Friday, May 28, 2010

आखिर कब तक...?


अभी अभी हाल ही में एक खबर आई चेन्नई से और मामला है तमिलनाडू के वेल्लूर का जहां कन्या के जन्म का जुरमाना सुनाया गया एक लाख रुपया. कन्या की मां को आदेश दिया गया कि वह इस जुर्माने को अदा करे. कन्या के पिता की इस हैवानियत को जब मीडिया ने सब के सामने रखा तो एक बार फिर यह अहसास हुआ कि क्या हम सचमुच इस आधुनिक युग में ही रहते है....? क्या सचमुच हम लोग उसी देश के रहने वाले हैं जिसकी महानता की बातें हम दिन रात करते हैं....? फेसबुक पर इसे रखा पठानकोट के पंजाबी पंजाब ने. गौरतलब है कि अगर पंजाब में बेटियों को नापसंद करने की शर्मनाक घटनाएँ हुईं हैं तो इनके खिलाफ आवाज़ उठाने के ज़ोरदार प्रयास भी हुए हैं, पुकार केवल छोटी सी फिल्म है.....केवल दो मिनट और आठ सेकंड की लेकिन इसका प्रभाव लम्बी देर तक बना रहता है. इसी तरह पंजाब हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन के लिए इसी मुद्दे पर प्रदीप्तो नंदी ने केवल 47 सेकण्ड्स में जो दिखाया है वह एक यादगारी असर छोड़ता है.ऐसे ही केवल 35 सेकण्ड्स की एक बहुत ही छोटी सी फिल्म है जिसे भारत सरकार के डीएवीपी और महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसी मुद्दे पर जन चेतना  जागरूक करने के इरादे से बनवाया. इन मासूम बच्चियों को बचाने के लिए एक और बहुत ही संगीतक फिल्म है अंकिता जैन की. केवल पांच मिनट सात सेकण्ड्स की इस फिल्म में दर्शायी गयीं तस्वीरें हिला देती हैं. रूला देती है. बच्चियों को जन्म से भी पहले मौत के घाट उतार देने की चर्चा करती है एक और बहुत ही छोटी सी फिल्म..इन्नोसेंट ड्रीम्स...केवल एक मिनट और 15 सेकण्ड्स की इस फिल्म में भी बहुत दम है. अब रुपिंदर कौर रूपसी ने इसे फेसबुक पर बहुत ही अच्छे ढंग से उठाया है एक ग्रुप बना कर. इसी तरह देश रतन ने भी एक विशेष प्रयास शुरू किया है.लवप्रीत मोगा भी इसी दिशा में सरगर्म हैं.इसी मुद्दे पर उनकी एक ख़ास तस्वीर इस पोस्ट के साथ ही ऊपर दाएं और प्रकाशित की गयी है. ऐसे बहुत से प्रयास और भी हैं. इतना कुछ होने के बावजूद हालत अभी भी खतरनाक और शर्मनाक है. जब तक कानून सख्ती से लागू नहीं होंगें, जब तक समाज इसे शर्मनाक नहीं समझेगा, जब तक बेटियों को बोकज सम्झ्जाने वाली अर्थ व्यवस्था कायम है...तब तक कुछ ठोस होने वाला लगता भी नहीं. आपका क्या ख्याल है इस मुद्दे पर?देवी के नो रूपों की पूजा करने वाले इस देश में, नवरात्र का त्यौहार मनाने वाले इस समाज में....आखिर कब तक चलेगा यह सिलसिला.  --रेक्टर कथूरिया

1 comment:

माधव said...

there need a draconian law