Tuesday, November 16, 2010

कैसे हम सम्मान करें?

डाक्टर कीर्तिवर्धन बहुत देर से और बहुत ही अच्छा लिख रहे हैं। पंजाब स्क्रीन पर उनकी चर्चा पहले भी कभी हो चुकी है.  इस बार उनकी नज्म में चर्चा है पूरे विश्व की. कोई वक्त था जब सोवियत संघ के साथ भारत की दोस्ती थी. इस दोस्ती ने बहुत लम्बा रास्ता भी तय किया. बाद में वक्त बदला तो पूरे विश्व में इस तबदीली की हवा चली. इस तबदीली की हवा के परिणामों को बहुत से लोगों ने देखा, सुना और महसूस भी किया. कई लोग खामोश रहे और कयिओं ने इसे अपने शब्द दिए और भविष्य के लिए भी संजो लिया. यहां आप देखिये उनकी एक कविता का रंग, उनकी नाराज़गी का रंग और शिकायत के साथ उसकी वजह भी. अगर आपके विचार कुछ अलग हैं तो भी हम, उन्हें प्रकाशित करेंगे.--रेक्टर कथूरिया.
कैसे हम सम्मान करें?
जिसका उद्देश्य साम्राज्य विस्तार हो
मानवता से जिसको नहीं कहीं प्यार हो
नीतियाँ हों जिसकी स्वयंभू बनने की
ऐसे ओबामा का कैसे हम सम्मान करें?
अफगानिस्तान को जिसने तहस नहस कर दिया
इराक के तेल पर भी अपना कब्ज़ा कर लिया
इसराइल-फिलिस्तीन को आपस मे लड़ा दिया
ऐसे निरंकुश शासक का कैसे हम सम्मान करें?
सोवियत रूस को जिसने टुकडे टुकडे करा दिया
आज भारत वर्ष मे भी अपने पैर पसर रहा
आर्थिक समृधि का छल प्रपंच फैला रहा
ऐसे घर भंजक का कैसे हम महिमागान करें?
अपनी दोहरी चालों  से दुनियां को जो छल रहा
भारत को भी अपना उपनिवेश समझ रहा
पाक को हथियार दे शांति की बात कर रहा
ऐसे चालबाज़ राष्ट्र का कैसे हम गौरव गान करें?
परमाणु अश्त्रों पर कब्ज़ा जिसका सारा हो
इरान के खात्मे को परमाणु ही बहाना हो
संयुक्त राष्ट्र नज़र मे जिसकी नहीं  अहमियत रखता हो
ऐसे दम्भी शासक का कैसे हम स्वागत गान करें?
आर्थिक आतंकवाद को जो पुरजोर समर्थक हो
य्रोपियाँ हितों का भी जो झंडाबरदार हो
तानाशाही की जिसकी रग-रग मे भरमार हो
ऐसे आतंकी प्रशासक का कैसे हम गुणगान करें?
भाई-भाई को आपस मे पहले तो लड़वता हो
मध्यस्थता के नाम पर फिर घर मे घुस जाता हो
घर पर ही जो बाद मे अपना कब्ज़ा बतलाता हो
ऐसे मध्यस्थ सरपंच का कैसे हम सम्मान करें?
अपने उत्पादों को दुनिया मे फैला रहा
हमारे उत्पादों पर प्रतिबन्ध लगा रहा
नीम,हल्दी,तुलसी,चावल का पेटंट करा रहा
ऐसे स्वार्थी व्यापारी का कैसे हम गौरवगान करें?
अश्त्रों का व्यापारी खेल कैसे खेलता
एक को हथियार बाँटें दुसरे को बेचता
बचपन की गोद मे मौत को धकेलता
ऐसे संहारक का कैसे हम सत्कार करें?
जापान मे आज भी विश्व युद्ध याद है
हिरोशिमा नगशाकी इतिहास मे दर्ज है
हर घर मे आज भी अपंगों का साथ है
ऐसे हत्यारों का कैसे हम स्वगात्गान करें?
    --- डॉ. अ कीर्तिवर्धन

1 comment:

Shashi said...

lIKE THEY SAY IN pUNJABI : DIGGE KHOTE TON TE GUSSA GUMIAR 'TE..