Friday, September 30, 2011

काले दिनों का सच !

पिछले दिनों किसी केन्द्रीय मंत्री ने एक ब्यान दिया था कि आतंकवाद में से भी वामपंथी आतंकवाद सबसे अधिक खतरनाक है. इस खबर को अख़बार ने भी बहुत प्रमुखता से प्रकाशित किया था. खबर देख कर मेरे पास बैठे कुछ मित्र बहुत ही अजीब मुस्कान से मुस्करा रहे थे. एक ऐसी मुस्कान जिसमें गुस्सा भी नजर आ रहा था. बोले इसे वामपंथी आतंकवाद तो सबसे खतरनाक नजर आता है पर उस आतंक की यह बात ही नहीं करता जो नवम्बर-84 में राजधानी की सडकों पर नजर आया था. घर से निकालना, फिर गले में टायर डाल डाल  कर जीवित जलाना...यह कौन सी अहिंसा थी. दुःख की बात यह है  कि आज भी इन लोगों को नवम्बर-84  की घटनाएं आतंक नहीं लगती. पंजाब की एक पूर्व मुख्यामंत्री प्रोफैसर दविंद्रपाल  सिंह भुल्लर को फाँसी देने की तो वकालत करती है पर जिन लोगों ने नवम्बर-84 में मौत का तांडव किया उनके बारे में वह एक शब्द भी नहीं बोलती.. इन लोगों को कभी भगवा आतंकवाद नजर आता है, कभी वामपंथी आतंकवाद नजर आता है..पर अपने पंजे का आतंक कभी नजर नहीं आता ! उन दिनों में क्या क्या हुआ इसे दोहराना उचित नहीं होगा पर एक सरपंच ने उन लोगों पर कुछ सवाल उठाये हैं जो मानवीय जान के नुक्सान पर भी अपनी राजनीती चलाते हैं. हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले में आते गाँव होन्द चिल्ल्ड में जो कुछ हुआ उसे इस सरपंच ने अपनी आखों से देखा था.एक हाथ में तेल या पैट्रोल की पीपी और दुसरे में माचिस. हमलावर बहुत ही साफ़ शब्दों में समझाते की हमारे रास्ते से हट जयो वरना....और सरपंच हट गया. अगर नहीं हटता  तो शायद वे लोग इसे पूरी तरह से ही रास्ते से हटा देते. इस सरपंच ने अपनी जान बचाने की कीमत अदा  कर दी है, उसने सच सच बता दिया है कि उस समय क्या क्या हुआ था. अब देखना यह है कि इस वक्त आम आदमी का अगला कदम क्या होगा और लीडरों का अगला कदम क्या होगा ?

अब राजनीती के मैदान में बड़ी बड़ी बातें करने वाले लीडरों का अगला कदम भी देखा जायेगा और संगत व जनता का अगला कदम भी. उन दिनों उजाड़ी गयी इस जगह को दोबारा बसाने में सिख संगत या फिर सिख लीडरों को कौन रोक रहा है ? अगर यहाँ मारे गए उन लोगों की स्मृति में यहाँ कोई गुरुद्वारा भी बनाया जाना है तो उसमें और देरी कौन कर या करवा रहा ? अगर आप भी इस मुद्दे पर कुछ कहना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. आपके विचारों की इंतज़ार बनी रहेगी ! सवाल किसी एक पार्टी या एक समुदाय का नहीं. सवाल है देश की संस्कृति का, देश के कानून का, देश के सदभाव का ! अगर आम नागरिक का विशवास इन चंद नेतायों की स्वार्थ भरी नीतियों के कारण भंग होता है या फिर कुछ बेगुनाहों को बचाने के लिए क़ानून और इन्साफ के साथ कोई खेल खेला जाता है तो यह निश्चय ही बहुत बड़े दुर्भाग्य की बात होगी ! गौरतलब है की इस वीडियो क्लिप को पोस्ट किया है इस स्थान का पता लगाने वाले इंजीनियर मनविन्द्र सिंह ने लेकिन आप इस सरे मुद्दे पर क्या सोचते हैं...क्या कहना चाहते हैं....क्या होना चैये इस मुद्दे पर अगला कदम ? आपके विचारों की इंतज़ार बनी रहेगी.

Wednesday, September 28, 2011

अमृतसर का विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेला

नवजात शिशु से लेकर नौजवान तक बनते हैं लंगूर 
दस दिनों तक ब्रह्मचर्य व्रत के साथ पूरा सात्विक जीवन
अमृतसर : गजिंदर सिंह किंग: 
पंजाब के जिला अमृतसर के बड़ा हनुमान मंदिर में हर वर्ष की तरह लगने वाला विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेला नवरात्र के पहले दिन से शुरू हो जाता है, इस मेले में नवजात शिशु से लेकर नौजवान तक लंगूर बनते हैं और पूरे दस दिनों तक ब्रह्मचार्य व्रत के साथ-साथ पूरे सात्विक जीवन को व्यतीत करते हैं, इस दस दिवसीय व्रत का अंत दशहरे वाले दिन होता है, आज इस मेले में जहां स्थानीय बच्चे लंगूर बनते है, वहीं देश-विदेश से आ कर बच्चे लंगूर बनते है.
अमृतसर का विश्व प्रसिद्ध बड़ा हनुमान मंदिर, कहा जाता है कि इस मंदिर में जो श्री हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है, वह अपने आप ही यहां पर प्रकट हुई थी, इसके बारे में कहा जाता है, कि जब श्री राम ने सीता माता को एक धोबी के कटाक्ष पर वनवास के लिए भेज दिया था, तो उन्होंने उस समय महर्षि वाल्मिकी के आश्रम में पनाह ली थी और वहीं पर अपने दो पुत्रों लव और कुश को जन्म दिया था
इस बीच श्री राम ने अश्वमेध यज्ञ करवाया और अपना घोड़ा विश्व को विजयी करने के लिए छोड़ दिया, जिसे इसी स्थान पर लव और कुश ने पकड़ कर बरगद के पेड़ के साथ बांध दिया, इस पर जब श्री हनुमान लव और कुश से घोड़ा आजाद करवाने के लिए पहुंचे, तो लव और कुश दोनों ने उन्हें भी बंदी बना लिया और इसी स्थान पर हनुमान को बैठा दिया, इसके बाद से ही यहां पर श्री हनुमान जी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हो गई.
ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी इस हनुमान मंदिर से अपने मन की मुराद मांगता है, वह पूरी हो जाती है और मांग पूरी होने पर वह व्यक्ति इन नवरात्रों में लंगूर का बाना पहन कर यहां हर रोज सुबह-शाम माथा टेकने के लिए आता है. 
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पंजाब के जिला अमृतसर के बड़ा हनुमान मंदिर में लंगूरों का मेला बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है, इसके लिए खास तौर पर लोगों में उत्साह देखने को मिलता है और बड़ा हनुमान मंदिर में हनुमान जी जिनकी मुरादें पूरी करते है और जिन्हें पुत्र की प्राप्ती होती है, वह बड़ा हनुमान मंदिर में आपने पुत्र को लंगूर वेश में माथा टेकने के लिए जरूर पहुंचते हैं और ढोल की ताल पर नाचते है , विपन खन्ना उसकी पत्नी अनुराधा अपने परिवार समेत आज पुत्र प्राप्ति की मानत पूरी होने के बाद यहाँ इस मंदिर में आपने बच्चे को लंगूर बनाने के लिए आयी है, दरअसल पिछले 14 साल से यह परिवार पुत्र से वंचित था, लेकिन जब उन्होंने यहाँ इस पवित्र मंदिर में मानत माँगी, तब उन के घर में पुत्र ने जन्म लिया, वहीँ जिस के चलते आज उन्होंने आपने बेटे के वस्त्रों की पूजा कर आपने बेटे को वस्त्र पहना कर उस को लंगूर बनाया है और आज वह यहाँ पर आपनी मानत उतारने के लिए यहाँ पर आये है 
         यही नहीं जो लोग यहाँ पर आपने बच्चो को लंगूर बनाते है, उन को कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है, जैसे कि दस दिनों तक पलंग पर नही सोना, कोई खंर वाली चीज चाक़ू से कट नही खाना, सुबह शाम नंगे पाँव आपने लंगूर बनाए बेटे के साथ ही ज़मीन पर सोना और सुबह-शाम मंदिर में माथा टेकने जाना और यहाँ पर मंदिर में उन्होंने मनोकामना की थी जो की पूरी हुई है. 
विपिन अकेला ऐसा नहीं है, दरअसल यहाँ पर हजारों ऐसी महिलाए है,  जिन की यहाँ पर मनोकामना पुरी हुई है और इस मंदिर में आपने बच्चे को एक विशेष पोशाक में लंगूर बना कर ढोल और नगाड़े की ताल पर यहाँ आ कर नाचते है और इस मंदिर में माथा टेकते है, इस दौरान  निदेविका श्रद्धालू का कहना है, कि इस मंदिर से मानत पूरी हुई है और पुत्र की प्राप्ति हुई है, आज मानत पूरी करने के लिए यहाँ पर आए है. 
यह ही नही, जहाँ इस मन्दिर में लोग पुत्र प्राप्ति के लिए आते है, वहीं इस मन्दिर में एक ऐसा परिवार भी है, जिस ने की इस पुरुष प्रधान समाज में बेटी को आगे लाया  है, यह है अनिल और उस की पत्नी पूजा  के घर में दूसरी बेटी ने जन्म लिया है और आज वह यहाँ पर आपनी बेटी सिया को लंगूर बनने के लिए आए है, इस दौरान उन्होंने बताया, कि यहाँ पर आपने बच्चे के लिए दुआ की थी और उन के घर में बेटी हुई है, लेकिन वह बेटा और बेटी में कोइ अन्तर नही समझते, जिस के चलते उन्होंने सारे रिति रिवाज़ों को खत्म कर के आज यहाँ  पर आपनी बेटी को लंगूर बनाया  है 
       यहीं नहीं इस मंदिर के पुजारी राम निवास पाठक  ने इस मंदिर की जानकारी देते हुए बताया, कि यहाँ पर खुद हनुमान जी आए थे और इस मंदिर में उन्होंने लव-कुश ने घोड़ा छुडवाने  की कोशिश की थी, तब उन को यहाँ पर इस पेड़ के साथ बाँध दिया गया था, तब से इस मंदिर में यह एक प्रथा चली आ रही है, वहीं इस मंदिर में लोग मानत मांगते है और पुत्र पाप्ति के बाद मानत पूरी करने के लिए आपने बच्चे को लंगूर बनाते है 
        फिलहाल आस्था के यह केंद्र पूरी दुनिया में एक ही है और यह ही नहीं जहाँ पूरी दुनिया माँ के नवरात्रे मानती है, वहीं हनुमान भगत यहाँ पर लंगूर बन कर नाच गा कर इस मंदिर की शोभा को बढ़ाते है 

Sunday, September 25, 2011

नशीले पदार्थों के तस्कर लगातार सरगर्म


स्टेट स्पेशल ओपरेशन सेल ने पकड़ी 30 करोड़ की हेरोइन  
 अमृतसर: 25  सितम्बर: (गजिंदर सिंह किंग) 
पंजाब के स्टेट स्पेशल ओपरेशन सेल को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब उन्होंने एक तस्कर को 6 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया, दरअसल जब पुलिस टीम ने इन को पकड़ने के लिए गयी, तब इस ने पुलिस टीम पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी, तकरीबन एक घंटे की मुठभेड के बाद इस को गिरफ्तार किया गया.
नशीले पदार्थों के ये तस्कर इतने बेखुअफ़ थे की इन लोगों ने पुलिस पर गोली चलाने में भी कोई हिचक्चाहत महसूस नहीं की.
पकिस्तान की तरफ हेरोइन की तस्करी का यह एक नया मामला सामने आया है, जब पंजाब के खुफिया विभाग के स्टेट स्पेशल ओपरेशन सेल ने एक व्यक्ति को हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया, दरअसल पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली, कि आज सुबह एक व्यक्ति चीचा भकना रोड पर हेरोइन की खेप किसी को देने के लिए आ रहां है, पुलिस ने सारी खबर का बारीकी से पता लगाने के बाद अपना जाल बिछाया.
जब आरोपी तस्कर दरबारा सिंह मोटर साइकिल पर सवार हो कर आ रहा था तो  पुलिस ने वहां पर नाका लगा कर जब उस को पकड़ने की कोशिश की, तब तस्कर दरबारा सिंह ने पुलिस पर गोलियां चलानी शुरू कर दी, पुलिस ने भी जवाबी कार्यवाही तकरीबन एक घंटे तक चली, फायरिंग के बाद  एक तस्कर दरबारा सिंह को गिरफ्तार कर लिया और इन का दूसरा साथी हरजिंदर सिंह जो कि  एक बड़ा तस्कर है, वहां से भागने में सफल हो गया , वहीँ पुलिस ने पकड़े हुए तस्कर के पास से 6 किलो हेरोइन एक पाकिस्तानी पिस्तौल और दो जिंदा कारतूस बरामद की  है.
पंजाब के स्टेट स्पेशल ओपरेशन सेल के ऐ,आई,जी कौस्तुब शर्मा का कहना है, कि आरोपी दरबारा सिंह के सम्बन्ध पकिस्तान के एक बड़े तस्कर कला मसीह के साथ है और कला मसीह को स्टेट स्पेशल ओपरेशन सेल की गिरफ्त में है साथ ही दरबारा सिंह आपने इलाके में छोटी छोटी मात्र में हेरोइन बेचता था और मई के महीने में यह तकरीबन दस किलो हेरोइन की खेप पकिस्तान से भारत में भेज चूका है, 
उन्होंने कहा, कि  दरबारा सिंह पर पहले कोई ऐसा मामला दर्ज नहीं है, उसके पास से जो पिस्तौल मिली है, वह पकिस्तान की अच्छी क्वालिटी की बनी हुई है, साथ ही उन्होंने कहा, कि इस का एक साथी हरजिंदर सिंह वहां से भागने में सफल हो गया और जल्द ही उस की गिरफ्तारी की जायेगी और पकड़े तस्कर के पास से 6 किलो हेरोइन, एक पकिस्तानी पिस्तौल, दो जिंदा कारतूस और एक मोटर साइकिल बरामद किया गया है और पकड़ी गई हेरोइन की अंतर राष्ट्रीय बाज़ार में 30 करोड़ रूपए कीमत है
           
         फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर सीमा पार से तस्करी के नेटवर्क का भांडा-फोड़ किया है, जहाँ पैसों का लालच दे कर सीमा पार के तस्कर भारत में नशे के जाल को बिछा रहे है और दरबारा सिंह जैसे लोग चंद पैसों की खातिर इस तरह की स्मगलिंग की गतिविधियों को अंजाम देते है.
            

श्रीनवरात्रि महामहोत्सव-2011 कार्यक्रम

विद्गव धर्म चेतना मंच
श्री ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति

R.C.Road, C.Ramapuram,
Ramachandrapuram Mandalam,
Tirupati-517561,
Tel. 918772247056,
Mob.09866622049,09395149611
Dated 25 Sept. 2011
श्री ब्रह्मर्षि आश्रम तिरुपति में

कल से विशेष आयोजन प्रारम्भ

तिरुपति, २५ सितम्बर। विद्गव धर्म चेतना मंच श्री ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति द्वारा दिनांक २८ सितम्बर से ६ अक्टुबर २०११ तक श्री नवरात्रि महामहोत्सव का आयोजन किया गया है। इस महामहोत्सव में शामिल होने के लिए देद्गा विदेद्गा से हजारों की संखया में भक्त मॉ के दरबार में दद्गानार्थ उपस्थित होंगे। आश्रम में श्री नवरात्रि महामहोत्सव की व्यापक तैयारियां चल रही है। विद्गााल माता दरबार को सजाया जा रहा है।                           
विद्गव धर्म चेतना मंच श्री ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष श्रीमती इंदु राठौड़ ने बताया कि मां भवानी के दरबार में एवं विद्गवसंत ब्रह्मर्षि श्री गुर्वानन्द जी स्वामी 'गुरुदेव' के सान्निध्य में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का प्रारम्भ २८ सितम्बर को कलद्गा स्थापना से होगा। २९ को गुरु पूजन पर्व, ३० को बसन्तोत्सव-सरस्वती वंदना, १ अक्टुबर को भक्त और भगवान, २ को मॉं के दरबार में लड्‌डू गोपाल दृद्गय, ३ को देवी मॉ के नेत्रों की पट्‌टी खोली जायेगी तथा भक्त मॉ के आलौकिक दिव्य दृष्टि को पायेंगे। ४ को सुहागिन व कन्या पूजा, ५ को महाचंडी यज्ञ तथा ६ अक्टुबर को पारणा व आद्गाीर्वाद का कार्यक्रम होगा। श्री ब्रह्मर्षि प्रांगण में मां के दरबार में प्रतिदिन युवा गुरुभक्त टीम द्वारा भक्तिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेगें।
प्रतिदिन विद्गवसंत ब्रह्मर्षि श्री गुर्वानन्द जी स्वामी 'गुरुदेव' की दिव्य दृष्टिअमृतवाणी जीवन की दिद्गाा व दद्गाा दोनों बदल देती है। आश्रम आचार्य पंडित श्री श्रीनिवास श्रीमाली एवं उनकी टीम प्रतिदिन माता के दरबार में होने वाले कार्यक्रमों की विधि पूर्वक पूजा अर्चना करायेंगे। देद्गा के प्रसिद्ध गायक कलाकार प्रतिदिन सांयकालिन कार्यक्रमों में भक्ति रस प्रस्तुत करेगें तथा जगराता व डांडिया रास के कार्यक्रम भी होंगे।

(कमल आत्रेय)
मीडिया प्रभारी,मो. 9460061190

"अहिल्या "// अलका सैनी की नयी नज़म


कल जब मै तुम्हारे घर की तरफ आई
तो देखा दरवाजे  और खिड़कियाँ खुले थे
मेरे  अंतर्मन में हजारों पुष्प  खिल गए    
पर  देखते-देखते  दरवाजे और खिड़कियाँ बंद हो गए
यह  देख  मेरी रूह गहराई तक  काँप गई   
खुश्क आहों में  मैं   थर्रथर्राती रही 
दर्द से बिलखकर सुबकती  रही 
गिड़गिडाकर इन्तजार करती रही 
दरवाजा खुलने का 

पर कोई  दरवाजा नहीं खुला 
मै बहुत देर तक बाहर सामने की रेलिंग पर बैठी सोचती रही 
शायद समय देखकर तुम आओगे 
मुझे उठाओगे, मुझे अपने सीने से लगाओगे 
पर तुम नहीं आए 
मै वहीँ नीचे घास पर बैठे- बैठे सोने लगी 
सारी रात तुम्हारी राह देखती रही 

आसमान मेरे आँसुओं का गवाह था 
वो भी मेरे साथ पानी बरसा रहा था
धरती का आँचल भी मेरे साथ भीग रहा था 
पेड़- पौधों की हालत भी मेरे जैसी थी 
पास में बैंच के नीचे एक कुत्ता भी 
बीच- बीच में अपनी नजर उठा लेता था 
दूर एक गाय शायद प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी 
हम सब मिलकर एक दूसरे का दुःख बाँट रहे थे   
कई राह चलते मुझ पर बेचारी सी नजर डाल कर आगे बढ़ गए 
जैसे ठंडी हवाएँ मेरे तन को छूकर जाती रही 
मै बारिश के तूफ़ान  में भीगती रही हमेशा की तरह 
पर वहाँ कोई नहीं था मेरे आंसू पोंछने वाला 
जब भी अँधेरे में कोई आकृति नजर आती 
मै उठ कर बैठ जाती कि शायद तुम आए होंगे 
फिर अपना वहम समझ कर वहीँ लेट जाती
मुझे पहली बार उस अँधेरी भयानक रात से भी डर नहीं लगा 
सुबह होते -होते 
आसमान भी  बरस कर थक गया 
धरती की प्यास भी बुझ गई 
पेड़- पौधे भी उजली किरण में खिल  गए 
कुत्ते को कहीं से एक हड्डी मिल गई 
बछड़ा अपनी माँ का दूध पीने लगा 
परन्तु मेरे नैनों का नीर कहाँ सूखा था ?
फिर मै भी मुक्त  हो गई और 
तब  मेरी रूह आँसुओं के सैलाब में विलीन हो गई  
पीछे छोड़ गई   एक बेजान पत्थर का बुत  
जो आज तक अहिल्या की तरह 
किसी राम के आने का इन्तजार कर रहा है 
पर कलयुग में कोई राम हो सकता है ?
     
                                --अलका सैनी