Saturday, February 23, 2013

यूरोप में बेरोज़गारी का क़हरः यूरोपीय आयोग


23.02.2013, 01:36
बेरोज़गारी का स्तर बढ़कर 12 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा
                                                                   फोटो: EPA
हमें लगता होगा कि शायद बेरोज़गारी का संकट केवल हमारे यहाँ ही है पर वास्तव में यह संकट पूरी दुनिया में गहराता जा रहा है। रेडियो रूस ने यूरोपीय आयोग के हवाले से खबर दी है कि वहन भी भी बेरोज़गारी का संकट घर रहा है। यूरोप में बेरोज़गारी का कहर शीर्षक से दी गई इस खबर में रेडियो रूस ने बताया है कि वर्ष 2013 में यूरो क्षेत्र में बेरोज़गारी का स्तर बढ़कर 12 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा। यह बात शुक्रवार को यूरोपीय आयोग द्वारा प्रकाशित आर्थिक पूर्वानुमान संबंधी एक रिपोर्ट में कही गई है। वर्ष 2012 में यूरो क्षेत्र में बेरोज़गारी का स्तर 11.4 प्रतिशत था। विशेषज्ञों के मुताबिक, योरोप में बेरोज़गारी की उच्चतम, 27 प्रतिशत दर यूनान में होगी।

यूरोपीय आयोग की रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि यूरोप में लंबे समय तक बेरोज़गारी बढ़ते रहने से कई लोग अपना पेशेवाराना कौशल भी भूल सकते हैं।

पाकिस्तान में लश्कर–ए-झंगवी का नेता गिरफ्तार

सुन्नी आतंकवादी गुट है लश्कर–ए-झंगवी
                                                                                                     Photo: RIA Novosti
आतंक की आग ने जब पाकिस्तान की नाक में दम किया तो पाकिस्तान को भी मजबूरन कुछ सख्त कदम उठाने पढ़ रहे हैं। पाकिस्तान में लश्कर–ए-झंगवी के एक वरिष्ठ नेता को गिरफ्तार कर लिया गया है। रेडियो रूस ने यह खबर देते हुए रिया नोवोस्ती की तरफ से जारी एक तस्वीर  भी प्रकाशित की है। 


पाकिस्तानी पुलिस ने सुन्नी आतंकवादी गुट लश्कर–ए-झंगवी के नेता मलिक इसहाक को गिरफ्तार कर लिया है। ग़ौरतलब है कि इसी इस्लामवादी संगठन ने क्वेटा शहर में हुए बम-विस्फोटों के लिए ज़िम्मेदारी ली थी। इस आतंकवादी हमले में 80 से अधिक लोग मारे गए थे।
 
मलिक इसहाक को देश के उत्तर-पूर्वी प्रांत पंजाब में गिरफ्तार किया गया। उन्हें कुछ ही महीने पहले जेल से रिहा किया गया था। क्वेटा शहर में 16 फरवरी को किए गए आतंकवादी हमले में मरनेवाले अधिकांश लोग शिया-हज़ारह समुदाय से संबंधित थे। बलूचिस्तान प्रांत के गवर्नर ने इस हमले के बाद कहा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों ने देश में शांति बनाए रखने में अपनी असमर्थता का प्रदर्शन किया है।

नए बैंकों को लाइसेंस के लिए मार्ग निर्देश

22-फरवरी-2013 19:48 IST
भारतीय रिजर्व बैंक दे रहा है मार्ग निर्देशों को अंतिम रूप
सरकार को अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से इस बारे में कोई सुझाव प्राप्‍त नहीं हुआ है। तथापि, आईएमएफ ने भारत : वित्‍तीय स्थिति की स्थिरता संबंधी अद्यतन आकलन पर जनवरी 2013 की अपनी रिपोर्ट में संकेत दिया कि अंतरर्राष्‍ट्रीय अनुभव औद्योगिक घरानों को बैंकों का स्‍वामित्‍व प्राप्‍त करने की अनुमति न देने की दूरदर्शी नीति का समर्थन करता है। भारतीय रिजर्व बैंक की नीति का उद्देश्‍य उचित दूरदर्शी उपायों के जरिए विभिन्‍न जोखिमों को दूर करना है। आईएमएफ की रिपोर्ट ने ऐसे दूरदर्शी उपायों की सूची जारी की है जिनमें मुख्‍य रूप से वित्‍त क्षेत्र की सभी इकाइयों को एकजुट रखने के लिए गैर-सक्रिय वित्‍तीय स्‍वामित्‍व वाली कंपनियों की स्‍थापना और उनका भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गैर-बैंकीय वित्‍तीय कंपनी के रूप में निरीक्षण शामिल है। 

यह जानकारी वित्‍त राज्‍यमंत्री श्री नमो नारायण मीणा ने आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में दी। (PIB)


वि. कासोटिया/क्‍वात्रा/दयाशंकर- 701

Thursday, February 21, 2013

केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल

19-फरवरी-2013 17:20 IST
विश्‍व का सबसे बड़ा अर्ध-सैनिक बल विशेष लेख----------ग़ृह मंत्रालय
केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल विश्‍व का सबसे बड़ा अर्ध-सैनिक बल है। समय के साथ-साथ इसका रूप बहुमुखी और बहु-आयामी हो गया है और विभिन्‍न प्रकार के विरोधियों से संघर्ष करते हुए इसे कई प्रकार के कार्य करने पड़ते हैं। आवश्‍यकता के अनुसार अपने को ढालना केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विशिष्‍टता है, जिसे सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के लिए खतरा पैदा करने वाली आंतरिक सुरक्षा से संबंधित अनेक जटिल समस्‍याओं से जूझना पडा है।
इस बल की स्‍थापना अपराधियों और डकैतों से निपटने के लिए 1939 में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में हुई थी। लेकिन इस बल से अपेक्षाएं निरंतर बढ़ती रही हैं। पिछले दशकों में इसने अपने कौशल और दक्षता का परिचय देते हुए घरेलू मोर्चे पर शत्रु को चुनौती दी है। चाहे वह वामपंथी उग्रवादियों का क्षेत्र हो, पूर्वोत्‍तर का जोखिम भरा पहाड़ी इलाका हो, पंजाब के कट्टर उग्रवादी हों या जम्‍मू-कश्‍मीर में पनप रहे आतंकवादी हों, केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस हर परीक्षा में खरी उतरी है। उग्रवादियों के साथ संघर्ष करने के अलावा केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस  ने आम चुनावों, अमरनाथ यात्रा, जम्‍मू-कश्‍मीर आंदोलन, कंधमाल की घटना जैसी अनेक परिस्थितियों में कानून और व्‍यवस्‍था बनाये रखने में भी अहम भूमिका निभाई है। राष्‍ट्रीय आपदा के समय भी केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल सहयोग करने वाले बलों में सबसे आगे होता है।
आज केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस तीन कठिन क्षेत्रों में संघर्ष कर रहा है- पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विद्रोह, जम्‍मू–कश्‍मीर उग्रवाद और वामपंथी उग्रवाद यानि नक्‍सलियों से प्रभावित क्षेत्र। इन तीनों में से नक्‍सलवाद से प्रभावित क्षेत्र ऐसा क्षेत्र है, जिस पर पिछले वर्षों में संघर्ष की जटिलता को देखते हुए अधिक ध्‍यान देना पडा है। तथाकथित नक्‍सलवादी या माओवादी गंभीर चुनौती बने हुए हैं। केवल उनके द्वारा किये जा रहे अनेक अत्‍याचारों के कारण नहीं, बल्कि जिस गति से यह और अधिक इलाकों में फैल रहा है उसके कारण यह गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। नक्‍सलवाद से प्रभावित इन क्षेत्रों में केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस की मौजूदगी और लगातार की जा रही उसकी गतिविधियों के परिणामस्‍वरूप नक्‍सलवाद के कारण मरने वाले लोगों की संख्‍या में कमी आई है और बड़ी संख्‍या में गैर-कानूनी हथियार भी बरामद हुये हैं। 24 नवम्‍बर 2011 को की गई योजनाबद्ध कार्यवाही में सीआरपीएफ और इसके विशिष्‍ट संगठन कोबरा के कमांडो को बहुत बड़ी कामयाबी मिली। एक ओर तो सीआरपीएफ ने नक्‍सलियों के खिलाफ कड़ा रूख अपनाया और बड़ी आक्रामक कार्यवाही की, दूसरी ओर नागरिक कल्‍याण कार्यक्रम शुरू करके समाज की बेहतरी के लिये भी कार्य किया। केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस नागरिक कल्‍याण से संबंधित कार्यक्रम चला रही है, जो बुनियादी तौर पर समाज के कमजोर वर्गों और छात्रों की सहायता के कार्यक्रम हैं। ये कार्यक्रम ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में चलाये जा रहे हैं, जहां अभी तक स्‍थानीय प्रशासन पहुंच नहीं पाया है। इस प्रकार उन क्षेत्रों में इन कार्यक्रमों ने प्रशासन और स्‍थानीय जनता के बीच एक पुल का काम किया है और जिला प्रशासन को स्‍थानीय लोगों की समस्‍याओं की सीधे जानकारी मिली है। हालांकि इस समय ज्‍यादा ध्‍यान नक्‍सलवाद प्रभावित इलाकों में दिया जा रहा है, लेकिन जम्‍मू-कश्‍मीर और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र की समस्‍याओं को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। लगातार निगरानी के साथ-साथ राष्‍ट्र विरोधी तत्‍वों पर नजर रखी जाती है और जब आवश्‍यक होता है तो आक्रामक कार्रवाई भी की जाती है।
प्रशिक्षण और मनोबल किसी भी वर्दीधारी बल की रीढ़ की हड्डी होते हैं। आजकल जिस तरह से कार्यवाही करनी पड़ती है, उसे देखते हुए प्रत्‍येक  जवान को हर लिहाज़ से स्‍वावलम्‍बी होना होता है। उसके पास रात को देखने के लिए उपकरण, आधुनिक हथियार और इन हथियारों को चलाने की योग्‍यता तथा उच्‍च तकनीक वाले रेडियो संपर्क उपकरण, भू-स्थिति प्रणाली (जीपीएस), नक्‍शों की समझ और वनों की जानकारी होनी चाहिए, जोकि आज के समय की जरूरत है। सीआरपीएफ को जिस तरह से तरह-तरह के कार्य करने पडते हैं, उसे देखते हुए इसके प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में सुधार किया गया है। इसके लिए जवानों को कई तरह के अभ्‍यास (ड्रिल) कराये जाते हैं, जैसे यूनिफॉर्म ड्रिल, हथियार ड्रिल, वाहन ड्रिल, रात्रि ड्रिल, खेल ड्रिल आदि। हेली-स्लिदरिंग का कठिन अभ्‍यास आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने के लिए किया जाता है। जंगल में रहने के लिए एक सप्‍ताह का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन सबका उद्देश्‍य वास्‍तविक परिस्थितियों में संघर्ष के लिए प्रशिक्षण देना है। बुनियादी प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों के लिए सिलचर (असम) या शिवपुरी (मध्‍यप्रदेश) में विद्रोहियों का मुकाबला करने और आतंकवादियों से संघर्ष करने से संबंधित पाठ्यक्रम अनिवार्य बना दिया गया है। इससे उन्‍हें नक्‍सलवादी इलाकों में कारगर नेतृत्‍व प्रदान करने में मदद मिलती है। 13 अलग-अलग स्‍थानों पर 50 मीटर से लेकर 200 मीटर के बाधा- क्षेत्र बनाये गये हैं। गतिशील लक्ष्‍यों से वास्‍तविक स्थिति जैसा अहसास होता है। प्रशिक्षकों की उपलब्‍धता बनाये रखने के लिए प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण का एक पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इसके लिए प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने वालों को विशेष प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उनकी सोच मजबूत होती है। कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए और जवानों के कल्‍याण को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष प्रणाली-बड्डी सिस्‍टम की शुरूआत की गई है।
तरह-तरह की परिस्थितियों में सीआरपीएफ की कार्यक्षमताओं को बढ़ाने की दृष्टि से देशभर में विशिष्‍ट कौशलों के विकास के लिए स्‍कूल स्‍थापित किये गये हैं। कादरपुर, गुडगांव के गुप्‍तचर स्‍कूल में खुफिया सूचनायें  इक्‍ट्ठी करने के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है। हिमाचल-प्रदेश में धर्मपुर में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए स्‍कूल खोला गया है, ताकि उच्‍च स्‍तर के प्रशिक्षक तैयार हो सकें। स्‍थानीय किस्‍म के विस्‍फोटकों के खतरे से निपटने के लिए पुणे में भारतीय आईईडी प्रबंधन संस्‍थान स्‍थापित किया गया है। क्‍योंकि आजकल सीआरपीएफ को नक्‍सलियों के प्रभाव वाले इलाकों में ज्‍यादा काम करना पड़ रहा है, इसलिए कर्नाटक में बेलगाम में जंगल युद्ध के बारे में प्रशिक्षण देने के लिए एक राष्‍ट्रीय संस्‍थान स्‍थापित किया जा रहा है। जवानों को अबाध रूप से बढि़या खाना मिलता रहे, इसके लिए कर्नाटक में तरालू में कॉलेज ऑफ कुकिंग एंड केटरिंग मैनेजमेंट स्‍थापित किया गया है। सांप्रदायिक सद्भाव को कायम रखने में सहायता के लिए जल्‍दी ही मेरठ में एक त्‍वरित कार्यवाही बल (आरएएफ) प्रशिक्षण स्‍कूल की स्‍थापना की जायेगी। इन सबके अलावा बंगलौर में तरालू में कुत्‍तों की नस्‍ल तैयार करने और उन्‍हें प्रशिक्षण देने के लिए भी एक स्‍कूल स्‍थापित किया गया है। इन सब स्‍कूलों में प्रशिक्षण से सीआरपीएफ की कार्यक्षमता निश्चित रूप से बढ़ेगी।
जवानों के कल्‍याण के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। सुरक्षा से संबंधित मंत्रिमंडल समिति ने गृह मंत्रालय के उस प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें सेवानिवृत्‍त केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बल के कर्मचारियों को पूर्व केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बल कर्मचारी कहने के बारे में घोषणा की गई है और राज्‍य/केन्‍द्रशासित प्रदेशों की सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे उन्‍हें भी उसी प्रकार से उपयुक्‍त लाभ दें, जिस तरह रक्षा सेवाओं के पूर्व सैनिकों को दिये जाते हैं।
    रेल मंत्रालय ने पूर्वोत्‍तर क्षेत्र, जम्‍मू–कश्‍मीर तथा मध्‍य और दक्षिणी क्षेत्र में, इन क्षेत्रों में कम से कम एक वर्ष तक कार्य करने वाले केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बल के जवानों के लिए नियमित आधार पर 7 रेलगाडि़यों में अतिरिक्‍त डिब्‍बा लगाने को स्‍वीकृति दे दी है।
    कहा जाता है कि ज्ञान शक्ति है और विचार दुनिया में शासन करते हैं। केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल अपने जवानों के बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा प्रदान करने के लिए शैक्षिक सहायता उपलब्‍ध कराता है। छात्रों को गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए दिल्‍ली में रोहिणी और द्वारका में आधुनिक सुविधाओं से युक्‍त दो सीआरपीएफ स्‍कूल खोले गये हैं। जवानों के मेधावी बच्‍चों के लिए छात्रवृत्तितयों की संख्‍या भी बढाई गई है और बीमार या विकलांग के लिए या परिवार की एकमात्र लड़की के लिए छात्रवृत्ति के वास्‍ते केवल पास होने लायक अंक प्राप्‍त करना ही काफी है।
सेवाकाल के दौरान मृत्‍यु होने पर दिवंगत के लिए परिवारों के जोखिम कोष के लाभ भी बढा दिये गये हैं। इनमें से कुछ राशि अभिभावकों को दी जाती है। विभिन्‍न कार्रवाईयों में घायलों की बढ़ती संख्‍या को देखते हुए विकलांगता लाभ की राशि विभिन्‍न प्रकार की विकलांगताओं के लिए 2 से 4 गुणा तक कर दी गई है। परिवारजनों को अंत्‍येष्टि के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि को 10 हजार रूपये से बढ़ाकर 15 हजार कर दिया गया है।
केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल अपने आदर्श वाक्‍य- सेवा और कर्तव्‍य- परायणता के अनुसार कार्य कर रहा है और देश की उन्‍नति में लगातार अपना अमूल्‍य योगदान दे रहा है। (PIB)
(पत्र सूचना कार्यालय विशेष लेख)
*गृह मंत्रालय से प्राप्‍त विवरण के आधार पर
मीणा/राजगोपाल/चन्‍द्रकला –44

Wednesday, February 20, 2013

20 एंव 21 फरवरी को २ दिवसय देशव्यापी हड़ताल

सैन्ट्रल ट्रेड यूनियनों की 10 मांगो के चार्टर का समर्थन 
युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन्स की २ दिवसय देशव्यापी हड़्ताल के आह्वान पर सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक कर्मचारीयों तथा आफिसर्स ने २० एंव २१ फरवरी को हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है । युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन्स की और से बहुत से रोष प्रोग्राम निर्धारित किये गये हैं । 
युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन्स ने आज केनरा बैंक, भारत नगर चौंक,  लुधियाना के सामने रोष रैली की । कामरेड सुदेश कुमार, चैयरमैन, पंजाब बैंक इम्प्लाईज फैडरेशन, कामरेड नरेश गौड़, कन्विनर, युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन्स, कामरेड अशोक अवस्थी (पी.बी.ई.एफ), कामरेड गुल्शन चौहान, कामरेड राकेश खन्ना, कामरेड बलजिंद्र सिंह, कामरेड जे.पी.कालड़ा (ए.आई.बी.ओ.सी), कामरेड डी.सी.लांडरा (एन.सी.बी.ई), कामरेड के.एस.संधु, कामरेड गुरबचन सिंह, ((ए.आई.बी.ओ.ए) तथा कामरेड डी.पी.मौड़, महासचिव, ज्वाईंट काउंसिल आफ ट्रेड यूनियन्स  ने बैंक कर्मचारियों को संबोधित किया ।कर्मचारियों को संबोधित करते युनाईटेड फोरम के नेताओं ने कहा कि हड्ताल का आह्वान निम्नलिखित मुद्दों तथा मांगों को लेकर किया गया है:-
१) सैन्ट्रल ट्रेड यूनियनों की १० मांगो के चार्टर का समर्थन 
२) बढ़्ती हुई कीमतों को काबू करो
३) मजदूर विरोधी नितियों को रोको
४) बैंकिग क्षेत्र में सुधारों को बंद करो 
५) स्थाई कार्यों को बाहर से करवाना बंद करो 
६) बैंक कर्मचारियों के बकाया मुद्दों का निपटान करो 

आफिर्स तथा कर्मचारियों को संबोधित करते हुए युनाईटेड फारम आफ बैंक ईम्पलाइज़ के नेताओं ने कहा कि ट्रेड यूनियनों की ऐतिहासिक एकता से एक ही प्लेट्फार्म पर आने के साथ ही, सरकार तथा कार्पोरेट्स द्बारा किए जा रहे आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोध करने के लिए नई सम्भावनाओं का रास्ता खुल गया है । खाद्द पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं । अर्थ-व्यवस्था ठ्प है यह उस संकट का द्दोतक है जिससे राष्ट्र घिर गया है । कीमतों को बढ़्ने से रोकने, आर्थिक मंदी को रोकने, गरीबी को दूर करने और काम के नुकसान को सीमित करने के लिए सरकार के पास कोई नीति नहीं है । सरकार की आर्थिक नितियों को लागु करने की होड़ में राजनीतिक और आर्थिक संकट छाया हुआ है । अर्थ-व्यवसथा ठप है । इस चुनौती का सामना करने के लिए कोई रणनीति नहीं है । यह सरकार संकट का पूरा बोझ आम जनता पर डालने की कोशिश कर रही है । राषट्रीय हितों से मुख मोड़कर, सरकार एक के बाद दूसरा ऐसा कदम उठा रही है जो मंहगाई को बढ़ा रहा है तथा आर्थिक मंदी का कारण बन रहा है । सरकार बिना सोचे समझे रोजमर्रा की जिन्दगी के लिए जरुरी वस्तुओं की कीमतों को बढ़ाती जा रही है । यह केवल औद्दोगिक क्षेत्र का संगठित मजदूर वर्ग ही नहीं है जो पूरी तरह से प्रभावित हुआ है बल्कि वह ठेके पर काम करने वाले मजदूर अन आधिकारिक और दिहाड़ी मजदूर हैं जिन पर बहुत बुरा असर पड़ा है । जबकि औद्दोगिक मजदूर जो संगठित है उनको अपने कानून सम्म्त अधिकारों, बोनस तथा मजदूरी को बढ़वाने से बंचित कर दिया जाना तो निश्चित है नहीं असंगठित मजदूर वर्ग को काम के नुकसान, मजदूरी में कटौती, कम से कम मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने और कानूनी बकायों की नामंजूरी के माध्यम से बहुत अधिक निर्दयी असर को झेलना पड़ेगा ।    
बैंकिंग क्षेत्र भी इसका अपवाद नहीं है । सरकारी क्षेत्र के बैंकों में सरकार की ईक्विटी कैपीटल को कम करने और घटाने की कोशिश की जा रही है । सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए सरकार सामाजिक बैंक के दायरे को संकुचित करने के लिए विलय तथा समेकित करने की बात करती है । परन्तु उसी सांस में सरकार निजी क्षेत्र की बैंकिंग मो उत्साहित करने की बात करती है । बड़े-बड़े औद्दिगिक घरानों को अपने निजी बैंक शुरु करने के लिए लाइसेंस देने की बात की जा रही है  धनवान ऋणकर्ताओं को सुविधा देने के लिए उनके बड़े-बड़े कर्जों को बटटे खाते डाला जा रहा है । ग्रामीण शाखाओं को बंद करने और ग्रामीण बैंकिंग को बाहर से कारोबारी प्रतिनिधियों के माध्यम से निजी हाथों में दिया जा रहा है । कारपोरेट ऋण बढ़ रहे हैं । बैंक, राष्र्ट्रीयकरण और उद्देश्यों से दूर जा रहे हैं ।                    
  
बहुत से जरूरी मुद्दे जैसे कि मृतक कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक सहायता, काम करने का समय निर्धारित करना, बैंकों की पैंशन स्कीम का केंद्रीय सरकारी पैंशन स्कीम की तरह सुधार करना, सप्ताह में पांच दिन की बैंकिग रखने पर बहुत समय से बिचार विमर्श नहीं किया गया है।  स्थायी कार्यों को भी निजी हाथों में सौंपने के प्रयास तेज़ी से किये जा रहे हैं । ये सब कदम स्थायी नौकरियों के लिए तथा पढ़े लिखे नौजवानों के लिए नौकरियों के अवसरों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है । यह बैंक के ग्राहकों के हित के लिए भी बहुत नुक्सानदायक है । बैंकों को और अधिक मजबूत करने के जरुरत है । लेकिन इसके वजाय सरकार बैंकों की कार्यप्रणाली में कुछ और ही तरह के संशोधन करने के लिए तत्पर है  जैसे कि पब्लिक सैक्टर बैंकों का निजीकरण, सरकारी पूंजी को घटाना, पब्लिक सैक्टर बैंकों का विलय, निजी व्यवसाय प्रतिनिधि स्कीम को लागू करना । बैंक देश्वासियों की मेहनत की कमाई का प्रतिनिधित्व करते हैं ।  इसलिए बैंकों को मजबूत बनाने की जरुरत है तांकि यू एस ए और दूसरे देशों में बैंकों को जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है हमारे बैंकों को उनका सामना नही करना पड़े । लेकिन बदकिस्मति से सरकार हमारे बैंकिंग क्षेत्र को मुक्त छोड़ देने पर तुली हुई है । नई शाखायें खोलने की बजाय पहले से खुली शाखायें जो कि बहुत बेहतर ढ़ंग से कार्य कर रहीं हैं, उन्हें बंद करने की कोशिशें की जा रहीं हैं ।

युनाईटेड फारम के नेताओं ने आगे कहा कि "जो लोगों पर आक्रमण करते हैं उनकी निंदा करो" । सरकारी अत्याचार को रोकने के लिए प्रति रक्षा के उपाय करो । सरकार द्वारा की जा रही अत्याचारी कार्रवाइयों के विरुद्ध सामूहिक हस्तक्षेप करने के लिए यही ठीक समय है । हर जगह क्रोध प्रकट किया जा रहा है । मंहगाई की आग में जल रहे लोग सरकार तथा इसके सभी तंत्रों को रोकने और सरकार की नितियों का विरोध करने वाले लोगों की शक्ति  को दिखाने के लिए सभी  सड़कों पर उतर आये हैं ।  बैंकिंग उद्दोग पूरी तरह से बंद है । सरकार का काम बंद रहना चाहिए । सरकार के आक्रमण का प्रतिरोध करने तथा लोगों के हित में मांगो को मनवाने का एक मात्र यही तरीका है । एकता की शक्ति ने एक अवसर प्रदान किया है, इसका संकट को प्रतिरोध की एक नई लहर में बदल देने  का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए।

नरेश गौड़, 
कन्विनर