Saturday, September 03, 2011

भूमि अधिग्रहण कानून (Land Acquisition Act) // रवि वर्मा

प्रिय पाठको,
इस बार मैं भूमि अधिग्रहण कानून के ऊपर लेख लाया हूँ |  एक बात मैं स्पष्ट कर दूँ कि यहाँ इस लेख में जो आंकड़े दिए गए हैं वो वर्ष 2009 तक के हैं | और इस लेख को पढने के पहले इस सूचि को पढ़ लीजिये तब जा के आपको बात ज्यादा बेहतर तरीके से समझ में आएगी, हमारे यहाँ जमीन की पैमाइश ऐसे ही की जाती है और 1260 sq . feet जो दिया गया है वो भारत के ज्यादातर राज्यों में एक ही है, किसी किसी राज्य में थोडा ज्यादा है |
1260 Sq. Feet = एक कट्ठा
20 कट्ठा = एक बीघा
ढाई बीघा = एक एकड़ और 
5 एकड़ = एक हेक्टेयर
भूमि अधिग्रहण कानून का इतिहास 
भारत में सबसे पहले भूमि अधिग्रहण कानून अंग्रेजों ने लाया था 1839 में लेकिन इसे लागू किया 1852 में और वो भी बम्बई प्रेसिडेसी में | बम्बई प्रेसिडेंसी जो थी उसमे शामिल था आज का महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, गोवा और मध्य प्रदेश का वो इलाका जो नागपुर से लगा हुआ है | भारत की पहली क्रांति जो 1857 में हुई थी उस समय  भारत से सारे अंग्रेज चले गए थे और जब इस देश के कुछ गद्दार राजाओं के बुलावे पर वापस आये तो उन्होंने इस कानून को पुरे देश में लागू कर दिया | फिर 1870 में इसमें एक संशोधन कर दिया गया और वो संसोधन ये था कि "जमीन के अधिग्रहण का नोटिस एक बार अंग्रेज सरकार ने जारी कर दिया तो उस नोटिस को भारत के किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती और कोई भी अदालत इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकता", मतलब अंग्रेज सरकार की जो नीति है वो अंतिम रहेगी, उसमे कोई फेरबदल नहीं होगा, कोई किसान अपनी जमीन छिनने की शिकायत किसी से नहीं कर सकता और इसी संसोधन में ये भी हुआ कि जमीन का मुआवजा सरकार तय करेगी और ये संसोधन सारे राज्यों में लागू हुआ | आखरी बार इसमें जो संसोधन हुआ वो 1894 में हुआ और वही संसोधित कानून आज भी इस देश में लागू हैं आजादी के 64 साल बाद भी | इस कानून में व्यवस्था क्या है ? व्यवस्था ये है कि केंद्र की सरकार हो, राज्य की सरकार हो, नगरपालिका की सरकार हो या जिले की सरकार हो, हर सरकार को, इस कानून के आधार पर किसी की जमीन को लेने का अधिकार है |

शहीदे आजम भगत सिंह को जब फाँसी की सजा हुई थी और उनको जेल में रखा गया था उस समय उन्होंने जितने इंटरव्यू दिए या पत्रकारों से बातचीत की हर बार वो कहा करते थे कि अंग्रेजों के सबसे ज्यादा दमनकारी कोई कानून भारत में है तो उसमे से एक है "भूमि अधिग्रहण कानून" और दूसरा है "पुलिस का कानून (इंडियन पुलिस एक्ट)" और भगत सिंह का कहना था कि आजादी के बाद ये कानून ख़त्म होना चाहिए, ऐसे ही चंद्रशेखर आजाद ने भी इस कानून के खिलाफ पर्चे बटवाए थे | ऐसे एक नहीं, दो नहीं, हजारों, लाखों क्रांतिकारियों का ये मानना था कि ये भूमि अधिग्रहण का कानून सबसे दमनकारी कानून है और अंग्रेजों के बाद इस कानून को समाप्त हो जाना चाहिए | हमारे सारे शहीदों का एक ही सपना था चाहे वो हिंसा वाले शहीद हो या अहिंसा वाले शहीद हो कि ये भूमि अधिग्रहण का जो कानून है वो अत्याचारी है, बहुत ज्यादा अन्याय करने वाला है, शोषण करने वाला है, इसलिए इस कानून को तो रद्द होना ही चाहिए, ख़त्म होना ही चाहिए | अब 15 अगस्त 1947 को जब ये देश आजाद हुआ तो ये अंग्रेजों का अत्याचारी कानून ख़त्म हो जाना चाहिए था लेकिन ये बहुत दुःख और दुर्भाग्य से मुझे कहना पड़ता है कि ये कानून आज आजादी के 64 साल बाद भी इस देश में चल रहा है और इस कानून के आधार पर किसानों से जमीने आज भी छिनी जा रही है और इस कानून के आधार पर आज भी हमारे किसानों को भूमिहीन किया जा रहा है | मुझे बहुत दुःख और दुर्भाग्य से ये कहना पड रहा है कि जिस तरह से अंग्रेजों की सरकार किसानों से जमीन छिना करती थी ठीक वैसे ही आजाद भारत की सरकार किसानों से जमीन छिना करती है | इसी कानून का सेक्सन 4 है इसी कानून का पैरा 1 है, उसके आधार पर अंग्रेज जमीन छिनने के लिए नोटिस जारी करते थे वही सेक्सन 4 और पैरा 1 का इस्तेमाल कर के आज भारत सरकार भी नोटिस जारी करती है और उसी तरीके से नोटिस आता है जिलाधिकारी के माध्यम से और जमीन छिनने के लिए आदेश थमा दिया जाता है और जिसका जमीन है उसके हाँ या ना का कोई प्रश्न ही नहीं है | और जमीन का भाव सरकार वैसे ही तय करती है जैसे अंग्रेज किया करते थे | कोर्ट इसमें हस्तक्षेप न करे इसके लिए इसमें चालाकी ये की गयी है कि इस भूमि अधिग्रहण कानून को संविधान के 9th Schedule में डाल दिया गया है जिसमे कोई petition भी नहीं दी जा सकती | भूमि अधिग्रहण का पूरा मामला हमारे संविधान के 9th Schedule में है और संविधान के 9th Schedule बारे में स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में केस नहीं कर सकता |
 

जमीनों का बंदरबांट
 
अब देखिये ये अधिग्रहित जमीन किसके पास कितनी है | भारत में एक रेल मंत्रालय है, उसके देश भर में रेलवे स्टेशन है, यार्ड है जहाँ डिब्बे खड़े रहते हैं, इसके अलावा रेल के चलने के लिए रेलवे लाइन हैं | करीब 70 हजार डिब्बे यार्ड में खड़ा करने के लिए जो जगह चाहिए, 6909 रेलवे स्टेशन बनाने के लिए जो जमीन ली गयी है, और 64 हजार किलोमीटर रेलवे लाइन बिछाने के लिए जो जमीन किसानों से ली गयी है या छिनी गयी है इस कानून के आधार पर वो बेशुमार है, आप कल्पना नहीं कर सकते है, आपके मन में ये सपने में भी नहीं आ सकता है कि इतनी जमीन ली जा सकती है | जो जमीन हमारी सरकार ने किसानों से छिनी है इस रेलवे विभाग के लिए वो 21 लाख 50 हज़ार एकड़ जमीन है | हमारे रेल मंत्रालय के दस्तावेजों में से निकले गए आंकड़े हैं ये | 21 लाख 50 हजार एकड़ जमीन रेल मंत्रालय ने इस कानून के तहत हमारे किसानों से छीन कर अपने कब्जे में ली है, अपनी सम्पति बनाई है जिस पर 64 हजार किलोमीटर रेलवे लाइन हैं,70 हजार डिब्बे यार्ड में खड़े होते हैं और 6909 रेलवे स्टेशन खड़े हैं | अब आप तुरत ये सवाल करेंगे कि रेल मंत्रालय ने ये जमीन ली है वो लोगों के हित के लिए है | आपकी बात ठीक है कि लोगों के हित के लिए ये जमीन ली गयी है लेकिन लोगों के हित में उन किसानों का हित भी तो शामिल है जिनसे ये जमीन ली गयी हैं | आप दस्तावेज देखेंगे तो पाएंगे कि आजादी के बाद 1947-48 में जो जमीन किसानों से ली गयी है उसकी कीमत है एक रुपया बीघा, दो रूपये बीघा, ढाई रूपये बीघा, तीन रूपये बीघा और आज उन जमीनों की कीमत है एक करोड़ रूपये बीघा, दो करोड़ रूपये बीघा | किसानों से एक,दो,तीन रूपये बीघा ली गयी जमीन करोड़ों रूपये बीघा है तो जिन किसानों से ये जमीन ली गयी उनके साथ कितना अन्याय हुआ, इसकी कल्पना आप कर सकते हैं | अब रेलवे विभाग इस जमीन का इस्तेमाल कर के एक साल में 93 हजार 159 करोड़ रुपया कमाता है | आप सोचिये कि किसानों से जो 21 लाख 50 हजार एकड़ जमीन ली गयी भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर और उस जमीन का इस्तेमाल कर के रेल विभाग एक साल में 93 हजार 159 करोड़ रुपया कमाता है तो क्या रेल मंत्रालय का ये दायित्व नहीं बनता, ये नैतिक कर्त्तव्य नहीं बनता कि इस कमाए हुए धन का कुछ हिस्सा उन किसानों को हर साल मिलना चाहिए जिनसे ये जमीने छिनी गयी हैं और जिनकी ये जमीने कौड़ी के भाव में ली गयी हैं | मैं मानता हूँ कि किसानों की बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए इस फायदे में, इस लाभ के धंधे में | रेलवे विभाग इस देश में कोई घाटा देने वाला विभाग नहीं है | उसका हर साल का नेट प्रोफिट 19 हजार 320 करोड़ रुपया है | अगर शुद्ध आमदनी में से ही 10 या 15 प्रतिशत हिस्सा उन किसानों के लिए निकल दिया जाये तो उन करोड़ों किसानों के जिंदगी का आधार तय हो जायेगा जिन्होंने आज से 50 -60 साल पहले कौड़ी के भाव में अपनी जमीन गवां दी थी रेलवे के हाथों में |

इसी तरह सरकार का एक दूसरा महत्वपूर्ण विभाग है जिसने किसानों से जमीन ली है भूमि अधिग्रहण के नाम पर, उस विभाग का नाम है भूतल परिवहन मंत्रालय | ये  भूतल परिवहन परिवहन मंत्रालय रोड और यातायात का काम देखती है | भारत में दो तरह के रोड होते हैं एक नेशनल हाइवे और दूसरा स्टेट हाइवे | आजादी के बाद इस देश में 70 हजार 5 सौ अड़तालीस किलोमीटर नेशनल हाइवे बनाया गया है और इस 70 हजार 5 सौ 48 किलोमीटर लम्बे सड़क के लिए किसानों से 17 लाख एकड़ जमीन छिनी गयी और इस जमीन पर सड़क जो बनती है उस पर ठेकेदार किलोमीटर के हिसाब से पैसा वसूलते हैं, लेकिन जिन किसानों ने हजारों एकड़ जमीन अपनी दे दी है उन्हें उस कमाई में से एक पैसा भी नहीं दिया जाता, इतना बड़ा अत्याचार इस देश में कैसे बर्दास्त किया जा सकता है | आप जानते हैं कि इस देश के नेशनल हाइवे पर जब हम चलते हैं तो हर पचास किलोमीटर पर टोल टैक्स हमको भरना पड़ता है और गाड़ी खरीदने के समय पूरी जिंदगी भर का रोड टैक्स हमको भरना पड़ता है | सरकार उस जमीन पर रोड बनवाकर टैक्स का पैसा तो अपने खाते में जमा करा लेती है लेकिन उन किसानों को टैक्स के पैसे में से कुछ नहीं दिया जाता जिनसे ये 17 लाख एकड़ जमीन छिनी गयी हैं भूमि अधिग्रहण कानून के हिसाब से और इन सड़कों पर कारें, ट्रक, बस आदि चलते हैं, देश की आमदनी उससे होती है और ये आमदनी हमारे GDP में जुड़ जाती है लेकिन उन किसानों का क्या जिन्होंने अपने खून-पसीने की कमाई की 17 लाख एकड़ जमीन एक झटके में हमारी सरकार को दे दी भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर, देश के लोगों का भला हों इस आधार पर | किसानों को कुछ तो नहीं मिल रहा है | इसी तरह से स्टेट हाइवे है, आप जानते हैं कि भारत में 29 राज्य हैं और एक एक राज्य में 10 से 12 हजार किलोमीटर का स्टेट हाइवे है | उत्तर प्रदेश में 14 हजार किलोमीटर, मध्य प्रदेश में 12 हजार किलोमीटर है और ऐसे ही हर राज्य में है और कुल मिलकर एक लाख किलोमीटर से ज्यादा स्टेट हाइवे है और इसमें किसानों की लाखों एकड़ जमीन जा चुकी हैं |
 

ऐसे ही स्कूल, कॉलेज बनवाने के लिए सरकार द्वारा जमीने ली गयी हैं | हमारे भारत में 13 लाख प्राइमरी, मिडिल और इंटर स्तर के स्कूल हैं और करीब 14 हजार डिग्री स्तर के कॉलेज है और 450 विश्वविद्यालय हैं | इन स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में जो कुल जमीन गयी हैं वो करीब 13 लाख एकड़ जमीन है, ये जमीन भी किसानों ने शिक्षा के नाम पर केंद्र सरकार को दी है, राज्य सरकारों को दी है | आप जानते हैं कि कॉलेज बनाने के नाम पर कौड़ी के भाव में जमीन मिलती है फिर वो जमीन का उपयोग कर के बिल्डिंग बनायी जाती है, फिर donation ले के नामांकन दी जाती हैं विद्यार्थियों को, ये donation लाखों करोड़ों में होती है | कोई भी कॉलेज घाटे में नहीं चलता, सब के सब फायदे में चलते हैं, लेकिन उन किसानों को कुछ भी नहीं मिलता है जिन्होंने एक झटके में वो जमीन कॉलेज बनाने के लिए दे दी है | 


हमारे देश में हॉस्पिटल किसानों के जमीन पर बनाई गयी है | हमारे देश की सरकार ने 15 हजार 3 सौ 93 हॉस्पिटल इस देश में तैयार किये गए हैं और इन हॉस्पिटल को बनाने के लिए कुल लगभग 8 लाख 75 हजार एकड़ जमीने किसानों से ली गयी हैं | इन जमीनों पर जो हॉस्पिटल खड़े हुए हैं उन हॉस्पिटल को बनाने के समय सरकार का हॉस्पिटल बनाने वालों से समझौता हुआ है और उसमे ये लिखा गया है कि गरीब किसानों के लिए इन हॉस्पिटल में निःशुल्क इलाज मिलेगा तभी जमीन कम कीमत पर मिलेगी लेकिन कोई हॉस्पिटल गरीब किसानों को निःशुल्क इलाज नहीं देता है | इतने महंगे इलाज हैं कि हॉस्पिटल बनाने के लिए जिस किसान ने जमीन दे दी, उसी किसान को अपने घर वालों का इलाज कराने के लिए उस हॉस्पिटल में जब जाना पड़ता है तो जमीन बेंच कर जो पैसे आये हैं वो सारे पैसे खर्च करने पड़ते हैं तब जाकर उसके परिजन का इलाज होता है | मतलब पैसे वापस उसी हॉस्पिटल में चला जाता है | इसलिए किसान वहीं के वहीं रहते हैं | उनका शोषण वैसे के वैसे ही होता है | तो हॉस्पिटल के लिए ली गयी 8 लाख 75 हजार एकड़ जमीन हैं | इसी तरह भारत में भारतीय और विदेशी कंपनियों ने उद्योग स्थापित किये हैं और उन उद्योगों के लिए 7 लाख एकड़ जमीन ली गयी है और इसी तरह भारत देश में भारत सरकार का एक विभाग है दूरसंचार मंत्रालय | इसके भवन सारे देश में बने हुए हैं और उसके लिए 1 लाख 55 हजार एकड़ जमीन इसने किसानों से ले रखी है | इसी तरह भारत सरकार के 76 मंत्रालय हैं उन 76 मंत्रालयों और राज्य सरकारों के मंत्रालय और म्युनिसिपल कारपोरेशन के काम करने वाले विभाग हैं, तीनों स्तर पर लाखो एकड़ जमीन तो ली जा चुकी हैं अब तक सरकार के द्वारा और करीब 25-30 लाख एकड़ जमीन ली जा चुकी है कंपनियों और निजी व्यक्तियों के द्वारा | ये सारे जमीन किसानों के हाथ से निकल कर निजी संपत्ति बन चुकी है सरकार और कंपनियों की | और किसान वहीं गरीब के गरीब हैं, वो आत्महत्या कर रहे हैं, भूखों मर रहे हैं और उनकी जमीनों पर लोग सोना पैदा कर रहे हैं | ये अत्याचार ज्यादा दिनों तक अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता,  आजादी के 64 साल तक तो बर्दाश्त हो गया अब क्षमता नहीं है | 


कई बार मजाक होता है किसानों के साथ ये कि किसानों के जमीन का भाव तय किया जाता है एक रुपया स्क्वायर फीट, पचास पैसे स्क्वायर फीट, पंद्रह पैसे स्क्वायर फीट | आपको एक सच्ची घटना सुनाता हूँ | आज से लगभग बीस साल पहले गुजरात के गांधीधाम के पास एक द्वीप "सत्सैदाबेग" को वहां की तत्कालीन सरकार ने एक अमरीकी कंपनी 'कारगिल' को पंद्रह पैसे स्क्वायर फीट के दर से बेंच दिया था नमक बनाने के लिए | वो द्वीप 70 हजार एकड़ का था | जनहित याचिका के अंतर्गत जब ये मामला गुजरात उच्च न्यायलय में पहुंचा और गुजरात सरकार से जब ये पूछा गया तो उसने इस बात को स्वीकार किया और कहा कि ये जमीन भारत के नागरिकों के हित को ध्यान में रखकर विदेशी कंपनी को बेचीं गयी है| सरकार का तर्क था कि ये कारगिल कंपनी जो नमक बनाएगी वो भारत के आम नागरिकों के आवश्यकता को पूरा करेगी और ये समझौता देशहित में है तो दुसरे पक्ष ने भी तर्क दिया कि इसमें ऐसी कौन सी तकनीक ये लगायेंगे ? जो काम ये कारगिल कंपनी करेगी वो काम तो गांधीधाम के गरीब किसान भी कर सकते हैं और वो भी इस लोकहित का काम कर सकते हैं | कोर्ट ने जब इस मामले की जाँच कराई तब पता चला कि इसमें घोटाला हुआ है और घोटाला ये हुआ है कि इस जमीन को पंद्रह पैसे की दर से बिका तो दिखाया गया है लेकिन पिछले दरवाजे से भारी रिश्वत ली गयी थी | तो हाई कोर्ट के कारण उस समय के मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और हाई कोर्ट ने इस समझौते को रद्द कर दिया था | समझौते को रद्द करने के पीछे कारण जो था वो भूमि अधिग्रहण का कानून नहीं था, क्योंकि भूमि अधिग्रहण के मामले में किसी कोर्ट में केस नहीं किया जा सकता और भूमि अधिग्रहण के मामले में तो ये समझौता एकदम पक्का था, ये समझौता तो रद्द हुआ था राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर क्योंकि जो जमीन इस कारगिल कंपनी को दी गयी थी वो पाकिस्तान सीमा के बिलकुल पास थी और इससे देश को खतरा था | इसके अलावा कोर्ट को ये भी बताया गया कि ये कारगिल कंपनी का मुख्य काम हथियार बनाना है | इस समझौते को रद्द करने के बाद अदालत ने एक टिपण्णी की थी  कि "ये सौदा हमने रद्द किया है देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर और करोडो नागरिकों के हित को ध्यान में रखकर और जल्द से जल्द इस कानून में परिवर्तन किया जाये, संसोधन किया जाये ताकि देश के जरूरतमंद नागरिकों की जमीनें सरकार बेवजह न छीन सके और करोड़ों किसानों को भूमिहीन न बनाया जा सके" | आज इस फैसले को आये 20 साल होने जा रहा है लेकिन भारत सरकार ने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया | आज भी इस देश में ये कानून चल रहा है और किसानों की छाती पर मुंग दल रहा है | ऐसे कई उदहारण हैं जैसे दादरी (उत्तरप्रदेश), जहाँ एक भारतीय कंपनी को ताप बिजलीघर लगाना था और 450 एकड़ जमीन की जरूरत थी और वहां की तत्कालीन सरकार ने जरूरत से सौ गुना ज्यादा जमीन किसानों से छीन लिया था, नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल अब पश्चिम बंग) में इंडोनेशिया की कंपनी से समझौता पहले हुआ था और जमीन बाद में अधिगृहित की गयी थी जिसका विरोध वहां के किसानों ने किया था लेकिन सरकार ने न कोई मदद की और न ही कोर्ट ने लेकिन किसानों के एकता ने उनको वहां सफलता दिलाई थी, ऐसे ही सिंगुर में हुआ था |
 

अभी हमारे देश में आर्थिक उदारीकरण के नाम पर एक योजना चल रही है जिसका नाम है Special Economic Zone (SEZ ) | इसके नाम पर हजारों लाखों एकड़ जमीन किसानों से छिनी जा रही है और अलग अलग कंपनियों को बेंची जा रही है और इन कंपनियों को ये अधिकार दिया जा रहा है कि ये कंपनियां इन खेती की जमीनों को औद्योगिक जमीन बना कर दोबारा बेंच सकें | किसानों से जब जमीन ली जाती है तो उसका भाव होता है पाँच हजार रूपये बीघा, दस हजार रूपये बीघा और वही जमीन जब ये कंपनियां दोबारा बेंचती हैं तो इस जमीन का भाव होता है एक लाख रूपये बीघा, दो लाख रूपये बीघा और कभी-कभी ये पचास लाख रूपये बीघा और कभी-कभी एक करोड़ रूपये बीघा तक भाव हो जाता है |  हमारे देश में किसानों से जमीन छिनकर कौड़ी के भाव में, कंपनियों को कम कीमत पर बेंच देना और बीच का कमीशन खा जाना, ये सरकारों ने अपना नए तरह का धंधा बना लिया है और इस कानून की आड़ में भारत के लाखों-करोडो किसानों का शोषण हो रहा है |

दिल्ली के नजदीक एक गाँव है गुडगाँव | कुछ साल पहले वो ऐसा नहीं था, थोड़े दिन पहले यहाँ की जमीन यहाँ के किसानों से ली गयी | यहाँ के किसानों को ये लालच दिया गया कि बहुत पैसे मिल रहे हैं अपनी जमीन बेच दो | उन्होंने अपनी जमीन बेच दी और उन पैसों से कोठियां बनवा ली, गाड़ियाँ ले ली | अब वो कोठिया और गाड़ियाँ एक दुसरे के सामने खड़ी रहती हैं और एक दुसरे को मुंह चिढ़ा रही हैं | क्योंकि किसानों की आमदनी बंद हो गयी है, जब खेत थी तो खाने को अनाज मिलता था और बचे हुए अनाज को बेच के पैसा मिलता था और उससे जिंदगी आसानी से चलती थी लेकिन अब वही किसान वहां बने अपार्टमेन्ट में गार्ड का काम कर रहे हैं, माली का काम कर रहे हैं, इस्त्री करने का काम कर रहे हैं, सब्जी बेचते हैं, दूध बेचते हैं और उनके घर की महिलाएं उन कोठियों में बर्तन मांजने का काम करती हैं, झाड़ू और पोंछा लगाती हैं | जमीन जब चली जाती है तो सब कुछ चला जाता है, ना इज्जत बचती है, ना आबरू बचती है, ना पैसा बचता है, ना सम्मान बचता है, ना संसाधन बचते हैं | हमारे देश में गुडगाँव की कहानी जो है वैसे ही बहुत सारे किसानों की है जिन्होंने इस भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीने या तो बेचीं या उनसे छीन ली गयी | इन सब किसानों की दुर्दशा इस देश में हो रही है | 


मैं थोड़े दिनों से इस कानून का अभ्यास कर रहा हूँ तो मुझे पता चला है कि हमारे देश का जो संसद भवन है, राष्ट्रपति भवन है वहां पर एक गाँव हुआ करता था , उस गाँव का नाम था मालचा | ये मालचा गाँव पंजाब राज्य का इलाका था बाद में हरियाणा बना तो ये गाँव हरियाणा के अधीन आ गया | इस गाँव के किसानों से अंग्रेजों ने मारपीट कर, डरा-धमका कर जमीन छिनी थी | किसान जमीन देने को तैयार नहीं थे, अंग्रेज सरकार ने जबरदस्ती किसानों से ये जमीने छिनी थी | भूमि अधिग्रहण कानून के हिसाब से नोटिस दिया और सन 1912 में मालचा गाँव के किसानों से तैंतीस (33 ) हजार बीघा जमीन छीन ली थी सरकार ने | किसानों ने जब विरोध किया तो अंग्रेज सरकार ने वैसे ही गोली चलायी जैसे आज चलती है और उस गोलीबारी में 33 किसान शहीद हुए थे, उनकी लाश पर अंग्रेज सरकार ने इस जमीन को भारत के संसद भवन और राष्ट्रपति भवन में बदल दिया और मुझे बहुत अफ़सोस है ये कहते हुए कि जिन किसानों से ये जमीने छिनी गयी उनको आज 100 साल बाद (1912 -2011) और आजादी के 64 साल बाद तक एक रूपये का मुआवजा नहीं मिल पाया है और उन किसानों के परिजन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से हाईकोर्ट और हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चक्कर लगाते लगाते थक गए हैं और वो कहते हैं कि "जैसे हम अंग्रेजों के सरकार का चक्कर लगाते थे, आजादी के बाद हम हमारी सरकार के वैसे ही चक्कर लगा रहे हैं हम कैसे कहें कि देश आजाद हो गया है, कैसे कहें कि देश में स्वाधीनता आ गयी है"| वो कहते हैं कि "हमारे पुरखे लड़ रहे थे अंग्रेजी सरकार से मुआवजे के लिए और वो मर गए और अब हम लड़ रहे हैं भारत सरकार से कि हमें उचित मुआवजा मिले, हो सकता है कि हम भी मारे जाएँ और हमारी आने वाली पीढ़ी देखिये कब तक लडती है" | हमारे देश का राष्ट्रपति भवन, संसद भवन जो सबसे सम्मान का स्थान है इस देश में वो इसी भूमि अधिग्रहण कानून के अत्याचार का प्रमाण है, शोषण का प्रमाण है | किसानों से जबरदस्ती छीन कर बनाया गया भवन है ये इसलिए मुझे नहीं लगता कि इस संसद भवन या राष्ट्रपति भवन से हमारे देश के लोगों के लिए 
कोईसद्कार्य हो सकता है, कोई शुभ कार्य हो सकता है, कोई अच्छा कार्य हो सकता है | आजादी के 64 सालों में ऐसा कोई नमूना तो मिला नहीं मुझे | ये कहानी बहुत दर्दनाक है, बहुत लम्बी है, मैं लिखता जाऊं और आप पढ़ते जाएँ | इस अंग्रेजी भूमि अधिग्रहण कानून के इतने अत्याचार हैं इस देश के किसानों पर कि जिस पर अगर पुस्तक लिखी जाये तो 1000 -1200 पन्नों के 50 -60 खंड बन जायेंगे | पुरे देश में इतने अत्याचार और शोषण इस कानून के माध्यम से हुए हैं | 

उपाय क्या है ? 

अब आपके मन में सवाल हो रहा होगा कि उपाय क्या है ? उपाय ये है कि किसानों को जमीन का उचित मुआवजा तो मिले ही साथ ही साथ उनके जमीनों से होने वाले मुनाफे में किसानों को भी हिस्सा मिलना चाहिए, कुछ बोनस मिलना चाहिए | जिस कार्य के लिए किसानों की जमीन ली जाये उसमे किसानों का आजीवन हिस्सा होना चाहिए | जो भी मंत्रालय, जो भी विभाग, जो भी कम्पनी, जो भी कारखाना उनकी जमीन ले, तो जमीन का मुआवजा तो वो दे ही साथ ही साथ उस जमीन की मिलकियत जिंदगी भर किसानों की रहनी चाहिए और उस मिलकियत में बराबर का एक हिस्सा उनके शुद्ध मुनाफे में से किसानों को मिलनी ही चाहिए तब जाकर हमारे देश के किसानों की हैसियत और स्थिति सुधरेगी | आपको एक छोटी सी बात बताता हूँ, आप कोई कारखाना लगाते हैं या अपार्टमेन्ट बनाते हैं और उसके लिए बैंक से ऋण लेते हैं तो आप जानते हैं, बैंक का क़र्ज़ जब तक आप वापस नहीं करते बैंक आपके कारखाने में हिस्सेदार होता है | आपने बैंक से एक करोड़ का या जितना भी क़र्ज़ लिया और जब तक आप क़र्ज़ चुकाते नहीं , भले ही आप उसका ब्याज चूका रहे हो बैंक आपके उस संपत्ति में हिस्सेदार होती है | जिस किसान ने अपनी  जमीन दी है और उसके जमीन पर वो कारखाना खड़ा किया गया है तो वो किसान क्यों नहीं उस कारखाने में हिस्सेदार होना चाहिए और वही किसान नहीं उसकी आने वाली पीढियां भी इसका लाभ उठायें ये नियम होना चाहिए तभी किसानों की स्थिति सुधरेगी | ये इस देश की जनता कर सकती है क्यों कि देश की जनता में वो ताकत है, सिर्फ ताकत ही नहीं सबसे ताकतवर है लेकिन उसे कोई जानकारी तो हो |   

अंत में आजकल भारत में राष्ट्रहित की बात करने वालों को, देश की समस्याओं के बारे में बात करने वालों को RSS का agent कहने की परंपरा सी हो गयी है और चुकि मेरा ये लेख राष्ट्र कोसमर्पित है, किसानों को समर्पित है इसलिए मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी अगर कोई मुझे RSS का agent कहे | आप ही के बीच का, आपका दोस्त | अपना कीमती समय देने के लिए आपका धन्यवाद् |   

रवि 

Friday, September 02, 2011

अमृतसर में चार अल्ट्रा साऊंड मशीने सील


स्वस्थ्य विभाग ने की अचानक छापेमारी 
अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग   की खास रिपोर्ट 

अमृतसर में आज सेहत विभाग की टीम ने अमृतसर के केनेडी ऐवन्यू में स्थित अडवांस डाइग्नोस्टिक पर छापेमारी दौरान चार अल्ट्रा साऊंड मशीन को सील कर दिया, दरअसल यहाँ पर एक महिला का अवैध  तौर पर जांच किया था, जिस का इन के पास कोई रिकॉर्ड भी नहीं था
अमृतसर में आज उस समय सनसनी मच गयी, जब अमृतसर शहर के सब से बड़े डाइग्नोस्टिक सेण्टर पर सेहत विभाग ने शिकायत के आधार पर छापे-मारी दौरान चार अल्ट्रा साऊंड  मशीन को सील कर दिया,  दरअसल पट्टी की रहने वाली एक महिला राजविंदर कौर ने सरबजीत नामक की एक महिला के साथ 19  मार्च 2011  को  आपने पेट में पल रहे बच्चे का गर्भपात करवाने की कोशिश की थी, लेकिन गर्भपात करवाते समय राजविंदर कौर की हालत खराब हो गयी और मामला बिगड़ गया. मामला बिगड़ा तो सरबजीत को भी इसकी चिंता हुयी.  उसने अमृतसर का रुख किया. 
बहुत सोच विचार कर सरबजीत उस महिला मरीज़ राजविंदर कौर को तरनतारण के त्रेहन  नाम के एक डाक्टर के पास ले गयी, लेकिन उस के बाद डाक्टर त्रेहन  ने इस को अमृतसर में अडवांस डाइग्नोस्टिक के पास भेज दिया  और 20  मार्च 2011  को जहाँ इस महिला का अवैध रूप से जांच की गई. गौरतलब है कि इस किस्म का गैर कानूनी सिलसिला तकरीबन हर जगह जारी है. 
इस तरह का काम पी,एन,डी,टी एक्ट की उल्लंघना है क्यों कि इस कानून के तहत जब कोई गर्भवती महिला का कोई इस तरह की जांच होती है, उस के लिए उस महिला का रिकॉर्ड रखना जरुरी होता है और साथ ही अगर किसी गर्भवती महिला इस तरह की जांच के लिए आती है, तो उस की रिपोर्ट सहेत विभाग और पुलिस  को देनी पड़ती है,  लेकिन यहाँ पर इस डाइग्नोस्टिक सेण्टर में इस तरह का कोई भी रिकॉर्ड नहीं रखा गया और न ही किसी को सूचित किया गया, अलबता उस के पेट में गर्भ न होने की एक फर्जी रिपोर्ट भी जारी कर दी  गयी, कि इस महिला के पेट में कोई भी गर्भ नहीं है, लेकिन उस के बाद जब इस महिला का जालंधर के पीइमस में जांच कारवाई गई, तब इस में 14  हफ्ते के बच्चे की एक रिपोर्ट जारी की गयी, इस से साफ़ साबित होता है, कि इस डाक्टर ने यहाँ पर पैसों के लालच में पहले तो भ्रूण की जांच की और साथ ही उस का कोई भी रिकॉर्ड नहीं रखा, यह जानकारी अमृतसर सिविल सर्जन अवतार सिंह ने देते हुए बताया, कि वहीँ इस रिपोर्ट के आधार पर आज सेहत विभाग की टीम ने यहाँ पर छापा मार कर यहाँ पर अल्ट्रा साऊंड स्कैन की चार मशीनों को सील कर इस का सारा रिकॉर्ड अपने साथ ले गए.

इंसानियत हुई शर्मसार

आज भी समझा जाता है बच्ची  के जन्म को बोझ
लगातार बढ़ रही है बाल झूले में छोडी जाने वाली बच्चियों की संख्या अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग 
आज हमारे देश में महिला शक्तिकरण को ले कर कई बार चर्चा होती रही है,  लेकिन अमृतसर में इस महिला शक्तिकरण का एक काला चेहरा सामने ला रहा है, जहाँ आए दिन लोग आपनी बच्चियों को जन्म दे कर फैंक जाते है, पिछले एक महीने में 6 बच्चियों को लोगो ने अमृतसर जिला प्रशासन की ओर से  रेडक्रास भवन के बाहर पंगूड़ा स्कीम के तहत लगाए गए पंगूडे  में रखा और चले गए. अमृतसर  जिला प्रशासन की ओर से कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए रेडक्रास भवन में चलाई गई पंगूड़ा स्कीम में लड़कियों को छोड़ने के मामले दिन प्रति दिन बड़ते जा रहे है. सन 2008  में चलायी गयी पंगूड़ा  स्कीम में अब तक 43  बच्चे पंगूडे  में आ चुके है, लेकिन सब से बड़ी हैरान करने वाली बात यह है, कि 2008  में  8 बच्चे 2009  में 9  बच्चे 2010  में  16 बच्चे और 2011  में 13 बच्चे और सब से बड़ी हैरान करने वाली बात यह है, कि पिछले एक महीने में 6  बच्चे यहाँ पर आ चुके है, जो एक खतरे की घंटी है वहीँ इस बात से प्रशासन के अधिकारी भी जानकार है, अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर का कहना है, कि जिस तरह से बच्चे यहाँ पिछले एक महीने में आए है.
उस से यह साफ़ साबित होता है, कि हमारे समाज में आज भी बच्ची  के जन्म को बोझ समझा जाता है और कहीं न कहीं अन-पढ़ता इस पर बढ़ी हो रही है, जिस कारण यह आंकड़े दिन प्रति दिन बढ़ते जा रहे है, वहीँ उन का कहना है, कि आज जरुरत है, कि समाज में लोग बढ़-चढ़  कर आगे आए और इस को विरोध कर के लड़कियों और लड़कों में समानता रखे , साथ ही उन का कहना है, कि आज हमारे समाज का ताना बाना है, वह खराब है और दहेज़ प्रथा की सोच है और लड़कियों को अपनाने की जरूरत है, साथ ही उन का कहना है, कि प्रशासन लोगों की सोच बदलने के लिए कई प्रयास कर रहा है और परिणाम भी सार्थक हो रहे है, वहीँ इन बच्चियों के ऊपर उन का कहना है, कि इन बच्चियों को यहाँ छोड़ने के बाद इका-दूका लोग ही उन को मिलने के लिए आए थे, लेकिन ज्यादातर उन को मिलने के लिए कोई नहीं आता, इस से एक बात साफ़ साबित होती है, कि यहाँ पर आज भी लोग लड़कियों को अपनाने में गुरेज करते है.


केंद्र सरकार को चेतावनी


 मामला सहजधारी सिख वोटों का:श्री अकाल तख्त साहिब में हुई मीटिंग 
अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग की ख़ास रिपोर्ट 
केंद्र सरकार के सहजधारी सिखों के वोट डालने के अधिकार मामले में दिए नोटीफिकेशन और कानून मंत्री द्वारा सिखों के अलग अनंद मैरिज एक्ट  को लेकर आज श्री अकाल तख्त साहिब में पांच सिंह साहिबान की मीटिंग हुई, जिस में श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने  केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, कि सिखों के मामले में किसी तरह की दखल अन्दाजी बरदाश नही की जाए गी
      आज श्री अकाल तख्त साहिब में पांच सिंह साहिबान की केंद्र सरकार के सहजधारी सिखों के वोट डालने के अधिकार मामले में दिए नोटीफिकेशन और कानून मंत्री द्वारा सिखों के अलग अनंद मैरिज एक्ट  को लेकर मीटिंग हुई, इस मीटिंग में पांच सिंह साहिबान ने केंद्र सरकार के सहजधारी सिखों के वोट डालने के अधिकार मामले में दिए नोटीफिकेशन बारे फैसला लिया गया, इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने नोटीफिकेशन बारे जानकारी देते हुए बताया, कि इस से सिद्ध हो गया है, कि केंद्र की कांग्रेस सरकार सिखों ले साथ गलत नीतिया खेल रही है, सिखों को ही सिख गुरुद्वारों पर प्रबंध करने का अधिकार है, सहजधारी  शब्द सिख रहित मर्यादा में शामिल नही है, श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने  केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, कि सिखों के मामले में किसी तरह की दखल अन्दाजी बरदाश नही की जाएगी. 
वही दुसरी तरफ श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कानून मंत्री द्वारा सिखों के अलग अनंद मैरिज एक्ट बारे जानकारी देते हुए बताया, कि सिख अनंद मैरिज एक्ट को पास न करने से सिखों को दुसरे दर्जे के शहरी होने का अहसास दिलाया है और अंग्रेजो के समय सिखों ने अपना अनंद मैरिज एक्ट पास करवा लिया था, लिकिन आजाद हिंदुस्तान ने सिखों को अलग कौम मानने से कतरा रही है, इस दौरान  श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने सिख अनंद मैरिज एक्ट बारे जानकारी देते हुए  बताया कि इस एक्ट के लिए पांच सिंह साहिबान ने सिख विद्वानों की मीटिंग के लिए शरोमानी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सेक्ट्रीय दलमेघ सिंह को नियुक्त किया गया है, जिसमे   सिख विद्वानों के विचार-विमर्श कर उस की जानकारी 26 सितम्बर से पहले दी जाए गी, उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, कि अगर इस मामले को हल नहीं किया गया तो 26 सितम्बर को श्री अकाल तख्त साहिब में पांच सिंह साहिबान की मीटिंग में निर्णय लिया जाए गा, इस के बारे उन्होंने इस ममाले को हल करवाने के लिए सिख जगत को एक जुट होने की अपील की 

सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में की गई दीपमाला और आतिशबाजी

 अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग:   
सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में गुरु ग्रन्थ साहिब के प्रकाश पर्व के  दिन दूर-दूर से आये श्रद्धालुओ ने  इस पवित्र दिवस पर जहा  गुरु घर में नमस्तक होकर माथा टेक गुरु घर से आशीर्वाद लिया, वही आज  सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में शाम के वक़्त दीपमाला की गई और रहि-रास पाठ की समाप्ति  के बाद यहाँ पर आशितबाजी चलाई गई, जोकि खूबसूरत नजारा  देखने लायक था और  श्रद्धालुओ ने दीपमाला व्  आशितबाजी का नजारा देख  आपने-आप को बहुत भाग्यशाली समझा.
शरोमणी गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी की तरफ से श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के प्रकाश पर्व पर  आज सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में दीपमाला की गई और शाम के वक़्त रहि-रास पाठ की समाप्ति के बाद खूबसूरत आतिशबाजी चलाई गई, जोकि खूबसूरत नजारा  देखने लायक था और सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब की लाइटों से सजवाट देखने लायक थी, सच्च्खंड श्री हरि मंदिर साहिब के सरोवर की चारो परिक्रमा पर श्रद्धालुओ द्वारा दीप और मोमबतिया जलाई गई थी, इस मौके पर इस नज़ारे को देख कर श्रद्धालुओ ने जानकारी देते हुए बताया, कि आज हम  सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन कर आपने-आप को बहुत भाग्यशाली मानते है और श्री हरिमंदिर साहिब की दीपमाला व्  आशितबाजी का नजारा देख  आपने-आप को बहुत भाग्यशाली समझते है , 
सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब के चारों और पटाखों की गड गडगडाहट का एक अलोकिक नजारा नज़र आया, इस अलोकिक नज़रे को देख्ने के लिए देश विदेश से लोग यहाँ पर आते है, वहीं यहाँ आए लोगों का कहना है, कि ऐसा अलोकिक नजारा कही देखने को नही मिलता, वहीं इस अलोकिक नाजारो को देख कर ऐसा लग रहा था कि जैसे आकाश में कोइ पटाखों की वर्षा हो रही हो,  सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब के उपर पटाखों की दस्तक एक अदभूत नजारा पेश कर रही थी. 

मामूली विवाद के कारण एक व्यक्ति की हत्या

 अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग  
अमृतसर के अजनाला जिले में रात के वक़्त एक व्यक्ति की  मामूली विवाद के कारण दो व्यक्तियों ने गोली मार कर  हत्या कर दी, जिसमे 35 साला के एक व्यक्ति की मौत हो गयी और एक घायल हो गया, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है
गुरबक्श  सिंह की आपने ही गाँव के कुछ लोगों के साथ मामूली विवाद के कारण दुसरे पक्ष ने इस पर गोलियों से हमला कर दिया, जिस में गुरबक्श   सिंह की मौत हो गयी और एक राहगीर संदीप कुमार ज़ख़्मी हो गया, गुरबक्श सिंह के भाई पृथ्वी पाल का कहना है, कि जब वह दुकान बंद कर के आपने घर वापिस जा रहा था, तब उस को रास्ते में किसी की चिलाने की आवाज़ सुनी, आवाज सुन कर जब  वह वहा पहुंचा तो देखा, कि चार लोग हथियारों से लैस उन के भाई पर गोली चला दी,  जब वह आपने भाई को हस्पताल में ले कर पहुचा, उस के भाई की मौत हो चुकी थी
वहीँ इस मौके पर अजनाला जिले के पुलिस थाना प्रभारी हरकिशन सिंह ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया, कि गाँव के दोनों पक्षों में कोई मामूली विवाद हो गया था, जिस के चलते चार लोगों ने मिल कर गुरबक्श सिंह को बीच रास्ते में गोली मार दी और फरार हो गए, इस सम्बन्ध में मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की धड-पकड़ तेज कर दी है, वहीँ पुलिस का कहना है, कि यह कोई  मामूली विवाद था, जिस कारण यह हत्या हुई है, लेकिन अभी कारणों का पता नहीं लग सका है, वहीँ पुलिस का कहना है, कि वह जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लेगी. फिलहाल इस घटना से एक बात साफ़ साबित होती है, कि किस तरह एक मामूली तकरार ने एक व्यक्ति की ज़िन्दगी खत्म कर दी है और वहीँ पुलिस का दावा है, कि वह जल्द ही आरोपियों को पकड़ लेगी

सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में सजाए गए जलो

अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग: 
सच्च्खंड  श्री हरि मंदिर साहिब में श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के 407   वा  प्रकाश दिवस मनाया गया, इस दौरान श्रध्दालुओ ने  सच्च्खंड  श्री हरि मंदिर साहिब  आकर नमस्तक होकर माथा टेका और  सरोवर में स्नान किया और आपने मन की शांति के लिए गुरु घर में अरदास की और गुरु घर की खुशीया प्राप्त की, इस उपलक्ष्य में सच्च्खंड  श्री हरि मंदिर साहिब  में श्रध्दालुओ के दर्शन के लिए जलोह सजाया गया, जिसे श्रध्दालुओ ने जलोह देख कर आपने आप को भाग्यशाली समझा.. सच्च्खंड  श्री हरि मंदिर साहिब  में  शरोमानी गुरुद्वारा  प्रबंधक कमेटी की तरफ से श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी   के 407  वा  प्रकाश दिवस के उपलक्ष्य पर जलोह सजाया गया, इस जलोह को देखने के लिए भारी गिनती में श्रध्दालु दर्शन के लिए आते है, इस जलो में बहु-कीमती वस्तुए जिनमे हीरे, जवाहरात, सोने-चांदी का समान आदि श्रध्दालुओ के दर्शन के लिए सजाया जाता है. 
इन कीमती वस्तुयों में सोने के दरवाजे, सोने के पांच कस्सी, चांदी के पांच तसल्ला शामिल है, इस के इलावा महाराजा रणजीत सिंह द्वारा दिए गए नौ लाखा हार, नील कण्ड का मोर, सोने के छतर, असली मोतीयो की माला आदि का प्रदर्शन आज के दिन जलोह द्वारा श्रध्दालुओ के लिए सजाया जाता है, वहीँ इस मौके पर सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में एक अलोकिक नज़ारा देखने को मिलता है,जब गुरु घर को इस विरासती गहनों और आभूषणो 0के साथ सजाया जाता है साथ ही इस विशेष पर्व पर हर कोई इस अलोकिक नज़ारे को देख कर आपने आप को खुश महसूस कर रहा था,  श्रध्दालुओ ने जलोह के दर्शन कर आपने आप को भाग्य-शाली  बताया, वहीँ उन का कहना है की जलो साहिब के दर्शन कर उन को बहुत ख़ुशी हो रही है,क्यों कि बहुत कम बार यहाँ सच्च्खंड में जलो सजाये जाते है और आज वह भाग्य शाली है, कि उन्होंने यहाँ पर जलो साहिब के दर्शन किए है, जिस के लिए वह खुश है, वहीँ यहाँ जलो साहिब किसी भी प्रकाश पर्व पर आपनी एक अलग ही पहचान बनाते है, जहाँ गुरु घर में इन बहु कीमती हीरे, जवाहरात  और आभूषणो को सजाया जाता है, जो कि एक अलग ही नज़ारा पेश करते है 
 

नगर कीर्तन के उन अलौकिक पलों का सुखद अहसास

अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग: 
यह अलैकिक नजारा जिस ने देखा वही महसूस कर पाया कि यह तो सचमुच अलौकिक पलों का एक जीवंत अनुभव था. हर रोज़ अरदास में सुन लेना एक.अलग बात है कि गुरू मान्यो ग्रन्थ पर इस आदेश को लागू होते हुए देखना इस हकीकत का एक ऐसा सुखद अनुभव जिसे पा कर एक बार तो हर दुःख भूल अंतर आत्मा तक पहुँचती हुई. इस अवसर पर एक भव्य नगर कीर्तन भी निकाला गया. इस विशाल नगर कीर्तन गुरुद्वारा रामसर जी से श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का 407 वे प्रकाश दिवस पर एक विशाल नगर कीर्तन पांच प्यारों के नेतृत्व में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सोने की पालकी पर सूबोधित कर निकाला गया,यह नगर कीर्तन सच्चखंड श्री हरि मंदिर साहिब में सम्पन हुआ, इस नगर कीर्तन में स्कूली बच्चे, स्कूली बैंड, मिलट्री बैंड, गतका पार्टी, धार्मिक सभाए और विभिन्न सिख जत्थेबंदियों ने भाग लिया, हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह नगर कीर्तन का स्वागत किया, रास्तों में गुरु की प्यारी विभिन्न सिख जत्थेबंदियों की ओर से गतका के करतब दिखा कर सिख संगत को निहाल किया, इस मौके पर श्री अकाल के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश दिवस पर देश विदेश की समूह संगत को श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के 407 वे प्रकाश दिवस बधाई दी.  
सिखों के पाचवे गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने गुरुद्वारा रामसर जी में बाबा बुड्डा जी के सिर पर श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी को रख कर आप खुद चौहल साहिब कर सच्चखंड श्री हरि मंदिर साहिब में प्रकाश करवाया था, इसी को मद्देनजर रखते हुए हर साल की तरह आज भी गुरुद्वारा रामसर जी से श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का 407 वे प्रकाश दिवस पर एक विशाल नगर कीर्तन पांच प्यारों के नेतृत्व में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सोने की पालकी पर सूबोधित किया गया, श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया में यह नगर कीर्तन सच्चखंड श्री हरि मंदिर साहिब में सम्पन हुआ, इस नगर कीर्तन में स्कूली बच्चे, स्कूली बैंड, मिलट्री बैंड, गतका पार्टी, धार्मिक सभाए और विभिन्न सिख जत्थेबंदियों ने भाग लिया, हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह नगर कीर्तन का स्वागत किया, रास्तों में गुरु की प्यारी विभिन्न सिख जत्थेबंदियों की ओर से गतका के करतब दिखा कर सिख संगत को निहाल किया, इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश दिवस पर देश विदेश की समूह संगत को श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के 407 वे प्रकाश दिवस बधाई देते हुए कहा, कि हमे जो गुरु जी ने संदेश दिए है उन को अमल में लाना चाहिय और गुरु जी के बताए मार्ग पर चले श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के बाणी के साथ जोड़ लेना चाहिए और अपना जीवन सफल बना कर गुरु घर की खुशिया प्राप्त करनी चाहिए, वहीं उन का कहना है, कि आज के दिन सिखों के पाचवे गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने गुरुद्वारा रामसर जी में बाबा बुड्डा जी के सिर पर श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी को रख कर आप खुद चौहल साहिब कर सच्चखंड श्री हरि मंदिर साहिब में प्रकाश करवाया था,, वहीं उस तरह से ही आज नगर कीर्तन और यह पर्व मनाया जा रहा है साथ ही इस मौके पर उन्होंने देश विदेशो की संगतों को बधाई दी.

अमृतसर में भी रही ईद की धूम


 मुस्लिम भाईचारे ने श्रद्धा, उत्साह और हर्षो-उल्लास से मनाया ईद का त्यौहार
 अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग  
पूरे देश में ईद का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया गया. गुरु की नगरी अमृतसर में भी मुस्लिम भाईचारे ने ईद का त्यौहार अमृतसर के सुल्तानविंड इलाके में बहुत ही श्रद्धा, उत्साह और हर्षो-उल्लास से मनाया गया,  इस बार भी परम्परा के मुताबिक नमाज़ अदा की गयी और उस के बाद खुतबा जारी किया गया.
एक माह रोजे रखने के बाद आज ईद का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से  पूरे देश और दुनिया में मनाया गया और मुस्लिम धर्म का सब से बड़ा त्यौहार आज के दिन मनाया जाता है, वहीँ आज अमृतसर में सुलतान विंड इलाके में ईदगाह में आज हजारों की संख्या में लोगों ने इस नमाज़ में हिस्सा लेकर नमाज़ अदा कर एक - दुसरे को गले मिल कर ईद मुबारक दी, साथ ही इस मौके पर पूरे देश में लोगों से मन और शांति रखने का सन्देश दिया गया साथ ही लोगों ने एक दुसरे से मिल कर ख़ुशी ज़ाहिर की, 
इस मौके पर इमाम साहिब मुजामिल हुसैन कादरी का कहना है, कि आज एक पवित्र दिन है, जिस दिन आज नमाज़ अदा करने से सारी खुशियाँ आती है और यह हसी और हशी के पैगाम वाला दिन होता है, साथ ही उन का कहना है, कि आज उन्होंने इंसानियत का सन्देश दिया है और देश में अमन और शांति का सन्देश दिया है , वहीँ यहाँ लोगों का कहना है, कि आज वह यहाँ पर ईद के पवित्र त्यौहार को मना रहे है और देश वासियों को उन्होंने इस ईद के अवसर पर ईद की मुबारकबाद दी.

Monday, August 29, 2011

बाढ़ के साथ साथ पंजाब में नशे का दरिया भी उफान पर


पंजाब स्टेट स्पेशल सेल ने पकड़ी 60 करोड की हेरोइन 
अमृतसर (गजिंदर सिंह किंग)    
पंजाब के स्टेट स्पेशल सेल को उस समय बड़ी सफलता मिली जब उस ने पकिस्तान से आई नशे की एक बड़ी खेप को पकड़ने में सफलता हासिल की, उसके साथ ही स्पेशल सेल ने तीन तस्करों को भी गिरफ्तार करे 12  किलो हेरोइन बरामद की गयी है, जिस की अंतर राष्ट्रीय बाज़ार में कीमत 60  करोड रूपए है.
पंजाब के स्टेट स्पेशल सेल पुलिस ने एक सफ़ेद आल्टो कार समेत दो दोषी महिंदर सिंह और राकेश कुमार को गिरफ्तार किया और उन से 8  किलो हेरोइन बरामद की गयी, यह दोनों आपराधी इस नशे की खेप को तीसरे अपराधी लखविंदर सिंह के साथ मिल कर किसी को देने जा रहे थे, तभी पुलिस ने तीसरे अपराधी लखविंदर को गिरफ्तार कर किया, जिसके पास से 4  किलो हेरोइन बरामद की,   स्टेट स्पेशल सेल पुलिस के गिरफ्त में आये यह वह शातिर है, जो देश की जड़ों को खोखला कर रहे है दरअसल यह वह अपराधी है, जो पकिस्तान से नशे की खेप  को ला कर देश के अलग अलग हिस्सों में भेजते थे, पुलिस को एक गुप्त सूचना के मिली थी, कि पकिस्तान से नशे की बड़ी खेप भारत में आयी है,  स्टेट स्पेशल सेल पुलिस ने नाके दौरान इन तीनो को गिरफ्तार कर 12 किलो हेरोइन बरामद की है,  दरअसल इन तीनो गुनेह्गारों का जुर्म की दुनिया से कोई रास्ता नया नहीं है, इस गिरोह का मुख्य मास्टर माइंड  लखविंदर सिंह पहले भी हेरोइन  की तस्करी में सजा काट चुका है, इस से पहले डी,आर,आई विभार ने लखविंदर सिंह को  3  किलो हेरोइन के साथ  गिरफ्तार किया था, जिस में वह 8  साल की सजा काट चुका है, उस के बाद जब स्टेट स्पेशल ओपरेशन सेल ने 2010  में 28  किलो हेरोइन के साथ राजिंदर सिंह को गिरफ्तार किया तब भी वह इस नशे की खेप में शामिल था, यह ही नहीं  इस गिरोह का दूसरा सदस्य मोहिंदर सिंह को जम्मू पुलिस ने 4  किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया, साथ ही उस के बाद इस के बाद 1997  में कस्टम विभाग ने जब 50  किलो हेरोइन पकड़ी उस में भी इस का नाम आया था, वहीँ इस गिरोह का तीसरा  सदस्य राकेश कुमार पर भी जाली करंसी का मामला दर्ज है, जो कि जेल से परोल पर आया था और उस के बाद फरार था, यह जानकारी  पंजाब के स्टेट स्पेशल सेल के ऐ, आई, जी   डाक्टर कौस्तुब शर्मा ने प्रेस दौरान दी और उन्होंने  इन तीनों आपराधियों बारे जानकारी देते हुए बताया, कि इन तीनों आपराधियों का सम्बन्ध पकिस्तान से है और यह लोग पकिस्तान से नशे की तस्करी करते थे और साथ ही यह तीन लोग इस स्मगलिंग के धंधे के सब से पुराने खिलाड़ी है, वहीँ उन्होंने कहा, कि  इन के पकडे जाने से पकिस्तान के साथ तस्करी के सम्बन्धों पर कई बड़े खुलासे हो सकते है
फिलहाल पुलिस ने चाहे इन तीन अपराधियों को 60  करोड की हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है, लेकिन इन के पकडे जाने से यह बात तो साफ़ है, कि कहीं न कही देश की सरहद पर कोई ऐसी सेंध है, जिस के कारण यह आरोपी पकिस्तान से हेरोइन भारत में लाते है, वहीँ पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है, कि नशे की यह खेप देश के किस हिस्से में देने जा रहे थे.  

Sunday, August 28, 2011

साउथ अफ्रीका से बुलाए गए कोच


 अब सपना नहीं रहा महिला खिलाडियों को क्रिकेट प्रशिक्षण  
अमृतसर से (गजिंदर सिंह किंग): 
देश में महिला क्रिकेट को बढाने के लिए कई प्रयास किये जाते है, लेकिन आज भी महिला क्रिकेट टीम उस स्तर तक नहीं पहुँच सकी, लेकिन अब इस क्रिकेट के स्तर को ऊँचा उठाने के लिए अमृतसर क्रिकेट प्रशासन ने एक विशेष रास्ता अख्तियार किया है, जिस के चलते अब अमृतसर की महिला खिलाडियों को प्रशिक्षण देने के लिए साउथ अफ्रीका से कोच बुलाए गए है, जिस से की माहिला क्रिकेट को बढावा मिल सके.  
भारत की स्टार महिला क्रिकेटर अंजुमन चोपड़ा देश के लिए कई बार इन्होने देश का नाम माहिला क्रिकेट में रोशन किया है, लेकिन अब वह एक संस्था वोमेन क्रिकेट वर्ल्ड के सहयोग से अमृतसर में महिलाओं के लिए एक विशेष उपहार ले कर आयी है, जिस के तहत लेवल तीन की एक विशेष कोच को साउथ अफ्रीका से बुलाया गया है, जिस से महिला क्रिकेट को एक नई दिशा मिलेगी, उन का कहना है, कि आज देश में महिला क्रिकेट के अंतर राष्ट्रीय मैच बहुत कम होते है, जिस कारण महिला क्रिकेट को वह मुकाम हासिल नहीं हो सका, जिस कारण खिलाडियों में प्रतिभा कम होती है, वहीँ आज इस के तहत साउथ अफ्रीका से एक विशेष महिला कोच को यहाँ लाया गया है, जो कि अमृतसर क्रिकेट एसोसीएशन के साथ मिल कर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी जा रही है. 
साथ ही उन का कहना है, कि जिस के तहत अंतर राष्ट्रीय कोच इन को प्रशिक्षण देगा, वहीँ उन का कहना है, कि वह भी एक खिलाडी है और वह जानती है, कि कोचिंग की एक खिलाड़ी के लिए क्या महत्वता होती है, वहीँ उन का कहना है, कि क्रिकेट जितनी ज्यादा खेली जाए गी उतनी अच्छी है, जिस के चलते ज्यादा से ज्यादा मैच करवाए जाये, ताकि क्रिकेट को बढावा मिल सके और महिला क्रिकेट भी आगे बढ़ कर खेल सके. 
वहीँ दूसरी और इस पूरे मामले में विदेशी कोच मार्च्लीस का कहना है, कि भारत में क्रिकेट को लोग पसंद करते है और भारत के मुकाबले साउथ अफ्रीका के पास अंतर राष्ट्रीय तजुर्बा नहीं है, लेकिन भारत में महिला क्रिकेट का अंतर राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके है, लेकिन उन को प्रशिक्षण की जरुरत है, जिस के चलते वह यहाँ पर है, साथ ही उन का कहना है, कि साउथ अफ्रीका में क्रिकेट का एक अच्छा स्तर है और वह उस अच्छे स्तर को यहाँ की महिला खिलाडियों को देंगे, जिस से कि उन के खेल में निखार आएगा, क्यों कि यहाँ की महिला खिलाडियों का मैदान में खेल अच्छा नहीं है और वह प्रयास करेंगी, कि इस खेल के स्तर को बढावा जाये
    वहीँ दूसरी ओर इस के आयोजकों का कहना है, कि महिला क्रिकेट को आगे बढाने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है, जिस के चलते इस महिला कोच को यहाँ बुलाया गया है, साथ ही उन का कहना है, कि इस के तहत यह हम से कोई पैसा नहीं लेंगे और यह एक संस्था है, साथ ही यह कोच इन को प्रशिक्षण देगी, साथ ही उन का कहना है, कि आने वाले समय में ट्वंटी ट्वंटी टूर्नामेंट करवाया जाएगा, जिस में विदेशी खिलाडियों को यहाँ पर बुलाया जायेगा, जिस से कि महिला क्रिकेट को एक बढावा मिलेगा और वह आपनी तरफ से उन की पूरी सहायता करेंगे, जिस के चलते यह दस दिन यहाँ पर अभ्यास करवाएंगी, साथ ही उन का कहना है, कि साउथ अफ्रीका के खिलाडियों का शरीरिक और मानसिक स्तर यहाँ से ऊँचा है, जिस के तहत यहाँ यह प्रयास किया गया है, जिस से दोनों देशों को फायदा मिलेगा
    फिलहाल अब देखना यह होगा, कि यह विदेशी महिला कोच भारत की इन महिला खिलाडियों को आपना प्रशिक्षण किस तरह से देती है, जिस से कि महिला क्रिकेट का नाम भी पुरुष टीम की तरह पूरी दुनिया में ऊचा हो सके, क्या यह विदेशी कोच भारत की टीम को एक नई दिशा दिखा पायेगी

मीडिया पर छाई अन्ना की जीत

पंजाब केसरी के मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित खबर 
अन्ना की जीत ने एक नया इतिहास रचा है. जन तन्त्र में डगमगाया विशवास इस जीत ने एक बार फिर भाल कर दिया है. जिन लोगों के सामने इस भ्रष्ट तन्त्र ने अन्धेरा ही अन्धेरा कर रखा था, उह्नें भी लगा है कि नहीं बहुत कुझ किया जा सकता है. जो लोग माओवाद या नक्सलवाद के रास्ते की तरफ  कुछ आशाएं बांध कर सोच रहे थे उन्हें लगा है कि नहीं अभी भी इस हालत में भी इस देश में शांतमय  रह कर बड़ी से बड़ी लड़ाई लड़ी जा सकती है. बाबा रामदेव के साथ सलूक से नाराज़ हुए लोगों ने भी सरकार के रवैये पर दोबारा सोचना शुरू कर दिया है. आतंकी संगठन इस देश में लोक तन्त्र की हत्या जैसे जिन मुद्दों को अक्सर उठाते थे उनके सामने सरकार ने साबित कर दिया है कि यहां ऐसा कुछ नहीं होता. यहां लोक तांत्रिक ढंग से उठाई गयी आवाज़ को पूरी गंभीरता से सुना जाता है. इस जीत की ख़बरों को अख़बारों ने पूरी प्रमुखता से प्रकाशित किया है.जालंधर से प्रकाशित पंजाब केसरी ने भी इस जीत की खबर को अपनी मुख्य खबर बनाते हुए शीर्षक दिया है जन का होगा लोक पाल. इस खबर के अलावा भी अख़बार ने इस मुद्दे पर बहुत कुछ प्रकाशित किया है.
इसी तरह दैनिक जागरण ने भी इसे अपनी मुख्य खबर बनाते हुए लिखा है कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में शनिवार को एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया। जन आंदोलन के सामने आखिरकार सरकार झुकी। अपार जन समर्थन की बदौलत अन्ना हजारे का जनलोकपाल आंदोलन जीत गया। संसद में उनकी तीनों प्रमुख मांगों के समर्थन में सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित हुआ। इसके साथ ही अन्ना ने रविवार को सुबह १० बजे अपना अनशन तोड़ देने का एलान भी कर दिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा कि जनता की इच्छा ही संसद की इच्छा है। संसद में प्रस्ताव पारित होने की खबर मिलते ही रामलीला मैदान के साथ-साथ देश के दूसरे अन्य भागों में लोगों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। अपने अनशन के १२वें दिन अन्ना हजारे अपने हजारों समर्थकों के साथ दूसरी बार जश्न मना रहे थे। इस बार आंदोलनकारियों के बीच एक मंत्री और दो कांग्रेसी सांसद भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख और सांसद संदीप दीक्षित तथा विलास मुत्तमवार प्रधानमंत्री की चिट्ठी लेकर आए थे। इसमें अन्ना की तीनों मांग के समर्थन में संसद में प्रस्ताव पारित होने की सूचना थी। साथ ही अनुरोध था अनशन तोड़ देने का। अन्ना ने तुरंत कहा कि वे अगली सुबह दस बजे अनशन तोड़ देंगे। इससे पहले अन्ना की तीनों मांगों को संसद में पारित किया जा चुका था। छुट्टी के दिन बुलाई गई संसद की कार्यवाही की शुरुआत में ही इसका प्रस्ताव सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने रख दिया। उन्होंने पहले अन्ना के आंदोलन और उस संबंध में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। रात आठ बजे तक चली कार्यवाही के अंत में यह प्रस्ताव पारित माना गया। यही प्रक्रिया राज्यसभा में भी अपनाई गई। इस तरह जन लोकपाल के तीनों अहम बिंदुओं के पक्ष में सदन की भावना जाहिर हो गई। अन्ना की तीन अहम मांगों में पहली थी-राज्यों में भी लोकपाल की तर्ज पर लोकायुक्त कायम हो। उनकी दूसरी मांग थी- सभी केंद्रीय कर्मचारी लोकपाल के और राज्य सरकार के सभी कर्मचारी लोकायुक्त के दायरे में आएं। तीसरी मांग थी कि नागरिक घोषणापत्र के जरिये जनता के सारे काम तय समय सीमा में हों। हालांकि शनिवार को भी सरकार लगातार इस कोशिश में रही कि सिर्फ सदन में चर्चा कर इस मामले को निपटा दिया जाए और इस पर प्रस्ताव पारित नहीं करना पड़े। सरकार के इस रवैये से एक बार फिर माहौल बिगड़ने की नौबत आ गई, मगर मुख्य विपक्षी दल भाजपा के हस्तक्षेप के बाद कुछ ही घंटों के अंदर सरकार ने फिर सफाई दी कि वह प्रस्ताव पारित करने के लिए तैयार है। आखिरकार रात लगभग आठ बजे प्रणब ने एक बार फिर सरकार का प्रस्ताव रखा, जिसे सदस्यों ने मेज थपथपा कर पारित करवाया। साढ़े आठ बजे राज्यसभा में भी यह प्रस्ताव पारित हुआ। सदन की इस भावना को संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा। वहां इस बिल पर पहले से ही चर्चा हो रही है। संसद में आम तौर पर किसी भी प्रस्ताव के पक्ष में ध्वनि मत विभाजन की प्रक्रिया इस मामले में नहीं अपनाए जाने के बावजूद इसे सदन से पारित प्रस्ताव माना जाएगा। पूर्व सॉलीसिटर जनरल हरीश साल्वे के मुताबिक चूंकि इस प्रस्ताव का किसी सदस्य ने विरोध नहीं किया इसलिए इसमें ध्वनि मत की जरूरत नहीं थी। प्रस्ताव पास होने के बाद खुद प्रणब मुखर्जी ने कहा भी कि उम्मीद की जानी चाहिए कि इसके साथ ही संसद की सर्वोच्चता और इसे चुनौती जैसी बहस अब समाप्त हो जाएंगी। सदन में चर्चा के दौरान भाजपा और जद (यू) ने तीनों बिंदुओं का पूर्ण समर्थन किया। बसपा और वाम दलों ने लोकायुक्त की मांग को छोड़ बाकी दोनों मांगों का समर्थन किया। कांग्रेस सदस्यों ने किंतु-परंतु के साथ इन मांगों को समर्थन दिया।

तीन दिवसीय नगर कीर्तन श्री अकाल तख्त साहिब से रवाना


श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के 305वे सम्पूर्णता दिवस  पर अलोकिक  नगर कीर्तन 
अमृतसर से गजिंदर सिंह किंग  
शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के 305वे सम्पूर्णता दिवस पर एक अलोकिक  नगर कीर्तन  पांच प्यारों के नेतृत्व में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया में आरम्भ हुआ. श्री अकाल तखत साहिब से आरभ्भ हुआ यह नगर कीर्तन अमृतसर से रवाना हो कर 30 तारीख को तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो में जा कर संम्पन होगा, जहा दो दिन का धार्मिक दीवान सजे गा.
श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के 305  वे संपूर्ण दिवस पर शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेठी की तरफ से एक नगर कीर्तन  पांच प्यारों के नेतृत्व में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया में श्री अकाल तख्त साहिब से रवाना हुआ तो श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदासिंह साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह     जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब  जी को आपने  शीश पर सूबोधित कर सुनहरी पालकी साहिब तक पहुँचाया. 
इस मौके पर उन्होंने मीडिया को भी संबोधित  किया और इस दिन के इतिहास और महत्व की जानकारी भी दी. उन्होंने याद दिलाया की साहिब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने दमदमा साहिब की पावन भूमि पर श्री गुरु ग्रन्थ साहिब  जी को सम्पूरंता  प्रदान की थी
इस नगर कीर्तन में  सिख संगतों और स्कूल, कालेज के बच्चो ने भाग किया, रास्तो में संगतों ने इस नगर कीर्तन का स्वागत किया, इस दौरान  ज्ञानी गुरबचन सिंह  जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब  जी ने सम्पूर्णता दिवस पर बधाई देते हुए सब लोगों से अपील की,  कि वह इस नगर कीर्तन का  सत्कार करे और जो हमारे दशम गुरु जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में दी गई शिक्षाओं को मानना  चाहिए , श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की विचार धारा से जुड़ना चाहिए  
        इस मौके पर शरोमानी  गुरुद्वारा  प्रबंधक कमेठी सेक्टरी दलमेघ सिंह ने  श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के संपूर्ण दिवस पर बधाई  देते हुए इस नगर कीर्तन बारे जानकारी देते हुए बताया, कि यह नगर कीर्तन शाम को फरीदकोट के मुदकी में विश्राम करेगा, उस के बाद कल सुबह यह मुदकी से  रवाना हो कर 29  तारीख को हाजी रतन में रुके गा  और 30 तारीख को यह हाजी रतन भटिंडा से रवाना हो कर तलवंडी साबो पहुंचेगा, जहाँ धार्मिक दीवान सजाये जायेंगे और इस नगर कीर्तन का वहा समापन होगा. 

बोधिसत्व कस्तूरिया की कुछ काव्य रचनायें

"कान्हा"
लगा के टोपी "अन्ना",अब तो गुण्डे भी मैदाँ मे आ गये !
भ्र्ष्टाचार के विरोध मे, अब तो भ्र्ष्टाचारी  भी छा गये !!
कैसे हो इसका अंत ,सोच-सोच कार्यकर्ता ही घबडा गये !
विधेयक की परिभाषा से अपरिचित,परिमार्जन को आ गये !!
लोकपाल जादू की पुडिया ,खाते ही सब ईमानदारी पा गये !
भ्रष्टाचार रगों मे ऐसे दौडा,अपने -अपनो को ही  खा गये !!
फ़िर भी अन्दाज-ए-अन्ना कया खूब, जन-जन मे छा गये !
कोई कहता गाँधी है,कोई कहता "कान्हा"को फ़िर हम पा गये!!
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ज्वालामुखी

अब न कोई राह सूझती है,
न कोई रह्बर दिख रहा!
कहने की न हो हिम्मत,
फ़िर भी इबारत लिख रहा!!
कल तक भ्रष्टाचार मिटाने वाला,
शेर की खाल मे भेडिया दिख रहा !!अब न कोई.............
संसद और संविधान की आड मे,
हर कोई इधर -उधर छिप रहा !! अब न कोई.............
अब तो हमे अपनी राह बनानी है,
नौजवां कितना बेसब्र दिख रहा !! अब न कोई.............
ज्वालामुखी न कोई फ़ट पडे,
बोधिसत्व ये इबारत लिख रहा !!अब न कोई....
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अनुबन्ध
प्रीत का यह अनोखा अनुबन्ध,
यह कब,किसे कहाँ हो जाये ?
जिससे न था  कोई समब्न्ध!! प्रीत का यह अनोखा अनुबन्ध !
शून्य से भी जब फ़ूटता ज्वार,
फ़िर टूट्ता है हर प्रतिबन्ध !!  प्रीत का यह अनोखा अनुबन्ध !
पहले दो अन्जानों का मिलन,
फ़िर बने युग-युग के सम्बन्ध !! प्रीत का यह अनोखा अनुबन्ध !
प्यार और विश्वास से निर्मित,
हो जाते हैं जन्मों के अनुबन्ध !! प्रीत का यह अनोखा अनुबन्ध !
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दर्द का  अह्सास
दर्द का अह्सास ,
क्यूं कर कभी होता नही ?
प्यार की प्यास मे,
आज तक रोता नही !! दर्द का अह्सास..........
ज़ज़्बात मे बह जाये,
मैं ऐसा कोई सोता नही!!दर्द का अह्सास..........
है इल्म मुझको,बेमतलब
रिश्तों को ढोता नही !! दर्द का अह्सास..........
किसी को अपनाना कया,
मेरा कोई बेटा या पोता नही !! दर्द का अह्सास.....
हैं यही मेरी लाश की,
कपाल क्रिया पर दर्द होता नही !!दर्द का अह्सास...
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गीत फ़िर मेरी प्रीत के ही गाना
गर किसी मोड पर मिल जाओ,
तो  कभी तुम ना मुसकुराना !
हो जायेगे ज़ख्म सब फ़िर हरे
जिन्को पडा था मुझे भुलाना !! ज़िन्दगी के किसी मोड पर
कुरेदो ना मेरे ज़िस्म के नासूर,
जी उठेगा दर्द  वो ही पुराना !! ज़िन्दगी के किसी मोड पर
खुश रहो तुम अपनी ज़िन्दगी मे,
अब तो यही है मेरा तराना !! ज़िन्दगी के किसी मोड पर
मय्य्त पर मेरी सज़दा करो तो,
गीत फ़िर मेरी प्रीत के ही गाना!ज़िन्दगी के किसी मोड पर 
बोधिसत्व कस्तूरिया 
२०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७