Friday, May 31, 2013

असम के साथ भविष्य में भी विकास और समृद्धि का वादा

30-मई-2013 20:45 IST
संसद के लि‍ए फि‍र चुने जाने पर प्रधानमंत्री का संदेश 
बैंकांक से दिल्ली लौटते हुए प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने साथ गयी मीडिया मंडली के सदस्यों से भी एक प्रेस वार्ता की।इस अवसर पर उनके साथ विदेश मन्त्र सलमान खुर्शीद भी थे। (पीआईबी फोटो)
यह मेरे लि‍ए सम्‍मान की बात है कि‍ असम की जनता ने अपने नि‍र्वाचि‍त प्रति‍नि‍धि‍यों के जरि‍ए एक बार फि‍र मुझे सेवा का अवसर दि‍या है। मैं 1991 से असम का प्रति‍नि‍धि‍त्‍व कर रहा हूं और इस अवधि‍ में यह मेरा लगातार प्रयास रहा है कि‍ मैं अपनी योग्‍यतानुसार राज्‍य के वि‍कास और समृद्धि के लि‍ए काम करूँ। मैं वादा करता हूं कि‍ भवि‍ष्‍य में भी मैं इन प्रयासों को जारी रखूंगा। 

एक बार फि‍र मैं असम की जनता और वि‍धानसभा के नि‍र्वाचि‍त सदस्‍यों को मेरे प्रति‍ वि‍श्‍वास, प्‍यार और स्‍नेह के लि‍ए धन्‍यवाद देता हूं। मैं कांग्रेस अध्‍यक्ष श्रीमती सोनि‍या गांधी और अनगि‍नत कांग्रेस जनों को धन्‍यवाद देता हूं जि‍न्‍होंने एक बार फि‍र मेरे लि‍ए असम का प्रतिनि‍धि‍त्‍व करना संभव बनाया। 
(PBI)                                वि. कासोटिया/अजि‍त गांधी/सुजीत-2570

Thursday, May 30, 2013

Rama Setu - An Engineering Marvel of 5076 BCE

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Rajiv Dixit on History

Story of Aurobindo Ghosh and Saheed Udham Singh :Rajiv Dixit

What Shaheed Bhagat Singh Predicted : Rajiv Dixit

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नक्सली हिंसा का प्रतिकार विकास से हो

आम आदिवासी की आज़ादी पूर्णत: छिन चुकी है--राजीव गुप्ता
अमेरिकी मार्क्सवादी नेता बाब अवेकिन के शब्दों में किसी भी प्रकार की क्रांति न तो बदले की कार्यवाही है और न ही मौज़ूदा तंत्र की कुछ स्थितियों को बदलने प्रक्रिया है अपितु यह मानवता की मुक्ति का एक उपक्रम है. परंतु मानवाधिकार को ढाल बनाकर भारत की धरा को मानवरक्तिमा से रंगने वालें
“बन्दूकधारी-कारोबारियों” को बाब अवेकिन की यह बात समझ नही आयेगी. भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (माओवादी) की दंड्कारण्य स्पेशल ज़ोनल कमिटी के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए बताया कि 25 मई को कांग्रेस की परिवर्तन रैली पर हमला इसलिये किया था क्योंकि इन्हे सलवा ज़ुडूम के प्रणेता महेन्द्र कर्मा को मारकर बदला लेना था. केन्द्र-सरकार जब नेताओं की सुरक्षा नही कर सकती और उसकी नाक के नीचे से इन नक्सलियों के पास अत्याधुनिक हथियार और पैसे पहुँचते है तो आम जनता की सुरक्षा तो भगवान भरोसे ही है. सरकार व नक्सलियो के बीच आम आदिवासी मात्र शरणार्थी बनकर रह गया है. न कोई प्राकृतिक आपदा आई, न कोई महामारी फैली परन्तु फिर भी आम आदिवासी को सरकार के राहत शिविरों मे रहना पड रहा है. देखते ही देखते पूरा क्षेत्र राहत शिविरों से पट  गया. जंगल मे राज़ा की भाँति विचरण करने वाला आदिवासी राहत शिविरों मे रहकर सरकारी दिनचर्या के हिसाब से जीने को मजबूर हो गया. उसके लिये इधर कुआँ उधर खाई वाली कहानी बन गई है. सरकार की बात करेगा तो नक्सली की गोली खानी पडेगी और अगर राहत शिविर छोडकर जायेगा तो नक्सली का जासूस कहकर सरकार की गोली खानी पडेगी. उसकी आज़ादी पूर्णत: छिन चुकी है या यूँ कहे कि उसके लिये अब आज़ादी के मायने ही बदल चुके है.         
देश की विकास-धारा को गति देने वाला छत्तीसगढ देश का 20 प्रतिशत स्टील और 18 प्रतिशत सीमेंट का उत्पादन करता है. परंतु यह देश का दुर्भाग्य ही है कि नक्सलवाद के चलते छत्तीसगढ में उथल-पुथल मची हुई है. शायद नक्सली समर्थक अपने कुतर्कों के आधार पर आम आदिवासी को पूरी तरह बरगालाने मे सफल हो गये है कि सराकर के विकास का अर्थ है उनसे उनकी संपदा से बेदखल कर देना. केन्द्र सरकार को छत्तीसगढ को विशेष तौर पर अलग से आर्थिक मदद उडीसा के कालाहांडी की तर्ज़ पर देना चाहिये क्योंकि अकेले छत्तीसगढ में 32 प्रतिशत आदिवासी है और जबतक उन्हे सडक या रेल तंत्र से जोडा नही जायेगा विकास का असली अर्थ ये भटके हुए आदिवासी नही समझ पायेंगे. जल्दी से जल्दी जयराम रमेश द्वारा 50 करोड रूपये की मूल्य के प्रोजेक्ट गवर्नेंस एंड एसिलरेटेड लाईवली हुड्स सिक्योरिटी प्रोजेक्ट्स स्कीम (गोल्स) को लागू किया जाय. ताकि इस प्रोजेक्ट के द्वारा असमानता की खाई को पाटा जा सके. अन्यथा नक्सली समर्थक नेताओं व गैर सरकारी संगठनो के चंगुल मे फँसकर ये भटके हुए आदिवासी यूँ ही बन्दूक उठाते रहेंगे. अत: जितनी जल्दी हो सके केन्द्र व राज्य सरकार मिलकर इस भयंकर समस्या को समय रहते सुलझा लेना चाहिये.
यह एक शाश्वत है कि किसी भी विचार से शत-प्रतिशत सहमत व असहमत नही हुआ जा सकता. इसके लिये लोकतंत्र मे तर्काधारित संवाद किया जा सकता है और अपने वैचारिक प्रकटीकरण के लिये संविधान ने हमें यह व्यवस्था दी है. नीतियों मे न्यूनता हो सकती है, जिसे समयानुसार संशोधित किया जा सकता है परंतु संविधान द्वारा प्रदत्त लोक-कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना को ही धराशायी करने का अधिकार किसी को कैसे दिया जा सकता है. हमें यह ध्यान रखना चाहिये कि लोकतंत्र में संवाद वह हथियार है जिसकी मदद से कोई भी जंग न केवल जीती जा सकती है अपितु संपूर्ण मानवता की भी रक्षा की जाती है. कोई भी देश वहाँ के निर्मित संविधान से चलता है परंतु स्थिति ज्यादा खतरनाक तब हो जाती है जब आम जनता को संविधान के खिलाफ ही भडकाकर उन्हे हथियार उठाने के लिये विवश कर दिया जाता हो. परंतु कुछ चिंतक-वर्ग अपनी कुंठित मानसिकता के चलते देश को अराजकता के गर्त मे ढकेल कर एक गृह-युद्ध आरंभ करना चाहते है. देश के नीति-निर्मातों को देश-विरोधी हर अभियान को हर स्तर पर अलग-थलग कर उसका बहिष्कार करने के लिये जो भी कठोर फैसले लेना हो तत्काल लेना चाहिये ताकि भारत की धरती पुन: ऐसी रक्त-रंजित न हो.    
इस सच्चाई को नकारा नही जा सकता कि आज़ादी के बाद से लेकर आजतक आदिवासियों के विकास के लिये जो भी कदम उठाया गया वह उस आदिवासी के शरीर की सभी 206 हड्डियों को मज़्ज़ा से ढकने के लिये नाकाफी रहा. आज भी उन्हे दो जून की रोटी व पीने के लिये पानी नसीब नही है. ऐसे मे उनके लिये विकास की बात करना मात्र एक छ्लावा है और शहरों की चमचामाती सडके और गगनचुम्बी इमारतें उनके लिये अकल्पनीय है. जिसका लाभ लेकर अरुन्धती राय सरीखे लोगों द्वारा आदिवासियों को सत्ता के खिलाफ बन्दूक उठाने के लिये प्रेरित व विवश किया जाता है. यही वें लोग हैं जो आम आदिवासी को यह समझाते है कि सत्ता द्वारा तुम्हे तुम्हारी संपत्ति से बेदखल कर तुम्हे विस्थापित कर दिया जायेगा. यह ठीक है कि कोई भी स्वस्थ समाज यह सहन नही कर सकता कि उसकी ही धरती पर उसे विस्थापित होकर रहना पडे. आज भी सरकार आम-जन को उसकी संपदा के अधिग्रहण का मुआवज़ा देती ही है. मुआवजे की राशि व प्रकृति को लेकर विवाद हो सकता है परंतु अगर कोई अपनी संपदा ही नही देगा तो सरकार विकास की इबारत कहाँ लिखेगी. सरकार यह सुनिश्चित कर उन आदिवासियों का भरोसा जीतकर वहाँ विकास मार्ग प्रशस्त करें कि इन आदिवासी क्षेत्रों मे यदि कोई आदिवासी विस्थापित होता है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी. इस प्रकार का कोई भी संवाद आदिवासियों द्वारा सरकार से किया जा सकता है. उन आम आदिवासियों को यह भी समझना होगा कि जो सडक उनके जंगल-खेत-खलिहानों से होकर गुजरेगी वही सडक उनकी इस असमानता को दूर करेगी क्योंकि वर्तमान समय में सडकें ही विकास का प्रयाय है. यदि उनके बच्चे स्कूलों में शिक्षा लेंगे, देश-समाज को समझेंगे, संचार माध्यमों से जुडेंगे तभी तो वे भी भविष्य में देश के विकास मे भागीदार होंगे. सत्ता से सशस्त्र ट्कराव करना कोई बुद्धिमानी नही है क्योंकि जिस भी दिन इनके “प्रेरणा-पुंजों” को नियंत्रण मे लेकर  सत्ता यह दृढ निश्चय कर लेगी कि इन आदिवासियों के पास हथियार नही पहुँचने चाहिये उस दिन इन आदिवासियों के पास मात्र आत्मसमर्पण के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नही रह जायेगा. पंजाब के आतंकवाद का दमन इस बात का एक जीता-जागता उदाहरण है. देर-सवेर इन भटके हुए आदिवासियों को विकास की इस धारा मे आना ही होगा. परंतु सरकार यदि उन भटके हुए आदिवासियों को समझाने में सफल हो गयी तो उन मानवधिकारवादी- कारोबारियों की जीविका कैसे चलेगी मूल प्रश्न यह है.        -राजीव गुप्ता (9811558925)


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सरकार के विरूद्ध युद्ध की तैयारी कर रहे नक्‍सलवादी                                 लाल सलाम 




Wednesday, May 29, 2013

फरीदकोट अपहरण काण्ड: दोषी निशान सिंह व अन्य को सजाएँ

जनता के एकजुट संघर्ष की बड़ी जीत करार
29 मई, लुधियाना। कारखाना मजदूर यूनियन, पंजाब, के संयोजक लखविन्दर, टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन, पंजाब के अध्यक्ष राजविन्दर, नौजवान भारत सभा के संयोजक छिन्दरापल व स्त्री मुक्ति लीग की नेत्री नमिता ने फरीदकोट अपहरण व बलातकार काण्ड के दोषी निशान सिंह को उम्र कैद व 9 अन्य को 7-7 वर्ष की कैद की सजा सुनाए जाने के अदालती फैसले का स्वागत करते हुए इसे जनसंघर्ष की बड़ी जीत करार दिया है। उन्होंने पीडि़तों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष करने वालीं वाले छात्रों, नौजवानों, मकादूरों, किसानों, बुद्धिजीवियों के जनसंगठनों को बधाई दी है। निशान सिंह व अन्य दोषियों को सजाए होना इस बात की पुष्टि है कि लोग जब एकजुट होकर संघर्ष करते हैं तभी वे इंसाफ हासिल कर सकते हैं। 31 दिसम्बर 2012 को संगरूर जिले के नमोल गाँव में अपनी नाबालिग छात्रा के साथ बलातकार करने वाले अध्यापक को उसके राजनीतिक सम्बन्धों के बावजूद लोगों के संघर्ष के कारण 23 मई को उम्र कैद की सजा होना भी इसी बात की मिसाल है। साथ ही उन्होंने कहा कि स्त्रियों के साथ हो रहे अपराधों को रोकने की राह भी जनता में चेतना पैदा करना और एकजुट जन आन्दोलन का निर्माण करना ही हो सकता है।
टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन, पंजाब के अध्यक्ष राजविन्दर ने बताया कि 24 सितम्बर, 2012 को कत्ल, लूट व बलातकार जैसे 22 संगीन अपराधों में शामिल, गुण्डागर्दी के लिए मशहूर, सत्ताधारी अकाली दल के नेताओं से अच्छे सम्बन्ध रखने वाले निशान सिंह व उसके साथियों ने मिल कर नाबालिग लडक़ी को फरीदकोट स्थित उसके घर में से दिन दिहाड़े हथियारों के दम पर अगव कर लिया था और परिवार के सदस्यों की बुरी तरह से मार-पीट की थी। जब दोषियों के राजनीतिक सम्बन्धों के कारण पुलिस ने इस मामले में कोई गम्भीर कार्रवाई न की तो विभिन्न जनसंगठनों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग पीडि़त परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए आगे आए। जनाक्रोश के आगे झुकी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 21 अक्टूबर 2012 को गोवा से लडक़ी को बरामद किया और दोषी को गिरफ्तार किया। इसके बाद भी पुलिस ने दोषी का साथ देना नहीं छोड़ा और तरह तरह की साजिशें रचकर देषियों को बचाने में लगी रही। इधर लोगों का गुस्सा बढ़ता गया जो दोषियों को सजा दिलाने के लिए बड़े स्तर पर अन्दोलन के रूप में सामने आया। दो महीने तक फरीदकोट शहर में बड़े स्तर पर धरने-प्रदर्शन होते रहे। आखिर जनसंघर्ष रंग लाया जिस तहत गुजरी 27 मई को मुख्य दोषी निशान सिंह को उम्र कैद और 9 अन्य को 7-7 वर्ष की कैद की सजा हुई जब्कि दस दोषियों को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया। अकाली नेता डिम्पी समरा को भी 7 वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई है। बरी किए गए दोषियों को सजा दिलाने के लिए पीडि़त परिवार और संघर्षशील संगठनों ने हाईकोर्ट में केस लडऩे का ऐलान किया है।
लखविन्दर, संयोजक, कारखाना मकादूर यूनियन पंजाब, (फोन नं.-9646150249)

Sunday, May 26, 2013

सभ्य समाज में ऐसे बर्बर कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं

बस्तर में कल हुए माओवादी हमले पर उपराष्ट्रपति का बयान 
देश और दुनिया को हिला कर रख देने वाले वाले बड़े और सुनियोजित हमले पर देश भर में तीखी प्रतिक्रिया का सिलसिला जारी है। उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने इसे कायरतापूर्ण बताते हुए कहा है कि किसी भी सभ्य समाज में इस तरह के बर्बर और सम्वेदना हीन हमलों की कोई जगह नहीं होती।इसी बीच प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह और राष्ट्रिय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन सोनिया गाँधी अपनी सभी व्यस्ततायों को बीच में ही छोड़ कर रायेपुर पहुँच गये।
बस्तर में कल हुए माओवादी हमले पर उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने कहा कि वे इस कायरतापूर्ण हमले की निंदा करते हैं जिसमें कई निर्दोष मारे गए जबकि कई अन्य घायल हो गये। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में ऐसे संवेदनाहीन और बर्बर कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है। श्री अंसारी ने कहा कि चरमपंथ और हिंसा के सभी पक्षों से मुकाबला किया जाना चाहिए और उन्हें अपने बीच से मिटा देना चाहिए। 
इस हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट करते हुए श्री अंसारी ने घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की भी कामना की। उप राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी भावनाएं और प्रार्थनाएं इस कठिन समय में उनके साथ हैं। श्री अंसारी ने कहा कि ईश्वर उन्हें इस दुःख से उबरने में साहस और धैर्य प्रदान करे। 
प्रधानमंत्री ने नक्सली हमले में घायल हुए लोगों से मुलाकात की, पीड़ित परिवारों को सहायता और अपराधियों को सज़ा दिलाने का संकल्प जताया प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कल छत्तीसगढ़ में हुई हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के साथ रायपुर अस्पताल का दौरा करके घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की। 
प्रधानमंत्री इस नृशंस हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से हिंसा के खिलाफ लड़ाई में देश की दृढ़ता में कमजोरी नहीं आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस हमले के जिम्मेदार अपराधियों को जल्द ही कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने देश को आश्वासन भी दिया कि सरकार अपराधियों को सज़ा दिलाने के प्रति वचनबद्ध है। 
उन्होंने राज्य प्रशासन से घायलों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा उपचार देने को कहा। डॉ. मनमोहन सिंह ने घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष से पांच लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। 
प्रधानमंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ छत्तीसगढ़ में सुरक्षा स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने स्थिति से निपटने के लिए राज्य को हर संभव सहायता देने का भी आश्वासन दिया। 
डॉ मनमोहन सिंह ने कहा कि इस तरह के बर्बर कृत्य करने वाले अपराधी क्षेत्र में विकास और शांति के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। 
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की निंदा की। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की निंदा की है। प्रधानमंत्री के संदेश का अनूदित पाठ इस प्रकार है: 
"मैं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की कड़ी निंदा करता हूं। मैं उन लोगों के परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट करता हूं जिन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी। मैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री विद्याचरण शुक्ल सहित इस कायरतापूर्ण हमले में घायल लोगों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार के लिए दुआ करता हूं। 
मैंने राज्य के मुख्यमंत्री से बात की है और उनसे अनुरोध किया है कि घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा अपहृत लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 
मैं हमलावरों से अपील करता हूं कि अपहृत लोगों को जल्द से जल्द छोड़ दें। 
ऐसी घटनाएं हमारे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के विरूद्ध हैं। सरकार किसी भी तरह की हिंसा के दोषी लोगों पर कड़ी कार्रवाई करेगी।" 
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