Saturday, September 17, 2011

श्यामल सुमन की दो नई कवितायेँ

                                                  चित्र दैट्स हिंदी से साभार


क्या तिहाड़ संसद बन जाए


अब तिहाड़ में कितने मंत्री
बतियाते आपस में संतरी

पता नहीं अब कितने आए
क्या तिहाड़ संसद बन जाए

संसद में चलता है झगड़ा
यह मिलाप का मौका तगड़ा

हो जुगाड़ हम कैसे छूटें
बाहर जाकर फिर से लूटें

यूँ तो हम सब भाई भाई
न्यायालय ही बना कसाई

न्यायालय को रोके कौन
इसीलिये है सत्ता मौन

किया है जनता से जब धोखा
जेल में खाएं खिचडी चोखा


उसको बना सिकन्दर देखा

भालू देखा बन्दर देखा
यह लोगों के अन्दर देखा

जो दबंग हैं नालायक भी
उसको बना सिकन्दर देखा  

सुख सारे शोषण के दम पर
भाषण मस्त कलन्दर देखा

सांसद की नैतिकता में भी
कितना बड़ा भगन्दर देखा

विकसित देश सुमन का ऐसा
सबके आँख समन्दर देखा

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