Saturday, September 17, 2011

श्यामल सुमन की दो नई कवितायेँ

                                                  चित्र दैट्स हिंदी से साभार


क्या तिहाड़ संसद बन जाए


अब तिहाड़ में कितने मंत्री
बतियाते आपस में संतरी

पता नहीं अब कितने आए
क्या तिहाड़ संसद बन जाए

संसद में चलता है झगड़ा
यह मिलाप का मौका तगड़ा

हो जुगाड़ हम कैसे छूटें
बाहर जाकर फिर से लूटें

यूँ तो हम सब भाई भाई
न्यायालय ही बना कसाई

न्यायालय को रोके कौन
इसीलिये है सत्ता मौन

किया है जनता से जब धोखा
जेल में खाएं खिचडी चोखा


उसको बना सिकन्दर देखा

भालू देखा बन्दर देखा
यह लोगों के अन्दर देखा

जो दबंग हैं नालायक भी
उसको बना सिकन्दर देखा  

सुख सारे शोषण के दम पर
भाषण मस्त कलन्दर देखा

सांसद की नैतिकता में भी
कितना बड़ा भगन्दर देखा

विकसित देश सुमन का ऐसा
सबके आँख समन्दर देखा

Thursday, September 15, 2011

कांग्रेस ने हमेशा पंजाब का नुक्सान ही किया


 स.प्रकाश सिंह बादल एसजीपीसी चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे अमृतसर
  अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग की खास रिपोर्ट

पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव  प्रचार के लिए अमृतसर पहुचे, उन्होंने अमृतसर के हल्का बाबा बकाला के जडियाला इलाके में चुनावी रैली को संबोधित किया और लोगो से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव में अकाली पार्टी को वोट डालने की अपील की.

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव 18 सितम्बर को होने जा रहे है, वही आख़री चरण में चुनाव प्रचार तेज हो गया है,  पंजाब के मुख्य मंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल आपने दौरे के तहत अमृतसर के ग्रामीण इलाकों में चुनावी रैलीयां करते हुए नज़र आये, पंजाब के मुख्य मंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल ने अमृतसर के हल्का बाबा बकाला के जडियाला इलाके में अमरजीत सिंह जानिया के हक में एक रैली की और लोगों को एक जुट होकर पार्टी की जीत दिलाने की अपील, पंजाब के मुख्य मंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल ने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, कि  एसजीपीसी चुनाव में माझे के लोगों का महत्वपूर्ण रोल रहा है और इस बार भी वह चाहते है, कि यह जीत एक बार फिर उन के साथ हो. 

इस मौके पर  उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, कि कांग्रेस ने हमेशा पंजाब का नुक्सान ही किया है और इस बार भी चुनाव में उन की पार्टी की जीत होगी और विधान सभा चुनाव में भी उन  की सरकार विजय रहेगी,  वहीँ पत्रकारों से बात करते हुए कहा, कि आज जो परमजीत सिंह सरना उन के साथ बहस की बात कर रहे है, वह उन के साथ बहस तो दूर की बात है, वह उन के साथ बात भी नहीं करना चाहते क्यों कि वह पंथ के पीठ चूरा घोपना चाहता है और वह आपने अच्छे पद और सन्मान के लिए कांग्रेस के साथ मिला हुआ है.

गुरुधामों की ज़मीनों के गबन का मामला गरमाया

रघुबीर सिंह राजासांसी ने मांगा मक्कड़ से जवाब 
अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग: 
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेठी के चुनाव अब आखिरी चरण में हैं. इस नाज़ुक मौके पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला और तेज़ हो गया है. पंथक मोर्चा के उम्मीदवार रघुबीर सिंह राजासांसी ने एसजीपीसी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ पर निशाना साधाते हुए कहा कि वह 16 तारीख को श्री अकाल तख्त साहिब में 2  घंटे के लिए अवतार सिंह मक्कड़ का इंतज़ार करेंगे, ताकि जमीनों के गबन की बात स्पष्ट हो सके.  उनहोंने कहा कि अवतार सिंह मक्कड़ गुरुधामों की जगह  प्राइवेट ट्रस्ट को दे रहे है, जोकि गुरुद्वारा एक्ट के खिलाफ है और अवतार सिंह मक्कड़ उन के सवालों का जवाब दें तन कि साडी बात संगत के सामने आ सके. 
       शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव को ले कर प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ पर मोर्चा खोलते हुए राजासांसी से पंथक मोर्चा के उम्मीदवार रघुबीर सिंह राजा सांसी ने यह सारा मामला मिडिया के सामने रखा. एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह गुरुद्वारा साहिब की ज़मीन को निजी ट्रस्ट के हवाले कर रहे हैं.  उनहोंने कहा कि अवतार सिंह मक्कड़ कि तरफ से गुरुधामों की जगह  प्राइवेट ट्रस्ट कोइस तरह जमीन दिया जाना  गुरुद्वारा एक्ट के खिलाफ है, उन्होंने कहा, कि पिछले आठ साल से जो गुरुधामों की ज़मीनों का गबन हो रहा है, उसके लिए अवतार सिंह मक्कड़ से जवाब लेने के लिए वह 16 तारीख को सुबह 10  बजे से ले कर 12  बजे तक श्री अकाल तखत साहिब में अवतार सिंह मक्कड़ का इंतज़ार करेंगे, ताकि अवतार सिंह मक्कड़ वहां आ कर उन के सवालों का जवाब दे सके, उन्होंने कहा कि जो आंकड़े अवतार सिंह मक्कड़ दे रहे है वह बिलकुल गलत है, जिस के चलते वह श्री अकाल तख्त साहिब में उन का इंतज़ार करेंगे, और वह सारे पैसों का हिसाब-किताब उनके सामने रखना चाहते है.

यह सरकार अब तक की सब से भ्रष्ट्र सरकार


अमृतसर में कांग्रेस ने किया डी,सी दफ्तर का घेराव   अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग
पंजाब भर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आज डी,सी दफ्तरों का अकाली दल के खिलाफ घेराव किया, जिस के चलते आज अमृतसर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अमृतसर के डी,सी दफ्तर का घेराव कर  अकाली दल के खिलाफ जम कर प्रदर्शन किया गया, उन का कहना है, कि यह सरकार अब तक की सब से भ्रष्ट्र सरकार है. कार्यकर्तायों में बहुत जोश था.
अमृतसर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आज पंजाब प्रदेश कमेटी के प्रधान कैप्टन अमरेंदर सिंह के आह्वान पर डी,सी दफ्तर का घेराव कर इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने जम कर नारे बाज़ी की, इस मौके पर अमृतसर के कांग्रेस के प्रधान भी इस मौके पर मौजूद थे, इस मौके पर कांग्रेस देहाती के प्रधान हरप्रताप सिंह अजनाला ने डी,सी दफ्तर के घेराव बारे जानकारी देते हुए बताया, कि पंजाब की अकाली सरकार अब तक की सब से भ्रष्ट्र सरकार है और वह सरकार को जगाना चाहते है, कि जो भ्रष्ट्राचार इस सरकार के राज़ में हुआ है, ऐसा कभी नहीं हुआ और आज वह एक चेतावनी देने के लिए यहाँ आये है, उन्होंने कहा, कि जो पिछले कुछ समय में आम जनता पर झूठे मामले दर्ज करवाए गए है, वह इस का जवाब चाहते है और आज सरकार ने सब जगहों पर कब्ज़ा किया हुआ है, उन्होंने भ्रष्ट्राचार बारे जानकारी देते हुए बताया, कि जो सरकार भ्रष्ट्राचार की बात कर रही है, वह गलत है क्यों कि जो खुद भ्रष्ट्र हो वह भ्रष्ट्राचार की बात न करे और आने वाले समय में विधान सभा चुनाव में कांग्रेस सरकार बनायेगी, साथ ही इस मौके पर कई आला नेता इस मौके पर मौजूद थे और वहीँ उन्होंने यहाँ जनता को संबोधित भी किया.

आठ वेगन माल गाडी चलाने पर विचार


भारत-पाक रेलवे अधिकारीयों के दरम्यान हुई मीटिंग
 अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग
देश की सीमा पर आज भारत के रेल अधिकारीयों और पकिस्तान के रेल अधिकारीयों की एक अहम मीटिंग वाघा सीमा पर हुई, जिस में पकिस्तान के लाहौर डिवीजन की रेल के उच्च अधिकारी और भारत की तरफ से फिरोजपुर डिवीजन  के अधिकारीयों ने भाग लिया, मीटिंग के तहत आने वाले समय में दोनों देशों के  दरम्यान व्यापार को बढाने के लिए आठ व्हीलर वैगन चलने पर जोर दिया गया.
अमृतसर के नज़दीक वाघा सीमा पर लाहौर रेलवे डिवीजन के सुपरिडेंट का एक विशेष दल वाघा सीमा के रास्ते भारत पहुंचा, जहाँ वह भारत के रेलवे फीरोजपुर  मंडल के अधिकारीयों के साथ मिला और एक विशेष मीटिंग दोनों देशो के अधिकारीयों के बीच में हुई, जिस में भारत और पकिस्तान के बीच चल रही दोस्ती की ट्रेन समझौता एक्सप्रेस में आ रही मुश्किलों पर चर्चा की गयी, इस मौके पर भारत के कस्टम अधिकारी भी इस मीटिंग में मौजूद थे, वहीँ इस विशेष मीटिंग में पिछले दिनो रेल के रास्ते से आई  हेरोइन, हथियार और जाली करंसी का मुख्य मुद्दा रहा,  इस के साथ समझौता के रास्ते कुछ हथियार भी भारत में आये थे, उस को भी भारत के द्वारा इस विशेष मीटिंग में रखा गया, वहीँ दोनों देशों ने इस मीटिंग में व्यापार को और बढाने के लिए कुछ नए प्रस्ताव भी सामने रखे, वहीँ इस मौके पर फिरोजपुर मंडल  के डी,आर, एम विश्वेश चौबे ने मीटिंग की जानकारी देते हुए बताया कि इस मीटिंग में दोनों देशों के अधिकारीयों के द्वारा माल गाडी में नए डिब्बे लाने पर विचार किया गया है, जिस के तहत आने वाले समय में आठ व्हीलर वैगन चलने पर जोर दिया गया है, वहीँ उन्होंने बताया, कि इस आठ  व्हीलर  के आने से माल ढाई गुना ज्यादा जा सकेगा, जिस से व्यापारियों को फायदा मिलेगा
      वहीँ इस मौके पर कस्टम के डिप्टी कमिश्नर विनोद खोसला ने भी आपनी मुश्किलों को पकिस्तान रेल अधिकारीयों  के आगे रखा, उन्होंने अपनी  मुश्किलों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि  समझौता एक्सप्रेस भारत में समय से नहीं आती, जिस के कारण उन को उस की चेकिंग करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, वहीँ दूसरी ओर पकिस्तान ने माल गाडी को शाम को 6  बजे भेजने का प्रस्ताव रखा था, जो कि कस्टम के अधिकारीयों ने खारिज कर दिया, उन्होंने बताया, कि वह किसी भी माल गाडी को शाम 4  बजे के बाद भारत में नहीं लेंगे, क्यों कि उन को गाडी की चेकिंग करने में असुविधा होगी, जिस के लिए उन्होंने पकिस्तान के अधिकारीयों को सुबह जल्दी ट्रेन भेजने की बात कही और साथ ही बीते समय में पकिस्तान की तरफ से आ रही हेरोइन पर भी आपनी शिकायत रखी
    वहीँ दूसरे ओर इस पूरे मामले में लाहौर रेलवे डिवीजन के सुपरिडेंट  मोहम्मद जावेद  अनवर ने मीटिंग की जानकारी देते हुए बताया, कि आज वह भारत में यहाँ पर रेल के अधिकारीयों के साथ एक विशेष मीटिंग के तहत यहाँ आये है और यहाँ पर दोनों देशों के बीच व्यापार को बढाने में विचार किया गया  और जल्द ही दोनों देशों के बीच में माल गाड़ी को आठ वेगन माल गाडी चलाने पर विचार किया गया है, साथ ही उन्होंने पकिस्तान की गाडियां बारे बताया, कि पकिस्तान की तरफ से जो गाडियां चल रही है, वह अब खराब हो चुकी है, जो कि चलने के काबिल नहीं है, दोनों देशों का रेल के रास्ते से व्यापार बढाने की कोशिश की जा रही है, जिस के कारण अब दोनों देशों के अधिकारी आपस में 8  व्हीलर  वेगन चलने की बात देश की सरकारों से करेंगे, ताकि इन डिब्बो से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ सके, वहीँ पिछले कुछ समय से  समझौता एक्सप्रेस के ज़रिये आई हेरोइन  और हथियार आने की बात को पहले तो रेलवे के अधिकारी इन्कार करते हुए नज़र आए, लेकिन आपनी गलती को छिपाने के लिए दबी जुबान में उन्होंने बताया,  कि मीडिया के हवाले से उन को पता चला था, कि इस तरह ट्रेन के रास्ते हेरोइन और हथियार गए है और इस मामले की जांच कर रहे है, उस में जो भी दोषी पाया गया उस पर कार्यवाही की जाए गी
     फिलहाल समझौता एक्सप्रेस के रास्ते आ रही हेरोइन और हथियार आने के मामले में पला झाड़ते हुए नज़र आए, लेकिन व्यापार को बढाने के लिए 8  व्हीलर वैगन चलने की बात को ले कर अब देखना यह होगा, कि कब इन दोनों देशों के बीच यह 8  व्हीलर वैगन चले गी, जिस से कि दोनों देश के व्यापार को बढाया मिल सके.

Wednesday, September 14, 2011

सरदार बादल अपने टी,वी चैनल पर बहस कर के देख लें


चुनावी जंग तेज़:सरना ने अमृतसर पहुंच कर दी चुनौती      
          अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग की ख़ास रिपोर्ट   
पंजाब में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की चुनावी जंग जोरों पर है. इस लिए इन चुनावों के चलते आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी है, दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान परमजीत सिंह सरना ने  एक बार फिर अकाली दल बादल पर अपना निशाना साधा और कहा कि पंजाब के मुख्य मंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल के पास केवल राजनैतिक मुद्दा है न कि धार्मिक मामलों या फिर एसजीपीसी का कोई मुद्दा.इस मामले पर मुख्यमन्त्री प्रकाश सिंह बादल को खुली चुनौती देते हुए उन्होंने साफ कहा कि वह किसी समय अपने टी,वी चैनल पर आमने -सामने बैठ कर बहस कर के देख ले. गौरतलब है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के 18 सितम्बर को चुनाव होने जा रहे है इस लिए यह चुनावी जंग अपनी चरम सीमा पर है.
 दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान परमजीत सिंह सरना ने एक प्रेस वार्ता के दौरान आज पंजाब की सत्ता धारी पार्टी अकाली दल पर निशाना साधते हुए कहा, कि पंजाब में इस बार पंथक मोर्चे कि तरफ से भी इस चुनाव में उम्मीदवार खड़े किये गए है और पंजाब के मुख्य मंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल के पास हमारे प्रत्याशियों का मुकाबिला करने के लिए कोई धार्मिक मुद्दा नहीं है.  उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्री बादल और उनकी टीम के पास केवल राजनैतिक मुद्दा है, उन्होंने कहा, कि वह केवल आटा-दाल की बात कर रहे है और पंथक मोर्चे को कांग्रेस का एजेंट बता रहे है,  उन्होंने कहा, कि वह बी,जे,पी और आर,एस,एस, के एजेंट हैं और उनके द्वारा ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर बी,जे,पी और आर,एस,एस, का कब्जा बहुत पहले से ही हुआ हुआ है.   वह शुरू से ही अकाली नही है, वह सिख कौम को खत्म करने में तुले हुए है, लेकिन हम उन्हें कामयाब नही होने देगे और हमारी पार्टी एसजीपीसी के  चुनावों में शानदार जीत हासिल करेगी, उन्होंने कहा, कि चुनाव कमिश्र्नर के पास जो उनके विरुद्ध शिकायते गई है, उसके विरुद्ध कारवाई होनी चाहिए नही तो आने वाले दिनों में सिख कौम में रोष देखने को मिलेगा, जिसके जिम्मेदार पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल होगे, उन्होंने इस चुनाव बारे कहा, कि हमारी लड़ाई धर्म बचाने के लिए है और उनकी लड़ाई दुबारा सता हासिल करने की है, उन्होंने अपनी  पार्टी के लिए लोगो से वोट मांगने की अपील भी की. 
    शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी  के चुनाव लड़ रहे पंथक दल के उम्मीदवार प्रदीप सिंह वालिया ने अकाली दल के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए बताया कि अकाली दल एसजीपीसी के चुनाव जीतने के लिए अपनी पार्टी के अफसर लगा रहा है जिसका सबूत हमारे पास है.

पन्द्रह दिन क्यों वर्ष में हिन्दी आती याद?

 चित्र प्रवक्ता.कॉम से साभार 
राज काज के काम हित हिन्दी है स्वीकार।
लेकिन विद्यालय सभी हिन्दी के बीमार।।

भाषा तो सब है भली सीख बढ़ायें ज्ञान।
हिन्दी बहुमत के लिए नहीं करें अपमान।।

मंत्री की सन्तान सब अक्सर पढ़े विदेश।
 
भारत में भाषण करे हिन्दी में संदेश।।

दिखती अंतरजाल पर हिन्दी नित्य प्रभाव।
लेकिन हिन्दुस्तान में है सम्मान अभाव।।

सिसक रही हिन्दी यहाँ हम सब जिम्मेवार।
करो राष्ट्र-भाषा इसे ऐ दिल्ली सरकार।।

पन्द्रह दिन क्यों वर्ष में हिन्दी आती याद?
 
हो प्रति पल उपयोग यह सुमन करे फ़रियाद।। 


श्यामल सुमन
09955373288

Tuesday, September 13, 2011

सफल हुयी कोशिशें-कबूल हुई दुआएं


17 भारतीय की रिहाई के बाद परिवारों में ख़ुशी की लहर
 अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग     
2009 में पकिस्तान के नागरिक की हत्या के आरोप में फसे 17 भारतीय की रिहाई को मंजूरी मिल गयी है, आज जब शारजाह की अदालत में इन की रिहाई हुई तब इन के परिवारों में ख़ुशी की लहर पैदा हो गई, वहीँ  17 भारतीयों में एक का नाम है राम सिंह जो इन 17  भारतीयों में से एक है. 

राम सिंह का परिवार जिन के चेहरे पर आज एक अलग सी ख़ुशी की लहर पैदा हुई है, क्यों कि आज इन का बेटा मौत के मुह से बाहर आया है, दरअसल पाकिस्तान नागरिक की हत्या के आरोप में 17 भारतीयो नागरिक को मौत की सजा सुनायी गयी थी, लेकिन आज रिहाई ने एक माँ की ममता का आँचल भर दिया है, राम सिंह के पिता पंजाब पुलिस में हवालदार है और उन्होंने आपने बेटे को कमाई के लिए विदेश भेजा था, लेकिन दुबई पहुँचने के 6 महीने के बाद उन का बेटा लापता हो गया, वहीँ कड़ी मुश्कत के बाद उन को जब पता चला, कि उन के बेटे पर हत्या का मामला दर्ज हुआ है, तब से ले कर आज तक इस परिवार में गम का माहौल छाया हुआ था, लगभग डेढ़ साल से यह परिवार एक ऐसे डर में जी रहा था, जिस की कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन आज एक रिहाई के सन्देश ने इस परिवार में एक नई उम्मीद पैदा कर दी है, राम सिंह के पिटा मलकीत सिंह का कहना  है, कि जब उन को पता चला कि उन का बेटा जेल में है, उन्होंने आपने दूसरे बेटे गुरनाम सिंह  को भी वहां भेज दिया कि शायद वह उस के बेटे को बचा सके, लेकिन शारजाह की अदालत के ताना शाही क़ानून के आगे उस की कुछ न चल सकी, लेकिन आज दुबई में भारतीय मूल के एस.पी.एस. ओबराय के पर्यटन से अब उन का बेटा वापिस आ रहा है, वहीँ उनके परिवार को आज बहुत ख़ुशी है और आज वाहेगुरु के आगे अरदास कर आपने बेटे की अच्छी जिन्दगी के लिए दुआ माँगी, यह ही नहीं ख़ुशी में उन्होंने आज लडू बाँट  कर आपनी ख़ुशी ज़ाहिर की.

वहीँ एक माँ आज आपने बेटे की तस्वीर को देख कर खुश है और आज आपने बेटे की तस्वीर से प्यार कर रही है, इस दौरान राम सिंह मी माँ  गुरजीत  कौर का कहना है कि आज फिर मेरे बेटे का जन्म हुआ है  और आज जब उस की रिहाई की खबर आई है,  उन के लिए आज यह सब से बड़ा दिन है और अब वह अपने घर वापिस आ रहा है, यह ख़ुशी उस के जन्म से भी ज्यादा है और बेटे के घर आने पर उस के लिए सुन्दर सुन्दर खाना बनाएगे, उसके स्वागत के लिए घर में आतिशबाजी चलाएंगे और गुरु घर में जा कर वाहेगुरु का आशीर्वाद लेगे, और अब उस की हसरत है कि उसका बेटा जल्द से जल्द घर आए.

      फिलहाल इस रिहाई के संदेश ने आज जहाँ इन् 17 परिवारों में एक खुशी की लहर पैदा हुई है, लेकिन अब एक सवाल यह पैदा होता है, कि क्या विदेश में भारतीय कितने सुरक्षित है, जहाँ इस तरह के तुगल्की फरमान किस तरह से इन् 17 भारतियों की जिन्दगी मुश्किल में डाल देती है.

अब पंजाब कांग्रेस चलेगी अन्ना के रास्ते पर !


पंजाब भर में कांग्रेस करेगी डी.सी. दफ्तरों का घेराव 
  अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग 
पंजाब भर में कांग्रेस के कार्यकर्त्ता 15 सितम्बर को अपने अपने शहरों के डी.सी. दफ्तरों का घेराव करेंगेयह जानकारी अमृतसर देहाती के प्रधान हरप्रताप सिंह अजनाला ने कार्यकर्ताओं के साथ एकविशेष मीटिंग में दी  
           पंजाब में राजनैतिक सरगर्मियां दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है, जिस के कारण राजनीतिक  पार्टीयाँ एक-दूसरे पर राजनीतिक वार कर रही है, वहीँ अब राजनैतिक पर अन्ना हजारे का साथ देने के मुद्दे पर अब कांग्रेस ने अकाली दल पर निशाना साधा है, क्यों कि अकाली दल की सरकार खुद भ्रष्ट्राचार में सलिप्त है और साथ ही यह सरकार जो  भ्रष्ट्राचार कर रही है यह जो  भ्रष्ट्राचार का सन्देश दे रहे है यह गलत है, यह  जानकारी अमृतसर देहाती के प्रधान हरप्रताप सिंह अजनाला ने कार्यकर्ताओं के साथ एक विशेष मीटिंग में दी और इस दौरान उन्होंने कहा, कि जिस के चलते वह   15 सितम्बर को पंजाब के हर शहर में डी,सी दफ्तर के आगे धरना देंगे, और इस सरकार के कारनामे आम जनता के आगे रखेंगे, उन्होंने कहा कि जो पिछले समय में आम जनता पर झूठे पर्चे हुए है, वह इस की जांच चाहते है और वह चाहते है, कि जो यह मामले दर्ज किये गए है उन पर न्यायिक जांच होनी चाहिए और इस के लिए वह डी,सी साहिब को एक विशेष ज्ञापन भी देंगे, ताकि इस सरकार पर कार्यवाही हो सके.

मुक्ति हेतु पितरेश्वरों का श्राद्ध,तर्पण

हिन्दूधर्म के अनुसार, प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारम्भ में माता-पिता,पूर्वजों को नमस्कार प्रणाम करना हमारा कर्तव्य है, हमारे पूर्वजों की वंश परम्परा के कारण ही हम आज यह जीवन देख रहे हैं, इस जीवन का आनंद प्राप्त कर रहे हैं। इस धर्म मॆं, ऋषियों ने वर्ष में एक पक्ष को पितृपक्ष का नाम दिया, जिस पक्ष में हम अपने पितरेश्वरों का श्राद्ध,तर्पण, मुक्ति हेतु विशेष क्रिया संपन्न कर उन्हें अर्ध्य समर्पित करते हैं। यदि कोई कारण से उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान नहीं हुई है तो हम उनकी शांति के लिए विशिष्ट कर्म करते है इसीलिए आवश्यक है -श्राद्ध और साथ ही.
श्राद्ध के लाभ 
श्राद्ध करने वाला व्यक्ति पापों से मुक्त हो परमगति को प्राप्त करता है। जिंद बाबा संस्कृत महाविद्यालय गुग्गामाड़ी मंदिर सेक्टर-20 के प्रधानाचार्य लक्ष्मीकांत कांडपाल ने मनु स्मृति का हवाला देते हुए बताया कि श्राद्ध से संतुष्ट होकर पित्तरगण श्राद्ध करने वालों को दीर्घायु,धन, सुख और मोक्ष प्रदान करते हैं।
श्राद्ध न करने कि हानियाँ
ब्रह्मपुराण के अनुसार श्राद्ध न करने से पित्तर गणों को दुख तो होता ही है, साथ ही श्राद्ध न करने वालों को कष्ट का सामना करना पड़ता है। कैसे करें श्राद्ध: श्राद्ध दो प्रकार के होते हैं पिंड दान और ब्राह्मण भोजन। मृत्यु के बाद जो लोग देव लोक या पितृ लोक पहुंचते हैं वे मंत्रों के द्वारा बुलाए जाने पर श्राद्ध के स्थान पर आकर ब्रा±मण के माध्यम से भोजन करते हैं। ऐसा मनु महाराज ने लिखा है क्योंकि पितृ पक्ष में ब्राह्मण भोजन का ही महत्व है, इसलिए लोग पिंड दान नहीं करते।
ध्यान योग्य:
पितृ पक्ष में संकल्प पूर्वक ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। यदि ब्राह्मण भोजन न करा सकें तो भोजन का सामान ब्राह्मण को भेंट करने से भी संकल्प हो जाता है। कुश और काले तिल से संकल्प करें। इसके अलावा गाय, कुत्ता, कोआ, चींटी और देवताओं के लिए भोजन का भाग निकालकर खुले में रख दें। भोजन कराते समय चुप रहें।
भोजन में इनका प्रयोग करें : 
दूध, गंगा जल, शहद, टसर का कपड़ा, तुलसी, सफेद फूल।
इनका प्रयोग न करें : कदंब, केवड़ा, मौलसिरी या लाल तथा काले रंग के फूल और बेल पत्र श्राद्ध में वर्जित हैं। उड़द, मसूर, अरहर की दाल, गाजर, गोल लौकी, बैंगन, शलजम, हींग, प्याज, लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन, पीली सरसों आदि भी वर्जित हैं। लोहा और मिट्टी के बर्तन तथा केले के पत्तों का प्रयोग न करें। विष्णु पुराण के अनुसार श्राद्ध करने वाला ब्राह्मण भी दूसरे के यहां भोजन न करे। जिस दिन श्राद्ध करें उसे दिन दातुन और पान न खाएं। श्राद्ध का महत्वपूर्ण समय: प्रात: 11.26 से 12.24 बजे तक है। {विकिपीडिया से साभार  आलेख का चित्र पंजाब केसरी से साभार}

Monday, September 12, 2011

नहीं भूख बच्चों की अब देखी जाती;मैं अपना लहू बेचना चाहता हूँ !

शक्ति पास हो तो बहुत से लोग हिम्मत दिखाने की बातें कर लेते हैं पर असली इम्तिहान तो तभी होता है जब पास कुछ नहीं होता. न ताकत न पैसा, न रिश्तेदार और न नही मित्र. ऐसे में भी जो व्यक्ति अपने विचारों पर दता रहता है उस को फिर जमाना सलाम करता है. मैंने लाला जगत नारायण जी को ज्यादा तो नहीं पर कई बार नज़दीक से देखा. हिंदसमाचार पत्र समूह जालंधर दफ्तर में एडिटोरियल लिखते हुए, कार्यालय में घूमघूम कर काम की निगरानी करते और दिशा निर्देश देते हुआ...सुन कर आज भी आँखों में आंसू आ जाते हैं.इतना दर्द, इतनी सम्वेदना..! लाला जी धुन के भी बहुत पक्के थे. सरकार उनकी कलम से घबरा कर अख़बार को बंद कराने के इरादे से हिंद समाचार पत्र समूह की बिजली काट देती है तो लाला जी अपने विचार नहीं बदलते. अपना मार्ग नहीं छोड़ते. सरकार्र की मिन्नतें नहीं करते, ट्रैक्टर से प्रेस चला कर अखबार छाप कर दिखा देते हैं और और अपनी हिम्मत से दमन की धज्जियां उड़ा देते हैं. पंजाब में बन्दूकों की दस्तक होती है तो लाला जी सर पे कफ़न बांध कर कहते हैं...देखना है जोर कितना बाजू--ऐ-कातिल में है. उनके विचारों से किसी को भी मतभेद हो सकते हैं पर उनकी लगन, मेहनत, ईमान और निष्ठां...इन सब को नमन करना ही पड़ता है. जल्द ही न समझाने वाले भी इसे समझ जायेंगे.
वह कैसे अपने वर्करों का ख्याल रखते थे, उनके दुःख सुख में काम आते थे इसकी सची कहानियां वे  बहुत से लोग जानते हैं जो उनके नज़दीक रहने का गौरव प्राप्त कर सके. यूं तो आज भी विजय जी और अविनाश जी अपने स्टाफ का पूरा ध्यान रखते हैं पर लाला जी की कमी तो खलती रहेगी....कभी सोचा नहीं था कि लाला जी को इस तरह इतनी जल्द हमसे छें लिया जायेगा. पर यह सब हुआ. पंजाब और दिल्ली में खून खराबे का एक भयावह दौर सब ने देखा.हम में से बहुतों ने तो इसे झेला भी, भुगता भी. लाला जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए ही रमेश जी ने भी शहादत का जाम पिया बहुत से स्टाफ मेम्बरों, पत्रकारों और हाकरों ने भी. हुआ वही जो होना था.गोली के जनून पर कलम का जनून भारी पड़ा.हिंद समाचार पत्र समूह की पंजाब केसरी अख़बार अगर आज हिंदी में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है तो जग बानी पंजाबी में पत्रकारिता का आधुनिक रंग दिखा रही है. जिस आवाज़ को मिटाने का प्रयास किया गया था वह आज भी बुलंद है. लोग लाला जी को पत्रकारिता के भीष्म पितामह कहते हैं. उन्हें आज भी लगातार याद करते हैं. पंजाब केसरी ग्रुप के संस्थापक अमर शहीद लाला जगत नारायण जी के बलिदान दिवस के उपलक्ष्य मे देश के अलग अलग  भागों में बहुत से कार्यक्रम हुए.पटियाला में भी विशेष आयोजन हुआ और अम्बाला में भी. ऑल इंडिया एंटी टैरारिस्ट फ्रंट की ओर से प्रदेश कार्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन अम्बाला में किय गया.इस कार्यक्रम में फ्रंट के प्रदेश उपाध्यक्ष नितीन उप्पल व फ्रंट के अन्य सदस्यों ने अमर शहीद लाल जगत नारायण जी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की.इस श्रद्धांजलि समारोह के दौरान फ्रंट के हर्षवर्धन उप्पल, परमिंद्र सिंह रोमी, अजीत पाल सिंह, मुनीष बत्तरा, पंकज कुमार, अमनप्रीत पूनिया, गुरदीप सिंह, राकेश कुमार, हर्षवर्धन सिंह, हरदीप सिंह, जतिंद्र शर्मा आदि फ्रंट के सैंकड़ों सदस्य मौजूद थे. इसी तरह जालंधर में एक विशेष मुशायरा भी आयोजित कराया गया. इस बार का मुशायरा अपने आप में ऐसा 14वां आयोजन था. आने वाले वक्त में इन आयोजनों का सिलसिला और तेज़ होगा.--रेक्टर कथूरिया 

Sunday, September 11, 2011

मस्ती के साथ साथ सावधान भी करती है पूनम की कविता

बहुत पहले जब छत पर सीमेंट बजरी की टैंकीयों का चलन काफी महंगा और बोझिल लगने लगा था तो एक कम्पनी आई थी प्लास्टिक की टंकी ले कर और विज्ञापन आता था अरे भई अब तो सिंटेक्स का जमाना है....अब उसी की याद आ रही है कहना चाहता हूं कि अब तो आतंकवाद का ज़माना है....किसी भी गली के मोड़ पर गोली चल सकती है, किसी भी बाज़ार के चौराहे पर बम फट सकता है...भारत हो या पाकिस्तान, रूस हो या अमेरिका....हर तरफ एक सा सहम, एक सा डर, एक सी तबाही, एक सा खून, एक सी लाशें, एक सा विरलाप, वही दर्द..., फिर हर बार एक से ब्यान........आतंक के इस काले भ्यावह दौर ने दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है, जीवन की शैली को बदल दिया है....अब गली से गुजरता कोई भला आगुन्तक देख कर भी लगता है कहीं वह कोई खतरनाक आतंकवादी न हो....! अब घर या दफ्तर के दरवाजे के सामने खड़ा कोई अन्जान व्यक्ति देख कर मन में अतिथि देवो भव. की भावना  नहीं आती....कुछ और ही शक होता...कुछ अजीब से ख्याल मन में आते हैं.....एक डर, एक घुटन, एक सहम... इस भयानक काली रात की सुबह होती नज़र नहीं आती.पर पूनम मतलब पूनम मटिया निकली है एक मशाल थाम कर. हाथ में मोहब्बत की मशाल और होठों पे आज भी वही गीत....
जोत से जोत जलाते चलो...
प्रेम की गंगा बहाते चलो.....! 
वह याद दिलाती है उन भले दिनों की जब लोग रात को भी निशचिंत हो कर गलियों में सोते थे....एक बड़े परिवार की तरह. दिन हो या रात, पूरी गली, पूरा मोहल्ला, पूरा इलाका किसी बड़े घर के आँगन सा लगता....अपना अपना सा. बहुत ही सुरक्षित सा....! अब वे दिन कहां......!
बहुत कुछ बदल गया. हर पल बदलती इस दुनिया में पूनम भी वही तो नहीं रह सकती थी.  वह भी बदली लेकिन यह बदलाहट बहुत ही अलग थी. बिलकुल उसी तरह जैसे कहते हैं न रंग लाती है हिना  पत्थर  पे घिस जाने के बाद. 
वह हालात की चक्की में पिसी, संघर्ष की धुप में जली, मोहब्बत और विरह की आग में तड्पी. दिल्ली के करोल बाग़ में एक मध्य वर्गीय परिवार में जन्म, दो कमरों के छोटे से मकान में लालन पालन, खेल कूद और फिर एक बड़ा सा घर. सिर्फ घर ही नहीं पूनम की सारी दुनिया ही बहुत बड़ी हो गयी है. पांच भाई बहनों का वह बचपन का प्यार अब पूरी दुनिया को अपने रंग में रंग रहा है.  
अब वह राजन इकबाल, रानू और गुलशन नंदा की जगह रोबिब कुक, इरविन वेल्स और सिडनी शेल्दन को पढती है. पेंटिंग के साथ अब वह कविता भी कहती है. नाटिकाएं भी लिखती है. उनका मंचन खुद भी करती है और दूसरों को भी ऐसा करना सिखाती है. पूनम की दुनिया अब बहुत बड़ी हो गयी है. वहां शायद सब कुछ है. हर रंग, हर ख़ुशी, हर महक लेकिन दो बातों के लिए वहां कोई स्थान नहीं रखा गया. एक तो नफरत और दूसरा अपने दोस्तों को भूल जाना. वह अपने दोस्तों को न तो भूलती है और न हो दोस्तों को कभी ऐसा करने देती है. आप अगर कहीं खो गए या किसी गम में घिर गए तो अचानक आप दस्तक सुनेंगे पूनम की. वह इतना अपनत्व और स्नेह से आपको आवाज़ देती है कि सारी परेशानी दूर हो जाती है और आप फिर से ज़िन्दगी जीने के लिए एक नयी ऊर्जा जुटा लेते हैं.
आपको यह जादूई आवाज़ उसके प्रथम काव्य संग्रह स्वप्न श्रृंगार से भी सुन सकती है जिसे प्रकाशित किया है लेखक परिषद अबोहर ने. पत्रकार मित्र प्रवीन कथूरिया और लेखक परिषद के अध्यक्ष राज सदोष ने इस पुस्तक के प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए दिन रात एक किये रखा. वे इसकी सफलता के लिए बधाई के पात्र हैं.
इस काव्य संग्रह में महकते फूलों का भी जिक्र है, काँटों के दर्द का भी, ख़्वाबों का भी, उनकी ताबीरों का भी, मोहब्बत का भी और विरह की तड़प का भी. प्रेम प्यार और सुन्दरता की  बातों में मग्न हो कर पूनम उन लोगों को नहीं भूली जिनके सपने अक्सर ही टूट हया करते हैं.उसे आम इन्सान का दर्द भी तड़पाता है. रिक्शावाले को सलाम करते हुए वह एक कविता के अंत में कहती है :
आज श्रमिक दिवस पर करती हूं इन्हें मैं नमस्कार;
जो मजदूर करते हैं हमारे सा काम अनथक लगातार. 
उसे चिलचिलाती धुप में काम करती महिला का दर्द भी अपना अपना लगता है. उसे देख कर कर उसकी हिम्मत को नमन करते हुए वह कहती है: 
झुलसायी है काया 
पर
न आलस की तनिक भी छाया.....!
जगह जगह जमीं के लिए संघर्ष पर किसान का साथ देते हुए वह कहती है:
जाती है ज़मीन जब कोडियों के दाम     
नाम होता है विकास का
बे मौत मारा जाता है बेचारा किसान 
शायद पूनम मन ही मन जानती है कि अगर यह शोषण नहीं रुका तो यह आक्रोश जमा होता होता एक दिन बारूद बनेगा और आतंकी संगठन इसका आसानी से फायदा उठा लेंगें. इस लिए वह सावधान करती है कि रोक दो इस अन्याय को.  मत करो विकास के नाम पर विनाश. 
निसंदेह पूनम के पास प्रतिभा तो जन्म जात थी पर इस उड़ान को पंख और शक्ति देने में पूनम जी के पति नरेश मटिया ने जो कुछ किया उसके बिना शायद यह सम्भव ही नहीं होता. इस लिए अब यह भी कहा जा सकता है कि हर सफल महिला के पीछे किसी पुरुष का हाथ होता है...!..... क्यूं आपका क्या ख्याल है.....होता है न.....?