Sunday, July 11, 2010

तोड़ जाता है कोई वादों की डोर को, कोई वादों की डोर से बंध कर टूट जाता है.


मैं ज्योतिष विज्ञान का जानकार तो नहीं पर इसमें मेरी रुचि बचपन से ही थी. इसी विज्ञान की एक शाखा है अंक ज्योतिष जिसे अंग्रेजी वाले Numerology कहते हैं.सुना था कि इस अंक ज्योतिष में सात के अंक को लेखन और कला के क्षेत्र में बहुत ही महत्वपूर्ण गिना जाता है. इन बातों की भूली बिसरी याद मुझे आज उस वक्त आयी जब कुछ पंक्तियाँ मेरे मैसेज बॉक्स में आयीं. लिखा था डूबना तभी सफल और आनंददायक लगता है चुनौती के सागर में जब चुनौती का सागर गहरा हो.डूबने में भी आनंद की बात...वह भी चुनौती के आनंद की.....मैं सचमुच हैरान रह गया.इन्हें भेजा था झारखंड से रजनी नय्यर मल्होत्रा ने. कुछ और ध्यान से देखा तो काफी कुछ और भी था.
कौन है जो ज़िन्दगी से मजबूर नहीं,
कौन है जो मंजिल से दूर नहीं,
गुनाह तो सभी करते हैं,
मेरी नजर में खुदा भी बेकसूर नहीं|

एक जगह लिखा था : 
मंजिलें उनको हैं मिलती,
जिनके सपनों में जान होती है,
पंख से कुछ नहीं होता,
हौसलों से उड़ान होती है,
कोशिशें अगर की दिल से,
अच्छी अंजाम होती है,
थककर वो बैठ जाते है,
जिनकी कोशिशें नाकाम होती हैं|


ज़रा कुछ और रंग देखिये: 

गीत बनते हैं मगर मै गा नहीं सकती,
हंसी की चाह है, लेकिन मुस्कुरा नहीं सकती|
अधूरे ख्वाब जाने क्यों आँखों में पलते हैं,
थोड़ी सी ख़ुशी मिले,तकदीर जलती है|

चल रही सांसे भी उखड़ी सी होती है,
अपनी धड़कनों पर भी अपना हक नहीं होता|

सागर की विरह में व्याकुल नदियाँ मचलती हैं,
पर अधीर न हो, उससे वो मंद गति से मिलती है
|
जो राह खो चूका मंजिल वो आगे बढ़ नहीं सकता,
जो दर्पण टूट गया हो वो फिर से जुड़ नहीं सकता |


अधूरी तस्वीर का कोई खरीदार नहीं होता,
सर्द आँखों का मोती बेकार नहीं होता |

रुकी हुई मौज का राह क्या तकना,
जो छोड़ गया मझदार में उसे याद क्या रखना | 


मांगने की बात पर कहती है :  

माँगा तो क्या माँगा जो अपने लिए माँगा,
दूसरे के आंसू से अपना दामन भींगे,
सच्ची दुआ तो इसे ही कहते हैं| 


ज़िन्दगी की बात करती है तो भी कहती है रोना नहीं:

ज़िन्दगी कुदरत का दिया अनमोल तोहफा है,
इसे रो कर नहीं हँस कर गुजारो,
ज़िन्दगी जीने के लिए है,
काटने के लिए नहीं |
रजनी अपने बारे में कहती है,"मै रजनी नैय्यर मल्होत्रा झारखण्ड के बोकारो थर्मल से, मेरी शिक्षा झारखण्ड एवं उ.प्र. में पूरी हुई इतिहास(प्रतिष्ठा) से बी.ए. संगणक विज्ञान में बी.स.ए. एवं हिंदी से बी.एड इलाहाबाद से ....मै संगणक विज्ञान की शिक्षिका हूँ ..एक कवियत्री , शायर, एक लेखिका, मेरा लालन पालन झारखण्ड के रांची में विवाहोपरांत बोकारो थर्मल". 
अगर आप उसकी कहानियां पढना चाहते हैं तो यहां क्लिक करिए और अगर आप उसकी शायरी का रस रंग चाहते हैं तो फिर यहां क्लिक करिए. नारी जीवन की बेबसी पर भी उसने काफी कुछ कहा है.  उसकी कविता का एक रंग यहां भी है.
 अंत में एक बात मैं भूल रहा था उसके जन्म दिन की. उसके जन्म की तारीख है सात जून. अब अंक ज्योतिष के हिसाब से तो वह साहित्य के क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण अवश्य ही करेगी. आप उसकी रचनायों के बारे में क्या कहना चाहते हैं अवश्य बताएं.   ---रेक्टर कथूरिया.

2 comments:

ana said...

shabdo par aapki pakad achchhi hai ..likhte rahiye.shubhakamnaye

Udan Tashtari said...

हम तो उन्हें पढ़ते रहे हैं और अच्छा लिखती हैं वह.


आभार इस परिचय का.