Friday, February 08, 2013

तीसरा राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो सम्मेलन कल से

08-फरवरी-2013 16:55 IST
3 दिन चलेगा यह सम्मेलन:एक प्रर्दशनी भी 
             Courtesy Photo
तीसरा राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो सम्मेलन कल से यहां विज्ञान भवन में आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन 3 दिन चलेगा। यह इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत में सामुदायिक रेडियो का पहला दशक मना रहा है। 
इस सम्मेलन में सामुदायिक रेडियो के संचालक, नीति निर्माता, सरकारी मंत्रालय/विभाग और संयुक्त राष्ट्र, यूनिसेफ, यूनेस्को, फोर्ड फाउंडेशन आदि अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी भाग लेंगे। 
पहला सामुदायिक रेडियो सम्मेलन फरवरी 2011 में और दूसरा फरवरी 2012 में आयोजित किया गया था। सम्मेलन के साथ-साथ सामुदायिक रेडियो के क्षेत्र में विभिन्न संगठनों और नए भाग लेने वाली संस्थाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रर्दशनी भी लगायी जा रही है। 
इस अवसर पर विजेताओं को राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो पुरस्कार भी प्रदान किये जाएगें। 3 दिन चलने वाली इस कार्यशाला में विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों यथा सामुदायिक रेडियो के लिए संसाधन, टिकाउपन, विकास की विषय वस्तुओं के आदान-प्रदान और कार्यक्रमों पर विचार किया जाएगा। इस अवसर पर एक सामुदायिक रेडियो सार-संग्रह भी जारी किया जाएगा जिसमें समूचे देश से प्रेरणा दायक कहानियां शामिल होंगी। यह सम्मेलन सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा वन वर्ड फाउंडेशन इंडिया के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। 
मंत्रालय द्वारा इस बात के भी प्रयास किये जा रहे हैं कि सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्वावलंबी बन सकें। मंत्रालय ने 35 सामुदायिक रेडियो स्टेशनों का एक पैनल बनाया है जिन्हें श्रृव्य-दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) से सरकारी विज्ञापन प्राप्त होंगे। सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के लिए विज्ञापन दरें एक रूपया प्रति सेकेंड से बढाकर चार रूपया प्रति सेकेंड कर दी गयी हैं। मंत्रालय 12वीं योजना में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को वित्तिय सहायता देने के बारे में भी सोच रहा है। इस योजना की मंजूरी के बाद हर वर्ष 100 नए सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोले जाएगे। इस प्रकार 12वीं योजना अवधि में लगभग 500 सामुदायिक रेडियो स्टेशन काम करने लगेंगे। 

वि.कासोटिया/क्वात्रा/चित्रदेव-503

कुंभ-इलाहाबाद: पुस्तक 'संघ अछूत है क्या ?' का विमोचन

Thu, Feb 7, 2013 at 3:04 PM
विमोचन हुआ संघ प्रमुख मोहन भागवत के कर कमलों द्वारा कुम्भ में 
कुंभ-इलाहाबाद:कुंभ के पावन  अवसर पर संतो के आशीर्वचन से दिल्ली के युवा लेखक राजीव गुप्ता की पुस्तक 'संघ अछूत है क्या ?' का विमोचन संघ प्रमुख मोहन भागवत के कर कमलों द्वारा  कुम्भ में हुआ। पुस्तक विमोचन के समय मंच पर कांची कामकोटि शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती, सर्वश्री अशोक सिंघल, प्रवीण भाई तोगड़िया, दिनेश जी एवं कई संत समाज के धर्माचार्य उपस्थित थे। यह पुस्तक कश्मीर-समस्या, धर्मांतरण, मंहगाई, भ्रष्टाचार, एफडीआई जैसे ज्वलंत विषयों पर राजीव गुप्ता के देश अनेक प्रसिद्ध हिन्दी अखबारों में प्रकाशित समसामयिक लेखों का संग्रह है। राजीव गुप्ता के अनुसार इस पुस्तक का उद्देश्य यह है-पिछले दिनों जयपुर मे संपन्न हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर में भारत के गृहमंत्री श्री सुशील कुमार शिन्दे द्वारा मात्र वोट बैंक की राजनीति के चलते 'आतंकवादी' कहकर संघ पर परोक्ष रूप से कुठाराघात करने के परिणामस्वरूप करोड़ो हिन्दुओ के साथ-साथ संघ के स्वयंसेवकों  की जन - भावनाएँ आहत हुई हैं। विहिप के श्री चम्पत राय ने कहा कि नि:स्वार्थ भावना से देश की सेवा करना यही संघ है। मानव की यह प्रवृत्ति अछूत कैसे हो सकती है; अत: संघ अछोत नहीं है। देश का हर युवा यह सोचने पर बाध्य है कि आज़ादी के इतने वर्षों के बाद भी आज देश की जनता भुखमरी, बेरोजगारी, नक्सलवाद, आतंकवाद  जैसी वीभत्स समस्याओं से क्यों जूझ रही है? हर भारतीयों के लिए देश सर्वोपरि ही है तथा वैचारिक मतभेद से लोकतंत्र और मजबूत ही होता है। साथ ही उन्होने यह सवाल भी देश की जनता से पूछा है कि  इससे कांग्रेस सरकार को भला आपत्ति क्यों है; साथ ही  क्या स्वतंत्र भारत में कोई अपनी आवाज नहीं उठा सकता।   
विनोद बंसल
मीडिया प्रमुख, दिल्ली
विहिप12:15

कुंभ-इलाहाबाद: पुस्तक 'संघ अछूत है क्या ?' का विमोचन

Thursday, February 07, 2013

एक आवाज़ उठेगी तो सौ संग में जुड़ जाएँगी...पूनम

Sun, Jan 27, 2013 at 5:12 PM
जोश और होश दोनों का संदेश देती-पूनम माटिया की कलम
                                                   एक सम्मान समारोह में पूनम 
पूनम और नरेश माटिया 
पूनम माटिया यूं तो काफी लम्बे समय से लेखन में हैं पर इस मामले में उनके छुपे  रुस्तम होने का पता करीब दो वर्ष पूर्व ही चला। इसे आप यूं भी कह सकते हैं कि उनकी कला का यह पक्ष अभी अभी सामने आया। इस लिए पुस्तकों के मामले में वह नवोदित ही गिनी जाती हैं। बहुत पुरानी पर फिर भी नवोदित--है न कमाल ! जैसे जोश और होश का मिलन होने पर जवानी का एक नया ही रंग सामने आता है बिलकुल उसी तरह सामने आई हैं पूनम की रचनायें। हर रचना में एक गहरा अनुभव, एक पैनी दृष्टि, बहुत ही पते का कोई संदेश पर साथ ही किसी पहाड़ी नदी जैसा जोश भी। जब शीत लहर के अंत में  सर्दी जा चुकी होती है लेकिन मौसम पूरी तरह गर्म भी नहीं हुआ लगता उस समय तन मन को अहसास होता है और खुद-ब-खुद होठों लगता से निकलने   है--लो  फिर वसंत आई। पूनम भी  हमारे इस मानव समाज में और कलम की दुनिया में किसी वसंत की तरह आई है। पूनम की रचनायें और जिंदगी का अंदाज़ दोनों मिलकर समाज को स्वस्थ और नैतिक जीवन जीने के सलीके भी सिखाते हैं। पूनम की रचना और पूनम का अंदाज़ स्वस्थ समाज की नींव के निर्माण में भी योगदान डाल रहा है।
साहित्यिक क्षेत्रों और नवोदित रचनाकारों की श्रेणी में दिलशाद गार्डन, दिल्ली की पूनम माटिया (रुस्तगी) भले ही एक नया नाम है परन्तु उनके सम्पूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला जाय तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह दिन दूर नहीं है जब यह रचनाकार भी अपने मजबूत विचारों के माध्यम से लेखन क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर  लेगीं । उनकी रचनाओं में सुख-दुख, दूरदृष्टि, समर्पण की भावना, स्नेह और रचनात्मक एवं सकारात्मक सोच की झलक हर जगह देखने मिलती है ।
इन सारी गतिविधियों और लेखन में नई दिशा देने का सारा श्रेय वह अपने पति नरेश माटिया को देती है । जो पेशे से इंजीनियर है । इतना ही नहीं एक चर्चा में उन्होने ने बताया कि वह हरियाणा की रेवाड़ी की रहने वाली है । शहर की चकाचौंध के साथ गांव की मिट्टी की सौंधी महक, ताजी हवा ,रहन सहन आदि का भी पूनम की जिदंगी में काफी महत्वपूर्ण स्थान रहा इसलिए उनकी रचनाओं में स्वतः ही इन सब की झलक भी मिलती है |
"पूनम मटिया" जी , जो विज्ञान और गणित की अध्यपिका हैं पर जिन्हें पढ़ने का शौक था वो  धीरे-धीरे, बढते-बढते लेखन की ओर मुड़ा | उन्होंने अपनी कलम से लिखना शुरू किया और ये देख कर आश्चर्य ज्यादा हुआ कि उनकी रचनायो में गंगा जमुनी संस्कृति का संगम है जबकि उर्दू तो कभी पढ़ी ही नहीं थी वही हिंदी भी सिर्फ माध्यमिक स्कूल तक पढ़ी थी और आज इतनी सुंदर-सुंदर रचनाओ से ‘स्वप्न श्रृंगार’ और  "अरमान" उन्होंने लिख डाली | पूनम माटिया की कविताओ का यथार्थ हम एक बार छू ले, तो उसके बाद इन रचनाओ के नए अर्थ उदघाटित होते हैं | 
राजीव गाँधी अवार्ड प्राप्त करते हुए पूनम का एक  अंदाज़ 
सीधे-सहज शब्दों में जटिल अनुभूतियो की गांठे खुलने का एक अनोखा अनुभव होता है | उनकी कविता में एक नाद है , गीतात्मक संवेदना है , अपनी एक लयात्मक सरंचना है | इन कविताओ में संगीत की एक सूक्ष्म धारा बहती है , रगों में थरथराते लहू जैसी , जिसका सिर्फ अहसास किया जा सकता है | 
ख़ुशी होती है यह जानकर कि उन्हे इतने अल्प काल में ही विभिन्न समूहों की तरफ से सम्मानित भी किया जा चूका है। 
१.सीमापुरी टाइम्स समूह द्वारा प्रायोजित, श्रीप्रकाश जायसवाल  (कोयला मंत्री ) के हाथों से राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड ,२०१२
२.मेहर टाइम्स समूह द्वारा प्रायोजित, श्रीमती अनु टंडन (सांसद) के हाथों से भारत गौरव अवार्ड ,२०१२
३.हम साथ साथ समूह द्वारा प्रायोजित, पंडित सुरेश नीरव जी ,साहित्यकार  के हाथों से सरस्वती सम्मान 
दिल्ली में एक दामिनी का मामला सामने आया तो दर्द के उस तुफान में पूनम भी शामिल रही। उसके दिल से भी एक तड़प निकली--कहने लगी--एक आवाज़ उठेगी तो सौ संग में जुड़ जाएँगी.........!
देश की राजधानी में एक लड़की की अस्मत दागदार ,तार तार हुई है .......ऐसे में कोई कैसे हंस सकता है ........सभी को अपनी शक्ति के अनुसार इस घटना का विरोध करना चाहिए और खासकर एक लेखक और कवी कवि को अपने शब्दों के माध्यम से अपना योगदान देना चाहिए ........
दिल पे अघात हुआ है 
अबला पे अत्याचार  हुआ है 

सियासतदारों की नाक के नीचे 

रक्षा के लिए प्रतिबद्ध 
संविधानी तौर पे कटिबद्ध 
पुलिसकर्मियों की खुली आँखों के सामने 
जन सुविधाओं के चालकों ने 
देश की अस्मत पर कुठाराघात किया है 

ऐसे में हम कैसे रहे शांत 

कैसे न उठाये आवाज़ 
क़ानून को ललकारना होगा 
घ्रणित ,विक्षिप्त मानसिकता को 
जड़ से उखाड़ना होगा 

एक आवाज़ उठेगी तो 

सौ संग में जुड़ जाएँगी 
शायद सरकार के कान पे 
जूँ कोई रेंग जायेगी 

एक आवाज़ उठेगी तो 

सौ संग में जुड़ जाएँगी 
शायद सरकार के कान पे 
जूँ कोई रेंग जायेगी .................................पूनम
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आप पूनम माटिया की कई और नई रचनायों का पठन बस यहां एक क्लिक करके भी कर सकते हैं।

गुरुवार 21 फरवरी से होगी संसद के बजट सत्र की शुरुआत


07-फरवरी-2013 12:37 IST
पंद्रहवीं लोकसभा के तेरहवें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत और अवधि 
                                                                                                                         Courtesy Photo
संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है। 

पंद्रहवीं लोक सभा के 13वें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और सरकारी कामकाज की अनिवार्यताओं के अध्याधीन 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है। 

राष्ट्रपति 21 फरवरी 2013, गुरुवार को संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रुप से नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में सुबह 11 बजे संबोधित करेंगे। 

मंत्रालयों/विभागों के अनुदान की मांगों पर स्थायी समिति द्वारा विचार और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 22 मार्च 2013 को दोनों सदनों को अवकाश के लिए स्थगित किया जाएगा और 22 अप्रैल 2013 को सदन का सत्र पुनः आरंभ होगा। (PIB)

वि.कासोटिया/सुधीर पी. /विजयलक्ष्मी – 469

संसद के बजट सत्र 

संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत

संसद:बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी से 

21 फरवरी से संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत

Wednesday, February 06, 2013

नक्‍सल प्रभावित जिलों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

05-फरवरी-2013 20:24 IST
केंद्र सरकार ने दी चौमुखी सडक सम्पर्क को मंजूरी
Photo Courtesy:Naxaliterage
सरकार ने नक्‍सल प्रभावित जिलों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन चौमुखी संपर्क कायम करने को अपनी मंजूरी दे दी है। केन्‍द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम नरेश ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्‍यों की सरकारें दो चरणों में विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर सकती हैं। राज्‍य सरकारें ढांचे का निर्माण, ग्रेवल बेस आदि का निर्माण पहले चरण के अधीन कर सकती हैं, जबकि दूसरे चरण में बिटुमिनस अथवा कंक्रीट की सतह तैयार करना शामिल है। उन्‍होंने कहा कि राज्‍यों को पहले चरण का कार्य पूरा करने की अनुमति दी जाएगी और कानून व्‍यवस्‍था को ध्‍यान में रखते हुए मार्च 2015 से पहले दूसरे चरण के लिए विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट भेजने के लिए कहा जाएगा। नक्‍सल प्रभावित 82 जिले के 52,000 आवास स्‍थलों में से 30,000 आवास स्‍थलों को इसमें शामिल किया गया है, किंतु अब तक केवल 19,000 आवास स्‍थलों को ही सड़कों से जोड़ा गया है।(PIB)
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वि.कासोटिया/सुधीर/मनोज-450

नक्सलबाड़ी स्क्रीन में भी देखिये 
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन

कामरेड स्क्रीन में देखिये:नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सडकों का जाल 

हिंदी स्क्रीन  देखें 

लेंस के जरि‍ए नौकरी की तलाश


05-फरवरी-2013 20:12 IST
मंत्री मनीष ति‍वारी ने कि‍या रोजगार समाचार के नए लोगो का अनावरण 
लोगो की तुरंत पहचान
जनहित के सरकारी मीडिया को और सशक्त व प्रभावी बनाने का प्रयास ही लगता है रोज़गार समाचार का नया लोगो। इस नए लोगो का अनावरण बहुत ही  गर्मजोशी से हुआ। इस  अवसर की तस्वीर में आप आप देख सकते हैं इस नए लोगो को रलीज करते हुए केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी और साथ में हैं पब्लिकेशन डिवीयन की एडीजी  कुमारी इरा जोशी और कुछ अन्य वशिष्ठ लोग।
सूचना और प्रसारण मंत्री श्री मनीष ति‍वारी ने कहा है कि‍‘सभी को समान अवसर’ के उद्देश्‍य के साथ रोजगार समाचार के नए लोगो का अनावरण नौकरी की तलाश में लगे युवाओं की महत्‍वकांक्षाओं को पूरी करने में मदद के प्रति‍संकल्‍प का भाव दर्शाता है। उन्‍होंने कहा कि‍ इस नई पहल से प्रकाशन को न केवल नई ब्रांड पहचान मि‍लेगी बल्‍कि‍आकांक्षी युवाओं के लि‍ए आकर्षक भी होगा। प्रकाशन वि‍भाग की इस कोशि‍श की सराहना करते हुए श्री मनीष ति‍वारी ने बताया कि‍ लेंस के जरि‍ए नौकरी की तलाश करते इस लोगो की तुरंत पहचान हो जाएगी। श्री ति‍वारी ने यह बातें आज दि‍ल्‍ली के प्रगति‍मैदान में प्रकाशन वि‍भाग द्वारा आयोजि‍त लोगो के शुभारंभ के मौके पर कही। 

इस मौके पर सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि‍ उर्दू भाषा में रोजगार समाचार का इलेक्‍ट्रॉनि‍क संस्‍करण शुरू करना भी एक महत्‍वपूर्ण कदम है जि‍ससे इसकी पहुंच अधि‍क लोगों तक हो सकेगी। उन्‍होंने कहा कि‍ प्रकाशन वि‍भाग की यह पहल भी सराहनीय है जि‍समें तकनीक की मदद से रोजगार समाचार लोगों तक पहुंचाया जाना संभव हुआ। श्री ति‍वारी ने कहा कि‍इस प्रकाशन में वि‍कास, राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों इत्‍यादि‍जैसे जनहि‍त से जुड़े कुछ मुद्दों आलेख होना चाहि‍ए। उन्‍होंने प्रकाशन वि‍भाग को कहा कि‍भवि‍ष्‍य के इसके संस्‍करण में दो से चार पन्‍नों पर ऐसे आलेख होने चाहि‍ए। 

श्री ति‍वारी से इंडि‍या 2013 और भारत 2013 का एक संदर्भ वार्षिक पुस्‍ति‍का भी जारी की जि‍समें 1997 से अब तक भारत सरकार के वि‍भि‍न्‍न मंत्रालयों और वि‍भागों की गति‍वि‍धि‍यों, वि‍कास और उपलब्‍धि‍यों पर सूचनाओं का सटीक और वि‍स्‍तृत संग्रह है। 

रोजगार समाचार का यह लोगो नई दि‍ल्‍ली में कॉलेज ऑफ आर्टस की घरेलू प्रति‍योगि‍ता से चुना गया। लोगो में लेंस के सहारे नौकरी तलाशते युवा को दि‍खाया गया है। 

देशभर में प्रति‍सप्‍ताह चार लाख प्रति‍यों के प्रसार के साथ रोजगार समाचार केंद्र और राज्‍य सरकारों के वि‍भि‍न्‍न संगठनों में रोजगार के अवसरों के बारे में आकांक्षी युवाओं को जानकारी मुहैया करता है। यह एक साथ तीन भाषाओं हि‍न्‍दी, अंग्रेजी और उर्दू में प्रकाशि‍त होता है। उूर्द भाषा जानने वालों के लि‍ए तकनीकी सुवि‍धा का लाभ देते हुए उर्दू रोजगार समाचार का इलेक्‍ट्रॉनि‍क संस्‍करण भी शुरू कर दि‍या गया है। अगस्‍त 2012 से अंग्रेजी और हि‍न्‍दी में भी रोजगार समाचार के इलेक्‍ट्रॉनि‍क संस्‍करण शुरू हैं। (PIB)

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वि‍.कसौटि‍या/अनि‍ल/राजीव/449

Tuesday, February 05, 2013

नई दिल्‍ली विश्‍व पुस्‍तक मेला – 2013

04-फरवरी-2013 18:38 IST
प्रकाशन के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देने पर जोर
एक सप्‍ताह तक चलने वाले नई दिल्‍ली विश्‍व पुस्‍तक मेला–2013 की आज यहां शुरूआत हुई। पुस्‍तक मेले का उद्घाटन करते हुए मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डाक्‍टर शशि थरूर ने कहा कि पुस्‍तकों, फिल्‍मों और कला में प्रतिस्‍पर्धी असहिष्णुता का बढ़ना अच्‍छा संकेत नहीं है। उन्‍होंने कहा कि जो लोग इन मुद्दों पर अलग राय रखते हैं, उन्‍हें इनपर प्रतिबंध लगाने की मांग करने की जगह तर्क एवं परिचर्चा करनी चाहिए। उन्‍होंने प्रकाशन के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देने पर जोर दिया। 

इससे पहले भारतीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद के अध्‍यक्ष डॉक्‍टर करण सिंह ने अपने भाषण में देश में मूल्‍य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने का आह्वान किया, क्‍योंकि इससे युवाओं को सकारात्‍मक मूल्‍यों को सिखाने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर भारत में फ्रांस के राजदूत श्री फ्रेंकोईस रिचियर ने भी अपने विचार व्‍यक्‍त किये। 

इस पुस्‍तक मेले में चीन, अमरीका, पोलैंड, तुर्की सहित लगभग 23 देश और चार अंतरराष्‍ट्रीय एजेंसियां भाग ले रहे हैं। (PIB)


वि.कासोटिया/सुधीर/सुनील -434

Monday, February 04, 2013

उल्लू का राज खुला

3.02.2013, 15:34
 दर्जनों उल्लुओं के एक्स-रे और सीटी स्कैन्स किए गए
Национальный зоопарк Манагуа Никарагуа карлик сова карлик Бруно Браулио птица птицы
                                                                                                                             फोटो: EPA
उल्लू दिन की रौशनी में देख नहीं सकता लेकिन रात के अँधेरे में उल्लू की शक्ति बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। उल्लू की वचित्र खूबियों की चर्चा अक्सर सुनने में मिलती है। तन्त्र की दुनिया में तो उल्लू को वश में करने के बहुत ही कठिन तरीके भी बताये जाते रहे हैं। लेकिन इस सब के साथ साथ विज्ञान अपना काम करता है। अब विज्ञानं ने उल्लू की गर्दन में हैरानीजनक हद तक पाए जाते  लचीलेपन के राज़ का पता लगा लिया है। रेडियो रूस ने इस सम्बन्ध में एक दिलचस्प खबर दी है।
उल्लू अपनी लचीली गर्दन के लिए मशहूर है और अब वैज्ञानिकों ने इसके कारण का भी पता लगा लिया है। उल्लू किसी भी दिशा में अपनी गर्दन को लगभग पूरा [270 डिग्री तक] घुमा सकता है और खास बात यह है कि ऐसा करने में उल्लू को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। उल्लू की शारीरिक संरचना के अध्ययन के लिए दर्जनों उल्लुओं के एक्स-रे और सीटी स्कैन्स किए गए। जागरण के अनुसार उल्लुओं का गर्दन घुमाने का रहस्य अब सुलझ गया है। इस अध्ययन के लिए उल्लू की नसों में रंगीन तरल प्रवाहित कर कृत्रिम रक्त प्रवाह बढ़ाया गया। उल्लू के जबड़े की हड्डी से ठीक नीचे सिर के आधार में स्थित रक्त वाहिकाएं रंगीन तरल के पहुंचने के साथ-साथ लंबी होती गई। यह प्रक्रिया तब तक चली जब तक कि यह रंगीन तरल रक्त भंडार में जमा नहीं हो गया। उल्लू में पाया जाने वाला यह गुण बिल्कुल अनोखा है जबकि मनुष्य में ऐसा नहीं होता है। (रेडियो रूस से साभार) उल्लू का राज खुला

Sunday, February 03, 2013

भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्‍यान केंद्रित किया

01-फरवरी-2013 15:23 IST
आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान
रक्षा पर विशेष लेख  *हामिद हुसैन
    भारतीय तटरक्षक 01 फरवरी, 2013 को अपनी 36वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी स्‍थापना के बाद से यह सेवा एक बहुआयामी और एक उत्‍साहपूर्ण बल के रूप में यह उभरी है जो बहु-भूमिका वाले पोतों और विमानों की तैनाती कर हर समय भारत के समुद्री क्षेत्रों की चौकसी करता है।
    भारतीय नौ-सेना के दो फ्रिगेट और सीमा शुल्‍क विभाग के 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत कर आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान हैं। गत वर्ष के दौरान एक प्रदूषण नियंत्रण पोत, 6 गश्ती पोत, 4 वायु कुशन पोत, 2 इंटरसेप्‍टर नौकाएं शामिल की गई हैं। इसके अतिरिक्‍त क्षेत्रीय मुख्‍यालय (एनई) की स्‍थापना तथा 8 सीजी स्‍टेशन का सक्रियण, सक्रियण/3 सीजी स्‍टेशनों की शुरूआत की योजना 2013 के प्रारंभ में की गई है।
    भारतीय तटरक्षक आज तीव्र विस्‍तार की राह पर है। इसमें आधुनिक स्‍तर के पोत, नौकाएं और विमान का निर्माण विभिन्‍न शिपयार्ड/ सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम में किया जा रहा है और भविष्‍य में तटरक्षक अकादमी की स्‍थापना की जाएगी। तटरक्षक के संगठनात्‍मक ढाँचे में 5 क्षेत्रीय मुख्‍यालय, 12 जिला मुख्‍यालय, 42 स्‍टेशन तथा सभी भारतीय तटों पर 15 एयर यूनिट कार्य कर रहे हैं।
    श्रम शक्ति की दृष्टि से इस सेवा ने सामान्‍य ड्यूटी में महिला अधिकारियों के लिए अल्‍प सेवा नियुक्ति की शुरूआत, मेधावी अधीनस्थ अधिकारियों को विभागीय पदोन्‍नति और विशेष नियुक्ति अभियान चलाकर अपने श्रम शक्ति में विस्‍तार किया है।
    बृहत विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और तट रक्षा पर सतत निगरानी के लिए औसतन 20 पोत और 8-10 विमान तैनात किए गए है। भारतीय तटरक्षक ने तटीय निगरानी नेटवर्क (सीएसएन) की भी स्‍थापना की है जिसमें तटीय निगरानी रडार नेटवर्क और 46 सुदूर स्‍थलों पर इलेक्‍ट्रो ऑप्‍टीक सेंसर शामिल है। इन सेंसरों में 36 मुख्‍य क्षेत्र में, 6 लक्ष्‍यद्वीप समूह और 4 अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में लगाएं गए हैं।
    भारतीय तटरक्षक द्वारा तट के आस-पास के गाँवों में नियमित समुदाय संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य मछली पकड़ने वाले समुदायों को मौजूदा सुरक्षा स्थितियों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उन्‍हें सतर्क रखना है। इसके अतिरिक्‍त गत वर्षों के दौरान भारतीय तट रक्षक ने 20 तटीय सुरक्षा अभ्‍यास और 21 तटीय सुरक्षा अभियान चलाया है।
    भारतीय तटरक्षक द्वारा हर समय भारतीय खोज और बचाव क्षेत्रों में समुद्री जांच और बचाव किया जाता है। इस कठिन परिस्थिति में साहस दिखाते हुए पिछले वर्ष तटरक्षरक ने 204 लोगों की जान बचाई है। इस अवधि के दौरान भारतीय तटरक्षक द्वारा कुल 30 चिकित्‍सा बचाव किए गए।
    भारतीय तटरक्षक ने अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी अपनी पहचान स्‍थापित की है। सहयोग समझौता/ ज्ञापन के तहत संस्‍थागत यात्राएं नियमित की जाती हैं। 12वीं भारत-जापान तटरक्षक उच्‍च स्‍तरीय बैठक जापान के टोक्‍यो में जनवरी, 2013 में की गई। अक्‍तूबर, 2012 में नई दिल्‍ली में 8वां एशियाई तटरक्षक प्रमुखों का सम्‍मेलन आयोजित किया गया। यह सम्‍मेलन काफी महत्‍वपूर्ण था क्‍योंकि इसे पहली बार भारत में आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्‍त, भारत-पाकिस्‍तान संयुक्‍त कार्य समूह बैठक का आयोजन पहली बार नई दिल्‍ली में जुलाई, 2012 में किया गया।
    भारतीय तटरक्षक लगातार अपना विस्‍तार कर रहा है और जिससे इसकी क्षमता में और विकास हो रहा है। सक्षम और पेशेवर अधिकारियों द्वारा आधुनिक पोतों और विमानों का संचालन किया जा रहा है जो देश सेवा और समुद्री सुरक्षा में कार्य कर अपने को गौरवान्वित महसूस करते है। वर्ष 2013 के लिए भारतीय तटरक्षक का शीर्षक है 'समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित लक्ष्‍य'। यह शीर्षक इस सेवा की प्रतिबद्धता और संकल्‍प को प्रदर्शित करता है जो इसके आदर्श वाक्‍य 'वयम् रक्षाम:' में प्रतिबिम्‍बित है जिसका अर्थ है 'हम रक्षा करते है'। (PIB) (पसूका) 
*एपीआरओ (रक्षा) भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्‍यान केंद्रित किया 
मीणा/आनंद/लक्ष्‍मी - 33
पूरी सूची - 01.02.2013

खादी और ग्राम उदयोग आयोग द्वारा रोजगार सृजन

01-फरवरी-2013 16:06 IST
ग्राम उद्योग और शिल्‍प ग्रामीण जीवन का महत्‍वपूर्ण भाग 
                                                                        विशेष लेख//(एमएसएमई)
खादी और ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) महात्‍मा गांधी के विचारों का प्रचार है। उद्योगों का विकास साधारण चरखे में प्रतिबिंबत किया गया है। महात्‍मा गांधी की प्रेरणा के अधीन भारत की राजनीतिक स्‍वतंत्रता के राष्‍ट्रीय संघर्ष ने ग्रामीण उद्योगों के संरक्षण, सुरक्षा और प्रोत्‍साहन के लिए सहगामी संघर्ष का रूप लिया। मिलों द्वारा तैयार किए गए सस्‍ते उत्‍पादों की असमान प्रतिस्‍पर्द्धा ने ग्रामीण दस्‍तकारों और शिल्‍पकारों के रोजगार और आजीविका के लिए खतरा पैदा कर दिया।
गांधी जी ने जीवन शैली और उपभोग में सादेपन को प्राथमिकता दी। भारतीय विकास के लिए गांधीवादी रणनीति अतिरिक्‍त जनशक्ति के विशाल प्रयोग और उत्‍पादन प्रक्रियाओं में उसकी सक्रिय भागीदारी से संबद्ध थी। गांधीवादी मुहावरे में कुटीर और ग्राम उद्योग जीवन शैली के लिए समर्थन ढांचे का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। गांधी जी ने इस विचार का जोरदार समर्थन किया था कि ग्राम उद्योग और शिल्‍प ग्रामीण जीवन का महत्‍वपूर्ण भाग हैं और आत्‍मनिर्भर ग्राम के अस्तित्‍व को सुनिश्चित करने के लिए उसका जोरदार संरक्षण किया जाना चाहिए। वास्‍तव में, यह ब्रिटिश उद्योग के अतिक्रमण के प्रति रक्षा कवच के रूप में प्रतिक्रियात्‍मक दृष्टिकोण था।
असली भारत गांवों में रहता है। भारत की ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्‍सा इसकी अर्थव्‍यवस्‍था का एक प्रमुख स्रोत है और यह कुटीर उद्योग द्वारा समर्थित है, जिसने भारत की सांस्‍कृतिक धरोहर को काफी हद तक संरक्षित रखने का काम किया है।
 खादी और ग्राम उद्योग आयोग देश में रोजगार पैदा करने की प्रमुख योजनाओं को कार्यान्वित कर रहा है। यह क्षेत्र 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान 16.07 लाख लोगों को रोजगार प्रदान कर सका है।
 प्रधानमंत्री की रोजगार गारंटी कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) देश में सूक्ष्‍म उद्यमों के जरिए रोजगार के अवसर पैदा करने का एक प्रमुख कारक रहा है। यह ऋण-संबद्ध सब्सिडी कार्यक्रम है, जिसमें सामान्‍य वर्ग के लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना लागत के 25 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 15 प्रतिशत की सब्सिडी मार्जिन राशि प्राप्‍त कर सकते हैं। इसके अलावा विशेष वर्गों यथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्‍य पिछड़े वर्ग, अल्‍पसंख्‍यक, महिलाएं, भूतपूर्व सैनिक, शारीरिक रूप से विकलांग, पूर्वोत्‍तर क्षेत्र, पर्वतीय और सीमावर्ती क्षेत्रों से संबंध रखने वाले लाभार्थियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी की मार्जिन राशि 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत है। विनिर्माण क्षेत्र में परियोजना की सर्वाधिक राशि 25 लाख रूपये और सेवा क्षेत्र में दस लाख रूपये है।
इस योजना की बेरोजगार लोगों में और प्रमुख कार्यान्‍वयन भागीदार यथा बैंकों, विशेष रूप से पूर्वोत्‍तर राज्‍यों और जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य में उत्‍साहवर्धक प्रतिक्रिया रही है। वर्ष 2011-12 के दौरान पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के लिए निर्धारित मार्जिन राशि 80 करोड़ रूपये रखी गई थी लेकिन 31 मार्च 2012 तक वास्‍तविक वितरण एक सौ एक करोड़ रूपये यानी लक्ष्‍य का 126 प्रतिशत के आंकड़े तक पहुंच गया है।
समूह विकास के लिए परम्‍परागत उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए धन उपलब्‍ध कराने की योजना ने भी परम्‍परागत उद्योगों को पुनर्जीवित करने और दस्‍तकारों की मजदूरी बढ़ाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना के अधीन पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में दो खादी, 11 ग्राम उद्योग और दो कॉयर समूहों को चालू किया गया है। इसके लिए उन्‍हें संवर्धित उपकरण, सामान्‍य सुविधा केंद्र, कारोबार विकास सेवाएं, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और डिजाइन तथा विपणन सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
केवीआईसी की नई योजनाएं
केवीआईसी को केवीआई उत्‍पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वाणिज्‍य मंत्रालय द्वारा निर्यात प्रोत्‍साहन परिषद का मानद दर्जा प्रदान किया गया है। यह केवीआई क्षेत्र के लिए निर्यात के अवसर पैदा करने का एक बड़ा प्रयास सिद्ध होगा।
केवीआईसी ने डिजाइन और फैशन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्‍यावसायिक विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए मुंबई स्थित निफ्ट के साथ संपर्क स्‍थापित किए हैं और एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं। निफ्ट, केवीआईसी की डिजाइन सैल गठित करने में सहायता करेगा जिसे बाजार में बिक्री के वास्‍ते वस्‍त्र तैयार करने के लिए खादी संस्‍थाओं द्वारा प्रयोग में लाया जाएगा।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केवीआईसी भारतीय विदेश व्‍यापार संस्‍था के साथ समझौता ज्ञापन के तौर-तरीकों पर काम कर रहा है, जो केवीआई संस्‍थाओं और इकाईयों की निर्यात के क्षेत्र में क्षमता निर्माण में व्‍यावसायिक विशेषज्ञता लाएगा और खादी एवं ग्राम उद्योग क्षेत्र के लिए निर्यात के बाजार भी तैयार करेगा।
केवीआईसी द्वारा इस क्षेत्र में उत्‍पादित खादी और ग्राम उद्योग की वस्‍तुओं की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए बंगलुरू, गुवाहाटी और नगालैंड में कई खादी प्‍लाजा बनाये जा रहे हैं।
क्षेत्र/राज्‍य से बाहर प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए पूर्वोत्‍तर क्षेत्र, जम्‍मू कश्‍मीर, अंडमान निकोबार बोर्ड की इकाईयों और खादी एवं ग्राम उद्योग संस्‍थाओं के दस्‍तकारों और बुनकरों आदि की यात्रा, ठहरने और भोजन के लिए अनुदान सहायता देने के विशेष पैकेज शुरू किए गए हैं। यह इन क्षेत्रों की संस्‍थाओं और इकाईयों को प्रमुख प्रदर्शिनयों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्‍साहित करेंगे। इससे वे अपने उत्‍पादों की बिक्री बढ़ा सकेंगे और उनमें व्‍यावहारिकता भी ला सकेंगे।
प्रारंभ        
वर्ष 2012-13 के दौरान ब्रैंड प्रोत्‍साहन, उत्‍पाद विकास, विभागीय बिक्री केंद्रों की सुव्‍यवस्‍था, सरकारी आपूर्तियों और निर्यात के क्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान दिया जाएगा। यह व्‍यावसायिक एजेंसियों जैसे आईआईएफटी, सीआईआई, निफ्ट आदि के सहयोग से प्राप्‍त किया जाएगा। इसके अलावा देश और विदेश में प्रदर्शनियों, क्रय-विक्रय मेलों, कार्यशालाओं, गोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि का भी आयोजन किया जाएगा।
·   अंतर्राष्‍ट्रीय प्रदर्शनियों और क्रय-विक्रय मेलों में भागीदारी के जरिए निर्यात बाजार को बढ़ावा देना। केवीआई उत्‍पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केवीआई संस्‍थाओं और प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी कार्यक्रमों के जरिए निर्यात बाजार को प्रोत्‍साहित करना।
·   निर्यातोन्‍मुख केवीआई संस्‍थाओं और आरईजीपी/पीएमईजीपी इकाईयों के निर्यात संघों को बढ़ावा देना। यह निर्यात को बढ़ावा देने और निर्यात योग्‍य इकाईयों की सहायता में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।
·   एशियाई विकास बैंक की सहायता से बाजारों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें केवीआईसी के साथ भागीदार के रूप में निजी क्षेत्र की संस्‍थाओं का चयन किया जाएगा, जो पूरे देश में बड़े पैमाने पर कारोबार करेंगे।

केवीआईसी के कार्य निष्‍पादन का विहंगम दृष्टिपात

ब्‍यौरा
2010-11
2011-12
उत्‍पादन (करोड़ रूपये में)
रूपये  19,871.86
21,852.00
बिक्री (करोड़ रूपये में)
रूपये  25,792.99
26,797.13
रोजगार
(लाखों में )
113.80
119.10
(पसूका लेख) 
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PIB feature

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*सूक्ष्‍म, लघु और मझौला उद्यम मंत्रालय से साभार


मीणा/क्‍वात्रा/सोनिका–34
पूरी-सूची 01.02.2013