Wednesday, November 25, 2009

दरअसल यह किताब अन्याय पर मेरा दूसरा जूता है-जरनैल सिंह


अपनी  नयी  किताब पर जरनैल सिंह का कहना है कि दरअसल अन्याय पर ये उसका दूसरा जूता है. यह बात उसने एक मीडिया इंटरवीयू में कही है. उसने यह भी बताया  कि कैसे इस किताब को लिखने  के लिए उसे सखत मेहनत और खोज करनी पड़ी. हालांकि उसने माना कि इसमें उसका अपना 11 बरसों का कटु अनुभव भी शामिल है पर फिर भी यह एक हकीक़त है इतने बरसों के बाद घटनायों के पीड़ितों को खोज निकालना  कोई आसान नहीं था. वो भी वहां जहाँ घटना के वक्त ही इतने  बड़े सामूहिक  हत्याकांड  को सरकारी मीडिया ने पूरी तरह से नज़र अंदाज़ कर दिया था. इस किताब को लिखने की पूरी कहानी आप अंग्रेजी में भी पढ़ सकते हैं बस नीचे दिए गए लिंक को दबा कर जहाँ आपको जरनैल सिंह की किताब और उसके बारे में कई और लोगों के विचार भी मिलेंगे.  इसके  साथ ही और भी बहुत कुछ.देख और सुन सकते हैं आप दूसरे लिंक पर क्लिक कर के यह कहानी है कुछ उन लोगों की जिन्हों ने इस देश का इतिहास भी कलंकित कर  दिया. पर कमज़ोर दिल के लोग इसे न देखें तो अच्छा होगा.

यह अन्याय पर मेरा दूसरा जूता है-जरनैल सिंह 

http://www.1984vigil.com/

3 comments:

मनोज द्विवेदी said...

apke diye link se maine jarnail singh ki kitab ke bare me kafi kuchh jana. I deeply thanks to you for this work. sach me sare communal rights politiciance ki shah par hote hai. kash ek din aisa communal right ho jisme sabhi gande aur khuni politiciance ko janta mar dale.
JARNAIL SINGH..REAL SINGH TUSSI GREAT HO...I really appriciate.

विनीत कुमार said...

जरनैल सिंह की लिखी किताब-कब कटेगी चौरासी के बारे में मैंने भी कुछ लिखा है। मौका मिले तो आप सब भी पढ़े- http://taanabaana.blogspot.com/2009/11/blog-post_07.html

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

इसका मतलब किताब पढ़नी पडेगी।

------------------
क्या धरती की सारी कन्याएँ शुक्र की एजेंट हैं?
आप नहीं बता सकते कि पानी ठंडा है अथवा गरम?