Friday, August 03, 2012

भारत के राष्‍ट्रपति की नए डिजाइन वाली वेबसाइट का शुभारंभ

अब आम नागरिक भी राष्‍ट्रपति से सीधे कर सकेंगे सपंर्क
                                                                                                       साभार चित्र 
भारत के राष्‍ट्रपति की नए डिजाइन वाली वेबसाइट का आज राष्‍ट्रपति भवन में शुभारंभ किया गया। पुरानी वेबसाइट के एतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य को बनाए रखा गया है लेकिन नए डिजाइन वाली वेबसाइट में कुछ नई खूबियां जाड़ी गई हैं। इसमें वेबसाइट से सीधे जुड़ने की सुविधा जोड़ी गई है अर्थात राष्‍ट्रपति के लिए फेसबुक और यू ट्यूब जैसे सोशल नेटवर्किंग माध्‍यम उपलब्‍ध कराए गए हैं। ये दोनों खूबियां राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पदभार संभालने के बाद शुरू की गई हैं। नई वेबसाइट में वीडियो गैलरी भी उपलब्‍ध कराई गई है। अब देश के नागरिक राष्‍ट्रपति से सीधे सपंर्क कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ "राष्‍ट्रपति को लिखें" बटन पर क्लिक करना होगा। वेबसाईट का शुभारंभ करते हुए राष्‍ट्रपति की सचिव ओमिता पॉल ने आशा प्रकट की कि इससे भारत के राष्‍ट्रपति को जनता के और करीब जाने में मदद मिलेगी। (पत्र सूचना कार्यालय)                          03-अगस्त 2012   21:21 IST

दुनिया की सबसे बड़ी सौर दूरदर्शी


विज्ञान पर विशेष लेख                                  * कलपना पाल्‍खीवाला
      अत्‍यधिक अशांत पलाज्‍मा को नियंत्रित करने वाली बहुत सी मेगनेटो - हाइइ्रोडाइनेमिक प्रक्रियाओं का अध्‍ययन और परीक्षण करने के लिए सूर्य का वायुमंडल आदर्श स्‍थान है। सूर्य के कुछ सबसे महत्‍वपूर्ण और सूक्ष्‍म गुणों का पता अत्‍याधुनिक दूरदर्शी से लगाया जा सकता है। लद्दाख भारत का शीत रेगिस्‍तान है, जहां इस उद्देश्‍य से दुनिया की सबसे बड़ी और अत्‍याधुनिक सौर दूरदर्शी लगाई जाएगी। इसका नाम नैशनल लार्जेस्‍ट सोलर टेलिस्‍कोप (एनएलएसटी) रखा गया है, जो भारत-चीन की सीमा पर वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के निकट पोंगओंग त्‍सो लेक मेराक पर स्‍थापित की जाएगी। यह वैश्विक रूप से बहुत अनोखी दूरदर्शी होगी क्‍योंकि यह दुनिया की सबसे बड़ी सौर दूरदर्शी होगी। इस समय दुनिया की सबसे बड़ी सोलर दूरदर्शी मेक मैथ पीयर्स सोलर टेलिस्‍कोप है, जिसकी लंबाई 1.6 मीटर है। यह अमरीका में अरिजोना में किट पीक पर राष्‍ट्रीय वेधशाला में स्‍थापित की गई है। एनएलएसटी 2020 तक दुनिया की सबसे बड़ी दूरदर्शी बनी रहेगी, क्‍योंकि उसके बाद 2020-21 में अमरीका में सबसे बड़ी दूरदर्शी स्‍थापित की जाएगी।
      एनएलएसटी ग्रेगोरियन बहुद्देशीय मुक्‍त दूरदर्शी है। यह स्‍पैक्‍ट्रोग्राफ के इस्‍तेमाल से रात के समय भी अवलोकन करने में सक्षम होगी। यह सूर्य के पचास किलोमीटर के दायरे में फैले कणों का अध्‍ययन कर सकेगी। इससे करीब 0.1 आर्कसैक के आकार के कणों की विशेषताओं का पता लगाया जा सकेगा। इस दूरदर्शी में 0.01 प्रतिशत की सटीकता के साथ ध्रुवीकरण की माप लेने के लिए हाई रेजोलूशन पोलेरीमेट्रिक पैकेज़ लगाया गया है। एक साथ पांच अलग-अलग चौड़ी अवशोषण पंक्तियों के अवलोकन के लिए हाई स्‍पैक्‍ट्रल रेजोलूशन स्‍पैक्‍ट्रोग्राम तथा विभिन्‍न पंक्तियों ने संकीर्ण छवियों को देखने के लिए हाई स्‍पैटियल रेजोलूशन का इस्‍तेमाल किया गया है।
      यह दूरदर्शी दो मीटर के परावर्तक लेन्‍स के साथ फिट की जाएगी, जिससे वैज्ञानिक धरती पर होने वाली बुनियादी प्रक्रियाओं को समझने के लिए अत्‍याधुनिक शोध कर सकेंगे। इस दूरदर्शी का डिजाइन अंतर्राष्‍ट्रीय कंपनी ने तैयार किया है जिसने स्‍पेन में टेनारिफ द्वीप पर स्थि‍त 1.5 मीटर लंबी दूरदर्शी का डिजाइन भी तैयार किया है। इस दूरदर्शी के सभी उपकरण भारतीय एस्‍ट्रो फीजिक्‍स संस्‍थान में विकसित किये जाएंगे तथा बंगलौर में मास्‍टर कंट्रोल फैसिलिटी के जरिए इसे रिमोट से संचालित किया जा सकेगा। दूरदर्शी उपग्रह से जुड़ी होगी जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन उपलब्‍ध कराएगा। विशेष उपकरण के जरिए रात के समय खगोलीय घटनाओं का अवलोकन किया जाएगा। यह उपकरण जर्मनी के हेम्‍बर्ग विश्‍वविद्यालय के सहयोग से बनाया जाएगा।
      इस दूरदर्शी के जरिए वैज्ञानिक सूर्य की संरचना का सूक्ष्‍म अध्‍ययन करेंगे और पृथ्‍वी की जलवायु तथा पर्यावरण में दीर्घावधि बदलावों का भी अध्‍ययन किया जाएगा। इस दूरदर्शी से समय - समय पर सौर आंधी के कारण संचार नेटवक और उपग्रह संपर्क में आने वाली बाधाओं को न्‍यूनतम करने या पूरी तरह दूर करने के लिए अनुसंधान में उपयोगी डाटा उपलब्‍ध कराया जा सकेगा।
      दूरदर्शी से इस बुनियादी प्रश्‍न का जवाब भी खोजा जाएगा कि सोलर मेगनेटिज्‍म की प्रकृति कैसी है। इसका लक्ष्‍य फलक्‍स ट्यूब्‍स का समाधान करना तथा उनकी लंबाई मापना और सूर्य के चु‍म्‍बकीय क्षेत्र के विकास से निपटना है, जिसके कारण सूर्य पर तमाम अनोखी घटनाएं घटती है जिनमें सोलर डाइनमो, सोलर सर्किल और सौर विवर्तनीयता शामिल है, जो अंतरिक्ष के मौसम को नियंत्रित और निर्धारित करती है।
      सूर्य के ऊपरी वायुमंडल में ऊर्जा के परिसंचरण के लिए जिम्‍मेदार दोलन की अवधियों के निर्धारण और छोटी-छोटी संरचनाओं का समाधान पाने के लिए मेगनेटो हाईड्रो डाइनेमिक्‍स  तरंग-
·     उच्‍च स्‍तर के अवलोकन के जरिए अत्‍यधिक सूक्ष्‍म सरंचनाओं की गतिशील छवि
·     सोलर फ्लेयर, प्रोमिनेन्‍स फिलामेंट इरप्‍शन्श, सीएनई इत्‍यादि को उकसाने वाले सक्रीय क्षेत्रों और उनकी भूमिकाओं का पता लगाना
·     इनफ्रा रेड तरंग दैर्ध्‍य  में अवलोकनों के जरिए क्रोमो स्‍पेयर्स का थर्मो डाइनेमिक्‍स
·     हेनले प्रभाव के इस्‍तेमाल से कमजोर और गतिशील चुम्‍बकीय क्षेत्र का माप जो उतना ही महत्‍वपूर्ण जितना मजबूत चुम्‍बकीय क्षेत्र का माप।
            यह सारी जानकारी आकाशीय विभेदन उपकरणों की सहायता से अवलोकन करके प्राप्‍त की जायेगी। इसके लिए अनुकूली प्रकाश विज्ञान, उच्‍च छाया संबंधी (स्‍पेक्‍ट्रल) विश्‍लेषण, उच्‍च लौकिक विश्‍लेषण, चित्ररूपण (इमेजिंग) और स्‍पेक्‍ट्रम विज्ञान के उपकरणों की मल्‍टी-वेव लैंथ क्षमता, उच्‍च फोटोन प्रवाह और डिटेक्‍टरों की सूक्ष्‍मग्राहि‍ता तथा परीवीक्षण के लिए स्‍पेक्‍ट्रम के इन्‍फ्रा-रेड भाग का इस्‍तेमाल करके जानकारी प्राप्‍त की जायेगी।
      दूरबीन (टेलीस्‍कोप) में नये डिजाइन का इस्‍तेमाल किया जायेगा, जिसमें प्रतिबिंबन कम होगा, ताकि उच्‍चस्‍तरीय परीवीक्षण हो सकेगा। डिजाइन में उच्‍चस्‍तरीय अनुकूली प्रकाश विज्ञान का समावेश होगा और इसमें 7 सेंटीमीटर के साधारण फ्रीड पैरामीटर का इस्‍तेमाल होगा, जिससे सीमित विवर्तन (डिफ्रेक्‍शन) होगा। टेलीस्‍कोप के साथ कई फोकस संबंधी उपकरण लगे होंगे, जिनमें उच्‍च विश्‍लेषण क्षमता का स्‍पेक्‍ट्रोग्राफ और पोलैरीमीटर भी होगा।
स्‍थल का चुनाव
      टेलीस्‍कोप स्‍थापित करने के लिए भारतीय खगोल भौतिकी संस्‍थान ने लेह में हानले का और उत्‍तराखंड में नैनीताल के पास देवस्‍थल का अध्‍ययन किया गया, लेकिन बाद में लद्दाख में मेराक स्‍थान को चुना गया। इस स्‍थान पर बादलों से मुक्‍त साफ आसमान और कम जलवाष्‍प वाला वायुमंडल उपलब्‍ध है, जिसके कारण यह प्रकाश विज्ञान संबंधी मिलीमीटर और मिलीमीटर से भी कम वेव लैंथ के उपकरणों के लिए विश्‍व के बेहतरीन स्‍थलों में से एक है।
      इस स्‍थान को विभिन्‍न वैज्ञानिक और पर्यावरण संबंधी पहलुओं का सावधानी से अध्‍ययन करने के बाद चुना गया। दृश्‍यता की परख के लिए सौर फोटोमीटर, एस-डीआईएमएम (सोलर डिफ्रेंशियल इमेज मोशन मॉनिटर) और शाबर (शैडो बैंड रेडियोमीटर) तकनीकों का इस्‍तेमाल किया गया। शाबर उपकरण की सहायता से निचले वायुमंडल के विक्षोभ की जानकारी प्राप्‍त की जा सकती है। इसमें बहुत सारे फोटो डिटेक्‍टरों की सहायता से सूर्य या चंद्रमा जैसे बड़े अतिरिक्‍त पिंडों की चमक का अवलोकन किया जा सकता है।
      हिमालय क्षेत्र में टेलीस्‍कोप के इस तरह के कार्य के लिए विशेष वायुमंडलीय परिस्थितियां है। वहां पर अवलोकन के लिए कई घंटों तक बहुत अच्‍छी दृश्‍यता उपलब्‍ध होती  है। वायुमंडल में जलवाष्‍प भी कम होता है, जिसमें चुम्‍बकीय क्षेत्र और सही-सही वेग-मापन के लिए इन्‍फ्रा-रेड वेव लैंथ के अवलोकन में सहायता मिलती है। झील के आस-पास बहुत अच्‍छी  दृश्‍यता उपलब्‍ध है। झील के पानी के कारण जलवाष्‍प की मात्रा भी बहुत कम होती है तथा मानसून का भी इस पर असर नहीं होता।
      राष्‍ट्रीय वृहद् सौर टेलीस्‍कोप की यह परियोजना एक बहुत बड़ी परियोजना है, जिसमें भारतीय खगोल भौतिकी विज्ञान संस्‍थान, आर्यभट्ट परीवीक्षण विज्ञान संस्‍थान, टाटा मौलिक अनुसंधान संस्‍थान तथा खगोल शास्‍त्र और खगोल भौतिकी के लिए अंतर-विश्‍वविद्यालय केंद्र जैसे कई संस्‍थान शामिल हैं। इस परियोजना में 250 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा, जिसमें से अधिकतर राशि उपकरणों की खरीद पर खर्च होगी।
(पसूका विशेष लेख)
*लेखक एक स्‍वतंत्र लेखक हैं
नोट:- लेख में व्‍यक्‍त किये गए विचार लेखक के अपने हैं और जरूरी नहीं कि वे पसूका के विचारों से मेल खाते हों।   (पत्र सूचना कार्यालय)   02-अगस्त-2012 14:04 IST

Thursday, August 02, 2012

रक्षाबंधन के पर्व पर राष्‍ट्रपति ने किया आह्वान

महिलाओं की सुरक्षा और कल्‍याण प्रयासो को और बढ़ाया जाये 
राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने लोगों से महिलाओं की सुरक्षा और कल्‍याण प्रयासो को ओर अधिक करने का आह्वान किया है। श्री मुखर्जी आज राष्‍ट्रपति भवन में रक्षाबंधन के उपलक्ष्‍य में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि राखी स्‍नेह का एक धागा है जो बहनें भाईयों के हाथ पर बांधती है। हमें यह याद रखना चाहिए कि यह सिर्फ एक प्रथा न होकर एक शक्तिशाली प्रयास है जो प्रत्‍येक पुरूष को महिलाओं को सुरक्षा देने और सुरक्षित रखने की याद दिलाती है। मैं देश से महिलाओं की सुरक्षा और उनके कल्‍याण के प्रयासों को ओर अधिक करने का आह्वान करता हूं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे देश की महिलाएं हर समय सुरक्षित महसूस करें।

महिलाओं के पूरे अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्‍यक कदम उठाए जाने चाहिए। घृणित प्रथाएं जैसे महिला भ्रूण हत्‍या और दहेज हत्‍या की समाप्ति होनी चाहिए। बालिका शिशु का कल्‍याण हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।

इस पर्व के मौके पर हम सभी को शपथ देनी चाहिए कि हम सब भारत की सभी महिलाओं विशेष तौर पर बालिका शिशु की बेहतरी के प्रति खुद को समर्पित करेंगे।

इस समारोह में दिल्‍ली और आस पास के क्षेत्रों के विभिन्‍न स्‍कूलों के छात्रों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। इस अवसर पर छात्रों ने गीत गाए और कविता पाठ किया और राष्‍ट्रपति के साथ बातचीत की और उन्‍हें राखी भी बांधी।     (पत्र सूचना कार्यालय) 
      02-अगस्त-2012 17:06 IST

एक उपलब्धि और

भारत विश्‍व में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्‍ता
                                                                                                                                                               साभार चित्र 
90 करोड़ से भी अधिक उपभोक्‍ताओं के साथ भारत विश्‍व में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्‍ता बन गया है। वर्ष 2011 में विश्‍व की कुल ऑनलाइन जनसंख्‍या का 10 प्रतिशत से भी अधिक हिस्‍सा भारत में रहा है। केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद ने आज लंदन में यह बात कही। ‘’स्‍वास्‍थ्‍य सूचनाविज्ञान की भूमिका-भारत में आम आदमी के लिए स्‍वास्‍थ्‍य किस प्रकार विशिष्‍ट है’’ नामक विषय पर स्‍वास्‍थ्‍य सेवा और जीवनविज्ञान वैश्विक व्‍यापार शिखर सम्‍मेलन में अपने संबोधन में श्री आजाद ने कहा कि भारत में मोबाइल दूरसंचार सुविधाओं में अत्‍यधिक वृद्धि दर्ज की गई है। देश के दूरस्‍थ क्षेत्रों में निर्धनतम परिवारों तक पहुंची यह सुविधा समावेशी विकास का एक उदाहरण है। केवल वर्ष 2011 में ही भारत में 14 करोड़ 20 लाख मोबाइल फोन के नये उपभोक्‍ता इस सेवा के साथ जुड़ गए थे, जो पूरे अफ्रीका के मोबाइल फोन ग्राहकों की तुलना में दुगुना है और अरब राज्‍यों, सीआईएस और यूरोप को एक साथ मिलाकर उनसे अधिक है। भारत में पूरे विश्‍व की तुलना में मोबाइल फोन पर लगने वाला शुल्‍क सबसे कम है।आम जनता तक, विशेषकर दूरस्‍थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक मोबाइल फोन की पहुंच को महत्‍व देते हुए भारत ने हाल में मौजूदा स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को बढ़ाने के लिए उसे सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों से जोड़ने की दिशा में कदम उठाए हैं। स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने नाम, पता और टेलिफोन आधारित जच्‍चा-बच्‍चा खोज प्रणाली (एमसीटीएस) नामक एक नयी पहल की शुरूआत की है, जो गर्भवती महिलाओं और अधिकतम पांच वर्ष की उम्र के बच्‍चों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य और रोग प्रतिरक्षण सेवाओं का संपूर्ण वितरण सुनिश्चित करने में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल का एक विशिष्‍ट उदाहरण है। इन पहलों का शिशु म़त्‍युदर (आईएमआर) और मातृ मृत्‍युदर (एमएमआर) जैसे महत्‍वपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य संकेतों पर एक सकारात्‍मक प्रभाव कायम होगा। 
(पत्र सूचना कार्यालय)   02-अगस्त-2012 20:00 IST

......और राखी पर आतंकी हमला ...!

राखी के पावन मौके पर हुए बम धमाकों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि  आतंकी कभी भी कहीं भी खुल खेल सकते हैं। धमाकों की खबर को देश विदेश के मीडिया ने  प्रमुखता से प्रकशित की है। जालन्धर से प्रकशित लोकप्रिय समाचार पत्र दैनिक पंजाब केसरी ने भी यह खबर अपने मुख्य पृष्ठ पर प्रकशित की है। 

अँधेरे में चमका पूर्णिमा का चाँद

दृष्टि की अहमियत वही समझ सकते हैं जिनके पास दृष्टि नहीं होती।  आँखों में अँधेरा और दिल में रौशनी से प्यार रौशनी की चाह और सोते जागते बस एक ही सपना रौशनी का। हर पल रौशनी का ध्यान, रौशनी से लगाव, राशनी की ही लग्न।.....इस सब का परिणाम होता है की हर पल अँधेरे में जीने वाले इन लोगों के अंदर एक अलौकिक सी रौश्निरौशनी पैदा हो जाती है। इतनी छोटी सी उम्र में देश के सर्वोच्च पद पर आसीन महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से भेंट इस आंतरिक रौशनी का ही करिश्मा है। बहाना बना रक्षा बंधन का पावन दिन और  हुई राष्ट्रपति जी से। देश के प्रमुख को राखी बाँध पाना इन सब बच्चियों के लिए एक यादगारी दिवस बन गया।  इस अवसर पर वहां मौजूद पत्र सूचना कार्यालय के कैमरा मैं ने इन पलों को हमेशां के लिए अपने कैमरे में संजो लिया। बहुतही स्नेह के साथ राखी बंधवा रागे महामहिम मानों पूरे समाज को एक संदेश दे रहे हों ...अँधेरे में जो बैठे हैं।..नजर उन पर भी कुछ डालो।...अरे ओ रौशनी वालो।.....!... --रेक्टर कथूरिता   (PIB 02-August-2012

भूमि हस्‍तांतरण नीति में छूट की मंजूरी

प्रधानमंत्री ने महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं की बाधाएँ दूर की 
प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह ने सरकारी स्‍वामित्‍व वाली भूमि के लिए सरकारी भूमि हस्‍तांतरण नीति में छूट की मंजूरी दे दी है, ताकि ढांचागत परियोजनाओं को प्रक्रियागत देरी का सामना न करना पड़े।

पिछले वर्ष के प्रारंभ में सिर्फ उन मामलों को छोड़कर सरकारी स्‍वामित्‍व वाली भूमि के सभी तरह के हस्‍तांतरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जहां भूमि एक सरकारी विभाग से दूसरे सरकारी विभाग को दी जानी थी। इस बीच, आर्थिक मामलों के विभाग ने सरकारी स्‍वामित्‍व वाली भूमि के लिए व्‍यापक भूमि हस्‍तांतरण नीति तैयार की। यदि किसी विभाग को कोई परियोजना लागू करनी हो जिसके लिए भूमि को लीज़, लाइसेंस या किराय पर लेना है तो ऐसे मामले में उसे मंत्रिमंडल की विशेष मंजूरी लेनी होती थी।

इसके कारण ढांचागत परियोजनाओं खासतौर से सार्वजनिक निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं के लिए अनुमति देने में देरी हो रही थी। सड़क , रेल, बंदरगाह, नागरिक उड्यन और मेट्रो जैसी सभी सार्वजनिक निजी भागीदारी वाली ढांचागत परियोजनाओं को भूमि के हस्‍तांतरण की जरूरत होती है, क्‍योंकि ऐसी सभी परियोजनाएं प्राय: सरकारी भूमि पर बनाई जाती हैं। लीज़ पर लेने या देने के बाद भी भूमि पर सरकार का स्‍वामित्‍व जारी रहता है। प्रत्‍येक सार्वजनिक निजी भागीदारी वाली परियोजना के लिए मंत्रिमंडल की अनुमति लेने की प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लग जाता है।

इसलिए प्रधानमंत्री ने भूमि हस्‍तांतरण की मंजूरी देने के लिए कुछ विशिष्‍ट श्रेणी की परियोजनाओं के लिए प्रतिबंध में छूट देने का फैसला किया है। यह योजनाएं इस प्रकार हैं- 1. मंत्रालयों से वैधानिक प्राधिकरणों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को भूमि के हस्‍तांतरण के सभी मामलों को अनुमति दी जाएगी, बशर्ते भारत सरकार के सामान्‍य नियमों की अपेक्षाएं पूरी होती हों।

2. लीज़ या किराए या लाइसेंस पर छूट लेने वाले को भूमि हस्‍तांतरण के सभी मामले जो सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति के जरिए आकलित किए गए हों तथा वित्‍त मंत्रालय या संबंधित मंत्रालयों या मंत्रिमंडल (जैसा भी मामला हो) के जरिए परियोजना के मूल्‍य के आधार पर स्‍वीकार की गर्इ हों।

3. रेलवे संशोधन अधिनियम 2005 के प्रावधानों और उसके बाद इसके तहत बनाए गए नियमों तथा रेल मंत्रालय और भारत सरकार की प्रचलित नीतियों तथा दिशा निर्देशों के अनुरूप रेल भूमि विकास प्राधिकरण द्वारा रेल भूमि का विकास तथा इस्‍तेमाल।

इस फैसले से इस महीने से सार्वजनिक निजी भा‍गीदारी की परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

(पीआईबी)            02-अगस्त-2012 14:10 IST

Wednesday, August 01, 2012

एक उम्मीद के उद्घाटन पर स्वास्थ्य मंत्री का वादा

मिलावट करने वालों को किसी भी हालत में नहीं नहीं बख्शेंगे: मित्तल
एक उम्मीद का उद्घाटन:सर पर मंच पर सुशोभित हैं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मदन मोहन मित्तल और अन्य प्


स्वास्थ्य मंत्री श्री मदन मोहन मित्तल को सुस्वागतम कहे जाने की एक यादगारी तस्वीर 
निखिल सिघल नोबल ट्रस्ट की और से प्रायोजित एक उम्मीद इमारत का उद्घाटन करते स्वास्थ्य मंत्री एम एम मित्तल 
के ऍफ़ सी के खिलाफ ज्ञापन देने आये यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों से घिरी स्वास्थ्य मंत्री श्री मित्तल की कार 
लुधियाना : राज्य में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने व मिलावट करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। कोई भी बड़ा हो या छोटा जनता के स्वास्थ्य से किसी को भी खिलवाड़ करने की इज़ाज़त किसी को भी नहीं दी जाएगी। यह बात सेहत मंत्री मदन मोहन मित्तल ने बुधवार पहली अगस्त 2012 को  सिविल अस्पताल परिसर में एक आयोजन के दौरान मंच से कही। यह आयोजन निखिल सिंघल नोबल ट्रस्ट की ओर से बनाए गए नए भवन एक उम्मीद का उद्घाटन करने के शुभ अवसर पर किया गया था।  उन्होंने कहा कि पंद्रह अगस्त से राज्य की सभी जेलों में बंद महिला कैदियों के स्वास्थ की जांच लिए महिला डाक्टर नियुक्त की जाएंगी टंकी महिला रोगी अपनी बीमारी के बारे में खुल कर बता सकें और उनका इलाज सही वक्त  पर सही ढंग से हो सके। सभी सिवल अस्पतालों में कम से कम एक महिला डाक्टर, एक बाल  रोग विशेषज्ञ और एक सर्जन की नियुक्ति को भी आवश्यक घोषित किया गया। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में कम से कम दो डाक्टर और न्यूनतम इलाज भी अवशयक करार दिए गए। सभी सरकारी अस्पतालों को निर्देश जारी किए गए हैं कि अस्पताल में आने वाले बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गो का विशेष ध्यान रखा जाए। लडकों और लडकियों की जन्म दर अनुपात में अंतर को कम करने के लिए उनहोंने बहुत जोर दिया। में 108 नम्बर एम्बुलेंस को बहुत ही चमत्कारी बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गाँव हो या शहर यह बैन आधे घंटे में बताये गए स्थान पर पहुँच जाती है और गर्भवती महिला को घर से सिवल अस्पताल ले आती है। प्रसूति के बाद फिर उस महिला और बच्चे को घर छोड़ कर भी आती है। साथ ही उस परिवार को मन और बच्चे की परवरिश के लिए एक हजार रूपये भी दिए जाते हैं। नशे की बुराई कोजड से उखाड़ने के लिए  श्री मित्तल ने कहा कि इन बच्चों को नशे के चंगुल से निकलने के लिए मनो वैज्ञानिक  ढंग तरीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है। अकेले कानून या द्वयों से समस्या हल न होगी। जब तक मन में नशे से दूर होने की तडप न उठे तब तक बाकी उपाए अधिक समय तक कारगर नहीं रहते। स्वास्थ्य पर जोर देते हुए श्री मित्तल ने कहा की जब तक शरीर तंदरुस्त न हो तब तक अच्छा दिमाग या अच्छा मन भी कुछ ज्यादा अच्छा करके नहीं दिखा सकते। श्री मित्तल की बारें सुनते हुए लगता था की उन्होंने  इस सब पर गहन अध्यन किया है और कई नए प्रेक्टिकल तरीकों की खोज भी की है। अगर उस दिन रोष प्रदर्शनों का शोरुगुल और डिस्टर्बेंस न होती तो शायद वह इस बेहद अवशयक विषय पर काफी कुछ और भी बताते।इस मौके पर पूर्व सेहत मंत्री सतपाल गोसाई भी मौजूद थे। उन्होंने एक बड़ी कम्पनी के बर्गर में से एक छोटा सा सांप नीलने के मामले पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मीडिया से कहा कि  अगर सारा मामला उनके पास लाया जाये तो वह सरकार के हात्नों ही सरकार से अधिक सख्त कारवाई करायेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा की मिलावट करने वाला देश का दुश्मन है उसे छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता। अपने इस दौरे का दौरान स्वास्थ्य मंत्री प्रदर्शनकारियों के अंदाज़ से कुछ खफा नज़र आये। उन्हें यह बात बहुत बुरी लगे की प्रदर्शकारी अपना ज्ञापन मीडीया को साथ अ कर या दिखा कर देना चाहते हैं।  सिविल सर्जन डा. सुभाष बत्ता और भाजपा के जिला प्रधान प्रवीण बांसल सहित कई अन्य अधिकारी व नेता भी मौजूद थे। जैसा कि आम तौर पर होता है जल पान का प्रबंध बहुत ही अव्यवस्थित था। खाने पीने का सामान कम नहीं पर  पर हर एक तक पहुँचाने के मामले में गडबडी हो रही थी। मेहमान खड़े देख रहे थे और बिन बुलाये बहुत से लोग सामान पर झपट रहे थे। इस सब कुछ के बावजूद कुल मिला कर यह भी एक यादगारी आयोजन रहा।-रेक्टर कथूरिया 

पेप्सी-कोक की लूट का षड्यन्त्

कोक द्वारा भूगर्भ जल का अंधाधुंध दोहन 
सामान्य रूप से पेप्सी कोला की एक बोतल बनाकर बेचने में 10 लीटर पानी का खर्चा आता है। हालांकि बोतल में 300 मिली॰ ही पेय होता है बाकी पानी बोतल को धोने में तथा अन्य मशीनरी प्रयोग में खर्च होता है। भारत देश में पेप्सी कोला की लगभग 600 से 700 करोड़ बोतल प्रतिवर्ष बिकती हैं। अर्थात भारत में प्रतिवर्ष 6000 से 7000 करोड़ लीटर पानी प्रतिवर्ष इन कोला कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है।

"सेंट्रल ग्राउंड वॉटर एथॉरिटी" का कहना है की सरकार इन कोला कंपनियों से भूगर्भ जल के इस्तेमाल का कोई शुल्क नहीं लेती है, जबकि खेतों में भी पानी छोडने का टैक्स सरकार्ड द्वारा लिया जाता है। कितनी आश्चर्य की बात की एक तरफ पेप्सी और कोला जैसी विदेशी कंपनियां भारत के बेशकीमती भूगर्भ जल का इस्तेमाल करके हजारों करोड़ कमा रही हैं और हमारी सरकार इस पानी पर कंपनियों से कोई शुल्क नहीं ले रही हैं। दूसरी ओर भारत देश के 2 लाख से अधिक गाँव पीने के पानी से भी वंचित हैं। जिस पानी से भारत के लाखों लोगों एवं पशुओं की प्यास बुझाने का इंतेजाम हो सकता है, वही बेशकीमती पानी ज़मीन से दोहन करके ठंडे पेयोन में बर्बाद किया जा रहा है जिसका पैसा भी अमेरिका जा रहा है।

इस भूगर्भ जल पर पहला अधिकार भारतवासियों एवं पशुओं का है जिन्हें अपनी प्यास बुझाने के लिए इस जल की जरूरत है। दूसरा अधिकार उन करोड़ों किसानों का है जो देश के लोगों का पेट भरने के लिए इस जल का प्रयोग करते हैं। तीसरा अधिकार यदि हो सकता है तो उन उद्योगों का है जो हमारे जीवन के लिए अत्यंत जरूरी एवं उपयोगी वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। ठंडे पेय कोई जरूरी उद्योग नहीं हैं।

जिस देश के अधिकांश भागों में औसतन हर साल सूखा पड़ता हो, जिस देश के लाखों गाँव एवं करोड़ों मनुष्य, पशु, पक्षी पीने के पनि को तरसते हों वहाँ हर साल ठंडे पेय के नाम पर हजारों करोड़ लीटर पानी को बर्बाद करना एक "राष्ट्रीय अपराध" है।

पेप्सी- कोला के कारखाने जहां जहां भी लगे हुए हैं वहाँ की ग्राम पंचायत, नगर परिषद से भूगर्भ जल निकालने की अनुमति भी इन कंपनियों ने नही ली है। इन कंपनियों द्वारा प्रतिदिन करोड़ों लीटर पानी निकालने से संयंत्र के आस पास के गाँवों का भूगर्भ जल बहुत ही कम हो जाता है, इसी कारण केरल के प्लाचीमडा गाँव में कोका कोला को संयंत्र को बंद कराने के लिए आंदोलन हुआ था।

पेप्सी-कोक की लूट के षड्यन्त्र को जानने के लिए पढे:
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Monday, July 30, 2012

चुनौती जिस्म और जिंदगी दोनों को खोखला कर रहे नशे की

लुधियाना पुलिस ने और तेज़ किया अभियान
 नशे की नज़र अब पंजाब को भी लग चुकी है। जिंदगी को बेरंग और जिस्म को बेजान करने वाली नशे की लत असंख्य घरों लो बर्बाद कर चुकी है
पंजाब में नशे से चल रही बर्बादी की आंधी को रोकने के लिए अब पंजाब पुलिस ने भी कमर कास ली है नशे  को जढ़ से उखाड़ने में जुटी पुलिस को इस मिशन में सफलता भी मिल रही है। यह सफ;ता बताती है कि आंधी मों भी चिराग जला लिया गया जय।
Courtesy photo
पंजाब पुलिस ने समाजिक संगठनों को साथ लेकर नशे की लत के खिलाफ जन चेतना जागरूक करने के लिए संगोष्ठियों ला एक सिलसिला और तेज़ किया है पिछले कई बरसों से चल रहे इस अभियान में एक नई जान फूंकते हुए लुधियाना के कमिश्नर ईश्वर सिंह ने अब हर थाना क्षेत्र में इस मकसद के कार्य करने का आदेश दिया है। आदेश के बाद काम शुरू भी किया गया है। कहीं नाटकों का मंचन हो रहा है तो कहीं गीत संगीत. कहीं पर डिबेट हो रही है तो कहीं पर प्रदर्शनी या संगोष्ठी का आयोजन। ऐसा ही आयोजन रविवार 29 जुलाई को भी हुआ लुधियाना के के वी एम स्कूल में......
इस मौके पर कुछ ऐसे लोग भी थे जो पुलिस के इस अभियान के अंतर्गत अब नशे को हमेशां के लिए छोड़ चुके हैं यहाँ नशेडी भी थे जिनके जिस्मों पर बने इंजेक्शनों के निशान अपनी कहानी खुद कह रहे थे. अब पूरी तरह नशे के चंगुल से मुक्त हो कर समान्य ज़िन्दगी जी रहे एक युवक ने नशे से होने वाली तबाही का एक  मंजर असब के सामने रखा। नशे से मुक्त हुए इस युवक भरे गले से सब बताया ता कि उसे सुन रहे देख रहे लोग बच सकें। 
इस मौके पर इस अभियान के साथ बहुत लम्बे समय से जुड़े हुए डाक्टर इन्द्रजीत सिंह धींगडा ने भी इस मिशक के मकसद को लेकर नीदिया के साथ कुछ बातें की. काफी लम्बे समय से डाक्टर कोटनिस अस्पताल के मेडिकल सुप्रिटेंडेंट की ज़िम्मेदारी पूरी तनदेही से निभा रहे डाक्टर धींगरा समाज सेवा के लोटे अजस्र अग्रसर रगते हैं। विचारों से वामपंथी भी उन्हें अपना मानते हैं और धर्मकर्म के लोग भी। उन्होने नशे की ब्रै पर भी थोड़े से शब्दों में बहुत कुछ कहा और नशे के खिलाह पुलिस व समाज के इस सन्तुक्त अभियान पर भी। उन्होंने बताया की यह अभियान सन 2005 से चल रहा है।  
पुलिस कमिश्नर ईश्वर सिंह ने जहाँ नशे की बुराई और नशे के खिलाफ किये जा रहे प्रयासों की चर्चा की वहीँ यह भी साफ़ साफ़ कहा कि पुलिस नशे की बुराई को समाप्त करने के लिए और समाज को बचाने के लिए दृढ़ संकल्प है
पुलिस कमिश्नर ईश्वर सिंह ने यह भी साफ़ साफ़ कहा अगर किसी को नशे के किसी व्यापारी का पता चले तो वह सीधा मुझे बताये.
अब देखना है कि पैसे और राजनीति के मकडजाल में फ़ैल रहे नशे के कारोबार को जड़ से उखाड फेंकने में पुलिस कहाँ तक सफल होती है. आओ दुआ करें कि पुलिस जल्द सफल हो। ---रेक्टर कथूरिया

लुधियाना के लोग फिर हुए मायूस

एक जानीमानी कम्पनी के बर्गर में छोटे से सांप जैसा जीव 
बड़े बड़े शहरों में अक्सर होती हैं छोटी छोटी बातेंइस तरह का जवाब एक बार फिर मिला लुधियाना वासियों को उस समय जब बर्गर में सांप मिलने की खबर से भी नहीं चेता प्रशासन क्यूंकि बर्गर किसी सडक किनारे खड़ी रेहड़ी से नहीं बल्कि एक बड़ी कम्पनी से मिला था। जब  नाम बड़े और दर्शन छोटे की बात एक बार फिर उस समय सही सिद्ध हुई जब एक जानी मानी अंतर्राष्ट्रीय कम्पनी के बर्गर में छोटा सा सांप मिला. इस घटना के बाद लुधियाना के लोग भोजन की साफ़ सफाई और शुद्धता को लेकर बेहद निराश हो गए हैं
गर्मी और व्यस्तता से बचकर थोडा सा स्कून पाने के लिए लोग फुर्सत के कुछ पल निकाल ही लेते हैं. यही किया था उस दिन लुधियाना में एक मध्यवर्गीय परिवार ने इस परिवार ने अपने छोटे से नन्हे मुन्ने की फरमाईश पूरी करने के लिए बर्गर मंगवायाबच्चा चूंकि छोटा था इस लिए स्वयम अपने मूंह से नहीं कह सकता था उसकी मोम (माता) ने बर्गर काट काट क्र उसे खिलाना शुरू कर दिया बर्गर के छोटे छोटे टुकड़े करते करते सामने आया एक सांप का बच्चा. इसे देख कर परिवार के होश उड़ गए महिला की चीख निकली तो बाकी के ग्राहक भी वहां आये. मामला देख कर सब भडक उठे. वहीं मौजूद एक ग्राहक ने इस साडी घटना की वीडियो बना ली
आप उस समय की तस्वीरें भी देख सकते हैं......जिनमें बर्गर खाने वाले परिवार के मुखिया और सबंधित रेस्टुरेंट के मैनेजर  भी नज़र आ रहे हैं.
इस घटना से निराश हुए लोग इस बात को लेकर भयभीत भी हैं की इतनी बड़ी साख के रेस्टोरेंट में भी यह हाल है.

अब देखना है की सडक किनारे खड़ी छोटी छोटी रेहड़ियों पर जोर आजमाई करने वाला प्रशासन बड़ी कम्पनी के सामने भी आँख उठा पाटा है या नहीं ?   --रेक्टर कथूरिया