्रम होगा। 

इस महत्‍वपूर्ण क्षेत्र के पाठ्यक्रम 15 राज्‍यों तथा एक केन्‍द्र शासि‍त क्षेत्र में 34 संस्‍थानों में शुरू कि‍ए गए हैं। 

यह जानकारी आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लि‍खि‍त उत्‍तर में मानव संसाधन वि‍कास राज्यमंत्री डॉ. शशि‍थरूर ने दी।    
वि.कासोटिया/इ.अहमद/गांधी/मनीषा—5624

चावल के दानों से तैयार किया भारत का नक्शा

Tue, Aug 13, 2013 at 8:32 PM
स्वतंत्रता दिवस पर पेपर आर्टिस्ट ने दिखाया अपनी कला का कमाल
अमृतसर (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन) 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था। आजादी के दिन से लेकर आज तक 15 अगस्त को देशवासी बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं। हर कोई इस दिन अपने-अपने अंगाज में लोगों को बधाई देता है, तो कोई एकता और अखंडता का संदेश देता है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में लोगों को बधाई देने के लिए अमृतसर के पेपर आर्टिस्ट गुरप्रीत सिंह ने अपने ही अंदाज में पेपर से देश के नक्शे को जहां तैयार किया है, वहीं उसने चावल के दानों से भी देश के नक्शे को तैयार कर लोगों को आपस में प्यार और सद्भाव से रहने का संदेश दिया। बकौल गुरप्रीत सिंह स्वतंत्रता दिवस का हमारे देशवासियों को पूरा साल इंतजार रहता है। उनके मुताबिक चावल के दानों से तैयार किए गए भारत देश के नक्शे को तैयार करने80 घंटे का समय लगा है। गुरप्रीत सिंह अब तक दुनिया के सात अजूबों के अलावा कई धार्मिक स्थलों के भी पेपर से माडल तैयार कर चुके हैं। जिस कारण उनका नाम विभिन्न रिकार्ड बुकों में भी शामिल हो चुका है।

टेक्सटाइल-हौजरी मज़दूरों ने की मज़दूर पंचायत

आनंदमार्गिओं ने नकारा महासम्भूति  के अवतरण का दावा

नए साल के साथ ही हो जाएगी कयामत की शुरुआत

आनन्दमार्ग जागृति में हुई तन-मन के गहरे रहस्यों की चर्चा 

बीएसएफ ने चलाया अभियान