Friday, November 27, 2009

आनंदमार्गिओं ने नकारा महासम्भूति के अवतरण का दावा

हम केवल और केवल अपने बाबा को ही जानते हैं:आनन्दमार्गी 
आनंदमार्ग के बहुत बड़े हिस्से ने उस दावे को पूरी तरह से ख़ारिज  कर दिया है जिसमें कहा गया है कि आनंदमार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी की भविष्यवाणी के मुताबिक अब महासम्भूती का अवतरण हो  चुका है. आनंदमार्ग के इस बड़े हिस्से ने यह बात पूरी तरह से साफ़ कर दी है कि  वे केवल और केवल बाबा को जानते हैं और उन पर ही विशवास करते हैं जो कि इस तरह के दावों से टूटने वाला नहीं. इस बड़े  हिस्से ने यह भी कहा है कि अब बाबा का स्थान  कोई नहीं ले सकता. इस हिस्से ने दावा करने वाली महिला को भी सलाह भी दी है कि वोह गहरायी में जा कर साधना , ध्यान करे और  बाबा के सामने समर्पण करदे.

गौरतलब है बैंगलोर की एक महिला ने चार नवम्बर 2009  की  तारीख वाले एक पत्र में दावा किया था कि श्री श्री आनंदमूर्ति जी की भविष्यवाणी के मुताबिक  महान्सम्भूती का  अवतरण अब हो चूका  है  इस लिए सभी लोग उसकी शरण में आ जायें. उसने महासम्भूती चक्रधर का अंतिम नोटिस भी सभी आनंदमार्गिओं के नाम जारी किया.
 
इस अंतिम नोटिसनुमा पत्र में कहा गया है कि मैं जल्द ही इस धरती पर नकारत्मक शक्तिओं के खिलाफ धर्मयुद्ध छेड़ने जा रहा हूँ; चाहे तुम इस धर्मयुद्ध में शामिल होना चाहो या न, मैं जल्द ही महाविनाश और महाप्रलय  की शुरुआत कर दूँगी. पत्र में कहा गया है कि मैं ही सम्पूर्ण और परिपूर्ण हूँ, मुझे जान लो, मुझे पहचान लो...मैं इस महाविनाश में तुम्हारी रक्षा करना चाहता हूँ. पत्र के आरम्भ में ही यह भी कहा गया है मैंने  ही आनंदमूर्ति बनकर इस धरती पर जनम लिया था और कहा था कि एक दिन महासम्भूती का अवतरण होगा...और अब यह अवतरण हो चूका है....

खुद  को श्री  श्री  आनंदमूर्ति का अवतार बताने वाले  महासम्भूती  चक्रधर ने  अपनी महायुद्ध और महाविनाश की  चेतावनी में कहा है इसकी शुरुआत 31  दिस्मबर 2009  और प्रथम जनवरी 2010  की मध्य रात्रि को हो जाएगी. इस चेतावनी में यह भी कहा गया है की उसने अपने भक्तों और सच्चे  लोगों को अपना बचाव करने के लिए नवम्बर  और  दिसम्बर - दो महीनों का वक्त दिया है...इसलिए अब वही  लोग बच पायेंगे जिन्होंने इस कार्यकाल में उसका दिया मन्त्र लगातार जपा होगा. पत्र में यह भी कहा गया है कि उसका नाम ही अपने आप में महामंत्र है..

दूसरी  तरफ  आनंदमार्गिओं ने इस मुद्दे पर सखत रुख अपनाते हुए यहाँ तक कहा है की इस  तरह की बकवास कोई दिमागी मरीज़ ही कर सकता है. मार्ग से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि वे केवल और केवल अपने बाबा को ही जानते हैं और किसी को नहीं. आनंदमार्गिओं ने इस महासम्भूति उर्फ चक्रधर को साधना और ध्यान करने की सलाह भी दी है तां कि उसे बाबा का ज्ञान प्राप्त हो सके.  फिर भी जो लोग देखना ही चाहते हैं कि आखिर क्या है इस चेतावनी में और क्या है अवतरण का दावा,  वे नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते है और देख सकते हैं महाविनाश के शरू होने का वह वक्त जो महासम्भूति उर्फ़ चक्रधर ने घोषित किया है. 
http://cakradhara.yolasite.com/shona.php

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Wednesday, November 25, 2009

दरअसल यह किताब अन्याय पर मेरा दूसरा जूता है-जरनैल सिंह


अपनी  नयी  किताब पर जरनैल सिंह का कहना है कि दरअसल अन्याय पर ये उसका दूसरा जूता है. यह बात उसने एक मीडिया इंटरवीयू में कही है. उसने यह भी बताया  कि कैसे इस किताब को लिखने  के लिए उसे सखत मेहनत और खोज करनी पड़ी. हालांकि उसने माना कि इसमें उसका अपना 11 बरसों का कटु अनुभव भी शामिल है पर फिर भी यह एक हकीक़त है इतने बरसों के बाद घटनायों के पीड़ितों को खोज निकालना  कोई आसान नहीं था. वो भी वहां जहाँ घटना के वक्त ही इतने  बड़े सामूहिक  हत्याकांड  को सरकारी मीडिया ने पूरी तरह से नज़र अंदाज़ कर दिया था. इस किताब को लिखने की पूरी कहानी आप अंग्रेजी में भी पढ़ सकते हैं बस नीचे दिए गए लिंक को दबा कर जहाँ आपको जरनैल सिंह की किताब और उसके बारे में कई और लोगों के विचार भी मिलेंगे.  इसके  साथ ही और भी बहुत कुछ.देख और सुन सकते हैं आप दूसरे लिंक पर क्लिक कर के यह कहानी है कुछ उन लोगों की जिन्हों ने इस देश का इतिहास भी कलंकित कर  दिया. पर कमज़ोर दिल के लोग इसे न देखें तो अच्छा होगा.

यह अन्याय पर मेरा दूसरा जूता है-जरनैल सिंह 

http://www.1984vigil.com/

और अब 1984 पर जरनैल सिंह की नयी किताब : I Accuse ...



25 बरसों से लगातार न्याय  की इंतज़ार कर रही सिख कौम के युवा पत्रकार जरनैल सिंह ने जूता उछाला तो बात दूर दूर तक पहुच गयी. दरअसल वह जूता किसी व्यक्ति पर न तो था न ही हो सकता था क्योंकि सिख कौम तो दोनों वक्त सर्बत्त का भला मांगती है. सिख आक्रोश का वह जूता उछला था उस सिस्टम पर जिस पर सभी को शर्म आनी चाहिए पर कभी आती नहीं. बात आई गयी हो गयी. इसकी याद ताज़ा हुयी आज उस वक्त जब मैं अपनी मेल देख रहा था. उसमे  एक ऐसा पत्र भी था जिसमें एक बार फिर नवम्बर-1984 की चर्चा की गयी थी. उसे खंगालता खंगालता मैं पहुँच  गया एक ऐसी साईट पर जिसमे एक बार फिर नज़र आया जरनैल सिंह का चेहरा. चर्चा उसकी किताब की थी. इस किताब को अपने गरिमामय अंदाज़ में प्रकाशित किया है पेंगुइन ने और इसकी भूमिका लिखी है खुशवंत सिंह ने.  तथ्यों और आंकड़ों का ज़िक्र जहाँ जरनैल सिंह की पत्रकारिता और तर्क को दिखाता है वहीँ पर घटनायों का मार्मिक प्रस्तुतिकरण उसके कवी ह्रदय से भी रूबरू करवाता है. 

http://www.carnage84.com