Saturday, May 21, 2011

बहुत पहले भगत ने कर दिखाया था जो संसद में


ये सत्ता हो गयी बहरी,धमाका कर दिखाऊँ क्या?


                                                                                            श्यामल सुमन की काव्य रचनाएँ 

तस्वीर

श्यामल सुमन

अगर तू बूँद स्वाती की, तो मैं इक सीप बन जाऊँ
कहीं बन जाओ तुम बाती, तो मैं इक दीप बन जाऊँ
अंधेरे और नफरत को मिटाता प्रेम का दीपक
बनो तुम प्रेम की पाती, तो मैं इक गीत बन जाऊँ


तेरी आँखों में गर कोई, मेरी तस्वीर बन जाये
मेरी कविता भी जीने की, नयी तदबीर बन जाये
बडी मुश्किल से पाता है कोई दुनियाँ में अपनापन
बना लो तुम अगर अपना, मेरी तकदीर बन जाये


भला बेचैन क्यों होता, जो तेरे पास आता हूँ
कभी डरता हूँ मन ही मन, कभी विश्वास पाता हूँ
नहीं है होंठ के वश में जो भाषा नैन की बोले
नैन बोले जो नैना से, तरन्नुम खास गाता हूँ

कई लोगों को देखा है, जो छुपकर के गजल गाते
बहुत हैं लोग दुनियाँ में, जो गिरकर के संभल जाते
इसी सावन में अपना घर जला है क्या कहूँ यारो
नहीं रोता हूँ फिर भी आँख से, आँसू निकल आते


है प्रेमी का मिलन मुश्किल, भला कैसी रवायत है
मुझे बस याद रख लेना, यही क्या कम इनायत है
भ्रमर को कौन रोकेगा सुमन के पास जाने से
नजर से देख भर लूँ फिर, नहीं कोई शिकायत है !


उलझन

सभी संतों ने सिखलाया, प्रभु का नाम है जपना
सुनहरे कल भी आयेंगे, दिखाते रोज एक सपना
वतन आजाद वर्षों से बढ़ी जनता की बदहाली,
भले छत हो न हो सर पे, ये सारा देश है अपना

कोई सुनता नहीं मेरी, तो गाकर फिर सुनाऊँ क्या?
सभी मदहोश अपने में, तमाशा कर दिखाऊँ क्या?
बहुत पहले भगत ने कर दिखाया था जो संसद में,
ये सत्ता हो गयी बहरी, धमाका कर दिखाऊँ क्या?


मचलना चाहता है मन, नहीं फिर भी मचल पाता
जमाने की है जो हालत, कि मेरा दिल दहल जाता
समन्दर डर गया है देखकर आँखों के ये आँसू,
कलम की स्याह धारा बनके, शब्दों में बदल जाता

लिखूँ जन-गीत मैं प्रतिदिन, ये साँसें चल रहीं जबतक
कठिन संकल्प है देखूँ, निभा पाऊँगा मैं कबतक
उपाधि और शोहरत की ललक में फँस गयी कविता,
जिया हूँ बेचकर श्रम को, कलम बेची नहीं अबतक

खुशी आते ही बाँहों से, न जाने क्यों छिटक जाती?
मिलन की कल्पना भी क्यों, विरह बनकर सिमट जाती?
सभी सपने सदा शीशे के जैसे टूट जाते क्यों?
अजब है बेल काँटों की सुमन से क्यों लिपट जाती?

                                                  ----श्यामल सुमन 

श्यामल सुमकी कवितायेँ आपको कैसी लगीं...इस पर अवश्य कुछ लिखिए...आपके विचारों की इंतज़ार रहेगी. आप उन्हें यहां पर भी मिल सकते हैं अर्थात मनोरमा के पास जा कर...बस यहां क्लिक कीजिये..--रेक्टर कथूरिया 

Friday, May 20, 2011

नारी शक्ति के लिए बना एतिहासिक दिन

शुक्रवार 20 मई को भी लोगों का ध्यान फिर खबरों पर केन्द्रित रहा. पशिचमी बंगाल में  लम्बे संघर्ष के बाद प्राप्त हुयी जीत के बाद ममता बनर्जी  राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता सम्भाल ली. कोलकाता के राज्य भवन में हुए एक समारोह के दौरान राज्यपाल एम् के नारायणन ने ममता को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. लोगों के साथ और जड़ने की कवायद ममता ने नए पद के साथ और तेज़ कर दे है. शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद  के बाद ममता ने मंत्री मंडल के 43 शियोगियों के साथ .राज्य भवन से राज्य सचिवालय तक का आठ सो मित्र लम्बा सफर पैदल तय किया.समारोह में शामिल होने के लिए 3200 निमंत्रित मेहमानों में सोनागाचे में जीवन व्यतीत करने वाली यौनकर्मियों के परिजनों को बुलाया गया था वहीँ नंदी ग्राम और सिंगूर में हुयी हिंसा का शिकार होने वालों के परिजनों को भी विशेष तौर पर न्योता भेजा गया था. .कर्ज़ से कराह रहे बंगाल के सर पर दो लाख करोड़ रूपये का कर्ज़ है और ममता को व्बिरासत में मिला खजाना खाली है. इस खाली खजाने से लोगों को राहत कैसे देनी है और नए कर लगाने से कैसे बचना है यह किसी परीक्षा से कम नहीं होगा. इसके साथ ही माओवाद  की चुनौती भी काफी बड़ी होगी.साथ  ही साथ सी पी एम की नयी रणनीतियों  को कैसे नाकाम बनाना है यह भी बहुत ही अहम बात होगी. इस पर जब जब भी कुछ नया मिलेगा हम आपके सामने लाते रहेंगे. अब चलते हैं अगली खबर की ओर.. यह तो थी एम से ममता बनर्जी की बात अब करते हैं एम से ही मायावती की बात.  दलित समाज के लिए करिश्मा बन कर उभरी मायावती का कहना है कांग्रेस पार्टी किसानो पर फूहड़ राजनीती कर रही है. यूपी की मुख्या मंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस तरह कि ओछी राज्नेती  करने से बाज़  आये. गाँव भाता पारसोल में हुयी जांच के दौरान वहां कि राख में से किसी किस्म के मानव अवशेष न मिलने कि रिपोर्ट आने से माया वती सरकार अब कांग्रेस पर पूरी तरह से आक्रामक हो गयी है. गौरतलब है कि यह जांच फोरेंसिक विभाग ने कि ठगी. कांग्रेस कि तरफ से रहुल गाँधी ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने महिलायों से बलात्कार किये और किसानों कि हत्याएं करके उनके शव जला दिए. इन आरोपों कि जांच के लिए इस राख के नमूने आगरा स्थित केन्द्रीय फोरेंसिक प्रयोगशाला में भेजे गए थे. रिपोर्ट में मानव अवशेष न मिलने कि पुष्टि हुयी है. अब देखते हैं कि आगे क्या रुख लेता है किसान आन्दोलन. --रेक्टर कथूरिया  

चीन ने पाकिस्तान को दिया हौंसला

 अमेरिका को दी चेतावनी  दलाईलामा के लिए खोले दरवाज़े 
खबर जितनी महत्वपूरण है उतनी ही हैरानकुन भी. चीन की सरकार ने दलाईलामा के प्रति अपने रुख में नरमी लाते हुए कहा है कि दलाईलामा का तिब्बत में स्वागत है. दलाई लामा कि तरफ से सन्यास लेने के बाद चीन कि सरकार ने पहली बार इस तरह कि नरमी दिखाई है. गौर तलब है कि दलाईलामा ने मार्च म,हीने में सन्यास ले लिया था और उनकी राजनीतिक जिम्मेदारियां लोबसांग सांगे को अपना प्रधानमन्त्री चुन लिया था. इस समय 43 वर्षों कि उम्र के संगे आज कल हार्वर्ड में अध्यापन करते हैं. इस नए घटनाक्रम के बाद पहली बार चीन सरकार कि तरफ से एक उच्च अधिकारी पद्मा चोलिंग ने कहा कि अगर दलाई लामा अपनी अलगाव वादी सरगर्मियों को छोड़ दें और तिब्बत शान्ति के साथ बोद्ध धर्म के लिए  काम करें तो उनका स्वागत है. आपो याद होगा कि दलाई लामा अलगाव वाद जैसी सरगर्मियों के आरोपों को बहुत पहले ही नकार चुके हैं. अपनी मात्र भूमि के लिए सार्थक स्वायत्तता  की मांग को लेकर 1959  से जलावतनी का जीवन बिता रहे दलाई लामा को 1989 में शान्ति के लिए नोबल पुरूस्कार भी मिला था. पहली ही नजर में अपना बना लेने का जादू उनके व्यक्तित्व में है. लम्बे संघर्ष के बावजूद उन्होंने कभी अपने अंदोलन की गति कम नहीं होने दी. 
75 बरस की उम्र में भी वह पूरी  तरह से सक्रिय हैं. प्राकृतिक  सुन्दरता और देवभूमि के तौर पर जाने जाते  हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के  पास मैक्डोल गंज में उनकी सरकार का मुख्यालय भी है जहाँ तिब्बत के जन जेवन को जी कर देखा जा सकता है. वहां के लोग अपने इस वृद्ध नेता की तस्वीरें लगा कर घर घर उनकी पूजा करते हैं. एक प्रमुख सैलानी स्थल बन चुके इस स्थान पर जा कर तिब्बत की सांस्कृतिक धरोहर के दर्शन भी बहुत ही नजदीक से किये जा सकते हैं. इस पर बहुत सी बातें की जा सकती हैं पर बाकी फिर कभी सही. अब चलते हैं अगली खबर की ओर..तन की बाकी खबरों की खबर भी ली जा सके.
तिब्बत की आज़ादी के आन्दोलन को सामन्ती दासता का आन्दोलन कहने वाली चीन सरकार ने पकिस्तान पर की गयी अमेरिकी कारवाई पर गहरा  रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि अमेरिका पकिस्तान से दूर रहे. पकिस्तान के एक अंग्रेजी अखबार दी नेशन में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक चीन ने कहा है कि पकिस्तान कि संप्रुभता का सम्मान किया जाना चाहिए. चेन के प्रधान मंत्री वें ज्याबयो ने इस आशय का ब्यान उस वक्त दिया है जब पाकिस्तान के प्रधान मंत्री यूसफ रज़ा गिलानी चीन के दौरे पर हैं. ओसामा बिन लादेन के खिलाफ पकिस्तान पर की गयी अमेरिकी कारवाई के गिलानी की यात्रा और चीन का ब्यान दोनों ही महत्वपूर्ण हैं. इसी सम्बन्ध में यूसफ  रज़ा गिलानी ने भी कहा है की चीन हमारा सबसे अच्छा दोस्त है.. --रेक्टर कथूरिया  

Wednesday, May 18, 2011

औरत होने का दर्द कौन समझता है ?

                       "औरत होने का दर्द "



औरत होने का दर्द कौन समझता है ?,
 हर कोई बस परखता है !

कभी माँ, कभी बीवी बनकर बलि की देवी बनती   है 
नौ महीने गर्भ के  बीज को पल- पल खून से सींचती है 
नव कोपल के फूटने के लम्बे इन्तजार को झेलती है 
कौन आगे बढकर प्यार से माथे का पसीना पौंछता है ?
नवजीव के खिलने के असहनीय दर्द को कौन समझता है ?,
हर कोई  बस परखता है !

माँ बनकर अपने जिगर के टुकड़े को हर दिन बढ़ते देखती है 
कभी प्यार से तो, कभी डांट  से पुचकारती है 
खुद भूखा  रहकर भी हर एक का पेट भरती  है 
कभी रात का बचा भात तो ,कभी दिन की बची रोटी रात में खाती है 
इस बलिदान को कौन समझता है ?, 
हर कोई बस परखता है !

कभी पति, कभी बच्चों की  दूरी को  कम करते पिस जाती है 
बच्चें लायक हो तो पिता का सीना गर्व से फूलता है 
परीक्षा में कम  निकले तो हर कोई माता को कोसता है 
हम सफ़र के माथे की हर शिकन को तुरंत भांप लेती  है 
इस ममता को कौन समझता है ?,
 हर कोई बस परखता है !

कभी बेटी, कभी बहन बनकर सब सह जाती  है 
कभी बाप , कभी भाई के गुस्से में  भी मुस्कुराती  है 
मायके में बचपन के आँगन का हर कर्ज चुकाती है 
अपने हर गम, हर दुःख में भी सबका गम भुलाती है 
इस दुलार को कौन समझता है ?, 
हर कोई बस परखता है !

कभी प्रेमिका बनकर, कभी दोस्ती के नाम पर छली जाती  है 
खुद गुस्सा होकर भी अपने प्रेमी को हर पल मनाती है 
प्रेमी के मन की हर बात  बिन कहे  समझ जाती है 
 अपना हर आंसू  उससे छुपा लेती  है 
कभी उसकी याद में तो, कभी बेरुखी में तड़पती है 
इस जलन को कौन समझता है ? , 
हर कोई बस परखता है !

कभी बहू बनकर दहेज़ के नाम पर ताने सह जाती  है 
बेटी पैदा करने  पर  गुनाहगार ठहराई  जाती है 
कभी प्रसव तो , कभी गर्भ -पात की पीड़ा  झेल जाती है 
अपने ही अरमानों की अर्थी  अपने कांधो पर उठाती है 
इस संवेदना को कौन समझता है ? , 
हर कोई बस परखता है !
                  
                                                              ---अलका सैनी

किसने रची देश और सुरक्षा एजंसियों को बदनाम करने की साज़िश?

देश में एक महत्वपूर्ण और सम्वेदनशील राज्य के मुख्यमंत्री का हैलीकाप्टर गायब हो जाता है और हमें कुछ पता ही नहीं चलता. इस के बावजूद यहाँ बातें उठती हैं की हम भी अमेरिका जैसी कारवाई करेंगे. एक तरफ अनाज सड़ता है दूसरी तरफ लोग भूख से मरते रहते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट की फटकार सुन कर भी यहाँ श्रम आने जैसी कोई बात नजर ही नहीं आती. अपराधी थानों के सामने या थानों मेंआ कर अपने विरोधी को निशाना बना जाते हैं लेकिन यहाँ न किसी के दिल को दर्द होता है और न ही दिमाग में कोई चिंता उठती है. लोगों को सरेआम गले में टायर दाल दाल कर जला दिया जाता है लेकिन २६ बरस गुजर जाने के बाद भी अपराधी सरें घुमते हैं और कहते हैं की लो कर लो जो करना है. अब इस तरह की बातों से हैरानी होनी भी बंद हो गयी है लेकिन एक खबर ने हिला कर रख दिया है. लादेन के खिलाफ  अचानक और गुपचुप हुयी अमेरिकी कारवाई से जितनी फजीहत पाकिस्तान सरकार और वहां की सुरक्षा एजंसियों  को हुयी उससे भी ज्यादा बुरी हालत लग रही है अब हमारे यहाँ.  पाकिस्तान को जिन 50 मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची सौंपी गयी है उनमें से एक मोस्ट वांटेड अपराधी यहाँ देश में ही है.. गौरतलब है कि जिसे सन 2003 में हुए बम धमाके का आरोपी बताया गया है वह वह ठाणे के ही वागले एस्टेट में रह रहा है. आपको यद् होगा कि ये धमाके मुम्बई सेंट्रल, मुलुंड और विलय परले में हुए थे. वजहल  कमर नाम के इस आरोपी ने एक टीवी चैनल को भी बताया कि वह तो यहाँ अपनी बीमार मन, पत्नी और बच्चों के साथ रह रहा है. वजहल ने मिडिया को बताया कि वह कभी पाकिस्तान नहीं गया. उसने यह भी कहा कि सन 2010 में उसे अवैध हथियार रखने के एक मामले में गिरफ्तार अवश्य किया गया था लेकिन बाद में सभी मामलों में जमानत पर रिहा कर दिया गया.  अब इस खबर की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. पूरे देश और देश कि सुरक्षा एजंसियों का नाम मिटटी में मिलाने की साज़िश से भी इंकार नहीं किया जा सकता पर सारी हकीकत किसी व्यापक जाँच के बाद ही सामने अ पायेगी. आयो देखते हैं की यह जांच कब तक पूरी होती है. --रेक्टर कथूरिया